नोएडा में 16 दिसंबर की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। शासन की ओर से घटना को लेकर विशेष जांच दल (SIT) गठित की गई। SIT ने 22 से ज्यादा सवाल प्राधिकरण समेत तीन विभागों से पूछे। नोएडा प्राधिकरण ने अपनी 150 पन्रों की, जबकि पुलिस विभाग ने 450 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। SIT का सवाल रहा कि रेस्क्यू में 2 घंटे की देरी क्यों हुई? इसका जवाब अधिकारियों को देते नहीं बना। इन रिपोर्ट को लेकर SIT टीम मेरठ रवाना हो गई। सोर्सेज की मानें तो नोएडा में युवराज मेहता मौत हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम के फेल्योर की तरह सामने आ रहा है। ये फैक्ट पुलिस और नोएडा प्राधिकरण की रिपोर्ट में सामने आ गया है। SIT रिपोर्ट का एनालिसिस करने के बाद इसे सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। इन रिपोर्ट में कुछ खास चेहरों को जिम्मेदार ठहराया गया है। कौन किस वजह से गलत पाया गया, पढ़िए रिपोर्ट… नोएडा शहर के रखरखाव की जिम्मेदारी प्राधिकरण के सीईओ की होती है। प्लॉट के पास हादसा होने के बावजूद अधीनस्त अधिकारियों से जवाब-तलब नहीं किया गया। फाइल अप्रूव होने के बाद रोड के कट पर काम आगे नहीं बढ़ाया गया। इसका फालोअप करना सीईओ की जिम्मेदारी है। यही वजह है कि जूनियर इंजीनियर को हटाने के बाद पहला बड़ा एक्शन सीईओ लोकेश एम. पर लिया गया। उनको पद से हटाकर वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद आगे का एक्शन होगा। नोएडा डीएम मेधा रूपम जिले की डिजास्टर मैनेजमेंट हेड हैं। हेड होने के बाद भी कोई विभागीय एक्शन नहीं लिया। वो हादसे के बाद चौथे दिन एसआईटी के साथ मौके पर पहुंचीं। युवराज के परिवार से बात तक नहीं की। जबकि, घटना से एक दिन पहले ही उन्होंने आपदा प्रबंधन के साथ बैठक की थी। युवराज की कार पानी में डूबने के दौरान रेस्क्यू के लिए पुलिस के बाद अग्निशमन की टीम ही मौके पर पहुंची थी। कर्मचारियों ने कहा कि हमें तैरना नहीं आता, हमारे पास उपकरण भी नहीं हैं। चीफ फायर ऑफिसर होने के नाते मौके पर भी नहीं पहुंचे, न ही किसी कर्मी को गाइड किया। हादसे के बाद सबसे पहले पुलिस कट के स्पॉट पर पहुंची थी। डायल-112 का रिस्पांस टाइम विजिबिलिटी के अनुसार सही था, लेकिन एसएचओ सर्वेश सिंह मौके पर नहीं पहुंचे। न ही अधिकारियों को अपनी तरफ से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी दी। SIT ने इनसे ये भी पूछा कि आपने एनडीआरएफ को भी समय पर जानकारी क्यों नहीं दी। युवराज मेहता की मौत के मामले में जिन बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, उनमें अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल वोहरा और निर्मल कुमार शामिल हैं। अब तक 4 बिल्डरों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, जिस प्लाट में पानी भरा था और हादसा हुआ, वो अभय कुमार का है, जोकि बिज टाउन प्लानर के नाम पर रजिस्टर्ड है। बेसमेंट पर गड्ढा इन्होंने ही खुदवाया और खाली छोड़ दिया। अब यहां पानी भरा था, इसकी वजह से कार गिरने के बाद भी युवराज बाहर सुरक्षित नहीं निकल सका। नोएडा ट्रैफिक सेल के जीएम एसपी सिंह का पूरे हादसे में सबसे अहम किरदार है। एनटीसी की जिम्मेदारी ब्लैक स्पॉट को चिह्नित करके वहां पर रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड, डिवाइडर और सुरक्षा मानकों की पूरा करना एसपी सिंह का काम था, जो नहीं किया। जल सीवर जीएम आरपी सिंह का काम नोएडा की ड्रेनेज में ये देखना है कि सीवर का पानी तो कहीं भर रहा है। इस प्लाट में करीब 12 सोसाइटी के 10 हजार से ज्यादा लोगों के सीवर का पानी पहुंच रहा था। माध्यम बनी थी टूटी हुई ड्रेनेज लाइन। 2023 में सिचाई विभाग को यहां हेड रेगुलेटर बनाना था, इसका फालोअप भी नहीं किया गया। अब जानिए जिनके बयान हुए, उन्होंने क्या कहा… जांच टीम ने 100 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए
