प्रयागराज पुलिस ने चोटी उखाड़ी, फिर जूते से मारा:राजदंड छीनकर उससे भी बहुत पीटा; शंकराचार्य के साधु का दर्द

हमारे जगत गुरु संगम पर पहुंचे। मैं ब्रह्मचारी हूं, इसलिए हमारे हाथ में राजदंड था। मैं गुरु जी के आगे चल रहा था। पुलिस ने हमारा राजदंड छीना। हमारी चोटी पकड़ी और ऐसे उछालकर ले गए जैसे धोबी कपड़ा उछालता है। इसके बाद हमें उसी राजदंड से बहुत मारा। जूते से मारा। मैं उसके बावजूद पुलिस से हाथ जोड़ता रहा। ये शब्द उस ब्रह्मचारी साधु विश्रवानंद के हैं, जिसे मौनी अमावस्या पर पुलिस घसीटते हुए पुलिस चौकी के अंदर ले गई और फिर चोटी उखाड़कर लात-जूते और राजदंड से मारा। दैनिक भास्कर के पास इसका एक्सक्लूसिव वीडियो है। इस घटना के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए हैं। हमने उस ब्रह्मचारी साधु से बात की। पुलिस ने चौकी के अंदर एक घंटे तक उनके साथ क्या किया, ब्रह्मचारी साधु विश्रवानंद पूरा हाल बताया। पढ़िए बातचीत… पहले पुलिस ने ब्रह्मचारी विश्रवानंद को पकड़ा
प्रयागराज माघ मेले के सेक्टर 4 में त्रिवेणी मार्ग पर शंकराचार्य स्वामी मुक्तेश्वरानंद का श्री ज्योतिर्मठ है। संगम की तरफ से पांटून पुल संख्या 2 से जाने पर सीधा ही पहुंच जाते हैं। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का स्नान था। शंकराचार्य को इसमें स्नान करना था लेकिन 6 घंटे चले हंगामे के बीच ऐसा नहीं हो सका। पुलिस ने रोका, पुलिस ने उनके साथ के साधुओं को पकड़ा और पीटा। सबसे पहले पुलिस ने आगे चल रहे ब्रह्मचारी विश्रवानंद को पकड़ा और पीटा। दैनिक भास्कर की टीम मुक्तेश्वरानंद के कैंप में पहुंची। वहां हमारी मुलाकात विश्रवानंद से हुई। विश्रवानंद नेपाल के रहने वाले हैं। शुरुआत में वह गोरखपुर में गोरक्षा पीठ से जुड़े थे, इसके बाद वह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ गए। विश्रवानंद वेद के छात्र हैं, वह अथर्ववेद से वेद विभूषण हैं। वह कहते हैं- मौनी अमावस्या का स्नान विशेष माना जाता है। हमारे जगतगुरू उस दिन स्नान करते रहे हैं। गुरु जी ने इसकी सूचना प्रशासन को भी दे दी थी। प्रशासन के लोग भी उनके साथ थे। वह आगे-आगे चल रहे थे। हम पुल नंबर दो के पास पहुंचे तो पुलिस ने ही बैरिकेड्स पर तैनात पुलिसकर्मियों से बात की। इसके बाद हमारे जो साथी थे उन्होंने भी पुलिस के साथ मिलकर बैरिकेड्स साइड किया और हम आगे बढ़े। विश्रवानंद कहते हैं, हम संगम से 50 मीटर की दूरी पर जाकर खड़े हो गए। वहां हमारे भगवान स्वरूप जगतगुरू को रोक लिया गया। हम सबको यह बहुत अजीब लगा। हमारे लिए हमारे भगवान ही श्रेष्ठ हैं, हमारे लिए वह परमपूज्य हैं। हमने कहा कि ये प्रशासन के लोग कौन होते हैं सनातन धर्म के प्रमुख गुरु को रोकने वाले। इसी बात को लेकर आपस में विवाद होने लगा। उन्होंने हमारा राजदंड लिया और उसी से मारा
