योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने भाजपा नेतृत्व को खुली धमकी दी है। मंगलवार को उन्होंने गोरखपुर में कहा, यदि भाजपा को लगता है कि हमसे गठबंधन का फायदा नहीं है तो गठबंधन तोड़ दें। क्यों छुटभैया नेताओं से हमारे खिलाफ बयान दिला रहे हैं। संजय निषाद ने कहा, ओमप्रकाश राजभर सुभासपा के अध्यक्ष हैं। वह भाजपा को राजभर समाज के वोट दिला रहे हैं। ओमप्रकाश राजभर को भी बीजेपी के छुटभैया नेताओं से अपशब्द कहलवा रहे हैं। रालोद ने जाट समाज का वोट दिलाया, अभी बीजेपी के एक मंत्री ने रालोद के खिलाफ बयान दिया। मैं भी निषाद समाज का नेता हूं, मैंने भी निषाद समाज का वोट दिलाया है। निषाद समाज के एक छुटभैया नेता से मेरे खिलाफ भी बयानबाजी कराई जा रही है। संजय निषाद ने भाजपा को सलाह भी दी। कहा, भाजपा को इम्पोर्टेड नेताओं से सावधान रहना चाहिए। SP और BSP से आए नेता सहयोगी दलों में घुसकर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए सहयोगी दलों के प्रति सम्मान और भरोसा बनाए रखना जरूरी है। सहयोगी दलों से भरोसे से चलें। राजभर, RLD, निषाद पार्टी पर अपशब्द बंद कराइए। सम्मान और शिष्टाचार कायम रहना चाहिए
मंत्री ने कहा, राजनीतिक विरोधाभास के बीच भी समान सम्मान और शिष्टाचार कायम रहना चाहिए, ताकि उत्तर प्रदेश और देश में स्थिरता बनी रहे। उन्होंने कहा, निषाद समाज 2013 से आरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। निषाद पार्टी समाज के हितों, आरक्षण और राजनीतिक अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। दिल्ली में हुए अधिवेशन में यह संदेश पूरी तरह स्पष्ट हुआ कि निषाद समाज अब राजनीति में अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, सहयोगी दलों के साथ मिलकर काम करना और अपने समाज के हितों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाना पार्टी की प्राथमिकता है। बीजेपी की नैया उनके छुटभैया नेता डुबो रहे
संजय निषाद ने ‘दैनिक भास्कर’ से फोन पर बातचीत में कहा, बीजेपी के नेता जयप्रकाश निषाद ने बीते दिनों बयान दिया है कि निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद आरक्षण के नाम पर समाज को गुमराह कर रहे हैं। इलाहाबाद में बीजेपी नेता पीयूष रंजन निषाद ने भी मेरे खिलाफ मोर्चा खोल रहा है। पीयूष रंजन समाज के लोगों से कहते हैं कि पहले निषाद की टोपी और झंडा हटाओ, फिर बात करो। उधर, राज्यमंत्री रामकेष निषाद भी मेरे खिलाफ बयानबाजी करते हैं। उन्होंने कहा, यह कैसे संभव है कि बीजेपी के नेता सहयोगी दलों के नेताओं के खिलाफ बयान दे रहे हैं और बीजेपी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। इससे पहले प्रदेश सरकार के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने रालोद के खिलाफ बयान दिया, जबकि रालोद ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जाट समाज का वोट दिलाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के छुटभैया राजभर नेता भी सुभासपा के अध्यक्ष और पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ बयानबाजी करते हैं, जबकि ओमप्रकाश ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को राजभर वोट दिलाया था। राजभर जब 2022 में बीजेपी से अलग हुए तो बीजेपी की सीटें कम हो गई थी और सपा की सीटें बढ़ गई थीं। उन्होंने कहा, इसी तरह अपना दल (एस) के उपाध्यक्ष और प्रदेश सरकार के मंत्री आशीष पटेल के खिलाफ भी माहौल बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नहीं चाहती है तो गठबंधन समाप्त कर दे। उन्होंने कहा कि बीजेपी की नैया उनके छुटभैया नेता डुबो रहे हैं। संजय निषाद की 8 बड़ी बातें भाजपा विधायक बेटे को पद से हटाया
