बाबा विश्वनाथ मंदिर में आज 5 लाख श्रद्धालु करेंगे जलाभिषेक:सावन की शिवरात्रि पर सैकड़ों डाक बम पहुंचे, आधी रात से लाइन में लगे

आज सावन की शिवरात्रि है। बाबा विश्वनाथ में दर्शनार्थी सुबह से ही मंदिर में पहुंच रहे हैं। भोर में मंगला आरती के बाद भक्तों के लिए मंदिर का द्वार खोल दिया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा भक्तों पर पुष्प वर्षा की गई आज कांवरियों के साथ-साथ डाक बम भी बड़ी संख्या में बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे हैं। आधी रात से ही श्रद्धालु लाइन में लग गए। बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह के चारों द्वार से झांकी दर्शन और पाइप से जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और फूल चढ़ाया जा रहा। भक्तों को गर्भगृह के पास महज 2-3 सेकेंड दिया जा रहा। चंदन से किया गया बाबा लेपन शिवलिंग का चंदन से लेपन किया गया और दूर्वा चढ़ाई गई। जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक के बाद फूलों और बेल पत्रों से बाबा का श्रृंगार किया गया। सावन की शिवरात्रि पर जुटे भक्तों ने अन्य मंदिरों में बड़ी मात्रा में शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करवाया। मंदिर के पुजारियों और सुरक्षाकर्मी दर्शन पूजन में मददगार बने। बाबा काशी विश्वनाथ का दरबार सावन में फूलों से सजाया गया तो दूधिया रोशनी और झालरें जगमगाती रहीं। चार प्रहरों की पूजा का महत्व शिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहरों की पूजा का विशेष विधान है। भक्त रात्रि के प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग सामग्रियों से शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। प्रत्येक पहर में शिव को अलग भोग, फूल और मंत्र अर्पित किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह पूरी रात्रि जागरण और पूजा, भक्त की सारी बाधाओं को दूर करती है और विशेष पुण्य की प्राप्ति कराती है। रात्रि को चार प्रहरों में बांटा गया है और शिवरात्रि की पूजा हर प्रहर विशेष विधि से की जाती है। चारों पहरों की पूजा का मुख्य उद्देश्य है शिव के चार रूपों और गुणों की साधना और रात्रि के प्रत्येक भाग में आत्मा को शुद्ध करते हुए शिव में लीन होना। असल में, रात का हर पहर हमारी भीतर की एक अवस्था दर्शाता है, जैसे कि शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्म (परमात्मा)। इन चार पहरों में शिव की चार पद्धतियों से आराधना करने पर साधक को पूर्णता प्राप्त होती है। अब जानिए सावन शिवरात्रि का विधान पंडित विकास पाण्डेय ने कहा – लिंग पुराण में कहा गया है कि शिवरात्रि के दिन, विशेषकर श्रावण मास में, उपवास, रात्रि जागरण और शिवलिंग पर बेलपत्र, जल, दुग्ध अर्पित करने से सौभाग्य, दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी पुराण में एक कथा मिलती है जिसमें चांडाल द्वारा अनजाने में शिवरात्रि के दिन बेलपत्र चढ़ाने से मोक्ष प्राप्त हुआ। सावन शिवरात्रि की रात्रि को ‘निशीथ काल’ में शिवपूजन का विशेष महत्व है। निशीथ काल, अर्थात मध्यरात्रि में, जब शिव तांडव में लीन होते हैं, उस समय शिवाभिषेक, महामृत्युंजय जाप से विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं। सावन शिवरात्रि कालसर्प दोष पूजा का समय सावन शिवरात्रि के दिन कालसर्प दोष की पूजा राहुकाल में होती है। सावन शिवरात्रि पर राहुकाल का समय दोपहर में 12 बजकर 27 मिनट से दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक है। राहु और केतु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए राहुकाल में भोलेनाथ की पूजा करें। शिव कृपा से आपके कष्ट मिटेंगे। अभेद्य है मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था सुरक्षा के लिए 5 जोन और 12 सेक्टर बनाए गए हैं। आज भक्तों की सुरक्षा व्यवस्था आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के 25 कमांडो संभाल रहे हैं। सिगरा पर सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर में 200 से ज्यादा CCTV कैमरों से मंदिर पर नजर रखी जा रही है। कमिश्नरेट की फोर्स के अलावा वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर जोन से 85 इंस्पेक्टर, 600 कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल के साथ 6 डिप्टी SP तैनात हैं। PAC के 2 उप सेनानायक सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद हैं। 3 कंपनी PAC के जवान, जल पुलिस, NDRF, बाढ़ राहत दल की 2 कंपनी भी लगाई गई है। गोदौलिया से मैदागिन क्षेत्र में बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और दमकल कर्मियों के अलावा स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) के कर्मचारी माहौल पर नजर रखे हुए हैं।