इस बार यूपी के 2 शिक्षकों को 5 सितंबर को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा जाएगा। दोनों शिक्षकों ने अपने दम पर अपने अपने स्कूल की दशा बदल दी। शिक्षा की गुणवत्ता में ऐसा सुधार किया कि जिन स्कूलों में गिने-चुने बच्चे पढ़ने आते थे, आज उनमें सैकड़ों बच्चे पढ़ रहे हैं। रेगुलर क्लासेस के साथ स्कूल में स्पोर्ट्स एक्टिविटी के साथ प्रतिभाशाली बच्चे परीक्षा पास कर 17 लाख रुपए की स्कॉलरशिप का फायदा उठा रहे हैं। एक शिक्षक का नाम है रामलाल यादव और दूसरी शिक्षका हैं मधुरिमा तिवारी। राम लाल भदोही जिले में प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। मधुरिमा मिर्जापुर में कंपोजिट स्कूल में टीचर हैं। रामलाल ने ग्रामीणों को मोटीवेट करने के लिए अपने बेटे को भी कक्षा- 8 तक अपने ही सरकारी स्कूल में पढ़ाई करवाई है। राष्ट्रपति पुरस्कारों की घोषणा के बाद दैनिक भास्कर टीम चंदौली और मिर्जापुर जिले में दोनों शिक्षकों के स्कूल पहुंची। हमारी टीम को दोनों शिक्षक स्कूल में बच्चों को पढ़ाते मिले। पढ़िए स्कूलों से रिपोर्ट…. पहले चंदौली के टीचर रामलाल के स्कूल चलते हैं… भदोही जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर बड़वापुर गांव है। इसी गांव में कंपोजिट विद्यालय बना है। जहां कक्षा-1 से लेकर 8वीं तक क्लासेस चलती हैं। इस स्कूल में रामलाल सिंह सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। रामलाल ने 2015 में बड़वापुर प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर जॉइनिंग की। 2015 में इस स्कूल की हालत ऐसी थी कि 50 बच्चों का नाम तो लिखा था, लेकिन पढ़ाई न होने के चलते मात्र 10 बच्चे पढ़ने आते थे। स्कूल 2 कमरों में चलता था और दोनों कमरे जर्जर हाल में थे। अपने ही स्कूल में बेटे का भी करवाया एडमिशन
रामलाल बताते हैं- बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए गांव में अभिभावकों से जाकर आग्रह किया। गांव के लोग कहने लगे कि आपके बच्चे किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हाेंगे। गांववालों की बात मुझे बिल्कुल सही लगी। उसी दिन मैंने फैसला किया कि मैं भी अपने बेटे का एडमिशन अपने ही स्कूल में करवाऊंगा। मैंने अपने बेटे ओजस का नाम अपने ही स्कूल में लिखवाया। यह देखकर गांव के लोगों का मन बदला। वो लोग अपने बच्चों को प्राथमिक स्कूल भेजने लगे। मेरा बेटा 8वीं तक इसी स्कूल में पढ़ा। अब वो 9वीं क्लास में दूसरे स्कूल में पढ़ रहा है। 2 कमरों के स्कूल में आज 6 कमरे
रामलाल ने बताया- आज मेरे स्कूल में 155 बच्चे पढ़ रहे हैं। अफसरों को लेटर लिखकर जर्जर कमरों बंद करवाए। 2 कमरों से पढ़ाने की शुरुआत हुई थी। बच्चों की संख्या बढ़ी, तो 6 कमरे बनवाए गए। आज सभी क्लासेस में बच्चे हैं। स्कूल में हरियाली के लिए पेड़-पौधों को लगाया गया है। बाउंड्रीवॉल और दीवारों पर अच्छी पेंटिंग भी की गई हैं। पढ़ने के लिए एक अच्छा माहौल है। यहां के बच्चे प्रतियोगिताओं में अपनी धाक जमा रहे हैं। 17 लाख की स्कॉलरशिप उठा रहे रामलाल के स्टूडेंट
