नोएडा में एमिटी यूनिवर्सिटी के 23 साल के छात्र हर्षित भट्ट की पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, बुधवार शाम परीक्षा खत्म होने के बाद हर्षित अपने तीन दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गया था। इसी दौरान वह गड्ढे में उतर गया। वह गहराई में चला गया और डूबने लगा। दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। 20 मिनट बाद पुलिस गोताखोरों के साथ मौके पर पहुंची और हर्षित को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डीसीपी साद मियां खान ने बताया- हर्षित भट्ट गाजियाबाद के इंदिरानगर का रहने वाला था। एमिटी यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) की पढ़ाई कर रहा था। उसका छठा सेमेस्टर चल रहा था। उसके पिता ललित चंद्रभट भारतीय सेना में टेक्निकल विभाग में हैं। अभी लद्दाख में तैनात हैं। परिवार में एक भाई और एक बहन हैं। हर्षित की मां दीप माला ने कहा- मुझे लगता है कि मेरे बच्चे की हत्या हुई है। मैं मॉर्चरी गई थी। मुझे बच्चे को दिखाया गया। उसके पूरे शरीर पर काले निशान थे। पीठ पर V-आकार की चोट के निशान थे। मैं मांग करती हूं कि मामले की जांच हो। मेरे बेटे के साथ इन बच्चों ने जो भी किया है, मैं नहीं चाहती कि ये लोग जेल से छूटें। मेरा घर उजाड़ दिया। नोएडा में इससे पहले 16 जनवरी की रात 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता कार समेत करीब 30 फीट गहरे गड्ढे में गिर गए थे। उसकी जान चली गई थी। घटना के बाद नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन सीईओ को हटाया गया था। नए सीईओ ने सिविल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर 15 दिन के भीतर सभी गड्ढों से पानी निकालने, बैरिकेडिंग करने और नालों को कवर करने के आदेश दिए थे। परीक्षा के बाद पिकनिक मनाने पहुंचे थे
डीसीपी ने बताया कि मंगलवार को चारों छात्रों का एग्जाम था। परीक्षा के बाद वे खाली प्लॉट पिकनिक मनाने पहुंचे। वहां नहाने के लिए गड्ढे में उतर गए। पूछताछ में साथियों ने बताया कि वे पहले भी इस गड्ढे में नहा चुके थे, लेकिन इस बार हर्षित ज्यादा अंदर चला गया और डूबने लगा। डीसीपी ने बताया कि सूचना मिलने के करीब 20 मिनट के भीतर पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंच गए। SDRF और NDRF की टीम भी बुलाई गई। इसके बाद हर्षित को गड्ढे से निकाला गया। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ड्रॉनिंग यानी पानी में डूबने से मौत की पुष्टि हुई है। फेफड़ों में रेत और पानी भरा हुआ है। बिसरा सुरक्षित रखा गया है। मां बोलीं- बेटा तैरना जानता था, गड्ढे में नहीं डूब सकता
हर्षित की मां ने कहा- बेटा तैरना जानता था। ऐसे में बेटा गड्ढे में डूब नहीं सकता। हर्षित बुधवार सुबह साढ़े 8 बजे घर से निकला था। उसका 10 बजे से पेपर था। इंदिरापुरम से कॉलेज पहुंचने में 1-2 घंटे लगते हैं। उसने कहा था- मैं 4 बजे तक घर आ जाऊंगा। कॉलेज जाने के बाद मैंने उसको फोन किया। कहा- घर की मोटर खराब हो गई है। मैंने उससे कहा था कि सोसाइटी के ऑफिस में फोन कर लेना, जिससे इलेक्ट्रिशियन आकर चेक कर लेगा। शाम को पता चला कि बेटे की मौत हो गई है। ‘मेरा बच्चा मुझसे छीन लिया गया..’
