टाइम – 10.45 बजे (रात), 23 जनवरी, 2025 स्पॉट – महाकुंभ में किन्नर अखाड़े का टेंट… मुख्य आसन पर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी बैठी थीं। करीब ही बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी मौजूद थीं। दूसरी तरफ जो अखाड़े के कुछ अहम चेहरे बैठे थे, उनमें कौशल्या नंद गिरि उर्फ टीना मां भी शामिल थीं। अचानक डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी कहती हैं- ममता कुलकर्णी अपने अखाड़े में महामंडलेश्वर बनेंगी, यह अंतिम निर्णय है…। कुछ देर तक टेंट में सन्नाटा पसर जाता है। फिर इस आयोजन को कैसे करना है, इसकी चर्चा शुरू हो गई। टीना मां उस वक्त मौन रहती हैं, फिर धीरे से वह उठकर बाहर चली जाती हैं। यही वो घटना थी, जब किन्नर अखाड़ा 2 हिस्सों में बंटने की शुरुआत होती है। अखाड़े में किसी ने मुखर होकर कुछ नहीं कहा, लेकिन सबको पता था कि टीना मां को ये फैसला पसंद नहीं आया। 24 जनवरी को ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बना दिया गया। उनका पट्टाभिषेक भी भव्य तरीके से किया गया। इस घटना के 3 महीने बाद टीना मां खुलकर बगावत की और अपना नया अखाड़ा बना लिया। अब वो सनातनी किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर बन गई हैं। टीना मां, ममता कुलकर्णी से नाराज क्यों हैं? नए अखाड़े को बनाने के पीछे के बड़े चेहरे कौन हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बता दें, किन्नर अखाड़े में डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के बाद सबसे ज्यादा आशीर्वाद लेने वालों की लाइन महामंडलेश्वर टीना मां के पास रहती थी। टीना मां से जब अलग अखाड़ा बनाने का सवाल पूछा गया, तब वह कहती हैं- किन्नर अखाड़ा अपने एजेंडे से कहीं न कहीं भटक चुका है। ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बना दिया गया, जिसका नाम दाउद जैसे देशद्रोही से जुड़ा है। शांडिल्य महाराज बोले- ममता के अखाड़े में आने से संत भी नाराज
ममता कुलकर्णी से टीना मां की नाराजगी पर हमने श्रृंगवेरपुर धाम की पीठाधीश्वर जगद्गुरु शांडिल्य महाराज से सवाल किया। वो कहते हैं- किन्नर अखाड़ा में ममता कुलकर्णी के आने के बाद से विवाद देखा गया है। टीना मां ने नया अखाड़ा बनाया। शायद वह नहीं चाहती थीं कि ममता कुलकर्णी जैसे विवादित लोग अखाड़े में महामंडलेश्वर बनें। सिर्फ टीना मां ही नहीं, ममता कुलकर्णी के आने से कहीं न कहीं सभी सनातनियों और साधु संतों में आक्रोश है। मुझे लगता है कि नया अखाड़ा बनाने के पीछे ये कारण भी हो सकता है कि वह भविष्य में होने वाले संभावित विवादों को ध्यान में रखते हुए किन्नरों के एक गुट को लेकर अलग हो गई हो। क्योंकि, हाल में ममता कुलकर्णी ने फिर दाउद को लेकर एक विवादित बयान दिया। इससे उनकी मानसिकता का पता चलता है। सनातनी किन्नर अखाड़े के पीछे के किरदारों भी जानिए
टीना मां की बगावत उनके अकेले की नहीं थी। सनातनी किन्नर अखाड़ा की स्थापना के पीछे 3 अहम किरदार भी रहे, जिन्होंने टीना मां के साथ मिलकर पूरा ब्लू प्रिंट तैयार किया। दैनिक भास्कर रिपोर्टर किन्नर अखाड़े के अलग-अलग सदस्यों से बात करने के बाद इन किरदारों तक भी पहुंचे। भवानी मां ने किन्नर अखाड़े से अलग होकर कुछ साल पहले ही वाल्मीकि अखाड़ा बनाया था। माघ मेले में इस अखाड़े के नाम से इन्हें शिविर में भी अलॉट होता रहा है। लेकिन, भवानी मां के साथ किन्नर समुदाय के लोग नहीं थे। इससे उनका अखाड़ा स्वरूप नहीं ले पाया था। वह भी टीना मां के साथ आ गई हैं। वह अब इस अखाड़े में पीठाधीश्वर के पद पर हैं। सनातनी किन्नर अखाड़ा बनाने के पीछे डाली मां की भी अहम भूमिका बताई जा रही है। टीना मां के अखाड़े में यह पीठाधीश्वर बनाई गई हैं। मुंबई के पालघर स्थित विष्णु मोहनी मठ से गौरी मां ने टीना मां के सपोर्ट में हैं। हिमांगी सखी ने कहा- टीना मां का फैसला सही
