मेस में बेसिक हाइजीन की बेहद कमी है। ये गंभीर मसला है। यहां जो सैंडविच मिलता है, उसमें बासी आलू यूज होता है। इसको लेकर कई बार प्रोवोस्ट मैम से कंप्लेंट की गई पर कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि वॉशरूम में आने वाला पानी भी बहुत गंदा रहता है। जिस पानी को कोई छूना नहीं चाहेगा पर उसी पानी से हम लोग बाल धोने को मजबूर हैं। ये कहना है लखनऊ विश्वविद्यालय के न्यू कैंपस स्थित गंगा हॉस्टल में रहने वाली एलएलबी सेकंड ईयर स्टूडेंट प्राजंलि यादव का। यहां मेस का खाना खाने के बाद 25 फरवरी को छात्राएं बीमार हो गई थीं। गुस्साए में छात्राओं ने मेस में ताला जड़कर प्रदर्शन किया था। मामले की हकीकत जानने दैनिक भास्कर टीम मौके पर पहुंची। छात्राओं से बातचीत की। उन्होंने कहा- खाना-पानी खराब मिलने की वजह से पेट दर्द की समस्या आम हो गई है। किडनी की समस्या हो रही है। शिकायत करने पर कैरेक्टर पर सवाल उठाए जाते हैं। कहा जता है कि बॉयफ्रेंड से मिलने के बहाने बना रही हो। प्रोवोस्ट मैम भी शिकायतों पर सुनवाई नहीं कर रही हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 60 हजार रुपए है हॉस्टल का फीस गंगा हॉस्टल में लॉ फैकल्टी के अलावा बीफार्मा, एमफार्मा, बीबीए और एमबीए के फीमेल स्टूडेंट्स रहती हैं। कुछ फीमेल असिस्टेंट प्रोफेसर भी रह रही हैं। 60 हजार का सालाना चार्ज स्टूडेंट से लिया जाता है। इसमें हॉस्टल फैसिलिटी के अलावा मेस चार्ज के 24 हजार भी शामिल हैं। अब पढ़िए छात्राओं ने जो बताया… पेट दर्द की समस्या आम हो गई है प्रांजलि कहती हैं कि गंगा हॉस्टल में करीब 200 से ज्यादा फीमेल स्टूडेंट्स रहती हैं। सभी को पेट की समस्या रहती है। यहां पर पेट दर्द की समस्या को नॉर्मल कहा जाता है। मेस संचालकों पर कोई एक्शन नहीं होता है। खाने को लेकर जब मेस संचालक से बात करो तो वह कहती हैं कि मैम बताएंगी। जब मैम से बात करो तो वे कहती हैं कि मोहित बताएंगे। दोनों ही तरफ से सिर्फ घुमाया जाता है। संडे को क्यों नहीं आते कुलपति-डीन प्रांजलि कहती हैं कि जब सब स्टूडेंट्स रहते हैं तब न तो डीन आते हैं और न ही कुलपति। 26 फरवरी, गुरुवार को भी जब कुलपति आए तो उनकी क्लास चल रही थी। इस वजह से वह अपनी समस्या नहीं बता पाईं। पहले भी कई बार डीन स्टूडेंट वेलफेयर दिन में वर्किंग डे पर आए। इस वजह से उनसे बात ही नहीं हो पाई। आखिर संडे को ये सब बड़े अफसर क्यों नहीं आते हैं? 3 दिन से सिर्फ दही चावल खा रही हूं प्राजंलि ने बताया कि 26 फरवरी, गुरुवार को दोपहर में जब लंच हुआ तो हॉस्टल में खाना खाने आई। मेस की कंडीशन बहुत खराब है। खाना खाने लायक नहीं है। अब बिना लंच किए वापस क्लास अटेंड करूंगी। उन्होंने बताया कि मेस का इतना घटिया खाना हैं कि खाया नहीं जा रहा है। बीते 3 दिनों से सिर्फ दही चावल खाकर रह रहे हैं। यहां पर कुछ भी खाने लायक नहीं है। अब ऐसी हालत कि पेरेंट्स को नहीं बता सकते, नहीं तो घर में सब टेंशन में आ जाते हैं। अब खुद टेंशन लेकर रह रहे हैं। समस्याएं बताने पर कैरेक्टर पर उठाया जाता है सवाल छात्रा श्वेता पाठक कहती हैं कि जब से हॉस्टल शुरू हुआ है, तभी से यहां पर रह रही हूं। मेस के खाने को लेकर समस्या शुरुआत से ही है। यही हॉस्टल की सबसे बड़ी समस्या है। साफ-सफाई और बेसिक हाइजीन से जुड़ी समस्याओं को भी नहीं दूर किया जा रहा है। इन समस्याओं को लेकर जब सवाल उठाया जाता है तो जवाब में हम लोगों के कैरेक्टर पर सवाल किया जाने लगता है। यही कारण है कि तमाम छात्राएं आक्रोशित हैं। कुलपति ने बात करके भरोसा दिया है। उम्मीद है कि अब सब ठीक हो जाएगा। गंदे खानपान से किडनी हो रही खराब नाम न छापने की शर्त पर कई छात्राओं ने कहा कि मेस के खाने के अलावा यहां का पानी भी दूषित है। एक लड़की की कुछ दिनों से तबीयत खराब थी। उसने डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने बताया कि किडनी पर असर