संत प्रेमानंद महाराज की एक झूठी (फेक) फोटो सामने आई है। जिसमें संत प्रेमानंद लेटे हुए हैं। पैरों की तरफ बैठीं राधा रानी उनकी सेवा कर रही हैं। इस तस्वीर पर मथुरा के संतों में आक्रोश है। संत प्रेमानंद के शिष्य ने अज्ञात के खिलाफ साइबर थाना में मुकदमा दर्ज कराया है। ट्रस्ट ने एक एडवाइजरी भी जारी की है। कहा- कुछ लोग आर्टिफिशियल तकनीक से फेक फोटो, वीडियो और ऑडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं, जो गलत है। यह मर्यादा और कानून के खिलाफ है। अब विस्तार से पढ़िए… तस्वीर मे भगवान कृष्ण हाथ जोड़कर खड़े
विवादित तस्वीर में संत प्रेमानंद एक महल में शयन मुद्रा में हैं। पैरों की तरफ राधा रानी हैं। जबकि भगवान श्री कृष्ण झरोखे से राधा रानी को देख रहे हैं। इसके अलावा तस्वीर में पलंग पर सोते हुए दिखाए गए संत प्रेमानंद महाराज के सामने एक सरोवर बना हुआ है। जिसमें बतख और मोर विचरण कर रहे हैं। शिष्य गौतम चिलाना ने दर्ज कराया केस
संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य गौतम चिलाना ने साइबर थाना में तहरीर दी। लिखा- सोशल मीडिया पर हमारी परमाराध्य राधा रानी और पूज्य गुरुदेव संत प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज की एक फोटो वायरल है। यह फोटो AI के माध्यम से बनाई गई है। जिस व्यक्ति का यह कृत्य है, वह असहनीय है। इस चित्र के वायरल होने से संत प्रेमानंद महाराज सहित अन्य संतों के हृदय को पीड़ा हुई है। उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसलिए ऐसे व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करें। जिससे इस तरह का दुस्साहस दोबारा न किया जा सके। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धारा 299 और IT एक्ट की धारा 66 C में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने अब उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की डिटेल मांगी है। जिन पर यह फोटो वायरल की गई। पुलिस अब उस अज्ञात व्यक्ति की तलाश कर रही है। जिसने यह फोटो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल किया। केली कुंज आश्रम ट्रस्ट ने जारी की थी एडवाइजरी
संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम का प्रबंधन देख रहे श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट ने एडवाइजरी जारी की है। कहा, कुछ लोग AI तकनीक से फोटो, वीडियो और ऑडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं, जो गलत है। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के भक्तों से कहा था कि वह केवल उनके अधिकृत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई फोटो, वीडियो और ऑडियो को ही देखें और उसे ही शेयर करें। संतों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
मामले में मथुरा में साधु संतों ने गुरुवार को बैठक कर आक्रोश जताया था। संतों ने संत प्रेमानंद महाराज के बैठक में पहुंचे प्रतिनिधियों से कहा था, वह इस मामले में मुकदमा दर्ज कराएं। जिसके बाद शुक्रवार को गौतम चिलाना ने मुकदमा दर्ज कराया। 2 माह पहले महाराज के AI से फेक VIDEO बनाए गए थे
