न जेपी न राज नारायण, कलाम भी गायब:सपा PDA पंचांग में हजरत अली का बर्थडे भूली, अखिलेश यादव ने किया था जारी

नए साल के मौके पर सपा प्रदेश सचिव और अखिल भारतीय चौरसिया समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौरसिया ने समाजवादी पीडीए पंचांग जारी किया। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय पर इसका विमोचन किया। बताया गया कि इसमें तमाम महापुरुषों के जन्मदिन-पुण्यतिथि, समाजवादी विचारधारा और पीडीए से संबंध रखने वालों के जन्मदिन-पुण्यतिथि मौजूद है। इसे लेकर भाजपा ने सपा पर हमला किया कि इस पंचांग में 22 जनवरी की जिक्र नहीं है, जब 2024 में अयोध्या मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। पंचांग में मुस्लिम तुष्टीकरण किया गया है। सपा ने जवाब देते हुए कहा कि भाजपा हर चीज में राजनीति तलाश करती है। ये उसकी आदत है। दैनिक भास्कर ने समाजवादी पीडीए पंचांग की पड़ताल की तो पता चला कि कई समाजवादी नेता ही इस पंचांग से गायब मिले। आचार्य नरेंद्र देव का नाम नहीं
पंचांग प्रकाशित कराने वाले अजय चौरसिया का कहना था कि पंचांग छपवाने का उद्देश्य महापुरुषों को याद करना था। इसमें समाजवादी विचारधारा से जुड़े महापुरुषों का भी जिक्र किया गया है। लेकिन, इस पंचांग में सबसे बड़े समाजवादी आचार्य नरेंद्र देव का जिक्र ही नहीं है। आचार्य नरेंद्र देव कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के प्रमुख सिद्धांतकारों में से एक थे। इनका जन्म 30 अक्टूबर, 1889 को और निधन 19 फरवरी, 1956 को हुई थी। सबसे बड़े समाजवादी नेता को भी भूल गए
इसी तरह संपूर्ण क्रांति के जनक और समाजवादी विचारक जननायक जय प्रकाश नारायण का नाम इस पंचांग में नहीं है। अखिलेश यादव ने इनके नाम से लखनऊ में सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर बनवाया था। ये बात अलग है कि अभी तक ये शुरू नहीं हो सका। भाजपा ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जेपी आंदोलन के नाम से समाजवादी आंदोलन की मिसाल दी जाती है। इनका जन्म 11 अक्टूबर, 1902 और निधन 8 अक्टूबर, 1979 को हुआ था। लोहिया के अनुयायी राज नारायण का भी नाम गायब
राज नारायण को 70 के दशक की सबसे ताकतवर नेता इंदिरा गांधी की 1971 की जीत को चुनौती देने और उनका चुनाव रद्द कराने के लिए याद किया जाता है। वे डॉ. राम मनोहर लोहिया के अनुयायी थे और जय प्रकाश नारायण के सहयोगी थे। इनका जन्म 23 नवंबर, 1917 को और निधन 31 दिसंबर, 1986 को हुआ था। इनका जिक्र भी समाजवादी पीडीए पंचांग में नहीं है। पहले समाजवादी प्रधानमंत्री का नाम भी गायब
चंद्र शेखर की पहचान मुखर और प्रखर समाजवादी नेता के रूप में थी। वे देश के 8वें प्रधानमंत्री थे। पंचांग में इनके नाम का भी जिक्र नहीं है। चंद्र शेखर का जन्म 17 अप्रैल, 1927 को और निधन 8 जुलाई, 2007 को हुआ था। चंद्र शेखर ने समाजवादी जनता पार्टी के नाम से पार्टी का गठन किया था। बाद में वे मुलायम सिंह के साथ आ गए थे। समाजवादी पार्टी के टिकट पर बलिया से चुन कर संसद भी पहुंचे थे। डॉ. कलाम का नाम भी पंचांग में नहीं
देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक और मिसाइल मैन के नाम से मशहूर एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को और निधन 27 जुलाई, 2015 को हुआ था। कलाम वो शख्सियत थे, जिन्होंने परमाणु हथियार कार्यक्रमों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई। वे सर्वसहमति से देश के राष्ट्रपति बने और उन्हें जनता का राष्ट्रपति की उपाधि दी गई। हजरत अली का नाम भी नहीं
