प्रयागराज में गंगा-यमुना नदी उफान पर हैं। नदियों से सटे 200 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। फसलें डूब गईं हैं। प्रशासन लोगों की मदद के लिए नाव चलवा रहा। मगर बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। लोगों के कामकाज भी ठप हो चुके हैं। वहीं, शहर के 15 मोहल्लों की सड़कें भी पानी में डूब गई हैं। गंगा-यमुना में बाढ़ जैसे हालात होने से 15 लाख की आबादी पर असर पड़ा है। कई परिवार घर की ऊपर की मंजिलों पर शिफ्ट हुए हैं। बहुत से परिवार रिश्तेदार या दोस्तों के घर चले गए हैं। गंगा के किनारे जहां महाकुंभ सिटी बसाई गई थी, वह पूरा इलाका अब जलमग्न हो चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक, जून महीने में प्रयागराज में सामान्य से 46% ज्यादा बारिश रिकार्ड हुई है। प्रयागराज में 24 घंटे में 57.7 मिमी बारिश ने हालात और बिगाड़े हैं। बाढ़ में परिवार किस कदर परेशान हैं? प्रशासन ने क्या व्यवस्थाएं की हैं? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ऐप की टीम शहर से 15Km दूर झूंसी के इलाके में पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… सुनौटी की मेन रोड डूबी, कई गांव का संपर्क शहर से टूटा
बाढ़ के हालात को समझते हुए भास्कर टीम झूंसी पहुंची। यहां सबसे पहले बदरा सुनौटी इलाका पड़ा। मेन रोड के साथ जहां खेत दिखा करते थे, अब वहां दूर तक पानी ही पानी दिख रहा है। मेन रोड पर पानी भर जाने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। लोगों ने बताया कि सुनौटी का घाट भी पूरी तरह से डूब गया था। महाकुंभ के दौरान गंगा रीवर फ्रंट तैयार किया गया था। ताकि लोग इस रोड से संगम तक पहुंच सके। यह रोड भी पानी में गायब हो गई। अब यहां बसे लोगों को शहर आने-जाने में खासी दिक्कत हो रही है। लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने एक नाव की व्यवस्था की है। मगर बड़ी आबादी के बीच यह नाव नाकाफी साबित हो रही। लोगों की शिकायत है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन को मदद पहुंचानी थी, मगर हमारा ध्यान नहीं रखा जा रहा। झूंसी वार्ड-50 में पानी ही पानी
अब हालात का जायजा लेते हुए भास्कर टीम झूंसी के वार्ड नंबर 50 में पहुंची। यह शहरी आबादी से जुड़ा हुआ इलाका है, जो नगर निगम के तहत आता है। इस वार्ड के पूरा सूरदास, कजरिया, ढोल बजवा, कोहना, मुंशी का पूरा और विश्वकर्मा मार्केट के इलाके अब जलमग्न हो चुके हैं। बाइक पर आगे जाना मुश्किल था, इसलिए हम एक ट्रैक्टर पर सवार हो गए। हमने देखा कि लोगों के घरों में पानी घुस गया था। महिलाएं और बच्चे लगातार पानी घर से बाहर फेंक रहे हैं। घरों के मुख्य दरवाजों के पास मिट्टी डालकर लेवल ऊंचा करने का प्रयास किया गया है। मगर पानी फिर भी अंदर जा रहा था। शीला बोलीं- रसोई में पानी भरा, छत पर चूल्हा बनाया
यहां एक घर के बाहर खड़ी शीला देवी ने गुस्से में कहा- हम तो मजबूरी में यहां रह रहे, क्योंकि जिनके पास आसरा था, वो दूसरे इलाकों में जा चुके हैं। हम जैसे लोग फंसे हुए हैं। हर रोज ये समझ नहीं आता कि आज बच्चों को क्या खिलाए। क्योंकि रसोई में भी तो पानी भरा हुआ है। घर की छत पर चूल्हा बनाया है। मगर सूखी लकड़ी तक नहीं मिलती है। अगर बारिश हो जाए तो समझिए चूल्हा भी खत्म। क्या करें हालात से मजबूर हैं। तभी यह हाल हो गया है। अरविंद ने कहा- रूटीन के काम भी मुश्किल हुए
