मैं अपनी बहन को मारना नहीं चाहता था। हम दोनों में बहुत प्यार था। उसी ने मुझसे कहा था कि पहले तुम मुझे मार दो, इसके बाद तुम खुद मर जाना। इसलिए मैंने उसे बांका से मारा। मैंने देखा वो जिंदा है, इसलिए करंट लगाकर उसकी हत्या की। ये कहना है कानपुर के 60 साल के भाई भगवानदास का, जिसने अपनी 69 साल की बहन द्रौपदी की हत्या कर दी। भगवानदास ने पुलिस को बताया- हम दोनों बीमार थे। इलाज का खर्च बहुत ज्यादा हो गया था। वो अब हमसे सहन नहीं हो रहा था। इसलिए हम रातभर सोचते रहे। आखिरी में हम दोनों ने मिलकर मरने का फैसला लिया। तय हुआ कि पहले बहन मरेगी, फिर मैं मर जाऊंगा। भगवानदास ने 21 जून की रात बहन को बांका मारा, फिर करंट लगाकर मारा डाला था। खून से लथपथ लाश घर में ही छोड़कर भाग गया। घटना के 18 घंटे बाद भगवानदास गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन की सीढ़ियों पर बदहवास मिला। पुलिस ने उसे हैलट हॉस्पिटल में भर्ती कराया। होश में आने के बाद भगवानदास ने अपना जुर्म कबूल किया। पढ़िए पूरा कबूलनामा… बहन बच न जाए, इसलिए बिजली का झटका दिया
भगवानदास ने बताया-10 दिन पहले बहन द्रौपदी की तबीयत बिगड़ी थी। तब वो तीन दिन तक अस्पताल में रही थी। मेरी और द्रौपदी की बाईपास सर्जरी हुई थी। मैं एक बिस्कुट फैक्ट्री में काम करता था। जहां पर कमाई इतनी नहीं थी। दवाओं का खर्च ज्यादा आ रहा था। अस्पताल में भर्ती रहने के कारण भी बहुत सारा पैसा द्रौपदी के इलाज में लग गया था। मैं खर्च नहीं उठा पा रहा था और किसी से कुछ कह भी नहीं पा रहा था। फिर मैंने द्रौपदी से कहा था कि मैं मर जाऊंगा। मुझसे खर्च नहीं उठाया जाता। द्रौपदी ने तब खुद को मारने के लिए कहा। मैं इतना मजबूर हो गया था कि मुझे कुछ और सूझा ही नहीं। शुक्रवार (19 जून) की रात को हमारी यह बात हुई। पूरी रात हम दोनों ने सोचा। हमारे बीच तय हुआ कि दोनों मरेंगे। शनिवार (20 जून) सुबह उठने के साथ ही मैंने द्रौपदी से फिर से वही बात दोहराई। उसका जवाब अब भी वही था। जिस पर मैंने घर में रखा बांका उठाकर उसके सिर पर वॉर कर दिया। इसके बाद भी उसकी सांसें चल रही थीं। मेरे मन में यह था कि अगर मैं मर गया और बहन बच जाएगी, तो उसकी दुर्गति होगी। फिर मैंने उसके पैरों के अंगूठों को बांधकर बिजली का झटका दिया। ‘मैं स्टेशन पर ट्रेन के आगे कूदने गया था’
भगवानदास ने बताया- हत्या करते वक्त मेरे कपड़ों पर खून लग गया था। बाहर किसी को पता न चल जाए, इसलिए मैंने कपड़े बदले और घर से बाहर निकल गया। मैं अक्सर गोविंदपुरी पुल रेलवे स्टेशन पर जाकर बैठता था। मैं वहीं चला गया। ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या करने के लिए गया था। मगर, वहां पर एकदम से द्रौपदी का ध्यान आ गया। मैंने कैसे उसे मार डाला, यह सोचकर मैं घबरा गया। मैं इतना डर गया कि वहीं पर बेहोश हो गया। बड़ा भाई बोला- मैं कुछ नहीं कह सकता
द्रौपदी और भगवानदास के बड़े भाई पुरुषोत्तम बैंक से रिटायर हैं। वो वडोदरा में रहते हैं। घटनास्थल पर पुलिस को भगवानदास का मोबाइल मिला था। पुलिस ने उसी मोबाइल से नंबर निकालकर पुरुषोत्तम को सूचना दी थी। रविवार दोपहर पुरुषोत्तम पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। भास्कर टीम ने उनसे इस बारे में बात करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता। इसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहता। द्रौपदी का शव लेकर पुरुषोत्तम गोविंद नगर स्थित घर पहुंचे। वहां पर शव को कुछ देर रखने के बाद द्रौपदी के अंतिम संस्कार के लिए स्वर्गाश्रम ले जाया गया। वहां पर पुरुषोत्तम ने ही द्रोपदी के शव को मुखाग्नि दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट- कोमा में जाने से हुई मौत
