सावन…भगवान शिव की भक्ति का महीना। हर तरफ कंधे पर कांवड़ उठाए लोग शिवालयों की तरफ नंगे पांव चल पड़े हैं। हर भक्त की अपनी एक कहानी और मान्यता है। कोई भगवान से चाहता है कि उसकी बेटी ठीक हो जाए। तो कोई चाहता है कि उसके गांव से कभी सरकारी नौकरी न पाने वाला कलंक मिट जाए। कुछ ऐसे भी हैं, जिनके साथ पहले बहुत बुरा हुआ था और फिर उन्होंने मान्यता मांगी कि सब कुछ सही होगा तो कांवड़ लेकर जाएंगे। जब सब सही होना शुरू हुआ तो वह कांवड़ लेकर निकल पड़े। सबको भगवान शिव पर भरोसा है कि उनके साथ अब सब अच्छा होगा। हमने यूपी के अलग-अलग हिस्सों के कांवड़ियों से उनकी कहानी सुनी। संडे बिग स्टोरी में कांवड़ियों की आस्था-विश्वास से जुड़ी कहानियां। कांवड़ उठाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? कांवड़िया कौन थे? जानिए… सपना का भरोसा- हरिद्वार से चलते ही ठीक होने लगी बिटिया
दिल्ली के नंदनगरी की सपना ने एक साल पहले बेटी को जन्म दिया। बेटी आए दिन बीमार रहने लगी। उसे गंभीर निमोनिया हो गया। डॉक्टरों ने कह दिया कि लास्ट स्टेज है। सपना टेंशन में आ गईं। महादेव से मन्नत मांगी कि मैं कांवड़ लाऊंगी, बेटी को किसी तरह ठीक कर दो। निमोनिया पीड़ित बेटी को लेकर सपना हरिद्वार आ गईं। साथ में सपना की मां, दो बहनें, भाई, मामी और मामी की लड़कियां हैं। हरिद्वार में हर की पैड़ी से गंगाजल भरा और बेटी को वॉकर में बैठाकर उसे दिल्ली ले जा रही हैं। सपना को विश्वास है कि जब से हरिद्वार से कांवड़ यात्रा शुरू की, बेटी की तबीयत ठीक होने लगी है। इस यात्रा को 3 दिन हो चुके हैं, लेकिन एक भी दिन दवा खिलाने की नौबत नहीं आई। सपना कहती हैं- इससे पहले कोई दिन ऐसा नहीं जाता था, जब बेटी को दवा न खिलानी पड़ती हो। शायद महादेव ने हमारी सुन ली है। सपना बताती हैं- मैं बेटी की सभी दवाइयां, कपड़े और खाने-पीने की चीजें साथ लाई हूं। बेटी को कोई दिक्कत नहीं हो रही। वो वॉकर में बैठकर चलते हुए खुश दिखती है। दूसरे कांवड़िए रास्ते में उसको खिलाते हैं। मन्नत से बेटी पैदा हुई तो हरिद्वार से गंगाजल ला रहीं श्वेता
गाजियाबाद में मोदीपुरम की श्वेता डेढ़ साल की बेटी के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर आ रही हैं। श्वेता बताती हैं- शादी को 4 साल पूरे हो गए, लेकिन कोई बच्चा नहीं हुआ। तमाम डॉक्टरों को दिखाया। सबने यही कहा कि बच्चा होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने सुना है कि जब सब जगह से थक जाते हैं, तो महादेव जरूर सुनते हैं। मैंने महादेव से प्रार्थना की और मन्नत मांगी कि अगर बच्चा हुआ तो कांवड़ लेकर जरूर आऊंगी। डेढ़ साल पहले मुझे बेटी हुई। अब उसी बेटी के साथ गंगाजल लेकर हरिद्वार से आ रही हूं। बेटी एकदम स्वस्थ है। गांव में पढ़ाई का महत्व हो इसलिए कांवड़ उठाई