हालात को समझने के लिए हम एक घर में दाखिल हुए, यहां अरविंद मिले। उन्होंने बताया कि पूरे घर के निचले हिस्से में पानी भर चुका है। जितना हो सकता था, उतना सामान ऊपर की मंजिल पर शिफ्ट कर दिया है। मगर फिर भी हमारा नुकसान हुआ है। इसकी शिकायत नहीं है, सिर्फ खाने-पीने के सामान की मदद मिल जाए तो सहूलियत रहेगी। यहीं पर हमारी मुलाकात बाबूलाल से हुई। उन्होंने बताया कि हमारे पड़ोस के 3 मकान अब खाली हैं। ये परिवार अपने रिश्तेदारों के घर चले गए, क्योंकि यहां पानी भरने से रूटीन के काम भी मुश्किल हो गए हैं। दूसरी बात यह कि पानी के साथ-साथ सांप आने का खतरा भी बढ़ गया है। मालती देवी बोलीं- बच्चे डरे हुए हैं, वो तख्त से नीचे नहीं उतरते
यहां से 150 मीटर आगे मालती देवी का घर है, वह भी बाल्टी से घर के बाहर पानी फेंकती हुई मिलीं। उन्होंने बताया कि पति मजदूरी करने बाहर जाते हैं। घर में 2 बच्चे हैं, उन्हें तख्त पर भी रहने को बोला है, क्योंकि डर लगता है कि पानी के साथ कीड़े न आ गए हों, काट लेंगे तो दिक्कत होगी। इस पूरे इलाके में रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है। गंगा मैया का पानी हर साल ही बढ़ता है। लोग बता रहे हैं कि पानी अभी और बढ़ेगा। अगर ऐसा होता है, तो हमारा क्या ही होगा? पानी बढ़ने पर बिजली काटी, शाम ढलने पर दिक्कत होती है…
लोगों से बातचीत करके समझ आया कि 6 इलाके (पूरा सूरदास, कजरिया, ढोल बजवा, कोहना, मुंशी का पूरा, विश्वकर्मा मार्केट) में करीब 5 हजार घरों में पानी दाखिल हो चुका है। यहां खतरे को देखते हुए विभाग ने बिजली भी काट दी है, क्योंकि पानी में करंट उतरने का भी खतरा रहता है। अंधेरा होने के बाद इन इलाकों में सिर्फ हादसे का खतरा नहीं बढ़ता है। बल्कि ये इलाके डरावने हो जाते हैं। लोग परेशान हैं, मगर अपने घर छोड़कर कहीं जा नहीं रहे हैं। लोगों ने बताया कि झूंसी की गारापुर रोड भी डूब गई है। लोग कहीं भी आ-जा नहीं सकते। इसलिए शहर की तरफ मजदूरी करने जाने वाले लोगों के सामने खासी दिक्कत है। सिर्फ झूंसी के 25 से ज्यादा गांवों में 5 लाख की आबादी बाढ़ का पानी बढ़ने से परेशान है। अब शहर के हालात समझिए… कंपटीशन की तैयार कर रहे स्टूडेंट घरों की तरफ लौटे
अब भास्कर टीम शहर के उन इलाकों की तरफ चल पड़ी, जहां पर पानी दाखिल हो चुका है। गंगा के कछारी इलाकों से सटे हुए मोहल्लों की सड़कों पर पानी भरा हुआ मिला। लोगों से बातचीत में सामने आया कि बड़ा बघाड़ा, छोटा बघाड़ा, सलोरी, मेंहदौरी, नेवादा, सिदापुर, करेलाबाग, दरियाबाद, जोघीघाट इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया है। इन इलाकों में सबसे ज्यादा सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्र रहते हैं। बाढ़ का पानी भरने की वजह से वह अपने-अपने शहरों में वापस चले गए हैं। डेली रूटीन में सब्जी, राशन के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं, पेट के इन्फेक्शन के मामले भी बढ़ रहे हैं। हमें बताया गया कि यमुनापार के जमुनानगर, पंजाबी हाता, मुंडी चक, चक फैजुल्ला, महेवा, मोहब्बतगंज, मड़ौका, बसवार, अरैल जैसे यमुना कछारी इलाके में भी हालात ऐसे ही हैं। शहरी इलाकों में रहने वाले 5 लाख से ज्यादा लोग गंगा- यमुना का पानी बढ़ने के बाद परेशान हैं। बलुआघाट बारादरी डूबा
प्रयागराज में शहर का बलुआघाट बारादरी इलाका भी बाढ़ के पानी की वजह से डूब गया। यहां श्रद्धालुओं की रोज भीड़ होती थी। मगर अब प्रशासन ने श्रद्धालुओं के आने पर रोक लगा दी है। इस घाट पर रोज शाम को यमुना आरती का आयोजन किया जाता है। बारादरी डूबने से आरती और पूजा की जगह बदल दी गई है। अब बरुआ बाबा मंदिर के पास से आरती और पूजन करने की व्यवस्था बनाई जा रही है। अब दारागंज श्मशान घाट के हालात घाट पर पानी, रोड पर दाह संस्कार हो रहे
