यूपी के बिजनौर में तेंदुओं का खौफ है। 14 दिन के भीतर 3 बच्चों समेत 4 लोगों को मौत की नींद सुला चुका है। दर्जनों लोगों पर हमला हो चुका है। नजीबाबाद क्षेत्र के करीब 40 किलोमीटर के दायरे में 50 से ज्यादा गांवों के लोग दहशत के साये में जी रहे हैं। कई गांव में तेंदुए देखे जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है, अचानक इतनी बड़ी संख्या में तेंदुए आए कहां से? तेंदुआ प्रभावित गांवों में माहौल कैसा है? लोग किस तरह अपनी सुरक्षा कर रहे? ये सब जानने के लिए दैनिक भास्कर ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। हमने उत्तराखंड के 2 बॉर्डर कोटद्वार और भागुवाला से सटे इलाकों में प्रभावित गांवों का दौरा किया। जिन्होंने अपनों को खोया, उनका दर्द जाना। पढ़िए इस सीरीज की पहली रिपोर्ट… गांव : मथुरापुर मोर नयागांव नल पर पानी भरने गया था बच्चा, गर्दन दबोचकर ले गया तेंदुआ
सबसे पहले हम बिजनौर-कोटद्वार रोड पर गांव बढ़िया से 1 किलोमीटर अंदर मथुरापुर मोर नयागांव में पहुंचे। यहां 9 सितंबर को तेंदुए के हमले में 8 साल के हर्षित की मौत हो गई थी। 17 सितंबर को हर्षित की तेरहवीं थी। घर-कुनबे के लोग इकट्ठा हुए थे। महिलाएं रो रही थीं। घर का माहौल पूरी तरह शोकाकुल था। सिर पर रस्म पगड़ी बांधे हर्षित के पिता रवि कुमार कुर्सी डालकर एक कोने में बैठे थे। रवि बताते हैं- घर के पीछे नल लगा था। शाम के वक्त बेटा नल पर पानी लेने गया था। नल के ठीक पास ही एक झोपड़ी बनी है। इसी झोपड़ी पर कूड़े की ओट लेकर तेंदुआ पहले से बैठा था। मेरा बैठा जैसे ही नल पर पहुंचा, तेंदुए ने गर्दन पर झपट्टा मारा। उसे खींचकर 20 कदम दूर खेत के पास ले गया। हमें हल्की सी चीखने की आवाज आई। हम घर के पीछे पहुंचे, तो तेंदुए ने मेरे बेटे की गर्दन दबोच रखी थी। हमारे शोर मचाने पर तेंदुआ उसे छोड़कर भाग निकला। तब तक हर्षित की मौत हो चुकी थी। हम उसे लेकर डॉक्टरों के पास भी गए, लेकिन उसमें जान नहीं बची थी। पिता बोले- दूसरे क्षेत्र से तेंदुए लाकर यहां छोड़े गए
मृतक बच्चे के पिता रवि कहते हैं- पूरे गांव में दहशत का माहौल है। कोई भी जंगल नहीं जा पा रहा। अगर लोग जंगल जा रहे हैं, तो समूह बनाकर जा रहे। रास्ते के दोनों तरफ गन्ने के खेत हैं। इन्हीं खेतों में तेंदुआ छिपा रहता है। रात में लोग जाग रहे हैं। वन विभाग कुछ नहीं कर रहा। रवि आगे बताते हैं- हमारी याद में इस क्षेत्र में कभी तेंदुआ नहीं देखा गया। हमें ऐसा लगता है कि जिन दूसरे इलाकों में पहले तेंदुए पकड़े थे, वो वन विभाग ने हमारे इलाके में लाकर छोड़ दिए हैं। इसलिए पिछले 2 साल से कई गांव में तेंदुए दिख रहे हैं। ये तेंदुए अब आदमखोर बन चुके हैं। मामा ने कहा- तेंदुआ सामने था, लेकिन ट्रेंकुलाइज करने की परमिशन नहीं थी
रवि के मामा सुरेश चंद भी बगल वाले घर में रहते हैं। हर्षित की मौत के बाद वो भी घर आए थे। तब से नौकरी पर नहीं गए हैं। सुरेश चंद बताते हैं- बच्चे की मौत 9 सितंबर को हुई थी। 10 सितंबर को जब वन विभाग की टीम आई, तो उन्होंने ड्रोन कैमरे में तेंदुए को देखा। वो एक कुत्ते का शिकार करके उसे मुंह में दबाकर लेकर जा रहा था। उस वक्त वन विभाग की टीम के पास सभी प्रकार के इक्विपमेंट्स मौजूद थे। फिर भी उन्होंने तेंदुए को पकड़ने से मना कर दिया। कहा कि उनके पास तेंदुआ ट्रेंकुलाइज करने की परमिशन नहीं है। जबकि, गांव वाले उस वक्त पूरा सहयोग करने के लिए तैयार थे। गांव : इस्सेपुर घास काटते वक्त तेंदुए ने महिला को दबोचा, पति की बाहों में दम तोड़ा