डॉ. संजय निषाद ने कहा, हमने परिवारवाद नहीं किया। अपने बेटे को पद से हटाया है दूसरी पार्टी हटाकर देखे। दो दिन पहले संजय निषाद ने अपने भाजपा विधायक बेटे ई. सरवन निषाद को पार्टी के प्रदेश प्रभारी पद से हटा दिया। उनका कहना है कि यह यह बदलाव है। बेटे ई. सरवन को दूसरी और बड़ी जिम्मेदारी देंगे। सरवन निषाद ने चौरी-चौरा से लड़ा था चुनाव
ई. सरवन निषाद ने 2022 का विधानसभा चुनाव चौरी-चौरा से लड़ा था। वह भाजपा के टिकट पर मैदान मे थे और भाजपा विधायक के रूप में विधानसभा पहुंचे। उनके पिता की पार्टी निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) है। भाजपा विधायक बनने से पहले पार्टी में सक्रिय थे। लेकिन भाजपा विधायक बनने के बाद भी उन्हें प्रदेश प्रभारी बनाए रखा गया। अब हाल ही में उनके पिता ने उन्हें पार्टी के प्रदेश प्रभारी पद से हटा दिया है। इस पर सरवन की व्यस्तता का हवाला दिया जा रहा है। सरवन की व्यस्तता भाजपा विधायक के रूप में है। परिवारवाद के आरोपों का जवाब तलाशने की कोशिश
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डा. संजय निषाद ने इस कदम से परिवारवाद के आरोपों का जवाब तलाशने की कोशिश की है। उनपर जब परिवारवाद के आरोप लगते थे तो कोई जवाब नहीं होता था। इस बदलाव से उन्होंने दो कार्यकर्ताओं को प्रदेश अध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी है। लेकिन सवाल अब भी उठेंगे। उनके दो बेटे पार्टी में सक्रिय हैं। जयप्रकाश निषाद पर भड़के हैं संजय निषाद
जयप्रकाश निषाद चौरी चौरा क्षेत्र से विधायक रहे हैं। भाजपा से राज्यसभा सदस्य रहे हैं और इसी पार्टी में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा- यह पॉलिटिकल ड्रामेबाजी है। उनका कहना है कि किसी पार्टी का विधायक दूसरी जगह पदाधिकारी हो ही नहीं सकता। डा. संजय अपने बेटे को हटाने का ड्रामा कर रहे हैं। अभी भी पार्टी में उनके परिवार के लोग ही भरे पड़े हैं। 20 अगस्त को दिल्ली में सम्मेलन किया
संजय निषाद ने 20 अगस्त को दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में सम्मेलन किया। जिसमें जाट, राजभर, निषाद और पटेल समुदाय के लोग पहुंचे थे। इस संजय निषाद ने कहा था, यूपी में पीडीए का एक नरेटिव चल रहा है, लेकिन यह मंच पीडीए नेतृत्व की एकजुटता का असली मंच था। जब सबका दर्द एक जैसा है, तो क्या मंच भी एक जैसा नहीं हो सकता? राजनीतिक इतिहास गवाह है कि ये समुदाय एक साथ आने पर ताकतवर बनते हैं। इस सभा ने साबित कर दिया है कि निषाद समुदाय किसी भी हालत में अपने अधिकारों और हकों से समझौता नहीं करेगा। अगर हमारे लोग दिल्ली आ सकते हैं, तो लखनऊ में विधानसभा घेरने के लिए भी मार्च कर सकते हैं। हमें अपने पूर्वजों के सपनों को साकार करना होगा और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत भविष्य सुनिश्चित करना होगा। जानिए क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक गोरखपुर विश्वविद्यालय के पॉलिटिकल साइंस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. अमित उपाध्याय ने कहा- चूंकि निषाद पार्टी, भाजपा की सहयोगी पार्टी है इसलिए व्यावहारिक रूप से ई. सरवन निषाद अपने पिता की पार्टी में काम करते रहे होंगे। उन्हें पद से हटाकर डा. संजय ने परिवारवाद के आरोपों से बचने की कोशिश की है। ———————— ये खबर भी पढ़ें…
