यूपी में चुनाव आयोग और समाजवादी पार्टी के बीच वोट चोरी को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। दरअसल, यूपी सरकार में मंत्री असीम अरुण के दावों की जांच आयोग ने बिना हलफनामे के ही शुरू कर दी है। असीम अरुण ने सोशल मीडिया X पर एक वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने कन्नौज की वोटर लिस्ट में सपा द्वारा धांधली करने का आरोप लगाया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने जांच शुरू करने की जानकारी X पर दी। वहीं, चुनाव आयोग ने सपा पर निशाना भी साधा। समाजवादी पार्टी की ओर से 18,000 शपथपत्र दिए जाने के दावों पर आयोग ने कहा कि एक भी मतदाता का शपथपत्र मूलरूप में नहीं मिला है। ई-मेल के जरिए 3919 लोगों का स्कैंड हलफनामा मिला है। पहले पढ़िए असीम अरुण ने वीडियो में जो दावा किया 18 अगस्त को बरेली पहुंचे मंत्री असीम अरुण ने कहा था- नवाब सिंह और उसके भाइयों के दो-दो वोटर लिस्ट में नाम हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से इसकी जांच करने की मांग की। साथ ही समाजवादी पार्टी से माफी मांगने को कहा। नवाब सिंह 12 अगस्त, 2024 की घटना में एक नाबालिग बच्ची से रेप के केस में जेल में बंद है। असीम अरुण ने जो आंकड़े दिए हैं, वो लोकसभा चुनाव-2024 के हैं। कहा था- अखिलेश जी तथ्य देखिए जवाब दीजिए…
सबसे पहला नाम है नवाब सिंह यादव, जिसे कन्नौज में मिनी सीएम कहा जाता था। समाजवादी पार्टी के समय ब्लॉक प्रमुख, अखिलेश यादव का राइट हैंड मैन। 2024 के लोकसभा चुनाव में नवाब सिंह अखिलेश यादव और राहुल गांधी के मंच पर खड़ा था। 2024 की वोटर लिस्ट जब हमने देखी तो बूथ संख्या 233 अड़ंगापुर में नवाब सिंह यादव का नाम दर्ज है। इसी के साथ इसी चुनाव में इसी लोकसभा, इसी विधानसभा में बूथ संख्या 299 प्राथमिक विद्यालय, ग्वाल मैदान में भी इसका नाम दर्ज है। नवाब का छोटा भाई वीरपाल यादव पुत्र चेतराम, इसके भी दो-दो वोट बने हैं। एक अड़ंगापुर में बूथ संख्या- 233 और दूसरा ग्वाल मैदान में बूथ संख्या- 300 पर है। तीसरा भाई कलियान सिंह पुत्र चेतराम का भी अड़ंगापुर बूथ संख्या- 233 और ग्वाल मैदान बूथ संख्या- 300 में वोटर है। मंत्री ने कहा था- मैं चुनाव आयोग का समर्थन करता हूं, जो चुनाव प्रक्रिया की बची हुई कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है। सबसे ज्यादा वोटर लिस्ट की शुद्धता पर सवाल है। मंत्री के इन्हीं आरोपों की चुनाव आयोग ने जांच शुरू की है। अखिलेश बोले- कभी-कभी ज्यादा होशियारी भारी पड़ती है सोमवार को अखिलेश यादव ने मंत्री असीम अरुण को लेकर X पर पोस्ट किया। लिखा- देखना है, अपनी ही सरकार के कार्यकाल में धांधली का आरोप लगाने वालों को दिल्लीवाले हटाते हैं या लखनऊवाले। या फिर ‘दो इंजन के बीच में…’ वाली कहावत में इनका पत्ता साफ होता है। क्योंकि, दिल्लीवालों को लग रहा है, हमारे अधीन आने वाले आयोग पर किसी और के कहने पर उंगली उठाई जा रही है। लखनऊवालों को लग रहा है कि हमारे प्रशासन पर किसी और के कहने पर आरोप लगाया जा रहा है। अब ये हटे नहीं तो घट तो जाएंगे ही। कभी-कभी ज्यादा होशियारी भारी पड़ जाती है। अब पढ़िए चुनाव आयोग ने सपा के लिए क्या लिखा यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सपा से शपथपत्रों की मूलप्रतियों की मांग की है, जिससे कि तेजी से जांच की जा सके। वहीं, पहले किए गए ट्वीट में कहा था कि एक भी शपथपत्र की मूल प्रति नहीं मिली है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने X पर लिखा- 18,000 व्यक्तियों के शपथपत्रों की जगह अभी तक केवल 3919 शपथपत्रों की स्कैंड कापी ही ई-मेल से मिली हैं। संभव हैं कि ई-मेल भेजते समय आपका कार्यालय 18 हजार के स्थान पर गलती से केवल 3919 शपथपत्रों की स्कैंड कापी को ही अटैच्ड फोल्डर में सेव कर पाया हो। इसलिए