समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आज बड़ी रैली करेंगे। गौतमबुद्ध नगर के मिहिर भोज डिग्री कॉलेज मैदान में हो रही इस रैली में अखिलेश सुबह करीब 11 बजे आएंगे। तय कार्यक्रम के मुताबिक अखिलेश यादव 9वीं सदी के गुर्जर-प्रतिहार वंश के शक्तिशाली सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर माल्यापण करेंगे। इसके बाद जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके लिए करीब 100 मीटर लंबा पंडाल लगाया गया है। अखिलेश पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 32 जिलों की 140 विधानसभा सीटों पर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की प्रयास करेंगे। साथ ही भाजपा की नाकामियों को उजागर करेंगे। रैली में गाजियाबाद, बुलंदशहर, सिकंदराबाद, मेरठ, इटावा के अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा, संभल, शामली, बागपत से बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है। रैली के संयोजक राजकुमार भाटी ने कहा कि यह रैली सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देगी। सपा नेताओं ने की रैली में शामिल होने की अपील पूर्व मंत्री जावेद आब्दी ने लोगों से बड़ी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। जिला अध्यक्ष सुधीर भाटी और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी महेंद्र नगर ने भी रैली की महत्ता बताते हुए इसे ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया। पूर्व जिला अध्यक्ष वीर सिंह यादव व फकीरचंद नगर ने कहा कि इस रैली को सफल बनाने के लिए गांव और बूथ स्तर पर भी लगातार बैठक की जा रही थीं। प्रतिमा को लेकर हुआ था विवाद, सपा क्या संदेश देना चाह रही? समाजवादी पार्टी गौतमबुद्धनगर की दादरी विधानसभा में अपनी बड़ी रैली आयोजित कर रही है। यह रैली दादरी स्थित सम्राट मिहिर भोज डिग्री कॉलेज के मैदान में ‘भाईचारा समानता रैली’ और पीडीए थीम के तहत हो रही है। खास बात यह है कि सपा ने उसी स्थान को चुना है, जहां 2022 विधानसभा चुनाव से पहले सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। उस समय प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिमा के पास लगे शिलापट्ट पर केवल ‘सम्राट मिहिर भोज’ लिखा था, जबकि गुर्जर समाज ‘गुर्जर सम्राट मिहिर भोज’ लिखे जाने की मांग कर रहा था। इसी बात को लेकर नाराजगी बढ़ी और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन तेज हो गया था। अब समाजवादी पार्टी ने उसी विवादित स्थल को अपनी रैली के लिए चुनकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पश्चिमी यूपी में 2022 और 2024 में सपा का प्रदर्शन 2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरने का फैसला किया था। इस गठजोड़ का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में असर भी साफ देखने को मिला। शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर जैसे जिलों में सपा-रालोद ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए कई सीटों पर मजबूती दिखाई। हालांकि, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद और अलीगढ़ जैसे इलाकों में यह गठबंधन खास असर नहीं छोड़ सका। इन जिलों में सपा को सीटें जीतने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा और नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। चुनाव परिणाम आने के बाद रालोद ने सपा से दूरी बना ली और बाद में भाजपा के साथ चली गई। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, जिसने चौंकाने वाले नतीजे दिए। इस गठबंधन ने 80 में से 43 सीटें जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया। पश्चिमी यूपी में भी इसका असर देखने को मिला, जहां शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल और रामपुर जैसी सीटों पर जीत हासिल हुई। वहीं अलीगढ़, मेरठ, फर्रुखाबाद और अमरोहा जैसी सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा। इन जगहों पर सपा को हार जरूर मिली, लेकिन जीत-हार का अंतर काफी कम रहा, जिससे यह साफ हुआ कि पार्टी ने यहां भी अपनी पकड़ मजबूत की है। ——————