पेट्रोल-डीजल की जगह एथनॉल से चलेंगी गाड़ियां:ये पेट्रोल से ₹30 तक सस्ता होगा, गाजियाबाद-नोएडा के बाद इन शहरों में लगेंगे पंप

देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। यूपी में डीजल ₹95 और पेट्रोल ₹102 के आसपास बिक रहा है। इसलिए ऑप्शन के तौर पर एथनॉल से चलने वाली गाड़ियों की चर्चा हो रही है। इसे फ्लेक्स फ्यूल भी कहा जा रहा है। जिसकी कीमत ₹70 से ₹75 प्रति लीटर हो सकती है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, देशभर के सभी पेट्रोल पंप पर E20 मिलने लगा है। 48 पेट्रोल पंपों पर E85 फ्यूल और 183 पंपों पर E100 भी उपलब्ध हैं। ये पंप महाराष्ट्र, दिल्ली, यूपी, कर्नाटक और तमिलनाडु में हैं। दिसंबर, 2026 तक पंप की संख्या संयुक्त रूप से 500 और 2027 तक 5 हजार तक बढ़ाने का टारगेट है। एथनॉल गाड़ी की खूबियां और कमियां एथनॉल गाड़ियां E100 जैसे एथनॉल फ्यूल के साथ पेट्रोल पर भी चल सकती हैं। E100 सस्ता होने की वजह से ईंधन का खर्च कम हो सकता है। ये गाड़ियां सामान्य वाहनों के मुकाबले 50% तक कम प्रदूषण फैलाती हैं। साथ ही पेट्रोल-डीजल पर देश की निर्भरता घटाने में मदद करती हैं। हालांकि, इनकी कीमत सामान्य गाड़ियों से 15 हजार से 40 हजार रुपए तक ज्यादा हो सकती है। पेट्रोल के मुकाबले माइलेज 25-35% तक कम मिल सकता है। इंजन की सर्विस जल्दी करानी पड़ सकती है। लंबे समय तक गाड़ी खड़ी रहने पर कोल्ड स्टार्ट जैसी समस्या भी आ सकती है। पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कैसे कम खर्च होगा? ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि एथनॉल में पेट्रोल की तुलना में करीब 30% कम ऊर्जा होती है। इसलिए E85 या E100 फ्यूल से चलने वाली गाड़ियां उतनी दूरी तय करने के लिए ज्यादा फ्यूल खर्च करती हैं। इनका माइलेज पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों के मुकाबले 25% से 35% तक कम हो सकता है। लेकिन, एथनॉल फ्यूल सस्ता होने से कुल खर्च कम पड़ सकता है। अगर पेट्रोल की कीमत ₹100 प्रति लीटर और E100 की कीमत ₹70 प्रति लीटर मानी जाए, तो तुलना इस तरह होगी- 65 किमी चलने के लिए करीब 1.25 लीटर E100 की जरूरत होगी। जिसका खर्च 1.25 × ₹70 = ₹87.50 आता है। यानी E100 में बाइक का माइलेज कम होगा और वह ज्यादा फ्यूल खर्च करेगी। फिर भी E100 सस्ता होने की वजह से 65 किमी चलाने का खर्च करीब ₹88 पड़ेगा। जबकि, पेट्रोल में यही दूरी तय करने का खर्च ₹100 होगा। यानी करीब ₹12 की बचत हो सकती है। नोएडा-गाजियाबाद में एथनॉल के 3 पंप E85 और E100 फ्यूल से चलने वाली गाड़ियां भी जून के पहले हफ्ते में लॉन्च हो चुकी हैं। अब बात यहां आकर फंसती है कि अगर E85 या E100 गाड़ियां खरीद ली जाएं, तो उनका फ्यूल कहां और कैसे मिलेगा? पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देशभर के ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर ‘E20’ फ्यूल मिलने लगा है। E85 और E100 के लिए फिलहाल लिमिटेड पंप हैं। सरकार पेट्रोल पंपों को अपग्रेड कर रही है। आने वाले समय में नॉर्मल पेट्रोल पंप पर भी एथनॉल फ्यूल मिलने लगेगा। एथनॉल गाड़ियों से जुड़े 3 जरूरी सवालों के जवाब सवाल 1. क्या पुरानी गाड़ियां एथनॉल पर चल पाएंगी?