जिस वक्त प्रशासन और हमारे बीच धक्का-मुक्की होने लगी। मैंने राजदंड को आगे कर दिया। उसी से भीड़ को रोकने की कोशिश की। पुलिस ने राजदंड को मुझसे छीन लिया। उन्होंने मेरी चोटी पकड़ी और ऐसे उछाला जैसे कोई धोबी कपड़ा उछालता है। मुझे खींचकर वह ले गए। साथ में वह मारते रहे, इसके बाद मुझे धक्का देकर एक कमरे में बंद कर दिया। विश्रवानंद को जिस वक्त पुलिस चोटी पकड़कर मारते हुए ले जा रही थी और अंदर चोटी पकड़कर खींचा उस वक्त भास्कर की टीम वहीं मौजूद थी। विश्रवानंद कहते हैं- वीडियो तो थोड़ी देर का है, इन्होंने हमें अंदर बंद किया और फिर राजदंड से मेरे पीछे मारना शुरू किया। इसके बाद लात और जूते से मारना शुरू किया। बहुत मारा। उस वक्त भी हमें गुरु जी की चिंता थी, उनके साथ क्या हो रहा होगा। मैं प्रशासन के सामने हाथ जोड़ रहा था। क्योंकि हमने कोई चोरी नहीं की, कोई गुंडा-गीरी नहीं की, हम तो बस अपने भगवान के साथ स्नान करने आए हैं। लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कुछ नहीं सुना और बुरी तरह से पीटा। विश्रवानंद ये सब जब बता रहे थे तो गुस्से से भर गए। उनका क्रोध उनके चेहरे पर दिखने लगा था। वह कहते हैं, हमारे साथ 13-14 साल के बाल बटुक थे। उन्हें बंद कमरे में जूते से मारा गया। मैं ऐसे प्रशासन को धिक्कार करता हूं जो 13-14 साल के बच्चों को जूतों से मारता हो। मैं जितना मार खाया हूं, मैं ही जानता हूं। सनातन के साथ कोई पक्षपात होता है तो हमारे गुरु जी खड़े होते हैं, लेकिन यहां उनके ही साथ प्रशासन ने गलत किया। जो पुलिसवाला मार रहा था, वह बोल रहा था साधु क्यों बने?
विश्रवानंद कहते हैं, जो हम लोगों को पीट रहा था, वह पुलिसवाला बोल रहा था कि साधु क्यों बने। हमारे दंडी स्वामी को बोल रहा था कि ये क्या पहनकर घूम रहा। जबकि ये पूरा माघ मेला साधु-संतो के लिए ही बना है। इन्हीं शंकराचार्य के लिए तो मेला होता है। अब उन्हीं के ऊपर कानून की बंदिश लगा रहे हैं। नहाने से रोक रहे हैं। उन्हें पुलिस के जरिए संगम से दूर लाकर छोड़ दे रहे हैं। इस वक्त शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर फुटपाथ पर ही धरने पर बैठे हैं। उनके साथ जो भी समर्थक हैं वह सब भी वहीं बैठे हैं। विश्रवानंद कहते हैं- हमारे गुरुजी रात के 1 बजे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए बैठे रहे। प्रशासन को मौका दिया कि वह आकर माफी मांगे लेकिन कोई नहीं आया। अब हमारी मांग सीधे सीएम योगी से है, क्योंकि मैं खुद भी उनके गोरक्षा पीठ में जाता रहा हूं। उनके साथ बैठता रहा हूं। अब उन्हें इस मामले पर कार्रवाई करनी होगी। वह खुद आए और हमारे गुरु महाराज से क्षमा मांगें। विश्रवानंद के अतिरिक्त करीब 35 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। उनके साथ मारपीट हुई। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और इन सबका जिक्र किया। बताया कि 3 लोगों को इस कदर पीटा गया कि उन्हें हॉस्पिटल में रात भर भर्ती करवाना पड़ा। एक 14 साल के बच्चे को कान पर इस तरह से पीटा कि खून निकलने लगा। उसके पीले पटके पर खून के छींटे लगे। एक्सक्लूसिव फोटो-वीडियो- तुषार राय ————————- ये खबर भी पढ़ें… अपर्णा की आवाज पर फिदा हो गए थे प्रतीक यादव:शादी में मुलाकात, ईमेल से प्यार का इजहार; जानिए लव मैरिज के बाद कैसे बढ़ती गईं दूरियां सपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव के परिवार में कलह अब सार्वजनिक हो चुकी है। प्रतीक ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके बताया है कि वे अपर्णा यादव को तलाक देने जा रहे हैं। उन्होंने अपर्णा पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा है कि ‘उसने मेरे पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया। वह बस मशहूर और प्रभावशाली बनना चाहती है। पढ़ें पूरी खबर