जिस वक्त हर्षित के साथ घटना हुई उस वक्त 3 दोस्त और थे। तीनों दोस्त बच्चों का स्वभाव कैसा है? इस सवाल पर मां ने कहा- मैं उनसे कभी नहीं मिली हूं, इसलिए पता नहीं। अगर मिली होती तो बता पाती कि वे कैसे हैं। लेकिन बेटे को उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत करते देखा है। एक का नाम कृष और दूसरे का नाम व्यास है। तीसरे को मैं नहीं जानती हूं। मेरा बच्चा समय पर घर आता-जाता था। उसके कॉलेज के सभी लेक्चरर्स भी कहते थे कि बहुत शरीफ था। लेकिन आज अचानक पता नहीं क्या हो गया। मेरा बच्चा मुझसे छीन लिया। हैबिटेट सेंटर के निर्माण के लिए खोदा गया था गड्ढा
जिस गड्ढे में हर्षित की डूबने से मौत हुई है, वहां हैबिटेट सेंटर का निर्माण होना था। इस जमीन को निर्माण करने वाली कंपनी यूआरएनएन को सौंप दिया गया था। साल 2019–20 में प्लॉट हैंडओवर होने के बाद निर्माण कार्य के लिए यहां गहरा गड्ढा खोदा गया था। काम शुरू किया गया, लेकिन बाद में विवाद में फंस गया। मामला साल 2022 से कोर्ट में चल रहा है। पूरा मामला जमीन के स्वामित्व को लेकर है। पूर्व CEO रितु माहेश्वरी ने कंपनी से करार कैंसल कर दिया था। अब इसे पीपीपी मॉडल पर बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था। हालांकि, मामला अदालत में लंबित होने के चलते निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। जमीन अभी तक प्राधिकरण को हैंडओवर नहीं की गई। इसी बीच गड्ढे में बरसात और आसपास का पानी भर गया, जिसमें डूबकर हर्षित की मौत हो गई। गड्ढा चारों तरफ से कवर, फिर कैसे पहुंचे छात्र?
साइट (गड्ढा) को चारों तरफ से कवर किया गया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि छात्र अंदर कैसे पहुंचे? साइट पर निर्माण कंपनी के गार्ड तैनात हैं, जिनकी जिम्मेदारी सुरक्षा की है। इसके बावजूद युवकों का अंदर पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब पढ़िए नोएडा में ही इंजीनियर युवराज की मौत कैसे हुई थी? 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे युवराज मेहता अपनी ग्रैंड विटारा कार से नोएडा के टाटा यूरिका पार्क जा रहे थे। सेक्टर-150 मोड़ पर यूटर्न था। घने कोहरे की वजह से आगे का रास्ता साफ दिखाई नहीं दिया। उनकी कार नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे एक प्लॉट के गड्ढे में गिर गई। यहां मॉल के बेसमेंट के लिए करीब 30 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए। रात 12:20 बजे उन्होंने अपने पिता को फोन कर हादसे की जानकारी दी। कहा- पापा, मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहता। पिता ने तुरंत डायल-112 पर सूचना दी और कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गए। करीब 30 मिनट बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें पहुंचीं। रात 1:15 बजे SDRF की टीम मौके पर आई। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद युवराज का शव बाहर निकाला जा सका। मामले ने तूल पकड़ने पर तत्कालीन नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु महेश्वरी को पद से हटा दिया गया। यह कार्रवाई प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए की गई थी। वहीं, योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए SIT गठित करने के निर्देश दिए थे। ——————— आपके विधायक को टिकट मिलना चाहिए या नहीं, सर्वे में हिस्सा लेकर बताएं यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…
डीसीपी ने बताया कि मंगलवार को चारों छात्रों का एग्जाम था। परीक्षा के बाद वे खाली प्लॉट पिकनिक मनाने पहुंचे। वहां नहाने के लिए गड्ढे में उतर गए। पूछताछ में साथियों ने बताया कि वे पहले भी इस गड्ढे में नहा चुके थे, लेकिन इस बार हर्षित ज्यादा अंदर चला गया और डूबने लगा। डीसीपी ने बताया कि सूचना मिलने के करीब 20 मिनट के भीतर पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंच गए। SDRF और NDRF की टीम भी बुलाई गई। इसके बाद हर्षित को गड्ढे से निकाला गया। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ड्रॉनिंग यानी पानी में डूबने से मौत की पुष्टि हुई है। फेफड़ों में रेत और पानी भरा हुआ है। बिसरा सुरक्षित रखा गया है। मां बोलीं- बेटा तैरना जानता था, गड्ढे में नहीं डूब सकता
हर्षित की मां ने कहा- बेटा तैरना जानता था। ऐसे में बेटा गड्ढे में डूब नहीं सकता। हर्षित बुधवार सुबह साढ़े 8 बजे घर से निकला था। उसका 10 बजे से पेपर था। इंदिरापुरम से कॉलेज पहुंचने में 1-2 घंटे लगते हैं। उसने कहा था- मैं 4 बजे तक घर आ जाऊंगा। कॉलेज जाने के बाद मैंने उसको फोन किया। कहा- घर की मोटर खराब हो गई है। मैंने उससे कहा था कि सोसाइटी के ऑफिस में फोन कर लेना, जिससे इलेक्ट्रिशियन आकर चेक कर लेगा। शाम को पता चला कि बेटे की मौत हो गई है। ‘मेरा बच्चा मुझसे छीन लिया गया..’