अब हम दारागंज श्मशान घाट पर पहुंचे। बाहर इकट्ठा लोगों ने बताया कि आप घाट तक नहीं जा सकते, वो डूब चुके हैं। दारागंज श्मशान घाट प्रयागराज का प्रमुख घाट है। यहां सबसे ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार होता है। यह घाट शास्त्री पुल के नीचे है। गंगा उफान पर हुई तो श्मशान घाट डूब गए हैं। घाट पहुंचने के रास्ते पर भी पानी भर गया। ऐसे में श्मशान घाट कुछ दूर पर स्थित मोरी सड़क पर बना दिया गया। अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले शवों को सड़क पर ही जलाया जा रहा है। गुरुवार को करीब 14 शवों का अंतिम संस्कार सड़क पर किया गया। यहां चिताएं जलती हुई मिलीं। इसके अलावा पूरा संगम क्षेत्र जलमग्न हो चुका है। इससे धार्मिक गतिविधियां तो प्रभावित हो ही रही हैं। अब अंतिम संस्कार करना भी कठिन होता जा रहा है। कई स्थानों पर शवों को लेकर लोग नाव के सहारे घाट की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन घाट तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। यहां मौजूद लोगों की समस्याएं भी जानिए नावों पर पूरी तरह रोक, घाट से पंडों को हटाया
गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 81.83 मीटर पर हैं, जोकि सबसे ज्यादा है, लेकिन ये खतरे के निशान से लगभग 3 मीटर नीचे है। गंगा यमुना में बाढ़ की वजह से नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। घाट से पंडों को हटा दिया गया है। पंडों, पुजारियों के तख्तों को भी प्रशासन ने हटवा दिया है। हर साल नागवासुकी इलाके में करीब 300 से ज्यादा घर बाढ़ से प्रभावित होते हैं। पटपर घाट डूबा, रोके गए टूरिस्ट
प्रयागराज से 45 किलोमीटर दूर यमुनापार के पटपर घाट एक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां हर रोज लोग पिकनिक के लिए पहुंचते रहे हैं। बाढ़ की वजह से पथरीला इलाका पूरी तरह डूब गया है। घाट से पानी गांवों की तरफ बहने लगा है। ऐसे में पुलिस ने यहां आने जाने पर रोक लगा दी है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। यहां जल निगम, जलकल विभाग, स्वास्थ्य विभाग और एनडीआरएफ की टीमें समन्वय के साथ काम कर रही हैं। अब ये जानिए कि गंगा-यमुना का वाटर लेवल क्यों बढ़ रहा… टिहरी बांध, नरौरा से पानी छोड़ा, इसलिए वाटर लेवल बढ़ा सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड के टिहरी बांध, कानपुर बैराज और यूपी के नरौरा बांध से पानी छोड़ा जा रहा है, इसकी वजह से गंगा-यमुना में वाटर लेवल बढ़ रहा है। जून के महीने में अब तक 320.3 मिमी बारिश हुई है, जबकि 219.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यह 46% ज्यादा है। प्रयागराज प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। मगर गंगा और यमुना अभी खतरे के निशान से काफी दूर हैं। गुरुवार को यमुना नदी का जलस्तर नैनी में 81.45 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 84.734 मीटर से लगभग 3 मीटर नीचे है। गंगा नदी भी फाफामऊ, छतनाग और बक्सी एसटीपी पर 81.83, 80.79 और 81.36 मीटर पर बह रही है। यहां खतरे का निशान 84.734 मीटर पर है। ……….. ये भी पढ़ें : वाराणसी में CM ने किया हवाई निरीक्षण, गंगा घाटों का जल स्तर देखा, बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया CM सीएम योगी आज दो दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने हेलिकाप्टर से वाराणसी के घाटों और गंगा के जलस्तर का निरीक्षण किया। इसके बाद सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक की। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन किया। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री 19 जुलाई को होने वाले नशा मुक्ति समिट की तैयारियां परखेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय शामिल होंगे। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और खेल राज्यमंत्री निखिल खडसे भी आएंगे। पढ़िए पूरी खबर….