दो माह पहले संत प्रेमानंद महाराज के फेक (झूठे) वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए थे। जिसमें तंत्र क्रिया से अभिमंत्रित श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र, पिरामिड जैसी चीजें बेची जा रही थीं। दावा था- इन्हें घर में रखने से नौकरी-व्यापार में उन्नति होगी। ये वीडियो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाए गए। जो कई भाषाओं में हैं। संत प्रेमानंद महाराज की आवाज और उनके वीडियो का इस्तेमाल किया गया। इस पर उनके आश्रम श्री हित राधा केली कुंज ने आपत्ति जताई। श्री केली कुंज आश्रम की ओर से एक और एडवाइजरी जारी की थी। इसमें कहा, कि श्री हित राधा केली कुंज आश्रम के अलावा कहीं भी कोई दूसरी शाखा नहीं है। इसके साथ ही श्री हित राधा केली कुंज आश्रम की ओर किसी प्रकार की भूमि, प्लॉट, फ्लैट और भवन की बिक्री नहीं की जाती। आश्रम का कोई होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, ढाबा, विश्राम स्थल, हॉस्पिटल, गुरुकुल, स्कूल नहीं है। अब संत प्रेमानंद महाराज को जानिए… 13 साल की उम्र में प्रेमानंद जी महाराज ने घर छोड़ दिया था
कानपुर जिले का नरवल तहसील का अखरी गांव। ये जगह है, जहां प्रेमानंद महाराज का जन्म और पालन-पोषण हुआ। यहीं से निकलकर वो इस देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी में बस गए। उनके बड़े भाई गणेश दत्त पांडे बताते हैं- मेरे पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। हम 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। वो बताते हैं कि प्रेमानंद हमेशा से प्रेमानंद महाराज नहीं थे। बचपन में मां-पिता ने बड़े प्यार से उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे रखा था। शिव मंदिर में चबूतरा बनाने से रोका, तो घर छोड़ दिया
बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ने का फैसला कर लिया। एक दिन देर रात खाना खाया और रोज की तरह छत पर बने कच्चे कमरे में जाकर सो गए। अगली सुबह जब बड़े भाई ने जगाने के लिए आवाज लगाई, कमरे से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने ऊपर जाकर देखा तो अनिरुद्ध कमरे में नहीं थे। खोजबीन शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि वो सरसौल में नंदेश्वर मंदिर पर रुके हैं। घरवालों ने उन्हें घर लाने का हर जतन किया, लेकिन अनिरुद्ध नहीं माने। फिर कुछ दिनों बाद बची-खुची मोह माया भी छोड़कर वह सरसौल से भी चले गए। प्रेमानंद जी के वृंदावन पहुंचने की कहानी
प्रेमानंद महाराज के संन्यासी बनने के बाद वृंदावन आने की कहानी बेहद रोचक है। एक दिन प्रेमानंद महाराज से मिलने एक संत आए। उन्होंने कहा- श्री हनुमत धाम विश्वविद्यालय में श्रीराम शर्मा दिन में श्री चैतन्य लीला और रात में रासलीला मंच का आयोजन कर रहे हैं। इसमें आप आमंत्रित हैं। पहले तो प्रेमानंद महाराज ने अपरिचित साधु से वहां आने के लिए मना कर दिया। लेकिन साधु ने उनसे आयोजन में शामिल होने के लिए काफी आग्रह किया। इस पर प्रेमानंद महाराज ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया। प्रेमानंद महाराज जब चैतन्य लीला और रासलीला देखने गए, तो उन्हें बहुत पसंद आई। यह आयोजन करीब एक महीने तक चला। चैतन्य लीला और रासलीला समाप्त होने के बाद प्रेमानंद महाराज को आयोजन देखने की व्याकुलता होने लगी। वह उसी साधु के पास गए, जो उन्हें आमंत्रित करने आए थे। उनसे मिलकर महाराज ने कहा- मुझे भी अपने साथ ले चलें। मैं रासलीला को देखूंगा और इसके बदले आपकी सेवा करूंगा। इस पर साधु ने कहा, आप वृंदावन आ जाएं। वहां हर रोज आपको रासलीला देखने को मिलेगी। इसके बाद प्रेमानंद महाराज वृंदावन आ गए। यहां खुद को राधा रानी और श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। साथ ही भगवद प्राप्ति में लग गए। इसके बाद महाराज संन्यास मार्ग से भक्ति मार्ग में आ गए। फिलहाल वह वृंदावन के मधुकरी में रहते हैं। …………………. ये खबर भी पढ़िए- संत प्रेमानंद महाराज के AI से फेक VIDEO बनाए:वृंदावन में आश्रम ने चेतावनी दी- ये मर्यादा और कानून के खिलाफ, लोग शेयर न करें वृंदावन में रहने वाले संत प्रेमानंद महाराज के फेक (झूठे) वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिसमें तंत्र क्रिया से अभिमंत्रित श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र, पिरामिड जैसी चीजें बेची जा रही हैं। दावा किया जा रहा है कि इन्हें घर में रखने से नौकरी-व्यापार में उन्नति होगी। पढ़ें पूरी खबर
