पूर्वांचल-दक्षिणांचल पर 3 साल में 25 हजार करोड़ खर्च:5 टुकड़े कर 6500 करोड़ में बेचना चाहती है सरकार, किसे फायदा पहुंचाने की तैयारी

ऊर्जा विभाग यूपी के 42 जिलों की बिजली व्यवस्था संभाल रहीं दक्षिणांचल और पूर्वांचल वितरण कंपनियों को प्राइवेट हाथों में सौंपने की तैयारी में है। इसके लिए कुल 5 निजी कंपनियां बनाई गई हैं। हर कंपनी में 8-8 जिले शामिल होंगे। पांचों कंपनियों का बेस रिजर्व प्राइस 6500 करोड़ रखा गया है। सवाल ये है कि जब 3 साल में दोनों कंपनियों के सिस्टम इम्प्रूव पर आरडीएसएस और बिजनेस स्कीम के तहत 25 हजार करोड़ खर्च किया जा चुका है, तो बेस प्राइस इतना कम क्यों? एक तरफ ऊर्जा मंत्री सरकारी विज्ञापनों में दावा कर रहे हैं कि उन्होंने 8 साल में लाइन लॉस 40 से घटाकर 16 फीसदी कर दिया है। फिर भी इन दोनों कंपनियों को कैसे घाटे में बताया जा रहा? बिजली विभाग के जानकारों की मानें, तो निजीकरण के नाम पर बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम देने की तैयारी है। पढ़िए ये रिपोर्ट… सबसे पहले ऊर्जा मंत्री का दावा जानिए
सरकार की ओर से 3 दिन पहले विज्ञापन प्रकाशित कर दावा किया गया कि 8 साल में बिजली का लाइन लॉस 40% निरंतर प्रयासों से घटाकर 16.5% पर लाया जा चुका है। 3 साल पहले तक ये लाइन लॉस 23.5% था। इसके साथ ही ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की तस्वीर भी लगी है। ऊर्जा विभाग के इस दावे पर उपभोक्ता परिषद और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने पलटवार किया। सरकार से सवाल पूछा- जब बिजली कंपनियों का घाटा लगातार कम हो रहा है। एटीएंडसी (तकनीकी और वाणिज्यिक) हानियां कम हो रही हैं। तो फिर पूर्वांचल-दक्षिणांचल वितरण कंपनियों का निजीकरण कर किस उद्योगपति को फायदा पहुंचाने की तैयारी है? दोनों सरकारी कंपनियों की बजाय 5 कंपनियां बनाई गईं
ऊर्जा विभाग ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल वितरण कंपनियों की जगह 5 नई कंपनी बनाई हैं। इनमें गोरखपुर, प्रयागराज, काशी, कानपुर-झांसी और आगरा-मथुरा बिजली वितरण कंपनियां होंगी। सभी कंपनियों में 8-8 जिलों को शामिल किया गया है। पांचों कंपनियों का रिजर्व बेस प्राइस न्यूनतम 6500 करोड़ रखा गया है। मतलब, इन कंपनियों को बेचने के लिए इसी रिजर्व प्राइस से बोली लगेगी। हर एक कंपनी का बेस रिजर्व प्राइस 1300 से 1400 करोड़ के बीच होगा। कंपनियों के इसी रिजर्व बेस प्राइस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, विद्युत अधिनियम की धारा 131, 132, 133, 134 के तहत निजीकरण के मसौदे को लागू किया जा रहा है। लेकिन, लगता है कि ऊर्जा विभाग के लोगों ने इस कानून को ठीक से पढ़ा नहीं है। विद्युत अधिनियम की धारा 131 (2) में कहा गया है कि सबसे पहले किसी कंपनी का रेवन्यू पोटेंशियल निकालेंगे। फिर उसका अगले 25 साल तक का आकलन करेंगे। ऊर्जा विभाग ने ये आकलन सही नहीं किया है। उन्होंने दोनों कंपनियों का रिजर्व बेस प्राइस 6500 करोड़ निकाला है। कंपनियों का वैल्यूएशन नेटवर्थ के आधार पर क्यों नहीं
ऊर्जा विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी सरकारी या प्राइवेट कंपनी का वैल्यूएशन नेटवर्थ के आधार पर किया जाता है। पूर्वांचल वितरण कंपनी देश की पहली ऐसी बिजली कंपनी है, जिसका अकेले का नेटवर्थ 54 हजार करोड़ है। देश के सभी निजी घरानों के नेटवर्थ को मिला लें, तो ये 87 हजार करोड़ है। इसकी तुलना में अकेले उत्तर प्रदेश के बिजली कंपनियों का नेटवर्थ 1.77 लाख करोड़ है। महाराष्ट्र को छोड़कर यूपी दूसरे नंबर पर है। उपभोक्ता परिषद के अवधेश वर्मा ने सवाल उठाते हुए पूछा- यूपी सरकार इतने बड़े नेटवर्थ वाली बिजली कंपनियों को औने-पौने दामों पर क्यों बेच रही? सरकार की नीयत से साफ है कि ये कहीं न कहीं निजी घरानों को फायदा देने की मंशा से किया जा रहा है। लेकिन, नियामक आयोग पर भरोसा है कि वह ऐसा होने नहीं देगा। 3 साल में पूर्वांचल-दक्षिणांचल पर 25 हजार करोड़ खर्च