युवराज मेहता की कार डूबने से हुई मौत अब एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, रेस्क्यू सिस्टम की विफलता और अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी का मामला बनकर सामने आ रही है। जांच कर रही विशेष जांच टीम ने SDRF, पुलिस, कंट्रोल रूम और रेस्क्यू ऑपरेशन, प्राधिकरण में शामिल 100 से ज्यादा लोगों के फाइनल बयान दर्ज किए। आपको सोर्सेज के हवाले से SIT के प्राधिकरण से सवाल और उनके जवाब पढ़वाते हैं… एसआईटी. 16 दिसंबर की रात हुए हादसे के बाद प्राधिकरण ने क्या किया? प्राधिकरण. मौके पर सुरक्षा प्रबंध करवाए गए। इसके साथ ही निरीक्षण करवाकर प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर को सेवा से हटाया गया। बाकी को कारण बताओ नोटिस जारी की गई। जांच के लिए तीनों महाप्रबंधक की अगुआई में टीम बनाई गई। एसआईटी. 31 दिसंबर को उसी जगह पर पहले ट्रक बेकाबू होकर नाले से टकराया, नाला टूटा। इसके बाद प्राधिकरण ने क्या किया? प्राधिकरण. ऐसी किसी भी घटना की जानकारी पुलिस या स्थानीय निवासियों की तरफ से नहीं दी गई थी। न ही यह घटना संज्ञान में आई। एसआईटी. हादसा जहां पर हुआ उस सड़क पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? प्राधिकरण. ब्रेकर पर पेंटिंग, कैट आई, डायवर्जन बोर्ड समेत अन्य सभी जरूरी सड़क सुरक्षा के इंतजाम सेक्टर में ट्रैफिक सेल की तरफ से किए गए हैं। एसआईटी. प्लॉट आवंटन, नक्शा पास होने की जानकारी, बिल्डर पर नियमों के उल्लंघन में क्या कार्रवाई की गई? प्राधिकरण. जुलाई, 2014 को स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 का आवंटन हुआ। इसमें 27185 वर्ग मीटर जमीन का उपविभाजन लीड विकासकर्ता लोटस ग्रीस ने विज टाउन बिल्डर के पक्ष में किया। बिल्डर पर 129 करोड़ रुपए बकाया है। इसको लेकर नोटिस जारी गई। 2017 में प्राधिकरण से एक नक्शा पास करवाया गया, फिर 2022 में नक्शे में संशोधन के आवेदन को निरस्त किया गया। इसके अलावा निर्माण पूरा करने को भी नोटिस जारी की गई। एसआईटी. सेक्टर-150 से पहले कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं और उन पर प्राधिकरण ने क्या किया? प्राधिकरण. सेक्टर के निवासियों से मिली शिकायतों का निस्तारण करवाया गया। कई काम जो प्राधिकरण को करवाने थे करवाए गए। बाकी की प्रक्रिया चल रही है। पढ़िए हादसे की रात क्या-कुछ हुआ… 12.20 बजे (रात) कॉल आया, प्लीज बचा लो, पिता बोले- सुनते ही भागा
पिता राजकुमार कहते हैं- शुक्रवार की रात के करीब 12.20 बजे मैं बेड पर लेटा था। अचानक बेटे युवराज का कॉल आया। वो घर ही आने वाला था, इसलिए मुझे अचानक समझ नहीं आया कि वो मुझे कॉल क्यों कर रहा है? मैंने फोन उठाया। उधर से घबराई आवाज सुनाई दी। बोला- पापा…पापा मैं नाले में गिर गया हूं, मैं मरना नहीं चाहता हूं। मुझे बचा लीजिए। इतना सुनने के बाद मैं जिन कपड़ों में था, उन्हीं में दौड़ पड़ा। सोसाइटी से निकलने से पहले मैंने एक मैसेज टाइप किया और सोसाइटी के ग्रुप पर पोस्ट किया, ताकि मदद मिल सके। बेटे ने जो नाला बताया था, वो हमारी सोसाइटी से 200 मीटर दूर था। मैं दौड़ता हुआ उस नाले तक पहुंचा। यहां 30 मिनट तक बेटे को घने कोहरे और अंधेरे में ढूंढने की कोशिश करता रहा, चिल्ला रहा था कि रिस्पॉन्स मिल जाए। फिर मुझे लगा कि मैं गलत जगह ढूंढ रहा हूं। 12.30 बजे वीडियो बना रहे लोगों से कहा- प्लीज मेरे बेटे को बचाइए