द्रौपदी आनंद का पोस्टमॉर्टम रविवार को किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, सिर पर जिस बांका से वॉर किया गया। उससे गहरा घाव हो गया था। जिसके कारण अधिक खून बहने की वजह से द्रौपदी कोमा में चली गई थी। हेड इंजरी की वजह से उनकी जान चली गई। जो करंट का जिक्र किया गया है। उससे जले के निशान पुराने लग रहे हैं। DCP साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया- भाई बहन एक दूसरे का सहारा बनकर रह रहे थे। दोनों वृद्ध थे। न जाने कितने बसंत एक साथ देखे होंगे। कितने सुख दुख एक साथ बांटे होंगे। फिर भी बहन के कहने पर उसे मौत के घाट उतारना और फिर खुद आत्महत्या के लिए गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन पहुंच जाना। यह डिसीजन लेना भी भाई के लिए आसान नहीं रहा होगा। फिर भी उसने ऐसा किया और अपनी बहन के कहने पर किया। मगर, किसी की जान लेना यह अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस इस मामले में कार्रवाई अवश्य करेगी। अगर शिकायत नहीं मिलती है तो खुद वादी बनकर FIR दर्ज करेगी। आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। ————————————- ये खबर भी पढ़ें:- 69 साल की बहन के पैर बांधे…करंट लगाया:सिर पर बांका मारा; कानपुर में हत्या कर 60 साल का भाई स्टेशन भागा कानपुर में 69 साल की द्रौपदी आनंद को उनके ही 60 साल के भाई ने मार डाला। भाई ने बहन के पैर बांधे फिर उसमें करंट लगाकर टॉर्चर किया। बहन चीखती रही, लेकिन भाई को तरस नहीं आया। जान लेने के लिए भाई ने सिर पर बांके से भी हमला किया। खून से लथपथ लाश घर में ही छोड़कर भाई भाग निकला। घटना के 18 घंटे बाद भाई भगवानदास गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन की सीढ़ियों पर बदहवास मिला। पुलिस ने भाई को हैलट हॉस्पिटल में भर्ती कराया है। पुलिस को एक CCTV भी मिला है, जिसमें भगवानदास मर्डर के बाद स्टेशन पर टहलता हुआ दिखा है। पढ़ें पूरी खबर
भगवानदास ने बताया-10 दिन पहले बहन द्रौपदी की तबीयत बिगड़ी थी। तब वो तीन दिन तक अस्पताल में रही थी। मेरी और द्रौपदी की बाईपास सर्जरी हुई थी। मैं एक बिस्कुट फैक्ट्री में काम करता था। जहां पर कमाई इतनी नहीं थी। दवाओं का खर्च ज्यादा आ रहा था। अस्पताल में भर्ती रहने के कारण भी बहुत सारा पैसा द्रौपदी के इलाज में लग गया था। मैं खर्च नहीं उठा पा रहा था और किसी से कुछ कह भी नहीं पा रहा था। फिर मैंने द्रौपदी से कहा था कि मैं मर जाऊंगा। मुझसे खर्च नहीं उठाया जाता। द्रौपदी ने तब खुद को मारने के लिए कहा। मैं इतना मजबूर हो गया था कि मुझे कुछ और सूझा ही नहीं। शुक्रवार (19 जून) की रात को हमारी यह बात हुई। पूरी रात हम दोनों ने सोचा। हमारे बीच तय हुआ कि दोनों मरेंगे। शनिवार (20 जून) सुबह उठने के साथ ही मैंने द्रौपदी से फिर से वही बात दोहराई। उसका जवाब अब भी वही था। जिस पर मैंने घर में रखा बांका उठाकर उसके सिर पर वॉर कर दिया। इसके बाद भी उसकी सांसें चल रही थीं। मेरे मन में यह था कि अगर मैं मर गया और बहन बच जाएगी, तो उसकी दुर्गति होगी। फिर मैंने उसके पैरों के अंगूठों को बांधकर बिजली का झटका दिया। ‘मैं स्टेशन पर ट्रेन के आगे कूदने गया था’
