पंडित पागल हो गया है…यह किसने कहा सभी जानते हैं:अलंकार अग्निहोत्री ने कहा- मुझे घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं, बड़े निर्णय लेने होंगे

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे का आज तीसरा दिन है। मंगलवार देर रात अलंकार अग्निहोत्री को उनके ही सरकारी आवास में हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। बुधवार सुबह अलंकार अग्निहोत्री ने अपने आवास के गेट पर आए। इस दौरान उन्होंने कहा कि यूजीसी का नया नियम छात्रों को जातियों में बांट देगा। इससे शिक्षण संस्थानों के अंदर आंतरिक कलह बढ़ेगी और देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनने का खतरा पैदा हो सकता है। हालात ऐसे न बन जाएं कि स्थिति संभालने के लिए देश के भीतर ही सेना को उतरना पड़े। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने सरकारी आवास के गेट के अंदर खड़े होकर भास्कर से बातचीत की। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: इस्तीफा के अगले ही दिन आपको नजरबंद कर दिया गया है। अब आगे की रणनीति क्या होगी? जवाब: यह स्थिति सीधे तौर पर संवैधानिक संकट की ओर इशारा करती है। संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मुझे प्राप्त मौलिक अधिकारों (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन की स्वतंत्रता) का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। जब किसी नागरिक के मौलिक अधिकार बाधित किए जाते हैं, तो यह माना जाना चाहिए कि संवैधानिक व्यवस्था विफल हो चुकी है। मुझे घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है, लेकिन राज्यभर के कई संगठन लगातार हमारे संपर्क में हैं। आने वाले समय में हम बड़े और निर्णायक विकल्पों पर विचार करेंगे। सवाल: क्या इस्तीफा देने से पहले आपने परिवार से कोई सलाह ली थी?
जवाब: यह अब केवल एक परिवार तक सीमित मामला नहीं रह गया है। मैं सैकड़ों-हजारों परिवारों के संपर्क में हूं। इस समय पूरा देश चिंतित है और हर वर्ग के लोग परेशान हैं। सवाल: आखिर यूजीसी (UGC) के इस नए रेगुलेशन का इतना विरोध क्यों हो रहा है?
जवाब: यह रेगुलेशन पूरे समाज के लिए घातक है। इसमें सामान्य वर्ग को पहले से ही स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है। कोई भी व्यक्ति झूठी शिकायत कर सामान्य वर्ग के युवाओं और उनके परिवारों को फंसा सकता है। यह व्यवस्था समाज में जहर घोलने जैसी है। शिक्षण संस्थानों में हम जाति देखकर मित्रता नहीं करते। चाहे कोई हिंदू हो, मुस्लिम, सिख या ईसाई सभी साथ पढ़ते हैं। लेकिन यह नियम विद्यार्थियों को अलग-अलग समूहों में बांट देगा। इससे संस्थानों के अंदर आंतरिक कलह बढ़ेगी और देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनने का खतरा पैदा हो सकता है। मुझे आशंका है कि जो सेना देश की सीमाओं पर लड़ती है, उसे हालात बिगड़ने पर देश के अंदर व्यवस्था संभालने के लिए उतरना न पड़े। सवाल: “पंडित पागल हो गया है” यह टिप्पणी किसने की?
जवाब: किसने यह कहा, यह आप सभी जानते हैं। मैं किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लेना चाहता। जनता खुद सब समझती है। इस पर मेरी ओर से कोई टिप्पणी नहीं है। अब जानिए अलंकार अग्निहोत्री के बारे में अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के रहने वाले हैं। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। मां बैंक में थीं। 1998 में यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में अलंकार को 21वां स्थान मिला। इसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीटेक किया और नौकरी करने लगे। 2014 में जब अलंकार के सभी छोटे भाई सेटल हो गए। बहन की शादी हो गई, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर UPPCS की तैयारी की और 2019 में एग्जाम क्वालिफाई किया। —————- ये भी पढ़ें- ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़ा ने बाहर निकाला:अविमुक्तेश्वरानंद को फर्जी और 10 में से 9 महामंडलेश्वर को झूठा कहा था किन्नर अखाड़ा से महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को बाहर कर दिया गया है। इसकी पुष्टि अखाड़े की प्रमुख महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने वीडियो जारी कर किया। उन्होंने कहा- अखाड़े के पदाधिकारी से बैठक करके यह निर्णय लिया है। अब ममता कुलकर्णी से अखाड़े का कोई संबंध नहीं है। वह अखाड़े की अधिकारी या सदस्य नहीं हैं। हमारे अखाड़े में महिला भी हैं, पुरुष भी हैं और किन्नर भी हैं। हम किसी तरह का विवाद नहीं चाहते हैं। मौनी अमावस्या के दिन जिस तरह से बटुक ब्राह्मणों को शिखा पकड़कर पीटा गया, इससे हमारी भी नाराजगी है। पढ़िए पूरी खबर…