बाढ़ के हालात को समझते हुए भास्कर टीम झूंसी पहुंची। यहां सबसे पहले बदरा सुनौटी इलाका पड़ा। मेन रोड के साथ जहां खेत दिखा करते थे, अब वहां दूर तक पानी ही पानी दिख रहा है। मेन रोड पर पानी भर जाने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। लोगों ने बताया कि सुनौटी का घाट भी पूरी तरह से डूब गया था। महाकुंभ के दौरान गंगा रीवर फ्रंट तैयार किया गया था। ताकि लोग इस रोड से संगम तक पहुंच सके। यह रोड भी पानी में गायब हो गई। अब यहां बसे लोगों को शहर आने-जाने में खासी दिक्कत हो रही है। लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने एक नाव की व्यवस्था की है। मगर बड़ी आबादी के बीच यह नाव नाकाफी साबित हो रही। लोगों की शिकायत है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन को मदद पहुंचानी थी, मगर हमारा ध्यान नहीं रखा जा रहा। झूंसी वार्ड-50 में पानी ही पानी
अब हालात का जायजा लेते हुए भास्कर टीम झूंसी के वार्ड नंबर 50 में पहुंची। यह शहरी आबादी से जुड़ा हुआ इलाका है, जो नगर निगम के तहत आता है। इस वार्ड के पूरा सूरदास, कजरिया, ढोल बजवा, कोहना, मुंशी का पूरा और विश्वकर्मा मार्केट के इलाके अब जलमग्न हो चुके हैं। बाइक पर आगे जाना मुश्किल था, इसलिए हम एक ट्रैक्टर पर सवार हो गए। हमने देखा कि लोगों के घरों में पानी घुस गया था। महिलाएं और बच्चे लगातार पानी घर से बाहर फेंक रहे हैं। घरों के मुख्य दरवाजों के पास मिट्टी डालकर लेवल ऊंचा करने का प्रयास किया गया है। मगर पानी फिर भी अंदर जा रहा था। शीला बोलीं- रसोई में पानी भरा, छत पर चूल्हा बनाया
यहां एक घर के बाहर खड़ी शीला देवी ने गुस्से में कहा- हम तो मजबूरी में यहां रह रहे, क्योंकि जिनके पास आसरा था, वो दूसरे इलाकों में जा चुके हैं। हम जैसे लोग फंसे हुए हैं। हर रोज ये समझ नहीं आता कि आज बच्चों को क्या खिलाए। क्योंकि रसोई में भी तो पानी भरा हुआ है। घर की छत पर चूल्हा बनाया है। मगर सूखी लकड़ी तक नहीं मिलती है। अगर बारिश हो जाए तो समझिए चूल्हा भी खत्म। क्या करें हालात से मजबूर हैं। तभी यह हाल हो गया है। अरविंद ने कहा- रूटीन के काम भी मुश्किल हुए
हालात को समझने के लिए हम एक घर में दाखिल हुए, यहां अरविंद मिले। उन्होंने बताया कि पूरे घर के निचले हिस्से में पानी भर चुका है। जितना हो सकता था, उतना सामान ऊपर की मंजिल पर शिफ्ट कर दिया है। मगर फिर भी हमारा नुकसान हुआ है। इसकी शिकायत नहीं है, सिर्फ खाने-पीने के सामान की मदद मिल जाए तो सहूलियत रहेगी। यहीं पर हमारी मुलाकात बाबूलाल से हुई। उन्होंने बताया कि हमारे पड़ोस के 3 मकान अब खाली हैं। ये परिवार अपने रिश्तेदारों के घर चले गए, क्योंकि यहां पानी भरने से रूटीन के काम भी मुश्किल हो गए हैं। दूसरी बात यह कि पानी के साथ-साथ सांप आने का खतरा भी बढ़ गया है। मालती देवी बोलीं- बच्चे डरे हुए हैं, वो तख्त से नीचे नहीं उतरते
यहां से 150 मीटर आगे मालती देवी का घर है, वह भी बाल्टी से घर के बाहर पानी फेंकती हुई मिलीं। उन्होंने बताया कि पति मजदूरी करने बाहर जाते हैं। घर में 2 बच्चे हैं, उन्हें तख्त पर भी रहने को बोला है, क्योंकि डर लगता है कि पानी के साथ कीड़े न आ गए हों, काट लेंगे तो दिक्कत होगी। इस पूरे इलाके में रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है। गंगा मैया का पानी हर साल ही बढ़ता है। लोग बता रहे हैं कि पानी अभी और बढ़ेगा। अगर ऐसा होता है, तो हमारा क्या ही होगा? पानी बढ़ने पर बिजली काटी, शाम ढलने पर दिक्कत होती है…
