केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में अब गैर-सनातनियों को एंट्री मिल सकती है। इसके लिए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) एक ऐसी एसओपी तैयार कर रही है। इसके तहत गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले एक घोषणा-पत्र भरना होगा। इसमें उन्हें यह लिखित रूप से देना होगा कि वे सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। मंदिर की परंपराओं का सम्मान करेंगे। मंदिर समिति की योजना है कि चारधाम यात्रा के दौरान पंजीकरण के समय ही श्रद्धालुओं को यह घोषणा-पत्र दिया जाए। अगर कोई गैर-हिंदू श्रद्धालु बद्रीनाथ या केदारनाथ धाम में दर्शन करना चाहता है तो उसे इस फॉर्म में अपनी संस्तुति देनी होगी, जिसके बाद ही उसे दर्शन की अनुमति दी जा सकती है। फिलहाल इस व्यवस्था को लागू करने से पहले मंदिर समिति विधिक राय ले रही है। लेकिन जिस तरह का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि गैर-सनातनी श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश का रास्ता “आस्था की घोषणा” के आधार पर तय किया जा सकता है। सख्त SOP पर काम कर रही मंदिर समिति बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति इस पूरे मामले में एक सख्त एसओपी तैयार कर रही है। समिति का कहना है कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही इस व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि धामों में प्रवेश को लेकर स्पष्ट नियम तय हो सकें। समिति के अनुसार एसओपी तैयार करते समय कानूनी पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए विधिक राय ली जा रही है, ताकि बाद में नियम लागू करने में किसी तरह की कानूनी बाधा न आए। एसओपी में मंदिर परिसर में प्रवेश, श्रद्धालुओं की पहचान और नियमों के पालन से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे। रजिस्ट्रेशन डेटा से होगी श्रद्धालुओं की पहचान चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की पहचान किस आधार पर की जाएगी। मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि चारधाम यात्रा में हर श्रद्धालु का ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण किया जाता है। इस पंजीकरण में श्रद्धालुओं की पूरी जानकारी दर्ज होती है और इसी डेटा के आधार पर मंदिर समिति निगरानी रख सकती है। समिति का मानना है कि धामों में वही लोग दर्शन के लिए पहुंचेंगे जिनकी बाबा केदारनाथ और भगवान बदरीनाथ के प्रति आस्था होगी और जो सनातन धर्म की परंपराओं को समझते हैं। घोषणा-पत्र में लिखनी होगी सनातन धर्म में आस्था मंदिर समिति जिस घोषणा-पत्र का प्रारूप तैयार कर रही है, उसमें दर्शन करने वाले श्रद्धालु से लिखित सहमति ली जाएगी। इसमें यह उल्लेख होगा कि श्रद्धालु सनातन धर्म में आस्था रखता है और मंदिर से जुड़ी सभी परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करेगा। घोषणा-पत्र में यह भी लिखा जाएगा कि श्रद्धालु अपनी इच्छा से इन शर्तों को स्वीकार कर रहा है और उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। इसी सहमति के आधार पर उसे बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम समेत मंदिर समिति के अधीन आने वाले करीब 48 मंदिरों में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। अध्यक्ष बोले- यह परंपरा शंकराचार्य काल से मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि यह व्यवस्था कोई नया नियम नहीं है। उनके अनुसार आदि गुरु शंकराचार्य के समय से ही धामों की पवित्रता और परंपराओं को बनाए रखने पर जोर दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि चारधाम सनातन धर्म की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए मंदिर परिसर और विशेष रूप से गर्भगृह के आसपास वही लोग प्रवेश करें जिनकी सनातन धर्म में आस्था हो और जो धामों की धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हों। 6.86 लाख रजिस्ट्रेशन हो चुके, अब पुराने यात्रियों पर भी सवाल 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के लिए देशभर में उत्साह दिख रहा है। 6 मार्च से शुरू हुई रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में 13 दिनों के भीतर ही 6,86,305 श्रद्धालु पंजीकरण करवा चुके हैं। औसतन हर दिन करीब 52 हजार लोग यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर पहले से रजिस्ट्रेशन करा चुके लोगों में कोई गैर-सनातनी हुआ तो नई व्यवस्था लागू होने के बाद उसके मामले को कैसे संभाला जाएगा। मंदिर समिति को इस पहलू पर भी स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी। कानूनी पहलुओं पर भी ली जा रही राय मंदिर समिति इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों की राय भी ले रही है। क्योंकि केवल प्रस्ताव पास होना ही अंतिम कदम नहीं माना जाता। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन “द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939” के तहत हुआ था। इस कानून के तहत समिति को मंदिर प्रशासन और व्यवस्थाओं से जुड़े नियम बनाने का अधिकार दिया गया है। हालांकि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले बायलॉज बनाना, उन्हें प्रकाशित करना और कई मामलों में राज्य सरकार की पुष्टि जैसी प्रक्रियाएं भी जरूरी हो सकती हैं। इसी कारण समिति अभी विधिक सलाह लेकर आगे की प्रक्रिया तय कर रही है। प्रस्ताव सरकार ने भी पास किया तो इन 48 मंदिरों में गैर सनातनियों की एंट्री होगी मुश्किल ———————–
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