हिमांगी सखी भी कभी किन्नर अखाड़े से जुड़ी थीं। लेकिन, महाकुंभ के पहले ही उन्होंने वैष्णव किन्नर अखाड़ा बनाने का दावा किया था। अपने अखाड़े की वह जगद्गुरु हैं। महाकुंभ में किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी और हिमांगी सखी के बीच काफी रार ठनी थी। हिमांगी सखी ने डॉ. त्रिपाठी और उनके लोगों पर मारने का आरोप भी लगाया था। अब हिमांगी सखी भी टीना मां के समर्थन में उतर गई हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से टेलीफोन पर कहा- किन्नर अखाड़ा धर्म के रास्ते को छोड़कर पथभ्रष्ट हो चुका है। टीना मां ने सही समय पर सही निर्णय लिया है। हमारा वैष्णव किन्नर अखाड़ा उनके समर्थन में है। जल्द ही दिल्ली से प्रयागराज आकर टीना को बधाई दूंगी। टीना मां बोलीं- सनातन को विस्तार देंगे, चाहे अपने लोगों की आहुति देनी पड़े दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत के दौरान टीना मां ने कहा- साल-2019 से हम किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर रहे, लेकिन यह कुछ समय से उस रास्ते से भटक गया है। यही कारण रहा कि हमारी विचारधारा उस अखाड़े से नहीं मिल रही थी, इसलिए उससे मैं निकल गई हूं। अब हमने नया “सनानती किन्नर अखाड़ा” बनाया है। टीना मां ने कहा- अपने नए अखाड़े के जरिए हम सनातन को और मजबूत करेंगे। इस सनातन धर्म का और विस्तार करेंगे। इसके लिए अगर हमें अपने लोगों की आहुति भी देनी पड़ी, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। किन्नर अखाड़ा बनने की कहानी 3 सवालों में जानिए- सवाल- किन्नर अखाड़े की शुरुआत कब हुई?
जवाब- साल 2015 में एक्टिविस्ट और किन्नरों की लीडर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने किन्नर अखाड़े की स्थापना की। उन्होंने अपने साथियों के साथ किन्नर समाज को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए इसे शुरू किया। किन्नर अखाड़ा बनाने के पीछे वो तर्क देती हैं, किन्नरों को समाज में सम्मान दिलाने के लिए इसकी शुरुआत की। एक इंटरव्यू में वो कहती हैं, कानून बन जाने के बाद भी जब तक समाज न स्वीकार करे, जीत अधूरी है। धर्म उसे समाज से जोड़ने का जरिया है। वो कहती हैं कि धर्म के जरिए सीधे लोगों से जुड़ा जा सकता है, जो एक्टिविजम से नहीं हो पाएगा। LGBTQ समुदाय के एक्टिविस्ट सिर्फ आपस के अपने समूहों से जुड़े होते हैं। यह एक इको चैंबर जैसा है। सवाल- पहली बार किन्नर अखाड़ा कुंभ में कब शामिल हुआ?
जवाब- किन्नर अखाड़ा सबसे पहले 2016 में उज्जैन कुंभ में शामिल हुआ था। उसके बाद 2019 में प्रयागराज के कुंभ मेले में शामिल हुआ। तब इस अखाड़े के टेंट में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी। अखाड़ों के इतिहास में यह पहली बार था, जब किन्नर समूह का एक अलग अखाड़ा बना था। किन्नर अखाड़ा, जूना अखाड़ा के साथ ही जुड़ा है। कुंभ 2019 में किन्नर अखाड़े ने देवत्व यात्रा यानी पेशवाई निकाली थी। इसमें अखाड़े की महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के अलावा पीठाधीश्वर प्रभारी उज्जैन की पवित्रा माई, उत्तर भारत की महामंडलेश्वर भवानी मां और महामंडलेश्वर डॉ. राज राजेश्वरी भी पहुंची थीं। सवाल- क्या किन्नर अखाड़े को मान्यता है?
जवाब- किन्नर अखाड़ा शुरू हुए 10 साल बीत गए हैं। वो प्रयागराज से लेकर उज्जैन तक के धार्मिक आयोजनों में शामिल हो चुका है। इसके बावजूद अखाड़ों को मान्यता देने वाली संस्था ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ की तरफ से किन्नर अखाड़े को आज तक मान्यता नहीं मिली। जब इस अखाड़े की शुरुआत की गई, तब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इसका विरोध किया था। ऐसे में, आधिकारिक रूप से 2019 के प्रयागराज के कुंभ में किन्नर अखाड़े के पास शामिल होने की इजाजत नहीं थी। तब किन्नर अखाड़े ने यह कहते हुए महाकुंभ में शिरकत की कि वे उप-देवता हैं। इसलिए उन्हें किसी मान्यता की जरूरत नहीं। यही वजह है कि आज भी यह अखाड़ा जूना अखाड़े के तहत आता है। इसे अलग अखाड़े की मान्यता नहीं दी गई है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें – ममता कुलकर्णी बोलीं- जिससे मेरा नाम जुड़ा, वो आतंकी नहीं, दाऊद से कोई नाता नहीं 90 के दशक की मशहूर अदाकारा ममता कुलकर्णी का अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। गोरखपुर में उन्होंने कहा, उसने कोई बम ब्लास्ट नहीं किया, वह आतंकी नहीं है। VIDEO में जानिए पूरा विवाद और महामंडलेश्वर के पास कितना पैसा है?