लोगों से बातचीत करके समझ आया कि 6 इलाके (पूरा सूरदास, कजरिया, ढोल बजवा, कोहना, मुंशी का पूरा, विश्वकर्मा मार्केट) में करीब 5 हजार घरों में पानी दाखिल हो चुका है। यहां खतरे को देखते हुए विभाग ने बिजली भी काट दी है, क्योंकि पानी में करंट उतरने का भी खतरा रहता है। अंधेरा होने के बाद इन इलाकों में सिर्फ हादसे का खतरा नहीं बढ़ता है। बल्कि ये इलाके डरावने हो जाते हैं। लोग परेशान हैं, मगर अपने घर छोड़कर कहीं जा नहीं रहे हैं। लोगों ने बताया कि झूंसी की गारापुर रोड भी डूब गई है। लोग कहीं भी आ-जा नहीं सकते। इसलिए शहर की तरफ मजदूरी करने जाने वाले लोगों के सामने खासी दिक्कत है। सिर्फ झूंसी के 25 से ज्यादा गांवों में 5 लाख की आबादी बाढ़ का पानी बढ़ने से परेशान है। अब शहर के हालात समझिए… कंपटीशन की तैयार कर रहे स्टूडेंट घरों की तरफ लौटे
अब भास्कर टीम शहर के उन इलाकों की तरफ चल पड़ी, जहां पर पानी दाखिल हो चुका है। गंगा के कछारी इलाकों से सटे हुए मोहल्लों की सड़कों पर पानी भरा हुआ मिला। लोगों से बातचीत में सामने आया कि बड़ा बघाड़ा, छोटा बघाड़ा, सलोरी, मेंहदौरी, नेवादा, सिदापुर, करेलाबाग, दरियाबाद, जोघीघाट इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया है। इन इलाकों में सबसे ज्यादा सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्र रहते हैं। बाढ़ का पानी भरने की वजह से वह अपने-अपने शहरों में वापस चले गए हैं। डेली रूटीन में सब्जी, राशन के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं, पेट के इन्फेक्शन के मामले भी बढ़ रहे हैं। हमें बताया गया कि यमुनापार के जमुनानगर, पंजाबी हाता, मुंडी चक, चक फैजुल्ला, महेवा, मोहब्बतगंज, मड़ौका, बसवार, अरैल जैसे यमुना कछारी इलाके में भी हालात ऐसे ही हैं। शहरी इलाकों में रहने वाले 5 लाख से ज्यादा लोग गंगा- यमुना का पानी बढ़ने के बाद परेशान हैं। बलुआघाट बारादरी डूबा
प्रयागराज में शहर का बलुआघाट बारादरी इलाका भी बाढ़ के पानी की वजह से डूब गया। यहां श्रद्धालुओं की रोज भीड़ होती थी। मगर अब प्रशासन ने श्रद्धालुओं के आने पर रोक लगा दी है। इस घाट पर रोज शाम को यमुना आरती का आयोजन किया जाता है। बारादरी डूबने से आरती और पूजा की जगह बदल दी गई है। अब बरुआ बाबा मंदिर के पास से आरती और पूजन करने की व्यवस्था बनाई जा रही है। अब दारागंज श्मशान घाट के हालात घाट पर पानी, रोड पर दाह संस्कार हो रहे
अब हम दारागंज श्मशान घाट पर पहुंचे। बाहर इकट्ठा लोगों ने बताया कि आप घाट तक नहीं जा सकते, वो डूब चुके हैं। दारागंज श्मशान घाट प्रयागराज का प्रमुख घाट है। यहां सबसे ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार होता है। यह घाट शास्त्री पुल के नीचे है। गंगा उफान पर हुई तो श्मशान घाट डूब गए हैं। घाट पहुंचने के रास्ते पर भी पानी भर गया। ऐसे में श्मशान घाट कुछ दूर पर स्थित मोरी सड़क पर बना दिया गया। अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले शवों को सड़क पर ही जलाया जा रहा है। गुरुवार को करीब 14 शवों का अंतिम संस्कार सड़क पर