सभी 18 हजार शपथपत्रों की मूल प्रतियां उपलब्ध कराएं। जिससे जांच प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके। इसके पहले किए गए ट्वीट में आयोग ने कहा कि 18,000 शपथपत्रों के साथ की गई शिकायत का उल्लेख बार-बार किया जा रहा है। उसके बारे में साफ किया जाता है कि एक भी मतदाता का शपथपत्र मूलरूप में नहीं मिला है। ई-मेल से सपा ने शिकायत की है। उसमें 3,919 अलग-अलग नाम के व्यक्तियों के शपथपत्रों की स्कैंड कॉपी मिली है। शिकायत 33 जिलों के 74 विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित है। 5 विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित शिकायत की जांच पूरी हो चुकी है। X के जरिए आम जनता के सामने जांच के निष्कर्ष को पेश किया जा चुका है। अभी तक 5 विधानसभा क्षेत्रों की जांच पूरी हुई है। उनमें पाया गया कि ऐसे कुछ व्यक्तियों के नाम से नवंबर- 2022 में शपथपत्र बने हैं। जिनकी मौत 2022 से कई साल पहले हो चुकी थी। कुछ व्यक्तियों ने अपने नाम से बने शपथपत्र की स्कैंड कॉपी दिखाने पर ऐसा कोई भी शपथपत्र देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। अब पढ़िए असीम अरुण ने जो मांग की थी नगर निगम और पंचायत की वोटर लिस्ट को एक किया जाए
असीम अरुण 18 अगस्त को कहा था- वोटर लिस्ट हमारी चुनाव प्रक्रिया की एक कमजोर कड़ी बनी हुई है। उसको दूर करने के लिए बिहार में एसआईआर के जरिए काम शुरू किया गया है। चुनाव आयोग ने सम्मेलन किया। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि क्या आधार कार्ड से इसको जोड़ा जा सकता है। मेरी मांग है कि नगर निगम और पंचायत की अलग-अलग वोटर लिस्ट को एक किया जाए। उसे आधार कार्ड से जोड़ा जाए। इससे डुप्लीकेशन खत्म हो पाएगी। चुनाव आयोग के मांगने पर कांग्रेस ने नहीं दिया सुझाव
असीम अरुण ने कहा- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को दूर करने के लिए चुनाव आयोग खुद ही काम कर रहा है। जब चुनाव आयोग ने सुझाव मांगे तो कांग्रेस अपने सुझाव दे ही नहीं पाई। सबसे ज्यादा सुझाव भारतीय जनता पार्टी ने दिए। जिससे पता चलता है कि कौन सी पार्टी सुधार के लिए काम करती है। —————————— यह खबर भी पढ़ें आजम का किला ढहाने वाले IAS आन्जनेय को विस्तार मिला, 7वीं बार एक्सटेंशन, अब सिक्किम नहीं जाएंगे सपा के कद्दावर नेता आजम खान का किला ढहाने वाले IAS आन्जनेय कुमार सिंह को एक्सटेंशन मिल गया है। वह यूपी से वापस अपने मूल कैडर यानी सिक्किम नहीं जाएंगे। उन्हें मुरादाबाद कमिश्नर के पद से यूपी सरकार ने रिलीव कर दिया था। यहां पढ़ें पूरी खबर
सबसे पहला नाम है नवाब सिंह यादव, जिसे कन्नौज में मिनी सीएम कहा जाता था। समाजवादी पार्टी के समय ब्लॉक प्रमुख, अखिलेश यादव का राइट हैंड मैन। 2024 के लोकसभा चुनाव में नवाब सिंह अखिलेश यादव और राहुल गांधी के मंच पर खड़ा था। 2024 की वोटर लिस्ट जब हमने देखी तो बूथ संख्या 233 अड़ंगापुर में नवाब सिंह यादव का नाम दर्ज है। इसी के साथ इसी चुनाव में इसी लोकसभा, इसी विधानसभा में बूथ संख्या 299 प्राथमिक विद्यालय, ग्वाल मैदान में भी इसका नाम दर्ज है। नवाब का छोटा भाई वीरपाल यादव पुत्र चेतराम, इसके भी दो-दो वोट बने हैं। एक अड़ंगापुर में बूथ संख्या- 233 और दूसरा ग्वाल मैदान में बूथ संख्या- 300 पर है। तीसरा भाई कलियान सिंह पुत्र चेतराम का भी अड़ंगापुर बूथ संख्या- 233 और ग्वाल मैदान बूथ संख्या- 300 में वोटर है। मंत्री ने कहा था- मैं चुनाव आयोग का समर्थन करता हूं, जो चुनाव प्रक्रिया की बची हुई कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है। सबसे ज्यादा वोटर लिस्ट की शुद्धता पर सवाल है। मंत्री के इन्हीं आरोपों की चुनाव आयोग ने जांच शुरू की है। अखिलेश बोले- कभी-कभी ज्यादा होशियारी भारी पड़ती है सोमवार को अखिलेश यादव ने मंत्री असीम अरुण