इसके बाद मैं रोड के कट की तरफ पहुंचा, जहां एक बिल्डिंग का निर्माण अधूरा पड़ा था। यहां बेसमेंट के लिए गड्ढा खोदा गया था। वहां पहुंचकर मैं चिल्लाने लगा, मेरी आवाज सुनकर बेटा भी चिल्लाया…बचाओ…बचाओ। हेल्प मी… की आवाज सुनकर मैं समझ गया कि यहीं पर बेटा गिरा है। मैं थोड़ा और आगे तक गया, कोहरे में दिखा कि कार पानी में है और बेटा उसकी छत पर लेटा हुआ है। वो सड़क से 50 से 60 फीट दूर था। धीरे-धीरे डूब रहा था। वो लगातार मोबाइल की लाइट को जला और बुझा रहा था, ताकि किनारे पर खड़े हम जान सकें कि वो जिंदा है। मैंने डायल-112 पर फोन किया। उस समय करीब साढ़े 12 बज रहे थे। मैं उसे अपने सामने डूबता देख रहा था। वहां और लोग भी थे, लेकिन मदद कोई नहीं कर रहा था। कुछ लोग वीडियो बना रहे थे, मैंने उन लोगों से कहा- प्लीज, वीडियो नहीं बनाइए, मेरे बेटे की मदद करिए। सर्च ऑपरेशन कैसे चला, ये समझिए 12:50 बजे क्रेन 30 फीट पहुंची, युवराज 50 फीट दूर था
रात करीब पौने एक बजे डायल-112 के साथ पुलिस और दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची। तब तक कोहरा और घना हो चुका था। विजिबिलिटी लगभग जीरो थी, सबसे पहले पुलिस और अग्निशमन की टीम ने रस्सी फेंककर बचाने का प्रयास किया। मगर, रस्सी युवराज तक नहीं पहुंच रही थी। कोई पुलिस वाला कह रहा था कि पानी बहुत ठंडा है, कैसे जाएं। कोई कह रहा था कि साइट में नीचे सरिया हो सकती हैं। इसके बाद क्रेन मंगवाई गई। मगर क्रेन भी युवराज तक नहीं पहुंच पा रही थी। वो सिर्फ 30-40 फीट तक जा रही थी। वहां मौजूद कोई भी पानी में उतरने की कोशिश नहीं कर रहा था। पिता ने बताया- वो गड्ढा शायद 15 से 20 फीट गहरा था, इसलिए गोताखोर वहां होते तो बेटे की जान बच सकती थी। 1.45 बजे SDRF बुलाई, मगर डूब गई कार
SDRF की टीम रात 1.15 बजे पहुंची। उसके पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे। सब चिल्ला रहे थे बचाओ, कुछ तो करो। पिता कहते हैं- मैं खुद पानी में उतरने को तैयार था, लेकिन पुलिस ने मुझे आगे जाने नहीं दिया। 1.45 बजे के आसपास युवराज की कार पूरी तरह पानी डूब गई। उसके ऊपर लेटा युवराज भी पानी में समा गया। ये हम सिर्फ देखते ही रहे। 80 कर्मचारियों ने 2 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया
करीब पौने दो बजे के आसपास NDRF की टीम पहुंची। SDRF और NDRF के 30 कर्मचारी आ चुके थे। पुलिस और अग्निशमन विभाग के 50 कर्मचारी वहां मौजूद थे। करीब 80 लोगों ने रेस्क्यू और सर्च आपरेशन चलाया। सर्च लाइट, क्रेन और लैडर से मदद से टीम पानी में गई। 2 घंटे की मशक्कत के बाद युवराज के शव को 4.15 बजे के आसपास निकाला गया। उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने बताया कि उसकी सांस थम चुकी है। ———————————- ये पढ़ें – शिष्यों का दावा- अविमुक्तेश्वरानंद की जान को खतरा:शिविर में CCTV लगवाए; अखिलेश ने कहा- शंकराचार्य ने नकली सनातनियों की पोल खोली प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच 6 दिनों से विवाद जारी है। इसी बीच, अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर के अंदर और बाहर 12 CCTV कैमरे लगवाए हैं। शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने बताया- यह हमारी मजबूरी है, क्योंकि शंकराचार्य सड़क पर बैठे हैं। यहां प्रशासन और उसके गुंडे हैं। संत के वेश में यहां शैतान घूम रहे। उनसे शंकराचार्य की जान को खतरा है। पढ़िए पूरी खबर…
