भाजपा विधायक बोले-रामभद्राचार्य ने बिना आंखों के संस्कृत कैसे पढ़ी?:वह जातिवादी हैं, ट्रोल हुए तो ब्राह्मणों से माफी मांगी

संत प्रेमानंद महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच विवाद खत्म हो गया है। लेकिन, मंगलवार को हरदोई से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश इस प्रकरण में कूद पड़े। विधायक ने रामभद्राचार्य के संस्कृत अध्ययन को झूठ बताते हुए पूछा, आपने अंधे होकर संस्कृत का अध्ययन कैसे किया? उन्होंने रामभद्राचार्य को सबसे बड़ा जातिवादी बताया। श्याम प्रकाश गोपामऊ विधानसभा से विधायक हैं। उन्होंने X पर लिखा, आप महिलाओं को चादर ओढ़ाकर जो करते हैं, वह व्यभिचार की श्रेणी में आता है। यह पोस्ट वायरल होने के बाद विधायक की जमकर आलोचना होने लगी। सोशल मीडिया पर उनकी ट्रोलिंग शुरू हो गई। आलोचना के बाद विधायक ने यू टर्न लेते हुए एक पोस्ट लिखकर माफी मांग ली है। श्याम प्रकाश ने लिखा- मैं पूज्यनीय प्रेमानंद महाराज का अनुयायी और समर्थक हूं। अध्यात्म गुरु रामभद्राचार्य जी द्वारा उनके प्रति एवं पूर्व में ब्राह्मण समाज के प्रति की गई गलत टिप्पणी से मैं व्यथित हुआ था, जिसके कारण मैंने कुछ टिप्पणी कर दी। मेरी उनके प्रति कोई निजी दुर्भावना नहीं है, मैं सभी सच्चे संतो का सम्मान करता हूं। रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज के संस्कृत ज्ञान को दी थी चुनौती तुलसी पीठाधीश्वर पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद महाराज को उनके ज्ञान पर चुनौती दी थी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा था: अगर प्रेमानंद महाराज में चमत्कार है, तो वे मेरे सामने एक अक्षर संस्कृत का बोलकर दिखाएं। मेरे द्वारा कहे गए किसी भी श्लोक का अर्थ समझाएं। उनकी लोकप्रियता क्षणभंगुर है। प्रेमानंद ‘बालक के समान’ हैं। संत समाज ने की थी निंदा हालांकि, संत रामभद्राचार्य की टिप्पणी के बाद देशभर का संत समाज इसके विरोध में उतर आया था। संत समाज ने ऐसी टिप्पणी से बचने की सलाह दी थी। मथुरा के संतों ने इसका विरोध किया था। साधक मधुसूदन दास ने कहा कि रामभद्राचार्य को अपने ज्ञान का अहंकार हो गया है। प्रेमानंद महाराज जैसे दिव्य संत के बारे में ऐसी टिप्पणी निंदनीय है। मधुसूदन दास ने कहा: भक्ति का भाषा से कोई मतलब नहीं है। कोई चाइनीज आ जाए वह कहे चाइनीज आती है। कोई फ्रेंच आ जाए वह कहे फ्रेंच आती है। भक्ति का किसी से लेना देना नहीं होता। वृंदावन धाम में पूरी दुनिया के लोग भक्ति भजन कर रहे हैं। राधा नाम स्तुति कर रहे हैं। काशी में भोले बाबा की स्तुति कर रहे हैं। इस बात का संस्कृत से क्या लेना देना? विवाद बढ़ा तो रामभद्राचार्य बोले- प्रेमानंद मेरे बालक समान विवाद बढ़ता देख तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सोमवार की शाम वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा- मैंने प्रेमानंद पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है। वह मेरे बालक के समान हैं। वह जब भी मेरे पास मिलने आएंगे। मैं उनको गले से लगाऊंगा, उन्हें आशीर्वाद दूंगा। साथ ही भगवान रामचंद्र से उनकी दीर्घायु की कामना करूंगा। मैंने किसी तंत्र के खिलाफ टिप्पणी नहीं की है और न करता हूं। मैं आचार्य होने के नाते सबको यह कहता हूं कि संस्कृत पढ़ना चाहिए। चोला पहनकर जो लोग कथा कहते हैं, उनको कुछ आता-जाता नहीं है। उनको पढ़ना सीखना चाहिए। इससे पहले रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने भी सफाई दी थी। उन्होंने कहा था, जगद्गुरु सबके गुरु होते हैं। सारी प्रजा उनके पुत्र के समान होती है। जगद्गुरु की बातों को इस तरह से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। प्रेमानंद जी से गुरुदेव (जगद्गुरु रामभद्राचार्य) को किसी प्रकार की ईर्ष्या नहीं है। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… रामभद्राचार्य बोले- प्रेमानंद पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की:मिलेंगे तो गले लगाऊंगा; वह मेरे बालक के समान; सनातन धर्म पर हमले हो रहे संत प्रेमानंद महाराज पर टिप्पणी के बाद मथुरा के संतों में उबाल है। विवाद बढ़ता देख तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा- मैंने प्रेमानंद पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है। वह मेरे बालक के समान हैं। वह जब भी मेरे पास मिलने आएंगे। मैं उनको गले से लगाऊंगा, उन्हें आशीर्वाद दूंगा। साथ ही भगवान रामचंद्र से उनकी दीर्घायु की कामना करूंगा। पढ़ें पूरी खबर…..