जिस वक्त हर्षित के साथ घटना हुई उस वक्त 3 दोस्त और थे। तीनों दोस्त बच्चों का स्वभाव कैसा है? इस सवाल पर मां ने कहा- मैं उनसे कभी नहीं मिली हूं, इसलिए पता नहीं। अगर मिली होती तो बता पाती कि वे कैसे हैं। लेकिन बेटे को उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत करते देखा है। एक का नाम कृष और दूसरे का नाम व्यास है। तीसरे को मैं नहीं जानती हूं। मेरा बच्चा समय पर घर आता-जाता था। उसके कॉलेज के सभी लेक्चरर्स भी कहते थे कि बहुत शरीफ था। लेकिन आज अचानक पता नहीं क्या हो गया। मेरा बच्चा मुझसे छीन लिया। हैबिटेट सेंटर के निर्माण के लिए खोदा गया था गड्ढा
जिस गड्ढे में हर्षित की डूबने से मौत हुई है, वहां हैबिटेट सेंटर का निर्माण होना था। इस जमीन को निर्माण करने वाली कंपनी यूआरएनएन को सौंप दिया गया था। साल 2019–20 में प्लॉट हैंडओवर होने के बाद निर्माण कार्य के लिए यहां गहरा गड्ढा खोदा गया था। काम शुरू किया गया, लेकिन बाद में विवाद में फंस गया। मामला साल 2022 से कोर्ट में चल रहा है। पूरा मामला जमीन के स्वामित्व को लेकर है। पूर्व CEO रितु माहेश्वरी ने कंपनी से करार कैंसल कर दिया था। अब इसे पीपीपी मॉडल पर बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था। हालांकि, मामला अदालत में लंबित होने के चलते निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। जमीन अभी तक प्राधिकरण को हैंडओवर नहीं की गई। इसी बीच गड्ढे में बरसात और आसपास का पानी भर गया, जिसमें डूबकर हर्षित की मौत हो गई। गड्ढा चारों तरफ से कवर, फिर कैसे पहुंचे छात्र?
साइट (गड्ढा) को चारों तरफ से कवर किया गया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि छात्र अंदर कैसे पहुंचे? साइट पर निर्माण कंपनी के गार्ड तैनात हैं, जिनकी जिम्मेदारी सुरक्षा की है। इसके बावजूद युवकों का अंदर पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब पढ़िए नोएडा में ही इंजीनियर युवराज की मौत कैसे हुई थी? 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे युवराज मेहता अपनी ग्रैंड विटारा कार से नोएडा के टाटा यूरिका पार्क जा रहे थे। सेक्टर-150 मोड़ पर यूटर्न था। घने कोहरे की वजह से आगे का रास्ता साफ दिखाई नहीं दिया। उनकी कार नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे एक प्लॉट के गड्ढे में गिर गई। यहां मॉल के बेसमेंट के लिए करीब 30 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए। रात 12:20 बजे उन्होंने अपने पिता को फोन कर हादसे की जानकारी दी। कहा- पापा, मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहता। पिता ने तुरंत डायल-112 पर सूचना दी और कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गए। करीब 30 मिनट बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें पहुंचीं। रात 1:15 बजे SDRF की टीम मौके पर आई। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद युवराज का शव बाहर निकाला जा सका। मामले ने तूल पकड़ने पर तत्कालीन नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु महेश्वरी को पद से हटा दिया गया। यह कार्रवाई प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए की गई थी। वहीं, योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए SIT गठित करने के निर्देश दिए थे। ——————— आपके विधायक को टिकट मिलना चाहिए या नहीं, सर्वे में हिस्सा लेकर बताएं यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…