रामलाल बताते हैं- हमारे कंपोजिट विद्यालय बड़वापुर के सैकड़ों बच्चे कई स्कॉलरशिप योजनाओं में चयनित हुए हैं। इनमें श्रेष्ठा में 24 बच्चे, नेशनल स्कॉलरशिप में 92 बच्चे, नेशनल फिलाटी में 3, प्रधानमंत्री यशस्वी स्कॉलरशिप योजना में 10, नेशनल इंस्पायर अवॉर्ड में 3, अटल आवासीय विद्यालय में 3, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में 4 बच्चे चयनित हुए हैं। इसके अलावा विद्या धन में एक बच्ची चयनित हुई है। विद्यालय के सभी चयनित बच्चों को कुल 17 लाख रुपए की स्कॉलरशिप मिली है। यह मेरे और मेरे स्कूल के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। 8वीं तक यहां पढ़े बच्चे, हाईस्कूल में लाए 95% नंबर
8वीं तक कंपोजिट विद्यालय बड़वापुर में पढ़े 5 बच्चों ने हाईस्कूल में हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में 95% नंबर पाए हैं। इस पर रामलाल का कहना है कि हमारे स्कूल में बच्चों को बेसिक बहुत अच्छे तरीके से पढ़ाया गया। जिससे वे बच्चे हाईस्कूल में इतने अच्छे नंबर ला सकें। इसके अलावा जिले के 4 प्रतिभाशाली बच्चों काे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावी सम्मान समारोह में सम्मानित किया था। इनमें बड़वापुर कंपोजिट विद्यालय के अरविंद और मेरे बेटे ओजस का चयन हुआ था। इस समय स्कूल में 7 अध्यापक कार्यरत हैं। उसमें एक अध्यापक रामलाल सिंह यादव भी हैं, जिन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। बच्चे बोले- गुरुजी ने आत्मविश्वास पैदा किया
विद्यालय के बच्चे अरविंद, हर्ष, अनीश, गुड़िया ,गोकुल और अभिनव ने बताया कि विद्यालय में हमारे गुरुजी रामलाल सिंह यादव लगातार हम लोगों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। हम लोगों का हौसला बढ़ाकर प्रतियोगी परीक्षा में शामिल करवाते हैं। जिससे हमें स्कॉलरशिप मिल सकी। बच्चों ने कहा- जिन बच्चों के पास पैसा नहीं रहता था, उनको टीचर खुद पैसे देकर मदद करते हैं। हम लोगों में गुरुजी ने आत्मविश्वास पैदा किया। इसकी बदौलत ही उनका नाम राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित हुआ है। बेटी भी सरकारी स्कूल पढ़ रही, रेंट पर रहता है परिवार
शिक्षक रामलाल अपनी मां शारदा देवी और पिता नेउर यादव के साथ ज्ञानपुर के गिरधरपुर में एक किराए के मकान में रहते हैं। पत्नी के अलावा परिवार में 1 बेटा और 1 बेटी है। बेटा ओजस अब 9वीं का छात्र है। वह सराय राजपूतानी स्थित सरकारी विद्यालय में पढ़ता है। बेटी निष्ठा प्राथमिक विद्यालय गिरधरपुर में कक्षा-5 की छात्रा है। पत्नी किरण देवी टेट क्वालीफाई हैं। वह सरकारी जॉब की तैयारी कर रही हैं। शिक्षक रामलाल 3 भाइयों में सबसे छोटे हैं। अब पढ़िए मिर्जापुर के कंपोजिट स्कूल से रिपोर्ट मिर्जापुर जिला मुख्यालय से 4 किमी दूर लालडिग्गी वार्ड में पीएमश्री रानी कर्णावती कंपोजिट स्कूल है। इसमें मधुरिमा तिवारी टीचर हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनका समर्पण और योगदान देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चुना गया है। ये स्कूल किसी भी प्राइवेट कॉन्वेंट स्कूल को टक्कर दे रहा है। उनके पुरस्कार के लिए चयन के बाद स्कूल के बच्चों में खुशी का माहौल है। टीचर मधुरिमा भी बेहद खुश हैं। मधुरिमा बताती हैं- 8 साल पहले 2017 में जब मैंने इस स्कूल में जॉइनिंग की थी। तब यहां एक से 8वीं तक की क्लास में मात्र 56 बच्चे पढ़ते थे। आज इस स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़कर 218 हो गई है। स्कूल में रेग्युलर पढ़ाई के साथ, कंप्यूटर शिक्षा और सिलाई-कढ़ाई जैसी स्किल में बच्चों को दक्ष बनाया जा रहा है। 8 कमरों से बढ़कर 12 हुई संख्या