रामभद्राचार्य बोले- प्रेमानंद पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की; मिलेंगे तो गले लगाऊंगा; वह मेरे बालक के समान; सनातन धर्म पर हमले हो रहे संत प्रेमानंद महाराज पर टिप्पणी के बाद मथुरा के संतों में उबाल है। विवाद बढ़ता देख तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा- मैंने प्रेमानंद पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है। वह मेरे बालक के समान हैं। वह जब भी मेरे पास मिलने आएंगे। मैं उनको गले से लगाऊंगा, उन्हें आशीर्वाद दूंगा। साथ ही भगवान रामचंद्र से उनकी दीर्घायु की कामना करूंगा। पढ़िए पूरी खबर
मंत्री ने कहा, राजनीतिक विरोधाभास के बीच भी समान सम्मान और शिष्टाचार कायम रहना चाहिए, ताकि उत्तर प्रदेश और देश में स्थिरता बनी रहे। उन्होंने कहा, निषाद समाज 2013 से आरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। निषाद पार्टी समाज के हितों, आरक्षण और राजनीतिक अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। दिल्ली में हुए अधिवेशन में यह संदेश पूरी तरह स्पष्ट हुआ कि निषाद समाज अब राजनीति में अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, सहयोगी दलों के साथ मिलकर काम करना और अपने समाज के हितों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाना पार्टी की प्राथमिकता है। बीजेपी की नैया उनके छुटभैया नेता डुबो रहे
संजय निषाद ने ‘दैनिक भास्कर’ से फोन पर बातचीत में कहा, बीजेपी के नेता जयप्रकाश निषाद ने बीते दिनों बयान दिया है कि निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद आरक्षण के नाम पर समाज को गुमराह कर रहे हैं। इलाहाबाद में बीजेपी नेता पीयूष रंजन निषाद ने भी मेरे खिलाफ मोर्चा खोल रहा है। पीयूष रंजन समाज के लोगों से कहते हैं कि पहले निषाद की टोपी और झंडा हटाओ, फिर बात करो। उधर, राज्यमंत्री रामकेष निषाद भी मेरे खिलाफ बयानबाजी करते हैं। उन्होंने कहा, यह कैसे संभव है कि बीजेपी के नेता सहयोगी दलों के नेताओं के खिलाफ बयान दे रहे हैं और बीजेपी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। इससे पहले प्रदेश सरकार के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने रालोद के खिलाफ बयान दिया, जबकि रालोद ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जाट समाज का वोट दिलाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के छुटभैया राजभर नेता भी सुभासपा के अध्यक्ष और पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ बयानबाजी करते हैं, जबकि ओमप्रकाश ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को राजभर वोट दिलाया था। राजभर जब 2022 में बीजेपी से अलग हुए तो बीजेपी की सीटें कम हो गई थी और सपा की सीटें बढ़ गई थीं। उन्होंने कहा, इसी तरह अपना दल (एस) के उपाध्यक्ष और प्रदेश सरकार के मंत्री आशीष पटेल के खिलाफ भी माहौल बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नहीं चाहती है तो गठबंधन समाप्त कर दे। उन्होंने कहा कि बीजेपी की नैया उनके छुटभैया नेता डुबो रहे हैं। संजय निषाद की 8 बड़ी बातें भाजपा विधायक बेटे को पद से हटाया
डॉ. संजय निषाद ने कहा, हमने परिवारवाद नहीं किया। अपने बेटे को पद से हटाया है दूसरी पार्टी हटाकर देखे। दो दिन पहले संजय निषाद ने अपने भाजपा विधायक बेटे ई. सरवन निषाद को पार्टी के प्रदेश प्रभारी पद से हटा दिया। उनका कहना है कि यह यह बदलाव है। बेटे ई. सरवन को दूसरी और बड़ी जिम्मेदारी देंगे। सरवन निषाद ने चौरी-चौरा से लड़ा था चुनाव