युवराज मेहता की कार डूबने से हुई मौत अब एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, रेस्क्यू सिस्टम की विफलता और अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी का मामला बनकर सामने आ रही है। जांच कर रही विशेष जांच टीम ने SDRF, पुलिस, कंट्रोल रूम और रेस्क्यू ऑपरेशन, प्राधिकरण में शामिल 100 से ज्यादा लोगों के फाइनल बयान दर्ज किए। आपको सोर्सेज के हवाले से SIT के प्राधिकरण से सवाल और उनके जवाब पढ़वाते हैं… एसआईटी. 16 दिसंबर की रात हुए हादसे के बाद प्राधिकरण ने क्या किया? प्राधिकरण. मौके पर सुरक्षा प्रबंध करवाए गए। इसके साथ ही निरीक्षण करवाकर प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर को सेवा से हटाया गया। बाकी को कारण बताओ नोटिस जारी की गई। जांच के लिए तीनों महाप्रबंधक की अगुआई में टीम बनाई गई। एसआईटी. 31 दिसंबर को उसी जगह पर पहले ट्रक बेकाबू होकर नाले से टकराया, नाला टूटा। इसके बाद प्राधिकरण ने क्या किया? प्राधिकरण. ऐसी किसी भी घटना की जानकारी पुलिस या स्थानीय निवासियों की तरफ से नहीं दी गई थी। न ही यह घटना संज्ञान में आई। एसआईटी. हादसा जहां पर हुआ उस सड़क पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? प्राधिकरण. ब्रेकर पर पेंटिंग, कैट आई, डायवर्जन बोर्ड समेत अन्य सभी जरूरी सड़क सुरक्षा के इंतजाम सेक्टर में ट्रैफिक सेल की तरफ से किए गए हैं। एसआईटी. प्लॉट आवंटन, नक्शा पास होने की जानकारी, बिल्डर पर नियमों के उल्लंघन में क्या कार्रवाई की गई? प्राधिकरण. जुलाई, 2014 को स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 का आवंटन हुआ। इसमें 27185 वर्ग मीटर जमीन का उपविभाजन लीड विकासकर्ता लोटस ग्रीस ने विज टाउन बिल्डर के पक्ष में किया। बिल्डर पर 129 करोड़ रुपए बकाया है। इसको लेकर नोटिस जारी गई। 2017 में प्राधिकरण से एक नक्शा पास करवाया गया, फिर 2022 में नक्शे में संशोधन के आवेदन को निरस्त किया गया। इसके अलावा निर्माण पूरा करने को भी नोटिस जारी की गई। एसआईटी. सेक्टर-150 से पहले कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं और उन पर प्राधिकरण ने क्या किया? प्राधिकरण. सेक्टर के निवासियों से मिली शिकायतों का निस्तारण करवाया गया। कई काम जो प्राधिकरण को करवाने थे करवाए गए। बाकी की प्रक्रिया चल रही है। पढ़िए हादसे की रात क्या-कुछ हुआ… 12.20 बजे (रात) कॉल आया, प्लीज बचा लो, पिता बोले- सुनते ही भागा
पिता राजकुमार कहते हैं- शुक्रवार की रात के करीब 12.20 बजे मैं बेड पर लेटा था। अचानक बेटे युवराज का कॉल आया। वो घर ही आने वाला था, इसलिए मुझे अचानक समझ नहीं आया कि वो मुझे कॉल क्यों कर रहा है? मैंने फोन उठाया। उधर से घबराई आवाज सुनाई दी। बोला- पापा…पापा मैं नाले में गिर गया हूं, मैं मरना नहीं चाहता हूं। मुझे बचा लीजिए। इतना सुनने के बाद मैं जिन कपड़ों में था, उन्हीं में दौड़ पड़ा। सोसाइटी से निकलने से पहले मैंने एक मैसेज टाइप किया और सोसाइटी के ग्रुप पर पोस्ट किया, ताकि मदद मिल सके। बेटे ने जो नाला बताया था, वो हमारी सोसाइटी से 200 मीटर दूर था। मैं दौड़ता हुआ उस नाले तक पहुंचा। यहां 30 मिनट तक बेटे को घने कोहरे और अंधेरे में ढूंढने की कोशिश करता रहा, चिल्ला रहा था कि रिस्पॉन्स मिल जाए। फिर मुझे लगा कि मैं गलत जगह ढूंढ रहा हूं। 12.30 बजे वीडियो बना रहे लोगों से कहा- प्लीज मेरे बेटे को बचाइए