मधुरिमा बताती हैं- स्कूल में जब मैं आई थी, तो 8 कमरे हुआ करते थे। बच्चों की संख्या भी कम थी। जैसे-जैसे हम लोगों ने सुविधाएं बढ़ाईं, तो बच्चों की संख्या भी बढ़ी। इसके चलते वर्तमान में 12 क्लासरूम हैं। सभी स्मार्ट क्लास से लैस हैं। एलईडी स्क्रीन और वाइफाई से लैस हैं। यहां स्मार्ट क्लास, वाईफाई युक्त प्रोजेक्टर और टीवी की व्यवस्था है। परिसर में औषधि वाटिका, बागवानी और पार्क भी विकसित किए गए हैं। मधुरिमा के समर्पण को देखते हुए उनको 2018 का स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार और 2022 का राज्य अध्यापक पुरस्कार कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। छात्राएं बोलीं- हम स्मार्ट क्लास में पढ़ते हैं, रोज स्कूल आते हैं
छात्रा लक्ष्मी प्रजापति ने बताया- स्कूल आकर बहुत अच्छा लगता है। विद्यालय में हर विषय की पढ़ाई होती है। हमें स्मार्ट टीवी चलाने और कंप्यूटर चलाने का तरीका हमारी टीचर बताती हैं। खेलने-कूदने के अलग से पीरियड लगते हैं। यहां पढ़ाई बहुत अच्छी होती है। मैं अभी अपनी पढ़ाई पर फोकस कर रही हूं। हाईस्कूल के बाद करियर किस विषय के साथ बनाना है, इस पर सोचूंगी। सरिता ने बताया- हम लोग यहां स्मार्ट क्लास में पढ़ते हैं। स्कूल आते हैं, तो समय कब बीत जाता है, ये पता ही चलता। हम लोग सभी विषय पढ़ते हैं। मधुरिमा मैम बहुत अच्छा पढ़ाती हैं। मधुरिमा के पति भी प्रिंसिपल हैं
मधुरिमा तिवारी के पति जाह्नवी प्रकाश तिवारी पहाड़ी ब्लाक के पड़री में स्थित ज्ञानानंद इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं। इनके पिता तारकेश्वर नाथ तिवारी बिजली विभाग से सेवानिवृत हैं। बड़े दादा कैलाशनाथ त्रिपाठी संयुक्त शिक्षा निदेशक पद से मिर्जापुर में ही सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके परिवार की 4 बहुएं सरकारी टीचर हैं। बेटा ऐश्वर्य तिवारी बीटेक की पढ़ाई कर कंपटीशन तैयारी कर रहा है। बेटी दिव्यांका बीबीए की पढ़ाई कर रही है। ————————- ये खबर भी पढ़े नोएडा स्पोर्ट्स सिटी- 9000 करोड़ का घोटाला किसने किया, बोर्ड पर सिमटा पूरा प्रोजेक्ट ‘हमने एक करोड़ रुपए से ज्यादा देकर फ्लैट खरीदा, लेकिन अब तक मालिकाना हक नहीं मिला। अपने ही घर में किराएदार की तरह रह रहे हैं। करीब डेढ़ साल पहले एक फ्लैट की छत टूटकर गिर गई थी। पुलिस में शिकायत करने पहुंचे तो हमें ही फटकार मिल गई। कहा कि बिना फ्लैट की रजिस्ट्री कराए एंट्री कैसे मिली। हमारे साथ बांग्लादेशियों की तरह बर्ताव किया जा रहा है।’ पूरी खबर पढ़ें
रामलाल बताते हैं- बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए गांव में अभिभावकों से जाकर आग्रह किया। गांव के लोग कहने लगे कि आपके बच्चे किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हाेंगे। गांववालों की बात मुझे बिल्कुल सही लगी। उसी दिन मैंने फैसला किया कि मैं भी अपने बेटे का एडमिशन अपने ही स्कूल में करवाऊंगा। मैंने अपने बेटे ओजस का नाम अपने ही स्कूल में लिखवाया। यह देखकर गांव के लोगों का मन बदला। वो लोग अपने बच्चों को प्राथमिक स्कूल भेजने लगे। मेरा बेटा 8वीं तक इसी स्कूल में पढ़ा। अब वो 9वीं क्लास में दूसरे स्कूल में पढ़ रहा है। 2 कमरों के स्कूल में आज 6 कमरे
