मंत्री संजय निषाद ने राप्ती नदी में डाली मछली:पत्नी- बेटे के साथ नाव भी खेई; कहा- राहुल मछली पकड़ रहे, हम डाल रहे

यूपी सरकार में मत्स्य विभाग के मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद गुरुवार को राप्ती नदी में मछलियां डालते नजर आए। वह अपनी पत्नी और बेटे पूर्व सांसद प्रवीण निषाद के साथ राजघाट पहुंचे थे। नाव से ही उन्होंने मछलियों के बीज नदी में डाले। चप्पू से उन्होंने नाव भी खेई। राहुल गांधी के मछली पकड़ने पर उन्होंने कहा- वह मछली पकड़ रहे हैं और हम डाल रहे हैं। दोनों में यही अंतर है। 70 साल तक मछली और मछुआरों से दूर रहे और अब दिखावा कर रहे हैं। डा. संजय निषाद प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत संचालित रिवर रीचिंग प्रोग्राम को बढ़ावा देने राप्ती नदी के घाट पर गए थे। उनके साथ मत्स्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी थे। बड़ी संख्या में मछलियों को नदी में डाला गया। डा. संजय निषाद ने चप्पू मांगा और खड़े-खड़े नाव खेने लगे। बिहार में एनडीए की सरकार बनेगी
इस दौरान डा. संजय निषाद ने कहा- बिहार में एनडीए की सरकार की बनेगी। उन्होंने कहा कि जब तक एनडीए में मैं हूं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, तब तक एनडीए की सरकार ही बनेगी। बिहार का 18 प्रतिशत मछुआरा समाज आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए के साथ है। 70 साल से मछली मार रहे थे, अब पाल रहे
डा. संजय निषाद ने कहा- 70 साल से निषाद समाज के लोग केवल मछलियां मार रहे थे। लेकिन जब से एनडीए की सरकार बनी है, मछलियां पालने का काम भी शुरू हो गया है। इससे मछुआरा समाज की आय में वृद्धि हो रही है। उनका जीवन स्तर सुधर रहा है। उन्होंने कहा- सरकार मछुआरा समाज के हित में कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। राहुल गांधी मछली पकड़ रहे, हम डाल रहे यहीं फर्क है
डा. संजय निषाद ने राहुल गांधी के मछली पकड़ने पर कहा- वह मछली पकड़ रहे हैं और हम डाल रहे हैं। दोनों में यही अंतर है। 70 साल तक मछली और मछुआरों से दूर रहे और अब दिखावा कर रहे हैं। जानिए क्या है रिवर रीचिंग प्रोग्राम
रिवर रीचिंग प्रोग्राम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत शुरू किया गया एक विशेष कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य नदियों में मछली पुनरुत्थान को बढ़ावा देना है, ताकि मछली पालन को प्रोत्साहित किया जा सके और नदियों की जैव विविधता को बनाए रखा जा सके। इसमें नदी के जल में मछलियों के बीज (spawn या fry) को छोड़कर उनकी संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाता है, जिससे स्थानीय मछुआरों को आर्थिक लाभ भी मिलता है। यह कार्यक्रम नदियों के प्रदूषण को कम करने, जल की गुणवत्ता सुधारने और मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए भी काम करता है।