जवाब. एथनॉल E85 और E100 पुरानी गाड़ियों के लिए नहीं है। इसके लिए अलग गाड़ियां खरीदनी होंगी। सवाल 2. क्या पुरानी गाड़ियों में E85 या E100 डालने से इंजन खराब हो जाएगा?
जवाब. साल- 2023 से पहले की गाड़ियां सिर्फ शुद्ध पेट्रोल के लिए बनी थीं। अगर उनमें लंबे समय तक एथनॉल मिक्स फ्यूल डाला जाए, तो गाड़ी के रबर होज, प्लास्टिक के पार्ट्स और एल्युमीनियम इंजन धीरे-धीरे गलने लगता है। इससे गाड़ी का इंजन समय से पहले खराब या सीज हो सकता है। पुरानी गाड़ी वालों को प्रीमियम पेट्रोल जैसे- XP95 ही डलवाना पड़ेगा। सवाल 3. अगर गाड़ी में एथनॉल फ्यूल खत्म हो जाए और एथनॉल पंप नजदीक न हो, तो क्या होगा?
जवाब. एथनॉल गाड़ियों में पेट्रोल और एथनॉल मिक्स फ्यूल दोनों का इस्तेमाल होता है। ये गाड़ियां नॉर्मल पेट्रोल से भी चल सकती हैं। भारत में E5 और E10 का ऑप्शन क्यों नहीं? ब्राजील, अमेरिका, फ्रांस और थाईलैंड जैसे कई देशों में गाड़ी के हिसाब से अलग-अलग एथनॉल ब्लेंड वाला पेट्रोल चुन सकते हैं। वहां E10, E15, E27, E85 और E100 जैसे कई ऑप्शन उपलब्ध हैं। इससे नई और पुरानी दोनों तरह की गाड़ियों के लिए सही फ्यूल मिल जाता है। वहीं, भारत के पुरानी गाड़ियों के मालिकों का कहना है कि अप्रैल- 2023 में E20 लागू करने के साथ E5 और E10 का ऑप्शन भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए था। उनका मानना है कि इससे पुरानी गाड़ियों के इंजन पर कम असर पड़ता और माइलेज भी बेहतर मिलता। वहीं, तेल कंपनियों का तर्क है कि E5, E10 और E20 तीनों तरह के पेट्रोल की सप्लाई और स्टोरेज की अलग व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ेगी। हालांकि, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल पहले से XP95, XP100 और दूसरे प्रीमियम पेट्रोल अलग नेटवर्क के जरिए बेच रही हैं। डीजल में भी आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की तैयारी आइसोब्यूटेनॉल एक बायोफ्यूल है, जो एथनॉल से बनता है। यह डीजल में आसानी से घुल जाता है। सितंबर- 2025 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया था- डीजल में 10% एथनॉल मिलाने का प्रयोग हो चुका है, लेकिन वह असफल रहा। अब डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की कोशिश की जा रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, 2026 के अंत तक इसे अनिवार्य किया जा सकता है। —————————– यह खबर भी पढ़ें UP में बिना ब्याज मिल रहा सरकारी लोन, युवाओं को बिजनेस के लिए ₹1 करोड़ तक का फंड यूपी में युवाओं को बिना ब्याज ₹5 लाख तक कर्ज मिल रहा है। वहीं, महिलाओं को 2.5 लाख और किसानों को 5 लाख रुपए तक लोन सिर्फ 4% ब्याज पर मिल रहा। महिलाओं को सस्ते कर्ज के लिए गारंटी देने की जरूरत भी नहीं है। यहां पढ़ें पूरी खबर