विवादित तस्वीर में संत प्रेमानंद एक महल में शयन मुद्रा में हैं। पैरों की तरफ राधा रानी हैं। जबकि भगवान श्री कृष्ण झरोखे से राधा रानी को देख रहे हैं। इसके अलावा तस्वीर में पलंग पर सोते हुए दिखाए गए संत प्रेमानंद महाराज के सामने एक सरोवर बना हुआ है। जिसमें बतख और मोर विचरण कर रहे हैं। शिष्य गौतम चिलाना ने दर्ज कराया केस
संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य गौतम चिलाना ने साइबर थाना में तहरीर दी। लिखा- सोशल मीडिया पर हमारी परमाराध्य राधा रानी और पूज्य गुरुदेव संत प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज की एक फोटो वायरल है। यह फोटो AI के माध्यम से बनाई गई है। जिस व्यक्ति का यह कृत्य है, वह असहनीय है। इस चित्र के वायरल होने से संत प्रेमानंद महाराज सहित अन्य संतों के हृदय को पीड़ा हुई है। उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसलिए ऐसे व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करें। जिससे इस तरह का दुस्साहस दोबारा न किया जा सके। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धारा 299 और IT एक्ट की धारा 66 C में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने अब उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की डिटेल मांगी है। जिन पर यह फोटो वायरल की गई। पुलिस अब उस अज्ञात व्यक्ति की तलाश कर रही है। जिसने यह फोटो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल किया। केली कुंज आश्रम ट्रस्ट ने जारी की थी एडवाइजरी
संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम का प्रबंधन देख रहे श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट ने एडवाइजरी जारी की है। कहा, कुछ लोग AI तकनीक से फोटो, वीडियो और ऑडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं, जो गलत है। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के भक्तों से कहा था कि वह केवल उनके अधिकृत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई फोटो, वीडियो और ऑडियो को ही देखें और उसे ही शेयर करें। संतों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
मामले में मथुरा में साधु संतों ने गुरुवार को बैठक कर आक्रोश जताया था। संतों ने संत प्रेमानंद महाराज के बैठक में पहुंचे प्रतिनिधियों से कहा था, वह इस मामले में मुकदमा दर्ज कराएं। जिसके बाद शुक्रवार को गौतम चिलाना ने मुकदमा दर्ज कराया। 2 माह पहले महाराज के AI से फेक VIDEO बनाए गए थे
दो माह पहले संत प्रेमानंद महाराज के फेक (झूठे) वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए थे। जिसमें तंत्र क्रिया से अभिमंत्रित श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र, पिरामिड जैसी चीजें बेची जा रही थीं। दावा था- इन्हें घर में रखने से नौकरी-व्यापार में उन्नति होगी। ये वीडियो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाए गए। जो कई भाषाओं में हैं। संत प्रेमानंद महाराज की आवाज और उनके वीडियो का इस्तेमाल किया गया। इस पर उनके आश्रम श्री हित राधा केली कुंज ने आपत्ति जताई। श्री केली कुंज आश्रम की ओर से एक और एडवाइजरी जारी की थी। इसमें कहा, कि श्री हित राधा केली कुंज आश्रम के अलावा कहीं भी कोई दूसरी शाखा नहीं है। इसके साथ ही श्री हित राधा केली कुंज आश्रम की ओर किसी प्रकार की भूमि, प्लॉट, फ्लैट और भवन की बिक्री नहीं की जाती। आश्रम का कोई होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, ढाबा, विश्राम स्थल, हॉस्पिटल, गुरुकुल, स्कूल नहीं है। अब संत प्रेमानंद महाराज को जानिए… 13 साल की उम्र में प्रेमानंद जी महाराज ने घर छोड़ दिया था
