बिहार चुनाव में सबसे ज्यादा डिमांड योगी-अखिलेश की:कई सांसद-विधायक भी प्रचार में जुटे; अजय राय को कांग्रेस ने बनाया स्टार प्रचारक

पड़ोसी राज्य बिहार की सियासत में इन दिनों यूपी के रण बांकुरों (बड़े नेताओं) ने चुनावी माहौल को गरम कर रखा है। मुख्यमंत्री योगी के अलावा भाजपा के 12 से ज्यादा मंत्री और दर्जनों विधायक पहले से ही यहां पहले से ही धुआंधार चुनाव प्रचार में लगे हैं। अखिलेश यादव भी 1 नवंबर से बिहार में रैलियां करेंगे। अखिलेश कहीं तेजस्वी के साथ मंच साझा करेंगे और कहीं तेजस्वी और राहुल दोनों के साथ। बिहार में यूपी के कौन-कौन से बड़े चेहरे प्रचार में जुटे हैं? किस दल से कौन-कौन गया है? सपा चुनाव नहीं लड़ रही, फिर भी बिहार में क्यों सक्रिय है? दैनिक भास्कर ने इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की… भाजपा की ओर से योगी ने संभाल रखी है कमान बिहार में दो गठबंधन एनडीए और इंडिया चुनाव लड़ रहे हैं। कोई भी बड़ा दल सभी 243 सीटों पर प्रत्याशी नहीं उतार रहा। भाजपा ने 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। एनडीए की ओर से कई राज्यों के मुख्यमंत्री बिहार में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। अपनी ‘फायरब्रांड’ छवि और हिंदुत्व के एजेंडे के लिए जाने जाने वाले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की बिहार में जबरदस्त मांग है। इसके अलावा लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह भी एनडीए के प्रमुख प्रचारक हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को बिहार चुनाव में सह प्रभारी बनाया गया है। वो भी रोज सभाएं कर रहे हैं। इसके अलावा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह पूर्व मंत्री और एमएलसी महेंद्र सिंह समेत दर्जनों विधायक बिहार चुनाव में जुटे हैं। इन नेताओं को अलग अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ये न केवल रैलियां कर रहे हैं, बल्कि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। ‘इंडिया’ गठबंधन में अखिलेश और कांग्रेस के रणनीतिकार विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में भी यूपी के सियासी धुरंधर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी बिहार के चुनावी दंगल में उतरने के लिए तैयार हैं। वे 1 नवंबर को बिहार पहुंच रहे। इसके बाद ताबड़तोड़ रैलियों में हिस्सा लेंगे। हालांकि समाजवादी पार्टी बिहार में एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ रही। अखिलेश यादव ने चुनाव की घोषणा से पहले ही तेजस्वी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के प्रचार के लिए अखिलेश की बिहार में अच्छी डिमांड है। खासकर, उन सीटों पर जहां यादव वोट निर्णायक भूमिका में हैं। अखिलेश यादव के अलावा 12 से अधिक सांसद बिहार चुनाव में बतौर स्टार प्रचारक बिहार जाएंगे। इसमें सांसद अफजाल अंसारी, अवधेश प्रसाद, बाबू सिंह कुशवाहा, नरेश उत्तम पटेल, रमाशंकर विद्यार्थी राजभर, लालजी वर्मा, छोटे लाल खरवार जैसे नेता राजद और कांग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए बिहार पहुंच रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय समेत कांग्रेस के कई नेता पहुंचे बिहार कांग्रेस ने बिहार चुनाव के लिए यूपी से एक पूरी टीम को जिम्मेदारी दी है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को पार्टी ने स्टार प्रचारक बनाया है। अजय राय ने वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर दी थी। अजय राय बिहार से अपना पुराना रिश्ता होने की बात कहकर मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने यूपी से 6 नेताओं को बिहार चुनाव प्रचार और रणनीति समन्वय का जिम्मा दिया है। इनमें प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, सांसद तनुज पुनिया, पूर्व सांसद प्रदीप जैन और पूर्व विधायक संजय कपूर शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 20 जिला इकाइयों को बिहार के अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी है। मसलन वाराणसी इकाई को बक्सर, अयोध्या इकाई को पटना, कौशांबी इकाई को नालंदा, मिर्जापुर इकाई को गया की जिम्मेदारी मिली है। बिहार के लोगों की पूर्वांचल के कई जिलों में रिश्तेदारी
पूर्वी यूपी के नेताओं की भाषा और क्षेत्रीय बोलियां बिहार के एक बड़े हिस्से के मतदाताओं से सीधे जुड़ने में सहायक होती हैं। ऐसा नहीं है कि प्रचार केवल बिहार में हो रहा, पूर्वी यूपी के कई जिलों के लोगों की रिश्तेदारियां बिहार के अलग अलग जिलों में हैं। ऐसे लोगों का इस्तेमाल भी प्रचार के लिए किया जा रहा है। दोनों ही गठबंधन अपने-अपने तरीके से यहां लोगों को बिहार की रिश्तेदारियों में अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए हाथ-पैर जोड़ रहे हैं। जिनकी डिमांड, उन्हीं को भेजा जा रहा बिहार
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई कहते हैं- पूर्वी यूपी के लोगों की मांग ज्यादा है। इसकी वजह वहां के लोगों को आपसी तालमेल, भाषाई निकटता भी है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में SIR, बीएलओ घर-घर 3 जानकारी मांगेंगे, 2003 की मतदाता सूची में आपका नाम नहीं तो क्या करना होगा? चुनाव आयोग ने यूपी समेत देश के 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) लागू कर दिया है। 4 नवंबर से बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर सर्वे करेंगे। बीएलओ 2003 की मतदाता सूची से आपके परिवार के वोटर्स का मिलान करेंगे। सवाल है, अगर आपका जन्म 2003 के बाद हुआ या सूची में आपका नाम नहीं, तो क्या होगा? जानिए सब कुछ…पढ़िए पूरी खबर…