मथुरापुर मोर से 15 किलोमीटर दूर इस्सेपुर गांव में 14 सितंबर को तेंदुए ने 36 साल की महिला मीरा की जान ले ली। पति-पत्नी गांव से एक किलोमीटर दूर नहर पटरी के पास घास काट रहे थे। दोनों के बीच की दूरी सिर्फ 10-15 कदम थी। तभी महेंद्र को पत्नी के चीखने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने उठकर देखा तो पत्नी की दोनों टांगें हवा में नजर आईं। महेंद्र ने शोर मचाया तो तेंदुए ने पत्नी की गर्दन दबोच रखी थी। तेंदुआ जैसे-तैसे महिला को छोड़कर भागा, लेकिन तब तक मीरा की मौत हो चुकी थी। महेंद्र कहते हैं- मेरी गोद में पत्नी ने दम तोड़ दिया। मैं कुछ नहीं कर सका। एम्बुलेंस नहीं आई। मैं किसी की बाइक पर बैठाकर पत्नी को डॉक्टर के पास लेकर गया, लेकिन वो मर चुकी थी। महेंद्र बताते हैं- किसी इंसान पर तेंदुए का अटैक पहली बार हुआ, लेकिन सभी क्षेत्र में तेंदुए रोजाना देखे जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि तेंदुआ एक नहीं, बहुत सारे हैं। जिस तरफ जाते हैं, उस तरफ तेंदुए खेतों में दिख जाते हैं। कहां से आए, ये तो हम नहीं कह सकते। गांव : कंड्रावाली ‘शोर न मचाते तो बच्ची की लाश भी नहीं मिलती’
इस्सेपुर गांव से 16 किलोमीटर दूर कंड्रावाली गांव है। यह नगीना क्षेत्र में कोटद्वार रोड पर पड़ता है। उत्तराखंड में कोटद्वार की पहाड़ियां यहां से साफ दिखाई देती हैं। यहां लखीमपुर खीरी जिले का मजदूर परिवार पूर्व प्रधान के घर पर रहकर मजदूरी करता है। इन्होंने खेतों में ही अपना आशियाना बना रखा है। 5 सितंबर को 12 साल की गुड़िया शाम के वक्त पूर्व प्रधान के घर से दूध लेकर खेतों में अपने घरवालों के पास जा रही थी। पहले से घात लगाए बैठे तेंदुए ने गुड़िया को धर दबोचा। पिता प्रेम बताते हैं- मुझे ‘हाय मां’ की आवाज सुनाई दी। मैं करीब 1 मिनट बाद दौड़कर मौके पर गया। तेंदुए ने बेटी की गर्दन मुंह में जकड़ रखी थी। शोर मचाने पर वो उसे छोड़कर भाग गया। बेटी की गर्दन पर गहरे घाव थे। मांस बाहर निकलकर आ चुका था। वो मौके पर ही मर गई थी। अगर हम शोर न मचाते, तो बेटी की लाश भी नहीं मिलती। मां रामकली कहती हैं- हम 4 साल से लखीमपुर खीरी से यहां आकर मजदूरी कर रहे हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ। तेंदुआ इस क्षेत्र में देखा तक नहीं गया। पहली बार ऐसा हुआ है, अब हम डर गए हैं। बाकी बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। गांव : रामदास वाली सड़क के एक तरफ घर, दूसरी तरफ खेत
कंड्रावाली से 33 किलोमीटर दूर यूपी-उत्तराखंड के बॉर्डर पर भागुवाला के नजदीक रामदास वाली गांव है। 1 सितंबर को तेंदुए के हमले में 8 साल के बच्चे कनिष्क की मौत हो गई। 17 सितंबर को जब हम गांव पहुंचे, तो मोटरसाइकिल पर सिर्फ एक वनकर्मी पहरा देता नजर आया। गांव के लड़के ग्रुप बनाकर घूम रहे थे। कनिष्क का घर गांव के सबसे आखिर छोर पर है। सड़क के एक तरफ घर बने हैं, तो दूसरी तरफ खेत और जंगल हैं। कनिष्क के पिता डालचंद बताते हैं- तेंदुआ तो अक्सर इस गांव के जंगलों-खेतों में देखा जाता है। वो आता है और किसी भी जानवर का शिकार करके चला जाता है। उसने कभी इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाया। इसलिए गांव के लोग कभी उससे दहशत नहीं मानते थे। ये