भगवानदास ने बताया- हत्या करते वक्त मेरे कपड़ों पर खून लग गया था। बाहर किसी को पता न चल जाए, इसलिए मैंने कपड़े बदले और घर से बाहर निकल गया। मैं अक्सर गोविंदपुरी पुल रेलवे स्टेशन पर जाकर बैठता था। मैं वहीं चला गया। ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या करने के लिए गया था। मगर, वहां पर एकदम से द्रौपदी का ध्यान आ गया। मैंने कैसे उसे मार डाला, यह सोचकर मैं घबरा गया। मैं इतना डर गया कि वहीं पर बेहोश हो गया। बड़ा भाई बोला- मैं कुछ नहीं कह सकता
द्रौपदी और भगवानदास के बड़े भाई पुरुषोत्तम बैंक से रिटायर हैं। वो वडोदरा में रहते हैं। घटनास्थल पर पुलिस को भगवानदास का मोबाइल मिला था। पुलिस ने उसी मोबाइल से नंबर निकालकर पुरुषोत्तम को सूचना दी थी। रविवार दोपहर पुरुषोत्तम पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। भास्कर टीम ने उनसे इस बारे में बात करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता। इसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहता। द्रौपदी का शव लेकर पुरुषोत्तम गोविंद नगर स्थित घर पहुंचे। वहां पर शव को कुछ देर रखने के बाद द्रौपदी के अंतिम संस्कार के लिए स्वर्गाश्रम ले जाया गया। वहां पर पुरुषोत्तम ने ही द्रोपदी के शव को मुखाग्नि दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट- कोमा में जाने से हुई मौत
द्रौपदी आनंद का पोस्टमॉर्टम रविवार को किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, सिर पर जिस बांका से वॉर किया गया। उससे गहरा घाव हो गया था। जिसके कारण अधिक खून बहने की वजह से द्रौपदी कोमा में चली गई थी। हेड इंजरी की वजह से उनकी जान चली गई। जो करंट का जिक्र किया गया है। उससे जले के निशान पुराने लग रहे हैं। DCP साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया- भाई बहन एक दूसरे का सहारा बनकर रह रहे थे। दोनों वृद्ध थे। न जाने कितने बसंत एक साथ देखे होंगे। कितने सुख दुख एक साथ बांटे होंगे। फिर भी बहन के कहने पर उसे मौत के घाट उतारना और फिर खुद आत्महत्या के लिए गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन पहुंच जाना। यह डिसीजन लेना भी भाई के लिए आसान नहीं रहा होगा। फिर भी उसने ऐसा किया और अपनी बहन के कहने पर किया। मगर, किसी की जान लेना यह अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस इस मामले में कार्रवाई अवश्य करेगी। अगर शिकायत नहीं मिलती है तो खुद वादी बनकर FIR दर्ज करेगी। आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। ————————————- ये खबर भी पढ़ें:- 69 साल की बहन के पैर बांधे…करंट लगाया:सिर पर बांका मारा; कानपुर में हत्या कर 60 साल का भाई स्टेशन भागा कानपुर में 69 साल की द्रौपदी आनंद को उनके ही 60 साल के भाई ने मार डाला। भाई ने बहन के पैर बांधे फिर उसमें करंट लगाकर टॉर्चर किया। बहन चीखती रही, लेकिन भाई को तरस नहीं आया। जान लेने के लिए भाई ने सिर पर बांके से भी हमला किया। खून से लथपथ लाश घर में ही छोड़कर भाई भाग निकला। घटना के 18 घंटे बाद भाई भगवानदास गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन की सीढ़ियों पर बदहवास मिला। पुलिस ने भाई को हैलट हॉस्पिटल में भर्ती कराया है। पुलिस को एक CCTV भी मिला है, जिसमें भगवानदास मर्डर के बाद स्टेशन पर टहलता हुआ दिखा है। पढ़ें पूरी खबर