पिछले 3 साल से केंद्र सरकार आरडीएसएस योजना के तहत दोनों कंपनियों पर 20 हजार करोड़ और बिजनेस स्कीम के तहत 5000 करोड़ खर्च किया जा रहा है। मतलब दोनों स्कीमों को मिलाकर 25 हजार करोड़ खर्च किया जा रहा है। इसका टेंडर भी हो चुका है। बहुत से काम भी शुरू हो चुके हैं। इसमें नए सब स्टेशन बनाने से लेकर पुराने सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाना, अधिक क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर लगाना, जर्जर तारों को बदलने से लेकर बिजली के सिस्टम को इम्प्रूव करने पर ये राशि खर्च की जा रही है। इसी सिस्टम के इम्प्रूव होने के बाद ही प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री आरके शर्मा की ओर से दावा किया जा रहा है कि भाजपा के 8 साल में एटीएंडसी लाइन लॉस 40 से 16.5% पर आ गया। इसमें बिजली की तकनीकी नुकसान 6% के लगभग ही है। शेष वाणिज्यिक हानियां हैं। मतलब, इसमें चोरी सहित अन्य कारण शामिल हैं। टैरिफ याचिका और केंद्र सरकार के अप्रूव्ड लाइन-लॉस में अंतर
केंद्र सरकार ने 2024-25 के लिए लाइन लॉस जो अप्रूव्ड किया है, उसके अनुसार पूर्वांचल के लिए 18.49% और दक्षिणांचल के लिए 18.97% है। प्रदेश की पांचों वितरण कंपनियों की अप्रूव्ड औसत लाइन लॉस 16.43% है। इसी को आधार बनाकर प्रदेश का ऊर्जा विभाग वाहवाही लूट रहा है। लेकिन, टैरिफ याचिका में इसी ऊर्जा विभाग ने लाइन लॉस का आंकड़ा अलग पेश किया। इसमें 2025 में दक्षिणांचल का लाइन लॉस 28.48% और पूर्वांचल का लाइन लॉस 36.08% दर्शाया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, लाइन लॉस के आंकड़े में ये अंतर साफ बता रहा है कि सरकार की मंशा क्या है? उन्होंने आरोप लगाए कि सरकार निजी कंपनियों से साठगांठ कर उन्हें फायदा पहुंचाने की तैयारी में है। यही आरोप संघर्ष मोर्चा की ओर से लगाते हुए पिछले 7 महीने से निजीकरण की खिलाफत की जा रही है। अब पढ़िए नियामक आयोग ने कहां फंसाया पेंच
7 जुलाई को प्रमुख सचिव सहित आला अधिकारी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग पहुंचे थे। ये अधिकारी लगभग ढाई घंटे तक वहां मौजूद रहे। अधिकारी पूर्वांचल और दक्षिणांचल वितरण कंपनी के स्थान पर नई 5 वितरण कंपनियों के मसौदे और उनके रिजर्व बेस प्राइस के प्रारूप पर मंजूरी लेना चाहते थे। लेकिन, नियामक आयोग ने 12 से अधिक बिंदुओं पर पेंच फंसा दिया। नियामक आयोग ने पूछा कि जिन 2 कंपनियों के स्थान पर नई 5 कंपनियां बनाई जा रही हैं, यदि इसमें से किसी एक का टेंडर नहीं हुआ तो उसके उपभोक्ता कहां जाएंगे? इस पर अधिकारियों की ओर से अभी संतोषजनक जवाब नहीं पेश किया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि पांचों कंपनियां बिकने वाली हैं। नियामक आयोग ने विद्युत अधिनियम की धारा 131, 132, 133, 134 का पालन न किए जाने पर भी जवाब मांगा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का आरोप है कि जिस तरीके से नियामक आयोग में सरकार की नुमाइंदगी में पहुंचे अफसरों ने कहा कि पांचों कंपनियां बिकने वाली है, इससे साफ है कि आपने पहले ही फिक्सिंग कर लिया है। निजीकरण की पूरी प्रक्रिया एक फिक्सिंग मॉडल है। सीबीआई जांच हो, तो इन अधिकारियों के बड़े भ्रष्टाचार उजागर होंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें…. छांगुर बाबा 2011 तक गांव-गांव जाकर अंगूठी बेचता था, अब आलीशान मकान, करोड़ों की जमीन बेचकर मुंबई से साथ आई नसरीन बलरामपुर का उतरौला इलाका। यहां 3 बीघे में एक आलीशान घर है। गेट तो ऐसा, जैसे शहर के 5 स्टार होटलों में होते हैं। चारों तरफ सीसीटीवी लगे हैं। बाउंड्री के ऊपर कुछ इस तरह कटीले तार लगे हैं, जिन्हें पार करना किसी शातिर चोर के लिए भी संभव नहीं। कहा तो यह भी जाता है कि रात में उन तारों में करंट दौड़ा दिया जाता है। ये आलीशान घर जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का है। उसी छांगुर बाबा का, जिसे धर्मांतरण के आरोप में यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। छांगुर 2011 तक गांव-गांव घूमकर अंगूठी और नग बेचा करता था। फिर अचानक किस्मत ऐसी पलटी कि करोड़ों का आदमी बन गया। पढ़ें पूरी खबर