पहली बार हुआ है, जब उसने किसी इंसान को अपना शिकार बनाया। डालचंद के अनुसार- 1 सितंबर की देर शाम मेरा बेटा दुकान से कुछ सामान खरीदकर घर लौट रहा था। गांव के मुख्य मार्ग पर घर से सिर्फ 100 मीटर दूर तेंदुआ आ। वह कनिष्क को मुंह में दबाकर उठा ले गया। तुरंत सभी ने शोर मचाया और पीछे दौड़े। लेकिन, तब तक कनिष्क की मौत हो चुकी थी। डालचंद कहते हैं- मेरा कच्चा मकान है। घर में शौचालय नहीं है। पत्नी-बच्चे सब लोग शौच करने खेतों में ही जाते हैं। अब हमें डर लग रहा है। इस हादसे के बाद ही प्रधान ने गांव में खंभों पर लाइटें लगवाई हैं, जिससे रात में रोशनी रहे। सरकार ने कुछ आर्थिक सहायता दी है। जिस गांव में तेंदुए ने बच्चा मारा, वहां सांसद चंद्रशेखर ने बिताई रात
आमतौर पर सड़क, बिजली-पानी, स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रदर्शन होते हैं। लेकिन, बिजनौर में तेंदुए के हमलों को लेकर आजाद समाज पार्टी ने बीते दिनों कलेक्ट्रेट पर बड़ा प्रदर्शन किया। नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर न केवल धरनास्थल पर आए, बल्कि उन्होंने इससे प्रभावित गांव रामदास वाली में एक रात गुजारी। चंद्रशेखर रात में अपनी टीम के साथ जंगलों में गए। वहां का माहौल देखा। लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता हर वक्त साथ हैं। चंद्रशेखर के निर्देश पर पूरे नगीना क्षेत्र के गांव-गांव में आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता एक्टिव कर दिए गए हैं। ये सुरक्षा वॉलंटियर के रूप में भी काम कर रहे हैं। इनपुट सहयोगी: जहीर अहमद, सुहैल ……………………… —————————— ये खबर भी पढ़ें… दशहरे पर राजा भैया दिखाएंगे अपने शस्त्रागार के हथियार, करीबी MLC बोले- उस दिन पूजा होती है बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के पास हथियारों का जखीरा है। यह शिकायत उनकी पत्नी भानवी सिंह ने पीएमओ से की है। इस पर राजा भैया के सबसे करीबी एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी ने कहा कि उनकी पत्नी 10 साल से अलग रह रही हैं। ऐसे में उन्हें हथियारों की फोटो कहां से मिल गई? पढ़िए पूरी खबर…
सबसे पहले हम बिजनौर-कोटद्वार रोड पर गांव बढ़िया से 1 किलोमीटर अंदर मथुरापुर मोर नयागांव में पहुंचे। यहां 9 सितंबर को तेंदुए के हमले में 8 साल के हर्षित की मौत हो गई थी। 17 सितंबर को हर्षित की तेरहवीं थी। घर-कुनबे के लोग इकट्ठा हुए थे। महिलाएं रो रही थीं। घर का माहौल पूरी तरह शोकाकुल था। सिर पर रस्म पगड़ी बांधे हर्षित के पिता रवि कुमार कुर्सी डालकर एक कोने में बैठे थे। रवि बताते हैं- घर के पीछे नल लगा था। शाम के वक्त बेटा नल पर पानी लेने गया था। नल के ठीक पास ही एक झोपड़ी बनी है। इसी झोपड़ी पर कूड़े की ओट लेकर तेंदुआ पहले से बैठा था। मेरा बैठा जैसे ही नल पर पहुंचा, तेंदुए ने गर्दन पर झपट्टा मारा। उसे खींचकर 20 कदम दूर खेत के पास ले गया। हमें हल्की सी चीखने की आवाज आई। हम घर के पीछे पहुंचे, तो तेंदुए ने मेरे बेटे की गर्दन दबोच रखी थी। हमारे शोर मचाने पर तेंदुआ उसे छोड़कर भाग निकला। तब तक हर्षित की मौत हो चुकी थी। हम उसे लेकर डॉक्टरों के पास भी गए, लेकिन उसमें जान नहीं बची थी। पिता बोले- दूसरे क्षेत्र से तेंदुए लाकर यहां छोड़े गए