ई. सरवन निषाद ने 2022 का विधानसभा चुनाव चौरी-चौरा से लड़ा था। वह भाजपा के टिकट पर मैदान मे थे और भाजपा विधायक के रूप में विधानसभा पहुंचे। उनके पिता की पार्टी निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) है। भाजपा विधायक बनने से पहले पार्टी में सक्रिय थे। लेकिन भाजपा विधायक बनने के बाद भी उन्हें प्रदेश प्रभारी बनाए रखा गया। अब हाल ही में उनके पिता ने उन्हें पार्टी के प्रदेश प्रभारी पद से हटा दिया है। इस पर सरवन की व्यस्तता का हवाला दिया जा रहा है। सरवन की व्यस्तता भाजपा विधायक के रूप में है। परिवारवाद के आरोपों का जवाब तलाशने की कोशिश
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डा. संजय निषाद ने इस कदम से परिवारवाद के आरोपों का जवाब तलाशने की कोशिश की है। उनपर जब परिवारवाद के आरोप लगते थे तो कोई जवाब नहीं होता था। इस बदलाव से उन्होंने दो कार्यकर्ताओं को प्रदेश अध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी है। लेकिन सवाल अब भी उठेंगे। उनके दो बेटे पार्टी में सक्रिय हैं। जयप्रकाश निषाद पर भड़के हैं संजय निषाद
जयप्रकाश निषाद चौरी चौरा क्षेत्र से विधायक रहे हैं। भाजपा से राज्यसभा सदस्य रहे हैं और इसी पार्टी में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा- यह पॉलिटिकल ड्रामेबाजी है। उनका कहना है कि किसी पार्टी का विधायक दूसरी जगह पदाधिकारी हो ही नहीं सकता। डा. संजय अपने बेटे को हटाने का ड्रामा कर रहे हैं। अभी भी पार्टी में उनके परिवार के लोग ही भरे पड़े हैं। 20 अगस्त को दिल्ली में सम्मेलन किया
संजय निषाद ने 20 अगस्त को दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में सम्मेलन किया। जिसमें जाट, राजभर, निषाद और पटेल समुदाय के लोग पहुंचे थे। इस संजय निषाद ने कहा था, यूपी में पीडीए का एक नरेटिव चल रहा है, लेकिन यह मंच पीडीए नेतृत्व की एकजुटता का असली मंच था। जब सबका दर्द एक जैसा है, तो क्या मंच भी एक जैसा नहीं हो सकता? राजनीतिक इतिहास गवाह है कि ये समुदाय एक साथ आने पर ताकतवर बनते हैं। इस सभा ने साबित कर दिया है कि निषाद समुदाय किसी भी हालत में अपने अधिकारों और हकों से समझौता नहीं करेगा। अगर हमारे लोग दिल्ली आ सकते हैं, तो लखनऊ में विधानसभा घेरने के लिए भी मार्च कर सकते हैं। हमें अपने पूर्वजों के सपनों को साकार करना होगा और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत भविष्य सुनिश्चित करना होगा। जानिए क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक गोरखपुर विश्वविद्यालय के पॉलिटिकल साइंस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. अमित उपाध्याय ने कहा- चूंकि निषाद पार्टी, भाजपा की सहयोगी पार्टी है इसलिए व्यावहारिक रूप से ई. सरवन निषाद अपने पिता की पार्टी में काम करते रहे होंगे। उन्हें पद से हटाकर डा. संजय ने परिवारवाद के आरोपों से बचने की कोशिश की है। ———————— ये खबर भी पढ़ें…
रामभद्राचार्य बोले- प्रेमानंद पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की; मिलेंगे तो गले लगाऊंगा; वह मेरे बालक के समान; सनातन धर्म पर हमले हो रहे संत प्रेमानंद महाराज पर टिप्पणी के बाद मथुरा के संतों में उबाल है। विवाद बढ़ता देख तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा- मैंने प्रेमानंद पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है। वह मेरे बालक के समान हैं। वह जब भी मेरे पास मिलने आएंगे। मैं उनको गले से लगाऊंगा, उन्हें आशीर्वाद दूंगा। साथ ही भगवान रामचंद्र से उनकी दीर्घायु की कामना करूंगा। पढ़िए पूरी खबर