आजमगढ़ से 15 साल का विनीत भी कांवड़ यात्रा में शामिल हुआ है। विनीत भी काशी से जल उठाकर चितारा ले जाएगा। उसने दूसरी बार कांवड़ उठाई है। विनीत से हमने पूछा कि क्या वजह है, जो इतनी छोटी-सी उम्र में कांवड़ उठा रहे हो? विनीत कहता है, भगवान से हम सबसे पहले तो यह मांगेंगे कि हमें 12वीं में पास करवा दें। साथ ही परिवार की तरक्की की बात की। विनीत ने शुरुआत में जो बताया, वह तो उसके अपने जीवन से जुड़ा है। लेकिन, कांवड़ उठाने के पीछे एक और गंभीर बात बताई। उसने कहा कि हमारे गांव में पढ़ाई का कोई माहौल नहीं है। गांव में कोई पढ़ाई भी नहीं करता। इक्का-दुक्का लोग ही ग्रेजुएशन हैं, लेकिन आज तक किसी को नौकरी नहीं मिली। हमने भगवान शिव से यह मांगने के लिए कांवड़ उठाई है कि हमारे गांव में पढ़ाई को लेकर माहौल बने और लोगों को सरकारी नौकरी मिलना शुरू हो जाए। हमें भरोसा है कि भगवान शिव हमारी यह मन्नत पूरी करेंगे। अचानक बेहोश हो जाता था, कांवड़ उठाया तो सही हो गया
जौनपुर के शाहगंज इलाके से 25 साल के संदीप राजभर वाराणसी पहुंचे हैं। यहां वह भगवान विश्वनाथ के दर्शन करेंगे और फिर कांवड़ उठाकर करीब 120 किलोमीटर पैदल चलेंगे। वह आजमगढ़ के चितारा के शिवालय में जल चढ़ाएंगे। संदीप कहते हैं- हम लगातार चौथी बार कांवड़ उठाने आए हैं। जब तक कांवड़ नहीं उठाते थे, बहुत परेशान रहते थे। घर में माता-पिता भी हमेशा बीमार रहते थे। संदीप से हमने पूछा कि आप किन परेशानियों से जूझ रहे थे? वह कहते हैं- पहले मैं चलते-चलते गिर जाता था। बेहोश हो जाता था। इलाज करवाया, लेकिन आराम नहीं होता था। माता-पिता का भी यही हाल था। फिर हमने तय किया कि अब कांवड़ लेकर जाएंगे। पहली बार कांवड़ उठाई, तभी ठीक होने लगे। अब एकदम ठीक हूं। हम तो बस यही चाहते हैं कि भगवान शिव हम सबका कल्याण करें। बबली को आस, भोलेशंकर परिवार को कर्जमुक्त कराएंगे
दिल्ली में भोपुरा बॉर्डर के आसपास रहने वाली बबली को उम्मीद है कि भोलेनाथ कर्ज मुक्त करा देंगे। इसी आस में वह अपने 8 साल के पोते के साथ कांवड़ लेकर हरिद्वार से आ रही हैं। बबली बताती हैं- मैंने अपने दोनों बेटों की शादी की। इस वजह से परिवार पर करीब 7-8 लाख रुपए का कर्ज हो गया। बड़ा बेटा 36 हजार रुपए महीने की जॉब करता है। इसके बावजूद कर्ज नहीं चुकाया जा रहा। ऐसे में कर्जदार लगातार परिवार को परेशान कर रहे हैं। बबली कहती हैं कि महादेव से ही अब आखिरी उम्मीद है। इसी उम्मीद के साथ गंगाजल लेकर हरिद्वार से दिल्ली की तरफ बढ़ रही हूं। बबली की कांवड़ यात्रा 13 जुलाई को हरिद्वार से शुरू हुई थी। 19 जुलाई को उन्होंने मेरठ क्रॉस किया। 