प्रयागराज के सिकंदरा इलाके से एक परिवार कांवड़ लेकर वाराणसी पहुंचा। परिवार में पति शीतल गुप्ता, उनकी पत्नी रिया और 5 साल का बेटा आर्यन शामिल है। शीतल लगातार 5वीं बार कांवड़ लेकर आए हैं। रिया ने दूसरी बार कांवड़ उठाई है। काशी विश्वनाथ मंदिर से करीब 10 किलोमीटर पहले ये लोग हमें रोहनियां में भास्कर तालाब के पास मिले। रिया कहती हैं- कांवड़ उठाने के पीछे एक मन्नत है। वह मन्नत हमारे इस बच्चे को लेकर है। हमारा आर्यन पैरों से चल नहीं पाता। इसे कोई चोट नहीं लगी, बचपन से ही ऐसा है। हम भगवान भोलेनाथ से और कुछ नहीं चाहते, बस मेरा बेटा चलने लग जाए, हमारे लिए सब कुछ हो जाएगा। हमने कहा- भरोसा है? रिया ने जवाब दिया- भरोसा तो है, तभी हम इतनी दूर आए हैं, बाकी अब ऊपरवाले की मर्जी है कि वह क्या करते हैं। शीतल कहते हैं- मैं सिंकदरा के पास चाट-फुल्की की दुकान लगाता हूं। पिछले 5 साल से कांवड़ उठा रहा हूं। हर बार सावन में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आता हूं। मेरा बेटा शुरुआत में बोल भी नहीं पाता था, लेकिन भगवान की कृपा से अब धीरे-धीरे बोलने लगा। यहां से राहत मिली है। अब ऊपर वाला चाहेगा तो मेरा बेटा चलने भी लगेगा। मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है। फिलहाल आर्यन यह सब बहुत ध्यान से सुन और देख रहा था। समझ भी रहा था। खाने की बात आई तो टूटी-फूटी आवाज में कहता है- रोटी-सब्जी और चावल अच्छा लगता है। पूड़ी-सब्जी भी खाता हूं। आर्यन को खड़ा करके चलाने की कोशिश की, तो वह 2 कदम चल पाया। पैर डगमगाने लगे। परिवार को उम्मीद है कि भगवान भोलेनाथ एक दिन आर्यन को सही कर देंगे। देखिए VIDEO…