मंत्री खन्ना और बसपा की इकलौती सीट खतरे में?:SIR के बाद 114 सीटें फंसीं, भाजपा-सपा का गणित बिगड़ा

यूपी में 10 अप्रैल को जारी SIR की फाइनल लिस्ट में 2.04 करोड़ वोटरों के नाम कट गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में 114 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत-हार का अंतर 10 हजार से कम था। SIR के बाद इन सीटों पर 16 हजार से 1.18 लाख तक वोटर कम हो गए हैं। ऐसे में ये सीटें डेंजर जोन में आ गई हैं। वजह है कि अगर कम हुए वोटर्स उस पार्टी के कोर वोटर थे, जिसने पिछली बार मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी, तो 2027 में वहां का रिजल्ट पूरी तरह पलट सकता है। इन 114 सीटों में से 63 भाजपा, 41 सपा और 10 अन्य पार्टियों ने 10 सीटें जीती थीं। SIR के बाद 2027 का चुनावी खेल कितना पलट जाएगा? कम मार्जिन वाली सीटों पर क्या समीकरण बदलेंगे? किस पार्टी को ज्यादा नुकसान होगा? पढ़िए खास रिपोर्ट… 2022 में 15 सीटों पर एक हजार से भी कम मार्जिन था
2022 के विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो 15 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत-हार का मार्जिन एक हजार से भी कम था। इसमें से 10 सीटों पर मार्जिन 500 वोट से भी कम था। इन 15 सीटों में से 9 पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की जीत हुई थी। वहीं, 6 सीटें सपा गठबंधन के पाले में गई थीं। अब इन सीटों पर 21 से 72 हजार तक वोट कम हो चुके हैं। सीनियर जर्नलिस्ट हेमंत तिवारी कहते हैं- अभी के लिहाज से देखें, तो भाजपा के लिए ये सीटें डेंजर जोन में आ चुकी हैं। पिछले दो इलेक्शन रिजल्ट की तुलना करने से पता चलता है कि 2022 में हार-जीत मार्जिन 2017 की तुलना में काफी कम रहा था। इसी वजह से 60 से ज्यादा सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर 10 हजार से भी कम रहा था। भाजपा के कब्जे वाली सीटों पर सबसे ज्यादा वोट घटे
2022 में 99 सीटें ऐसी थीं, जहां हार-जीत का अंतर 10 हजार से कम था। इनमें से भाजपा को 55, सपा को 35, रालोद को 3, निषाद व सुभासपा को 2-2 और बसपा व कांग्रेस को 1-1 सीट मिली थी। सियासी जानकार मानते हैं कि ये सीटें भी डेंजर जोन में आ गई हैं। SIR के दौरान ही खुद सीएम योगी ने पार्टी, सरकार और संघ के साथ समन्वय बैठकों में इन सीटों को लेकर आगाह किया था। पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में 22 सीटों पर 10 हजार से कम मार्जिन से जीत-हार हुई थी। इसमें से 13 पर भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, सपा ने रालोद के साथ मिलकर 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पश्चिम में मुस्लिम और जाट आबादी ज्यादा है, लेकिन समीकरण अब 2022 वाले नहीं हैं। रालोद, सपा से गठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ आ चुकी है। ऐसे में कम मार्जिन वाली सीटों पर सपा को नुकसान हो सकता है। मंत्री सुरेश खन्ना की सीट पर जीत के मार्जिन से 10 गुना ज्यादा वोट घटे
2022 के विधानसभा चुनाव में मध्य यूपी में 10 हजार से कम मार्जिन वाली 50 सीटे थीं। यहां सपा और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई हुई थी। इसमें से 30 सीटों पर भाजपा तो 20 पर सपा ने कब्जा जमाया था। इस बेल्ट में लोधी, मौर्या, कुर्मी-यादव जैसे ओबीसी वोटरों का दबदबा है। SIR के बाद यहां दोनों दलों के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। यहां जीत-हार के अंतर की तुलना में 10 गुना तक वोट घट गए हैं। इसमें वित्तमंत्री सुरेश खन्ना की शाहजहांपुर सीट भी शामिल है। 2022 में वे 9313 वोट से जीते थे, जबकि सीट पर 1 लाख से ज्यादा वोट कट गया। खास बात यह है कि इस सीट पर 30% से ज्यादा मुस्लिम वोटर्स हैं। ऐसे में सीट पर भाजपा का समीकरण बिगड़ता नजर आ रहा है। पूर्वांचल में कांग्रेस और बसपा के सामने चुनौती
पूर्वांचल में 27 सीटों पर जीत-हार का मार्जिन 10 हजार से कम था। 2022 में सपा ने सुभासपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इस इलाके में ये गठबंधन भाजपा पर भारी पड़ा था। भाजपा को 12 सीटों पर, तो सपा को 9 पर जीत मिली थी। सुभासपा और निषाद पार्टी ने 2-2, बसपा और कांग्रेस ने 1-1 सीट जीती थीं। अब सुभासपा भाजपा के साथ है। इस बेल्ट में पिछड़ों वर्ग की आबादी ज्यादा है। भाजपा का इसी पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली सुभासपा और निषाद पार्टी से गठबंधन है। SIR के बाद फरेंदा से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र चौधरी और रसड़ा से बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह की सीट फंसती नजर आ रही है। वजह यह है कि कांग्रेस के वीरेंद्र ने 1246 तो बसपा के उमाशंकर सिंह ने 6583 वोट से जीते थे। जबकि SIR में फरेंदा पर करीब 29 हजार और रसड़ा सीट पर 37 हजार वोट कम हुआ है। वहीं, दुद्धी सीट पर भाजपा जीती थी, लेकिन विधायक राम दुलार गौंड को रेप केस में सजा हो गई। उपचुनाव में ये सीट सपा के विजय सिंह गौंड़ ने जीत ली, लेकिन बीमारी के चलते उनका भी निधन हो चुका है। फिलहाल ये सीट खाली है। सीनियर जर्नलिस्ट आनंद राय कहते हैं- SIR के बाद जारी फाइनल सूची से डुप्लीकेट, ट्रांसफर और मृतकों के नाम अलग किए जा चुके हैं। पलायन सबसे ज्यादा किस जाति समूह का हुआ है, ये पता नहीं चल पाया है। एक आम धारणा है कि यादव और मुस्लिम सपा के वोटर हैं। इसी तरह बसपा को दलित तो सवर्ण और अति पिछड़ी जातियां भाजपा की वोटर मानी जाती हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… 40 मंत्रियों के लिए फाइनल वोटर लिस्ट खतरे की घंटी, यूपी में जितने वोट से चुनाव जीते थे, उससे 10 गुना कट गए यूपी में SIR के आंकड़े बताते हैं कि 40 मंत्री 2022 विधानसभा चुनाव में जितने वोट मार्जिन से जीते थे, उसके 2 से 10 गुना वोटर उनकी सीट पर कम हो गए हैं। इनमें शहरी और ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटें शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…