22 जुलाई तक वह दिल्ली पहुंचकर गंगाजल से महादेव का जलाभिषेक करेंगी। कांवड़ से जुड़े ये फैक्ट भी जानिए ———————– ये खबर भी पढ़ें… 60 साल की महिलाएं कांवड़ लेकर 120 KM पैदल चलीं, पति-बच्चे भी साथ; एक का हाथ टूटा, फिर भी कांवड़ उठाई प्रयागराज की ममता निषाद कांवड़ लेकर 120 किलोमीटर पैदल चलीं। सुल्तानगंज से देवघर गईं। इसे पूरा करने में 6 दिन लग गए। इसके बाद वाराणसी में काशी विश्वनाथ के दर्शन करने आईं। ‘दैनिक भास्कर’ के माइक पर अपनी यात्रा के बारे में बताया। पढ़ें पूरी खबर
दिल्ली के नंदनगरी की सपना ने एक साल पहले बेटी को जन्म दिया। बेटी आए दिन बीमार रहने लगी। उसे गंभीर निमोनिया हो गया। डॉक्टरों ने कह दिया कि लास्ट स्टेज है। सपना टेंशन में आ गईं। महादेव से मन्नत मांगी कि मैं कांवड़ लाऊंगी, बेटी को किसी तरह ठीक कर दो। निमोनिया पीड़ित बेटी को लेकर सपना हरिद्वार आ गईं। साथ में सपना की मां, दो बहनें, भाई, मामी और मामी की लड़कियां हैं। हरिद्वार में हर की पैड़ी से गंगाजल भरा और बेटी को वॉकर में बैठाकर उसे दिल्ली ले जा रही हैं। सपना को विश्वास है कि जब से हरिद्वार से कांवड़ यात्रा शुरू की, बेटी की तबीयत ठीक होने लगी है। इस यात्रा को 3 दिन हो चुके हैं, लेकिन एक भी दिन दवा खिलाने की नौबत नहीं आई। सपना कहती हैं- इससे पहले कोई दिन ऐसा नहीं जाता था, जब बेटी को दवा न खिलानी पड़ती हो। शायद महादेव ने हमारी सुन ली है। सपना बताती हैं- मैं बेटी की सभी दवाइयां, कपड़े और खाने-पीने की चीजें साथ लाई हूं। बेटी को कोई दिक्कत नहीं हो रही। वो वॉकर में बैठकर चलते हुए खुश दिखती है। दूसरे कांवड़िए रास्ते में उसको खिलाते हैं। मन्नत से बेटी पैदा हुई तो हरिद्वार से गंगाजल ला रहीं श्वेता
गाजियाबाद में मोदीपुरम की श्वेता डेढ़ साल की बेटी के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर आ रही हैं। श्वेता बताती हैं- शादी को 4 साल पूरे हो गए, लेकिन कोई बच्चा नहीं हुआ। तमाम डॉक्टरों को दिखाया। सबने यही कहा कि बच्चा होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने सुना है कि जब सब जगह से थक जाते हैं, तो महादेव जरूर सुनते हैं। मैंने महादेव से प्रार्थना की और मन्नत मांगी कि अगर बच्चा हुआ तो कांवड़ लेकर जरूर आऊंगी। डेढ़ साल पहले मुझे बेटी हुई। अब उसी बेटी के साथ गंगाजल लेकर हरिद्वार से आ रही हूं। बेटी एकदम स्वस्थ है। गांव में पढ़ाई का महत्व हो इसलिए कांवड़ उठाई
आजमगढ़ से 15 साल का विनीत भी कांवड़ यात्रा में शामिल हुआ है। विनीत भी काशी से जल उठाकर चितारा ले जाएगा। उसने दूसरी बार कांवड़ उठाई है। विनीत से हमने पूछा कि क्या वजह है, जो इतनी छोटी-सी उम्र में कांवड़ उठा रहे हो? विनीत कहता है, भगवान से हम सबसे पहले तो यह मांगेंगे कि हमें 12वीं में पास करवा दें। साथ ही परिवार की तरक्की की बात की। विनीत ने शुरुआत में