कानपुर जिले का नरवल तहसील का अखरी गांव। ये जगह है, जहां प्रेमानंद महाराज का जन्म और पालन-पोषण हुआ। यहीं से निकलकर वो इस देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी में बस गए। उनके बड़े भाई गणेश दत्त पांडे बताते हैं- मेरे पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। हम 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। वो बताते हैं कि प्रेमानंद हमेशा से प्रेमानंद महाराज नहीं थे। बचपन में मां-पिता ने बड़े प्यार से उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे रखा था। शिव मंदिर में चबूतरा बनाने से रोका, तो घर छोड़ दिया
बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ने का फैसला कर लिया। एक दिन देर रात खाना खाया और रोज की तरह छत पर बने कच्चे कमरे में जाकर सो गए। अगली सुबह जब बड़े भाई ने जगाने के लिए आवाज लगाई, कमरे से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने ऊपर जाकर देखा तो अनिरुद्ध कमरे में नहीं थे। खोजबीन शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि वो सरसौल में नंदेश्वर मंदिर पर रुके हैं। घरवालों ने उन्हें घर लाने का हर जतन किया, लेकिन अनिरुद्ध नहीं माने। फिर कुछ दिनों बाद बची-खुची मोह माया भी छोड़कर वह सरसौल से भी चले गए। प्रेमानंद जी के वृंदावन पहुंचने की कहानी
प्रेमानंद महाराज के संन्यासी बनने के बाद वृंदावन आने की कहानी बेहद रोचक है। एक दिन प्रेमानंद महाराज से मिलने एक संत आए। उन्होंने कहा- श्री हनुमत धाम विश्वविद्यालय में श्रीराम शर्मा दिन में श्री चैतन्य लीला और रात में रासलीला मंच का आयोजन कर रहे हैं। इसमें आप आमंत्रित हैं। पहले तो प्रेमानंद महाराज ने अपरिचित साधु से वहां आने के लिए मना कर दिया। लेकिन साधु ने उनसे आयोजन में शामिल होने के लिए काफी आग्रह किया। इस पर प्रेमानंद महाराज ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया। प्रेमानंद महाराज जब चैतन्य लीला और रासलीला देखने गए, तो उन्हें बहुत पसंद आई। यह आयोजन करीब एक महीने तक चला। चैतन्य लीला और रासलीला समाप्त होने के बाद प्रेमानंद महाराज को आयोजन देखने की व्याकुलता होने लगी। वह उसी साधु के पास गए, जो उन्हें आमंत्रित करने आए थे। उनसे मिलकर महाराज ने कहा- मुझे भी अपने साथ ले चलें। मैं रासलीला को देखूंगा और इसके बदले आपकी सेवा करूंगा। इस पर साधु ने कहा, आप वृंदावन आ जाएं। वहां हर रोज आपको रासलीला देखने को मिलेगी। इसके बाद प्रेमानंद महाराज वृंदावन आ गए। यहां खुद को राधा रानी और श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। साथ ही भगवद प्राप्ति में लग गए। इसके बाद महाराज संन्यास मार्ग से भक्ति मार्ग में आ गए। फिलहाल वह वृंदावन के मधुकरी में रहते हैं। …………………. ये खबर भी पढ़िए- संत प्रेमानंद महाराज के AI से फेक VIDEO बनाए:वृंदावन में आश्रम ने चेतावनी दी- ये मर्यादा और कानून के खिलाफ, लोग शेयर न करें वृंदावन में रहने वाले संत प्रेमानंद महाराज के फेक (झूठे) वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिसमें तंत्र क्रिया से अभिमंत्रित श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र, पिरामिड जैसी चीजें बेची जा रही हैं। दावा किया जा रहा है कि इन्हें घर में रखने से नौकरी-व्यापार में उन्नति होगी। पढ़ें पूरी खबर