सपा पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप भी लगता रहता है। हकीकत यह है कि प्रमुख विद्वान हजरत अली का जन्मदिन 3 जनवरी को था। लेकिन समाजवादी पीडीए पंचांग में उनका भी जिक्र नहीं है। हजरत अली के जन्मदिन पर सार्वजनिक छुट्‌टी की शुरुआत मुलायम सिंह यादव ने की थी। इसे योगी सरकार ने भी बरकरार रखा है। जनेश्वर मिश्र की दो बार जयंती
इस पंचांग में जनेश्वर मिश्र का दो बार जिक्र है। पहली बार 22 जनवरी को जयंती के रूप में और दूसरी बार 5 अगस्त को जयंती के रूप में। हालांकि जनेश्वर मिश्र का जन्म 5 अगस्त, 1933 को और निधन 22 जनवरी, 2010 को हुआ था। ज्यादातर दलित और पिछड़े समाज के महापुरुषों के नाम
सपा के पंचांग में सबसे अधिक दलित महापुरुषों का जिक्र है। इसमें बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर, सावित्री बाई फुले, ज्योतिबा फुले, संत रविदास, रामाबाई अम्बेडकर, छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति साहू जी महाराज, संत गाडगे, कर्पूरी ठाकुर, कांशी राम, राम मनोहर लोहिया, जगजीवन राम, बिरसा मुंडा, संत कबीर जैसे महा पुरुषों का जिक्र है। सभी प्रमुख पर्व शामिल
पंचांग में सभी प्रमुख पर्व शामिल हैं। इनमें होली, दीपावली, ईद, मोहर्रम, बारावफात, दशहरा, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, छठ पूजा, धनतेरस, नवरात्र, गणेशोत्सव, शिवरात्रि, महाशिवरात्रि का जिक्र है। हालांकि, इसमें भी ईद उल अजहा का जिक्र नहीं है। कहां से आया समाजवादी पीडीए पंचांग? इस कैलेंडर पर ऊपर महापुरुषों की फोटो लगी है। नीचे हर पन्ने पर एक ओर अखिलेश यादव और दूसरी ओर डॉ. अजय चौरसिया की फोटो है। मूलरूप से वाराणसी के रहने वाले अजय चौरसिया सपा के प्रदेश सचिव भी हैं। इनकी तस्वीर इसलिए लगी है, क्योंकि पीडीए पंचांग का आइडिया इन्हीं का था। इस कैलेंडर को छपवाकर भी वही लाए थे। अखिलेश यादव को आइडिया पसंद आया। अजय के अनुरोध पर अखिलेश यादव ने इस कैलेंडर का विमोचन भी कर दिया। ये पहली बार है, जब इस तरह के कैलेंडर की शुरुआत समाजवादी पार्टी के किसी नेता ने की है। अजय चौरसिया बताते हैं- पीडीए पाठशाला और पीडीए प्रहरी की वजह से सपा ने अपनी अलग पहचान समाज में बनाई है। यहीं से उनका पीडीए पंचांग का भी आइडिया आया, जिसमें तमाम महापुरुषों के बारे में जानकारी देने का विचार शामिल है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि ये पहली बार है, जब इस तरह का कैलेंडर की शुरुआत की है। संभव है कि इसमें कमियां भी हों और बहुत सारे महापुरुषों के नाम छूट भी गए हों। अगली बार इन गलतियों को दूर कर लिया जाएगा। ——————– ये खबर भी पढ़ें… महाकुंभ से 60 गुना कम बजट वाला है माघ मेला, एरिया 5 गुना घटा, 4 गुना कम श्रद्धालु आएंगे पिछले साल प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा मेला हुआ। संगम के तट पर हुए महाकुंभ में 100 से ज्यादा देशों से लोग आए। 60 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने स्नान किया। मेले को विहंगम दिखाने के लिए 6 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ। अरबों रुपए की कमाई हुई। अब उसी संगम के तट पर माघ मेला लगा है। पढ़ें पूरी खबर