है। बहुत अलर्ट रहना पड़ेगा। डॉक्टर ने कहा कि गंदे खान-पान से किडनी खराब हो रही है। छात्राओं ने कहा कि प्रोवोस्ट मैडम इसे इग्नोर करती हैं। जब बुधवार रात तमाम छात्राओं ने मिलकर हॉस्टल की मेस में ताला जड़ दिया, तब वह आईं। उन्होंने छात्राओं को धमकाना शुरू कर दिया। कहा कि तुम लोग तो रील बनाती हो। उल्टा हम लोगों पर आरोप लगाया और चली गई। आवाज उठाने पर धमकाया जा रहा नाम न छापने की शर्त पर कई छात्राओं ने कहा कि हॉस्टल प्रशासन के लोग कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हैं। जब इसको लेकर आवाज उठाई गई तो उनका कहना था कि लॉ फैकल्टी के स्टूडेंट्स को ज्यादा परेशानी हो रही है। उन्हें अगले सत्र से उन्हें हॉस्टल अलॉट नहीं किया जाएगा। बुधवार रात जो स्टूडेंट बीमार हुए, उन्हीं पर आरोप मढ़ा छात्राएं कहती हैं कि हॉस्टल प्रोवोस्ट खुद ऐसे आपत्तिजनक कमेंट पास करती हैं। बुधवार रात जब एक छात्रा की तबीयत अचानक से बिगड़ गई तो उन्होंने उसका इलाज करने के बजाय कहा कि जब तुम बीमार हो तो इतना बोल कैसे पा रही हो? कुल मिलाकर वह बीमार का इलाज कराने की जगह सवाल ज्यादा खड़े करती हैं। हॉस्टल की अन्य अव्यवस्थाएं भी जानिए… उल्टा-सीधा कमेंट करते हैं जिम्मेदार लोग सेकंड ईयर लॉ स्टूडेंट अस्मिता सिंह कहती हैं कि यहां पर खाने की गंभीर समस्या तो है ही इसके अलावा भी कई और समस्याएं हैं। जैसे रात में कोई मेडिकल इमरजेंसी हो गई तो एम्बुलेंस की सुविधा मौजूद नहीं है। खुद के किसी साधन से ले जाना पड़ता है। कई बार जब अचानक से किसी स्टूडेंट की तबीयत खराब होती है तो स्कूटी से ले जाना पड़ता है। हॉस्टल एडमिनिस्ट्रेशन बिल्कुल ध्यान नहीं देता है। कभी देर रात किसी स्टूडेंट को कोई परेशानी होती है तो कहा जाता है कि आप नौटंकी कर रही हो। आपको किसी से मिलने के लिए जाना होगा। आप अपने बॉय फ्रेंड के पास जा रही होगी। ऐसे आपत्तिजनक कमेंट किए जाते हैं। यहां पर मेडिकल फैसिलिटी भी नहीं है। सामान्य और मूलभूत जरूरत की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। वाशिंग मशीन के लिए भी स्टूडेंट्स को परेशान रहना पड़ता है। हॉस्टल में दवा के नाम पर मात्र 4-5 पैरासीटामोल छात्राओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में मेडिकल फैसिलिटी के नाम पर सामान्य फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। ढाई सौ से ज्यादा छात्राओं की संख्या है। दवा के नाम पर मात्र चार से पांच पैरासीटामोल का पत्ता मौजूद रहता है। इमरजेंसी के समय बाहर से दवाई मंगानी पड़ती है। उसको लेने के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। पढ़िए जो छात्रा खाना खाने से बीमार हुई उसने जो कहा… ‘प्रोवोस्ट बोलीं खुद क्यों नहीं डिस्पेंसरी चली गई’ LLB फाइनल ईयर स्टूडेंट मेघना शाह ने बताया कि दाल खाते ही अचानक से तबीयत खराब हो गई और उल्टियां होने लगी। बाद में जब राहत नहीं मिली तो साथी छात्राओं ने प्रोवोस्ट को जानकारी दी। जब प्रोवोस्ट आईं तो उन्होंने कहा कि आप खुद क्यों डिस्पेंसरी नहीं चली गई और आपत्तिजनक बयान भी दिए? इसके बाद कुछ और छात्राओं की भी तबीयत खराब हो गई। अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। यही कारण रहा कि सब स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट करने लगी। जरूरत पर कभी नहीं आते डॉक्टर मेघना ने कहा कि मेडिकल फैसिलिटी राउंड द क्लॉक मुहैया कराने की बात कही जाती है पर जब जरूरत होती है तब यह कोई डॉक्टर नहीं मिलता है। जब मेरी तबीयत खराब हुई तब भी कोई डॉक्टर नहीं बुलाया जा रहा था। बाद में जब मेरे पैरंट्स ने फोन करके कहा तब डॉक्टर आए। मेरी कंडीशन इतनी खराब थी कि मैं खुद से डॉक्टर के पास चलकर नहीं जा सकती थी। रही बात मेस के खाने की क्वालिटी की तो कई सालों से ऐसे ही कंडीशन में मेस का खाना चल रहा है। कुलपति से बात हुई है। अब उम्मीद है कि हालात सुधार जाएंगे।