रामलाल ने बताया- आज मेरे स्कूल में 155 बच्चे पढ़ रहे हैं। अफसरों को लेटर लिखकर जर्जर कमरों बंद करवाए। 2 कमरों से पढ़ाने की शुरुआत हुई थी। बच्चों की संख्या बढ़ी, तो 6 कमरे बनवाए गए। आज सभी क्लासेस में बच्चे हैं। स्कूल में हरियाली के लिए पेड़-पौधों को लगाया गया है। बाउंड्रीवॉल और दीवारों पर अच्छी पेंटिंग भी की गई हैं। पढ़ने के लिए एक अच्छा माहौल है। यहां के बच्चे प्रतियोगिताओं में अपनी धाक जमा रहे हैं। 17 लाख की स्कॉलरशिप उठा रहे रामलाल के स्टूडेंट
रामलाल बताते हैं- हमारे कंपोजिट विद्यालय बड़वापुर के सैकड़ों बच्चे कई स्कॉलरशिप योजनाओं में चयनित हुए हैं। इनमें श्रेष्ठा में 24 बच्चे, नेशनल स्कॉलरशिप में 92 बच्चे, नेशनल फिलाटी में 3, प्रधानमंत्री यशस्वी स्कॉलरशिप योजना में 10, नेशनल इंस्पायर अवॉर्ड में 3, अटल आवासीय विद्यालय में 3, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में 4 बच्चे चयनित हुए हैं। इसके अलावा विद्या धन में एक बच्ची चयनित हुई है। विद्यालय के सभी चयनित बच्चों को कुल 17 लाख रुपए की स्कॉलरशिप मिली है। यह मेरे और मेरे स्कूल के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। 8वीं तक यहां पढ़े बच्चे, हाईस्कूल में लाए 95% नंबर
8वीं तक कंपोजिट विद्यालय बड़वापुर में पढ़े 5 बच्चों ने हाईस्कूल में हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में 95% नंबर पाए हैं। इस पर रामलाल का कहना है कि हमारे स्कूल में बच्चों को बेसिक बहुत अच्छे तरीके से पढ़ाया गया। जिससे वे बच्चे हाईस्कूल में इतने अच्छे नंबर ला सकें। इसके अलावा जिले के 4 प्रतिभाशाली बच्चों काे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावी सम्मान समारोह में सम्मानित किया था। इनमें बड़वापुर कंपोजिट विद्यालय के अरविंद और मेरे बेटे ओजस का चयन हुआ था। इस समय स्कूल में 7 अध्यापक कार्यरत हैं। उसमें एक अध्यापक रामलाल सिंह यादव भी हैं, जिन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। बच्चे बोले- गुरुजी ने आत्मविश्वास पैदा किया
विद्यालय के बच्चे अरविंद, हर्ष, अनीश, गुड़िया ,गोकुल और अभिनव ने बताया कि विद्यालय में हमारे गुरुजी रामलाल सिंह यादव लगातार हम लोगों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। हम लोगों का हौसला बढ़ाकर प्रतियोगी परीक्षा में शामिल करवाते हैं। जिससे हमें स्कॉलरशिप मिल सकी। बच्चों ने कहा- जिन बच्चों के पास पैसा नहीं रहता था, उनको टीचर खुद पैसे देकर मदद करते हैं। हम लोगों में गुरुजी ने आत्मविश्वास पैदा किया। इसकी बदौलत ही उनका नाम राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित हुआ है। बेटी भी सरकारी स्कूल पढ़ रही, रेंट पर रहता है परिवार
शिक्षक रामलाल अपनी मां शारदा देवी और पिता नेउर यादव के साथ ज्ञानपुर के गिरधरपुर में एक किराए के मकान में रहते हैं। पत्नी के अलावा परिवार में 1 बेटा और 1 बेटी है। बेटा ओजस अब 9वीं का छात्र है। वह सराय राजपूतानी स्थित सरकारी विद्यालय में पढ़ता है। बेटी निष्ठा प्राथमिक विद्यालय गिरधरपुर में कक्षा-5 की छात्रा है। पत्नी किरण देवी टेट क्वालीफाई हैं। वह सरकारी जॉब की तैयारी कर रही हैं। शिक्षक रामलाल 3 भाइयों में सबसे छोटे हैं। अब पढ़िए मिर्जापुर के कंपोजिट स्कूल से रिपोर्ट मिर्जापुर जिला मुख्यालय से 4 किमी दूर लालडिग्गी वार्ड में पीएमश्री रानी कर्णावती कंपोजिट स्कूल है। इसमें