को लेकर X पर पोस्ट किया। लिखा- देखना है, अपनी ही सरकार के कार्यकाल में धांधली का आरोप लगाने वालों को दिल्लीवाले हटाते हैं या लखनऊवाले। या फिर ‘दो इंजन के बीच में…’ वाली कहावत में इनका पत्ता साफ होता है। क्योंकि, दिल्लीवालों को लग रहा है, हमारे अधीन आने वाले आयोग पर किसी और के कहने पर उंगली उठाई जा रही है। लखनऊवालों को लग रहा है कि हमारे प्रशासन पर किसी और के कहने पर आरोप लगाया जा रहा है। अब ये हटे नहीं तो घट तो जाएंगे ही। कभी-कभी ज्यादा होशियारी भारी पड़ जाती है। अब पढ़िए चुनाव आयोग ने सपा के लिए क्या लिखा यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सपा से शपथपत्रों की मूलप्रतियों की मांग की है, जिससे कि तेजी से जांच की जा सके। वहीं, पहले किए गए ट्वीट में कहा था कि एक भी शपथपत्र की मूल प्रति नहीं मिली है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने X पर लिखा- 18,000 व्यक्तियों के शपथपत्रों की जगह अभी तक केवल 3919 शपथपत्रों की स्कैंड कापी ही ई-मेल से मिली हैं। संभव हैं कि ई-मेल भेजते समय आपका कार्यालय 18 हजार के स्थान पर गलती से केवल 3919 शपथपत्रों की स्कैंड कापी को ही अटैच्ड फोल्डर में सेव कर पाया हो। इसलिए सभी 18 हजार शपथपत्रों की मूल प्रतियां उपलब्ध कराएं। जिससे जांच प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके। इसके पहले किए गए ट्वीट में आयोग ने कहा कि 18,000 शपथपत्रों के साथ की गई शिकायत का उल्लेख बार-बार किया जा रहा है। उसके बारे में साफ किया जाता है कि एक भी मतदाता का शपथपत्र मूलरूप में नहीं मिला है। ई-मेल से सपा ने शिकायत की है। उसमें 3,919 अलग-अलग नाम के व्यक्तियों के शपथपत्रों की स्कैंड कॉपी मिली है। शिकायत 33 जिलों के 74 विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित है। 5 विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित शिकायत की जांच पूरी हो चुकी है। X के जरिए आम जनता के सामने जांच के निष्कर्ष को पेश किया जा चुका है। अभी तक 5 विधानसभा क्षेत्रों की जांच पूरी हुई है। उनमें पाया गया कि ऐसे कुछ व्यक्तियों के नाम से नवंबर- 2022 में शपथपत्र बने हैं। जिनकी मौत 2022 से कई साल पहले हो चुकी थी। कुछ व्यक्तियों ने अपने नाम से बने शपथपत्र की स्कैंड कॉपी दिखाने पर ऐसा कोई भी शपथपत्र देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। अब पढ़िए असीम अरुण ने जो मांग की थी नगर निगम और पंचायत की वोटर लिस्ट को एक किया जाए
असीम अरुण 18 अगस्त को कहा था- वोटर लिस्ट हमारी चुनाव प्रक्रिया की एक कमजोर कड़ी बनी हुई है। उसको दूर करने के लिए बिहार में एसआईआर के जरिए काम शुरू किया गया है। चुनाव आयोग ने सम्मेलन किया। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि क्या आधार कार्ड से इसको जोड़ा जा सकता है। मेरी मांग है कि नगर निगम और पंचायत की अलग-अलग वोटर लिस्ट को एक किया जाए। उसे आधार कार्ड से जोड़ा जाए। इससे डुप्लीकेशन खत्म हो पाएगी। चुनाव आयोग के मांगने पर कांग्रेस ने नहीं दिया सुझाव
असीम अरुण ने कहा- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को दूर करने के लिए चुनाव आयोग खुद ही काम कर रहा है। जब चुनाव आयोग ने सुझाव मांगे तो कांग्रेस अपने सुझाव दे ही नहीं पाई। सबसे ज्यादा सुझाव भारतीय जनता पार्टी ने दिए। जिससे पता चलता है कि कौन सी पार्टी सुधार के लिए काम करती है। —————————— यह खबर भी पढ़ें आजम का किला ढहाने वाले IAS आन्जनेय को विस्तार मिला, 7वीं बार एक्सटेंशन, अब सिक्किम नहीं जाएंगे सपा के कद्दावर नेता आजम खान का किला ढहाने वाले IAS आन्जनेय कुमार सिंह को एक्सटेंशन मिल गया है। वह यूपी से वापस अपने मूल कैडर यानी सिक्किम नहीं जाएंगे। उन्हें मुरादाबाद कमिश्नर के पद से यूपी सरकार ने रिलीव कर दिया था। यहां पढ़ें पूरी खबर