मृतक बच्चे के पिता रवि कहते हैं- पूरे गांव में दहशत का माहौल है। कोई भी जंगल नहीं जा पा रहा। अगर लोग जंगल जा रहे हैं, तो समूह बनाकर जा रहे। रास्ते के दोनों तरफ गन्ने के खेत हैं। इन्हीं खेतों में तेंदुआ छिपा रहता है। रात में लोग जाग रहे हैं। वन विभाग कुछ नहीं कर रहा। रवि आगे बताते हैं- हमारी याद में इस क्षेत्र में कभी तेंदुआ नहीं देखा गया। हमें ऐसा लगता है कि जिन दूसरे इलाकों में पहले तेंदुए पकड़े थे, वो वन विभाग ने हमारे इलाके में लाकर छोड़ दिए हैं। इसलिए पिछले 2 साल से कई गांव में तेंदुए दिख रहे हैं। ये तेंदुए अब आदमखोर बन चुके हैं। मामा ने कहा- तेंदुआ सामने था, लेकिन ट्रेंकुलाइज करने की परमिशन नहीं थी
रवि के मामा सुरेश चंद भी बगल वाले घर में रहते हैं। हर्षित की मौत के बाद वो भी घर आए थे। तब से नौकरी पर नहीं गए हैं। सुरेश चंद बताते हैं- बच्चे की मौत 9 सितंबर को हुई थी। 10 सितंबर को जब वन विभाग की टीम आई, तो उन्होंने ड्रोन कैमरे में तेंदुए को देखा। वो एक कुत्ते का शिकार करके उसे मुंह में दबाकर लेकर जा रहा था। उस वक्त वन विभाग की टीम के पास सभी प्रकार के इक्विपमेंट्स मौजूद थे। फिर भी उन्होंने तेंदुए को पकड़ने से मना कर दिया। कहा कि उनके पास तेंदुआ ट्रेंकुलाइज करने की परमिशन नहीं है। जबकि, गांव वाले उस वक्त पूरा सहयोग करने के लिए तैयार थे। गांव : इस्सेपुर घास काटते वक्त तेंदुए ने महिला को दबोचा, पति की बाहों में दम तोड़ा
मथुरापुर मोर से 15 किलोमीटर दूर इस्सेपुर गांव में 14 सितंबर को तेंदुए ने 36 साल की महिला मीरा की जान ले ली। पति-पत्नी गांव से एक किलोमीटर दूर नहर पटरी के पास घास काट रहे थे। दोनों के बीच की दूरी सिर्फ 10-15 कदम थी। तभी महेंद्र को पत्नी के चीखने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने उठकर देखा तो पत्नी की दोनों टांगें हवा में नजर आईं। महेंद्र ने शोर मचाया तो तेंदुए ने पत्नी की गर्दन दबोच रखी थी। तेंदुआ जैसे-तैसे महिला को छोड़कर भागा, लेकिन तब तक मीरा की मौत हो चुकी थी। महेंद्र कहते हैं- मेरी गोद में पत्नी ने दम तोड़ दिया। मैं कुछ नहीं कर सका। एम्बुलेंस नहीं आई। मैं किसी की बाइक पर बैठाकर पत्नी को डॉक्टर के पास लेकर गया, लेकिन वो मर चुकी थी। महेंद्र बताते हैं- किसी इंसान पर तेंदुए का अटैक पहली बार हुआ, लेकिन सभी क्षेत्र में तेंदुए रोजाना देखे जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि तेंदुआ एक नहीं, बहुत सारे हैं। जिस तरफ जाते हैं, उस तरफ तेंदुए खेतों में दिख जाते हैं। कहां से आए, ये तो हम नहीं कह सकते। गांव : कंड्रावाली ‘शोर न मचाते तो बच्ची की लाश भी नहीं मिलती’
इस्सेपुर गांव से 16 किलोमीटर दूर कंड्रावाली गांव है। यह नगीना क्षेत्र में कोटद्वार रोड पर पड़ता है। उत्तराखंड में कोटद्वार की पहाड़ियां यहां से साफ दिखाई देती हैं। यहां लखीमपुर खीरी जिले का मजदूर परिवार पूर्व प्रधान के घर पर रहकर मजदूरी करता है। इन्होंने खेतों में ही अपना आशियाना बना रखा है। 5 सितंबर को 12 साल की गुड़िया शाम के वक्त पूर्व प्रधान के घर से दूध लेकर खेतों में अपने घरवालों के पास जा रही थी। पहले से घात लगाए बैठे तेंदुए ने गुड़िया को धर दबोचा। पिता प्रेम बताते हैं- मुझे ‘हाय मां’ की आवाज सुनाई दी। मैं करीब 1 मिनट बाद दौड़कर मौके पर गया। तेंदुए ने बेटी की गर्दन मुंह में जकड़ रखी थी। शोर मचाने पर वो उसे छोड़कर भाग गया। बेटी की गर्दन पर गहरे घाव थे। मांस बाहर निकलकर आ चुका था। वो मौके पर ही मर गई थी। अगर हम शोर न मचाते, तो बेटी की लाश भी नहीं मिलती। मां रामकली कहती हैं- हम 4 साल से लखीमपुर खीरी से यहां आकर मजदूरी कर रहे हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ। तेंदुआ इस क्षेत्र में देखा तक नहीं गया। पहली बार ऐसा हुआ है, अब हम डर गए हैं। बाकी बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। गांव : रामदास वाली सड़क के एक तरफ घर, दूसरी तरफ खेत