मधुरिमा तिवारी टीचर हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनका समर्पण और योगदान देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चुना गया है। ये स्कूल किसी भी प्राइवेट कॉन्वेंट स्कूल को टक्कर दे रहा है। उनके पुरस्कार के लिए चयन के बाद स्कूल के बच्चों में खुशी का माहौल है। टीचर मधुरिमा भी बेहद खुश हैं। मधुरिमा बताती हैं- 8 साल पहले 2017 में जब मैंने इस स्कूल में जॉइनिंग की थी। तब यहां एक से 8वीं तक की क्लास में मात्र 56 बच्चे पढ़ते थे। आज इस स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़कर 218 हो गई है। स्कूल में रेग्युलर पढ़ाई के साथ, कंप्यूटर शिक्षा और सिलाई-कढ़ाई जैसी स्किल में बच्चों को दक्ष बनाया जा रहा है। 8 कमरों से बढ़कर 12 हुई संख्या
मधुरिमा बताती हैं- स्कूल में जब मैं आई थी, तो 8 कमरे हुआ करते थे। बच्चों की संख्या भी कम थी। जैसे-जैसे हम लोगों ने सुविधाएं बढ़ाईं, तो बच्चों की संख्या भी बढ़ी। इसके चलते वर्तमान में 12 क्लासरूम हैं। सभी स्मार्ट क्लास से लैस हैं। एलईडी स्क्रीन और वाइफाई से लैस हैं। यहां स्मार्ट क्लास, वाईफाई युक्त प्रोजेक्टर और टीवी की व्यवस्था है। परिसर में औषधि वाटिका, बागवानी और पार्क भी विकसित किए गए हैं। मधुरिमा के समर्पण को देखते हुए उनको 2018 का स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार और 2022 का राज्य अध्यापक पुरस्कार कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। छात्राएं बोलीं- हम स्मार्ट क्लास में पढ़ते हैं, रोज स्कूल आते हैं
छात्रा लक्ष्मी प्रजापति ने बताया- स्कूल आकर बहुत अच्छा लगता है। विद्यालय में हर विषय की पढ़ाई होती है। हमें स्मार्ट टीवी चलाने और कंप्यूटर चलाने का तरीका हमारी टीचर बताती हैं। खेलने-कूदने के अलग से पीरियड लगते हैं। यहां पढ़ाई बहुत अच्छी होती है। मैं अभी अपनी पढ़ाई पर फोकस कर रही हूं। हाईस्कूल के बाद करियर किस विषय के साथ बनाना है, इस पर सोचूंगी। सरिता ने बताया- हम लोग यहां स्मार्ट क्लास में पढ़ते हैं। स्कूल आते हैं, तो समय कब बीत जाता है, ये पता ही चलता। हम लोग सभी विषय पढ़ते हैं। मधुरिमा मैम बहुत अच्छा पढ़ाती हैं। मधुरिमा के पति भी प्रिंसिपल हैं
मधुरिमा तिवारी के पति जाह्नवी प्रकाश तिवारी पहाड़ी ब्लाक के पड़री में स्थित ज्ञानानंद इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं। इनके पिता तारकेश्वर नाथ तिवारी बिजली विभाग से सेवानिवृत हैं। बड़े दादा कैलाशनाथ त्रिपाठी संयुक्त शिक्षा निदेशक पद से मिर्जापुर में ही सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके परिवार की 4 बहुएं सरकारी टीचर हैं। बेटा ऐश्वर्य तिवारी बीटेक की पढ़ाई कर कंपटीशन तैयारी कर रहा है। बेटी दिव्यांका बीबीए की पढ़ाई कर रही है। ————————- ये खबर भी पढ़े नोएडा स्पोर्ट्स सिटी- 9000 करोड़ का घोटाला किसने किया, बोर्ड पर सिमटा पूरा प्रोजेक्ट ‘हमने एक करोड़ रुपए से ज्यादा देकर फ्लैट खरीदा, लेकिन अब तक मालिकाना हक नहीं मिला। अपने ही घर में किराएदार की तरह रह रहे हैं। करीब डेढ़ साल पहले एक फ्लैट की छत टूटकर गिर गई थी। पुलिस में शिकायत करने पहुंचे तो हमें ही फटकार मिल गई। कहा कि बिना फ्लैट की रजिस्ट्री कराए एंट्री कैसे मिली। हमारे साथ बांग्लादेशियों की तरह बर्ताव किया जा रहा है।’ पूरी खबर पढ़ें