जो बताया, वह तो उसके अपने जीवन से जुड़ा है। लेकिन, कांवड़ उठाने के पीछे एक और गंभीर बात बताई। उसने कहा कि हमारे गांव में पढ़ाई का कोई माहौल नहीं है। गांव में कोई पढ़ाई भी नहीं करता। इक्का-दुक्का लोग ही ग्रेजुएशन हैं, लेकिन आज तक किसी को नौकरी नहीं मिली। हमने भगवान शिव से यह मांगने के लिए कांवड़ उठाई है कि हमारे गांव में पढ़ाई को लेकर माहौल बने और लोगों को सरकारी नौकरी मिलना शुरू हो जाए। हमें भरोसा है कि भगवान शिव हमारी यह मन्नत पूरी करेंगे। अचानक बेहोश हो जाता था, कांवड़ उठाया तो सही हो गया
जौनपुर के शाहगंज इलाके से 25 साल के संदीप राजभर वाराणसी पहुंचे हैं। यहां वह भगवान विश्वनाथ के दर्शन करेंगे और फिर कांवड़ उठाकर करीब 120 किलोमीटर पैदल चलेंगे। वह आजमगढ़ के चितारा के शिवालय में जल चढ़ाएंगे। संदीप कहते हैं- हम लगातार चौथी बार कांवड़ उठाने आए हैं। जब तक कांवड़ नहीं उठाते थे, बहुत परेशान रहते थे। घर में माता-पिता भी हमेशा बीमार रहते थे। संदीप से हमने पूछा कि आप किन परेशानियों से जूझ रहे थे? वह कहते हैं- पहले मैं चलते-चलते गिर जाता था। बेहोश हो जाता था। इलाज करवाया, लेकिन आराम नहीं होता था। माता-पिता का भी यही हाल था। फिर हमने तय किया कि अब कांवड़ लेकर जाएंगे। पहली बार कांवड़ उठाई, तभी ठीक होने लगे। अब एकदम ठीक हूं। हम तो बस यही चाहते हैं कि भगवान शिव हम सबका कल्याण करें। बबली को आस, भोलेशंकर परिवार को कर्जमुक्त कराएंगे
दिल्ली में भोपुरा बॉर्डर के आसपास रहने वाली बबली को उम्मीद है कि भोलेनाथ कर्ज मुक्त करा देंगे। इसी आस में वह अपने 8 साल के पोते के साथ कांवड़ लेकर हरिद्वार से आ रही हैं। बबली बताती हैं- मैंने अपने दोनों बेटों की शादी की। इस वजह से परिवार पर करीब 7-8 लाख रुपए का कर्ज हो गया। बड़ा बेटा 36 हजार रुपए महीने की जॉब करता है। इसके बावजूद कर्ज नहीं चुकाया जा रहा। ऐसे में कर्जदार लगातार परिवार को परेशान कर रहे हैं। बबली कहती हैं कि महादेव से ही अब आखिरी उम्मीद है। इसी उम्मीद के साथ गंगाजल लेकर हरिद्वार से दिल्ली की तरफ बढ़ रही हूं। बबली की कांवड़ यात्रा 13 जुलाई को हरिद्वार से शुरू हुई थी। 19 जुलाई को उन्होंने मेरठ क्रॉस किया। 22 जुलाई तक वह दिल्ली पहुंचकर गंगाजल से महादेव का जलाभिषेक करेंगी। कांवड़ से जुड़े ये फैक्ट भी जानिए ———————– ये खबर भी पढ़ें… 60 साल की महिलाएं कांवड़ लेकर 120 KM पैदल चलीं, पति-बच्चे भी साथ; एक का हाथ टूटा, फिर भी कांवड़ उठाई प्रयागराज की ममता निषाद कांवड़ लेकर 120 किलोमीटर पैदल चलीं। सुल्तानगंज से देवघर गईं। इसे पूरा करने में 6 दिन लग गए। इसके बाद वाराणसी में काशी विश्वनाथ के दर्शन करने आईं। ‘दैनिक भास्कर’ के माइक पर अपनी यात्रा के बारे में बताया। पढ़ें पूरी खबर