कंड्रावाली से 33 किलोमीटर दूर यूपी-उत्तराखंड के बॉर्डर पर भागुवाला के नजदीक रामदास वाली गांव है। 1 सितंबर को तेंदुए के हमले में 8 साल के बच्चे कनिष्क की मौत हो गई। 17 सितंबर को जब हम गांव पहुंचे, तो मोटरसाइकिल पर सिर्फ एक वनकर्मी पहरा देता नजर आया। गांव के लड़के ग्रुप बनाकर घूम रहे थे। कनिष्क का घर गांव के सबसे आखिर छोर पर है। सड़क के एक तरफ घर बने हैं, तो दूसरी तरफ खेत और जंगल हैं। कनिष्क के पिता डालचंद बताते हैं- तेंदुआ तो अक्सर इस गांव के जंगलों-खेतों में देखा जाता है। वो आता है और किसी भी जानवर का शिकार करके चला जाता है। उसने कभी इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाया। इसलिए गांव के लोग कभी उससे दहशत नहीं मानते थे। ये पहली बार हुआ है, जब उसने किसी इंसान को अपना शिकार बनाया। डालचंद के अनुसार- 1 सितंबर की देर शाम मेरा बेटा दुकान से कुछ सामान खरीदकर घर लौट रहा था। गांव के मुख्य मार्ग पर घर से सिर्फ 100 मीटर दूर तेंदुआ आ। वह कनिष्क को मुंह में दबाकर उठा ले गया। तुरंत सभी ने शोर मचाया और पीछे दौड़े। लेकिन, तब तक कनिष्क की मौत हो चुकी थी। डालचंद कहते हैं- मेरा कच्चा मकान है। घर में शौचालय नहीं है। पत्नी-बच्चे सब लोग शौच करने खेतों में ही जाते हैं। अब हमें डर लग रहा है। इस हादसे के बाद ही प्रधान ने गांव में खंभों पर लाइटें लगवाई हैं, जिससे रात में रोशनी रहे। सरकार ने कुछ आर्थिक सहायता दी है। जिस गांव में तेंदुए ने बच्चा मारा, वहां सांसद चंद्रशेखर ने बिताई रात
आमतौर पर सड़क, बिजली-पानी, स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रदर्शन होते हैं। लेकिन, बिजनौर में तेंदुए के हमलों को लेकर आजाद समाज पार्टी ने बीते दिनों कलेक्ट्रेट पर बड़ा प्रदर्शन किया। नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर न केवल धरनास्थल पर आए, बल्कि उन्होंने इससे प्रभावित गांव रामदास वाली में एक रात गुजारी। चंद्रशेखर रात में अपनी टीम के साथ जंगलों में गए। वहां का माहौल देखा। लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता हर वक्त साथ हैं। चंद्रशेखर के निर्देश पर पूरे नगीना क्षेत्र के गांव-गांव में आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता एक्टिव कर दिए गए हैं। ये सुरक्षा वॉलंटियर के रूप में भी काम कर रहे हैं। इनपुट सहयोगी: जहीर अहमद, सुहैल ……………………… —————————— ये खबर भी पढ़ें… दशहरे पर राजा भैया दिखाएंगे अपने शस्त्रागार के हथियार, करीबी MLC बोले- उस दिन पूजा होती है बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के पास हथियारों का जखीरा है। यह शिकायत उनकी पत्नी भानवी सिंह ने पीएमओ से की है। इस पर राजा भैया के सबसे करीबी एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी ने कहा कि उनकी पत्नी 10 साल से अलग रह रही हैं। ऐसे में उन्हें हथियारों की फोटो कहां से मिल गई? पढ़िए पूरी खबर…