आज राधा अष्टमी की धूम है। इस उत्सव पर पूरा बरसाना ‘लाडलीजी’ के रंग में डूबा हुआ दिख रहा है। यहां की गलियों में राधे-राधे की गूंज है। भक्त सखी और श्रीकृष्ण के रूप में मंदिर पहुंच रहे हैं। राधारानी के जन्म के बाद दर्शन के लिए 15 लाख भक्त बरसाना पहुंचे हैं। बरसाना में घंटे घड़ियाल बजने के साथ राधारानी का जन्म हुआ। कमल पुष्प से वृषभानु दुलारी राधारानी प्रकट हुईं। इस दौरान लाखों श्रद्धालु राधे-राधे के जयकारे लगाते रहे। बादलों की गड़गड़ाहट, तेज बारिश और घंटे घड़ियाल की गूंज के साथ राधारानी ने जन्म लिया। बरसाना के श्रीजी महल में ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे राधारानी का अभिषेक हुआ। यहां मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लाडली जी का अभिषेक किया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर राधा प्यारी ने जन्म लियो है से गूंज उठा। विदेश भी राधारानी के जन्म लेते ही झूम उठे। महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, बिहार, झारखंड और यूपी समेत देश-विदेश के भक्तों का हुजूम राधारानी के दर्शन के लिए उमड़ा है। ज्यादातर भक्तों के हाथों में उनके लड्डू गोपाल हैं, ताकि जन्म के बाद श्रीजी अपने ठाकुरजी को देख सकें। वहीं, ठाकुरजी भी एक नजर श्रीजी को निहार लें। भक्तों की दर्शन इच्छा पूरी करने के लिए श्रीजी मंदिर में राधारानी 15 घंटे दर्शन दे रही हैं। सामान्य दिनों में यह दर्शन 11 घंटे तक होते हैं। 31 अगस्त की सुबह 4 बजे से अभिषेक के दौरान भी श्रद्धालुओं को 1 घंटे तक राधा रानी के दर्शन हो रहे हैं। जन्म के बाद पहले श्रृंगार में राधाजी पीतांबर वस्त्र धारण किया है। बता दें कि मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को बरसाना में राधारानी का जन्म हुआ था। इसी वजह से आज मथुरा और बरसाना में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दे रहा है। बरसाना के श्रीजी मंदिर में सुबह मंगला आरती के साथ राधा अष्टमी के आयोजन की शुरुआत हो गई है। मंदिर को फूलों और झालरों से सजाया गया। हर तरफ भजन-कीर्तन गूंज रहा है।