किया गया। यहां चिताएं जलती हुई मिलीं। इसके अलावा पूरा संगम क्षेत्र जलमग्न हो चुका है। इससे धार्मिक गतिविधियां तो प्रभावित हो ही रही हैं। अब अंतिम संस्कार करना भी कठिन होता जा रहा है। कई स्थानों पर शवों को लेकर लोग नाव के सहारे घाट की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन घाट तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। यहां मौजूद लोगों की समस्याएं भी जानिए नावों पर पूरी तरह रोक, घाट से पंडों को हटाया
गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 81.83 मीटर पर हैं, जोकि सबसे ज्यादा है, लेकिन ये खतरे के निशान से लगभग 3 मीटर नीचे है। गंगा यमुना में बाढ़ की वजह से नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। घाट से पंडों को हटा दिया गया है। पंडों, पुजारियों के तख्तों को भी प्रशासन ने हटवा दिया है। हर साल नागवासुकी इलाके में करीब 300 से ज्यादा घर बाढ़ से प्रभावित होते हैं। पटपर घाट डूबा, रोके गए टूरिस्ट
प्रयागराज से 45 किलोमीटर दूर यमुनापार के पटपर घाट एक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां हर रोज लोग पिकनिक के लिए पहुंचते रहे हैं। बाढ़ की वजह से पथरीला इलाका पूरी तरह डूब गया है। घाट से पानी गांवों की तरफ बहने लगा है। ऐसे में पुलिस ने यहां आने जाने पर रोक लगा दी है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। यहां जल निगम, जलकल विभाग, स्वास्थ्य विभाग और एनडीआरएफ की टीमें समन्वय के साथ काम कर रही हैं। अब ये जानिए कि गंगा-यमुना का वाटर लेवल क्यों बढ़ रहा… टिहरी बांध, नरौरा से पानी छोड़ा, इसलिए वाटर लेवल बढ़ा सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड के टिहरी बांध, कानपुर बैराज और यूपी के नरौरा बांध से पानी छोड़ा जा रहा है, इसकी वजह से गंगा-यमुना में वाटर लेवल बढ़ रहा है। जून के महीने में अब तक 320.3 मिमी बारिश हुई है, जबकि 219.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यह 46% ज्यादा है। प्रयागराज प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। मगर गंगा और यमुना अभी खतरे के निशान से काफी दूर हैं। गुरुवार को यमुना नदी का जलस्तर नैनी में 81.45 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 84.734 मीटर से लगभग 3 मीटर नीचे है। गंगा नदी भी फाफामऊ, छतनाग और बक्सी एसटीपी पर 81.83, 80.79 और 81.36 मीटर पर बह रही है। यहां खतरे का निशान 84.734 मीटर पर है। ……….. ये भी पढ़ें : वाराणसी में CM ने किया हवाई निरीक्षण, गंगा घाटों का जल स्तर देखा, बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया CM सीएम योगी आज दो दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने हेलिकाप्टर से वाराणसी के घाटों और गंगा के जलस्तर का निरीक्षण किया। इसके बाद सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक की। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन किया। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री 19 जुलाई को होने वाले नशा मुक्ति समिट की तैयारियां परखेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय शामिल होंगे। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और खेल राज्यमंत्री निखिल खडसे भी आएंगे। पढ़िए पूरी खबर….