इसके बाद मैं रोड के कट की तरफ पहुंचा, जहां एक बिल्डिंग का निर्माण अधूरा पड़ा था। यहां बेसमेंट के लिए गड्ढा खोदा गया था। वहां पहुंचकर मैं चिल्लाने लगा, मेरी आवाज सुनकर बेटा भी चिल्लाया…बचाओ…बचाओ। हेल्प मी… की आवाज सुनकर मैं समझ गया कि यहीं पर बेटा गिरा है। मैं थोड़ा और आगे तक गया, कोहरे में दिखा कि कार पानी में है और बेटा उसकी छत पर लेटा हुआ है। वो सड़क से 50 से 60 फीट दूर था। धीरे-धीरे डूब रहा था। वो लगातार मोबाइल की लाइट को जला और बुझा रहा था, ताकि किनारे पर खड़े हम जान सकें कि वो जिंदा है। मैंने डायल-112 पर फोन किया। उस समय करीब साढ़े 12 बज रहे थे। मैं उसे अपने सामने डूबता देख रहा था। वहां और लोग भी थे, लेकिन मदद कोई नहीं कर रहा था। कुछ लोग वीडियो बना रहे थे, मैंने उन लोगों से कहा- प्लीज, वीडियो नहीं बनाइए, मेरे बेटे की मदद करिए। सर्च ऑपरेशन कैसे चला, ये समझिए 12:50 बजे क्रेन 30 फीट पहुंची, युवराज 50 फीट दूर था
रात करीब पौने एक बजे डायल-112 के साथ पुलिस और दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची। तब तक कोहरा और घना हो चुका था। विजिबिलिटी लगभग जीरो थी, सबसे पहले पुलिस और अग्निशमन की टीम ने रस्सी फेंककर बचाने का प्रयास किया। मगर, रस्सी युवराज तक नहीं पहुंच रही थी। कोई पुलिस वाला कह रहा था कि पानी बहुत ठंडा है, कैसे जाएं। कोई कह रहा था कि साइट में नीचे सरिया हो सकती हैं। इसके बाद क्रेन मंगवाई गई। मगर क्रेन भी युवराज तक नहीं पहुंच पा रही थी। वो सिर्फ 30-40 फीट तक जा रही थी। वहां मौजूद कोई भी पानी में उतरने की कोशिश नहीं कर रहा था। पिता ने बताया- वो गड्ढा शायद 15 से 20 फीट गहरा था, इसलिए गोताखोर वहां होते तो बेटे की जान बच सकती थी। 1.45 बजे SDRF बुलाई, मगर डूब गई कार
SDRF की टीम रात 1.15 बजे पहुंची। उसके पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे। सब चिल्ला रहे थे बचाओ, कुछ तो करो। पिता कहते हैं- मैं खुद पानी में उतरने को तैयार था, लेकिन पुलिस ने मुझे आगे जाने नहीं दिया। 1.45 बजे के आसपास युवराज की कार पूरी तरह पानी डूब गई। उसके ऊपर लेटा युवराज भी पानी में समा गया। ये हम सिर्फ देखते ही रहे। 80 कर्मचारियों ने 2 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया
करीब पौने दो बजे के आसपास NDRF की टीम पहुंची। SDRF और NDRF के 30 कर्मचारी आ चुके थे। पुलिस और अग्निशमन विभाग के 50 कर्मचारी वहां मौजूद थे। करीब 80 लोगों ने रेस्क्यू और सर्च आपरेशन चलाया। सर्च लाइट, क्रेन और लैडर से मदद से टीम पानी में गई। 2 घंटे की मशक्कत के बाद युवराज के शव को 4.15 बजे के आसपास निकाला गया। उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने बताया कि उसकी सांस थम चुकी है। ———————————- ये पढ़ें – शिष्यों का दावा- अविमुक्तेश्वरानंद की जान को खतरा:शिविर में CCTV लगवाए; अखिलेश ने कहा- शंकराचार्य ने नकली सनातनियों की पोल खोली प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच 6 दिनों से विवाद जारी है। इसी बीच, अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर के अंदर और बाहर 12 CCTV कैमरे लगवाए हैं। शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने बताया- यह हमारी मजबूरी है, क्योंकि शंकराचार्य सड़क पर बैठे हैं। यहां प्रशासन और उसके गुंडे हैं। संत के वेश में यहां शैतान घूम रहे। उनसे शंकराचार्य की जान को खतरा है। पढ़िए पूरी खबर…