ममता कुलकर्णी से टीना मां की नाराजगी पर हमने श्रृंगवेरपुर धाम की पीठाधीश्वर जगद्गुरु शांडिल्य महाराज से सवाल किया। वो कहते हैं- किन्नर अखाड़ा में ममता कुलकर्णी के आने के बाद से विवाद देखा गया है। टीना मां ने नया अखाड़ा बनाया। शायद वह नहीं चाहती थीं कि ममता कुलकर्णी जैसे विवादित लोग अखाड़े में महामंडलेश्वर बनें। सिर्फ टीना मां ही नहीं, ममता कुलकर्णी के आने से कहीं न कहीं सभी सनातनियों और साधु संतों में आक्रोश है। मुझे लगता है कि नया अखाड़ा बनाने के पीछे ये कारण भी हो सकता है कि वह भविष्य में होने वाले संभावित विवादों को ध्यान में रखते हुए किन्नरों के एक गुट को लेकर अलग हो गई हो। क्योंकि, हाल में ममता कुलकर्णी ने फिर दाउद को लेकर एक विवादित बयान दिया। इससे उनकी मानसिकता का पता चलता है। सनातनी किन्नर अखाड़े के पीछे के किरदारों भी जानिए
टीना मां की बगावत उनके अकेले की नहीं थी। सनातनी किन्नर अखाड़ा की स्थापना के पीछे 3 अहम किरदार भी रहे, जिन्होंने टीना मां के साथ मिलकर पूरा ब्लू प्रिंट तैयार किया। दैनिक भास्कर रिपोर्टर किन्नर अखाड़े के अलग-अलग सदस्यों से बात करने के बाद इन किरदारों तक भी पहुंचे। भवानी मां ने किन्नर अखाड़े से अलग होकर कुछ साल पहले ही वाल्मीकि अखाड़ा बनाया था। माघ मेले में इस अखाड़े के नाम से इन्हें शिविर में भी अलॉट होता रहा है। लेकिन, भवानी मां के साथ किन्नर समुदाय के लोग नहीं थे। इससे उनका अखाड़ा स्वरूप नहीं ले पाया था। वह भी टीना मां के साथ आ गई हैं। वह अब इस अखाड़े में पीठाधीश्वर के पद पर हैं। सनातनी किन्नर अखाड़ा बनाने के पीछे डाली मां की भी अहम भूमिका बताई जा रही है। टीना मां के अखाड़े में यह पीठाधीश्वर बनाई गई हैं। मुंबई के पालघर स्थित विष्णु मोहनी मठ से गौरी मां ने टीना मां के सपोर्ट में हैं। हिमांगी सखी ने कहा- टीना मां का फैसला सही
हिमांगी सखी भी कभी किन्नर अखाड़े से जुड़ी थीं। लेकिन, महाकुंभ के पहले ही उन्होंने वैष्णव किन्नर अखाड़ा बनाने का दावा किया था। अपने अखाड़े की वह जगद्गुरु हैं। महाकुंभ में किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी और हिमांगी सखी के बीच काफी रार ठनी थी। हिमांगी सखी ने डॉ. त्रिपाठी और उनके लोगों पर मारने का आरोप भी लगाया था। अब हिमांगी सखी भी टीना मां के समर्थन में उतर गई हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से टेलीफोन पर कहा- किन्नर अखाड़ा धर्म के रास्ते को छोड़कर पथभ्रष्ट हो चुका है। टीना मां ने सही समय पर सही निर्णय लिया है। हमारा वैष्णव किन्नर अखाड़ा उनके समर्थन में है। जल्द ही दिल्ली से प्रयागराज आकर टीना को बधाई दूंगी। टीना मां बोलीं- सनातन को विस्तार देंगे, चाहे अपने लोगों की आहुति देनी पड़े दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत के दौरान टीना मां ने कहा- साल-2019 से हम किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर रहे, लेकिन यह कुछ समय से उस रास्ते से भटक गया है। यही कारण रहा कि हमारी विचारधारा उस अखाड़े से नहीं मिल रही थी, इसलिए उससे मैं निकल गई हूं। अब हमने नया “सनानती किन्नर अखाड़ा” बनाया है। टीना मां ने कहा- अपने नए अखाड़े के जरिए हम सनातन को और मजबूत करेंगे। इस सनातन धर्म का और विस्तार करेंगे। इसके लिए अगर हमें अपने लोगों की आहुति भी देनी पड़ी, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। किन्नर अखाड़ा बनने की कहानी 3 सवालों में जानिए- सवाल- किन्नर अखाड़े की शुरुआत कब हुई?
जवाब- साल 2015 में एक्टिविस्ट और किन्नरों की लीडर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने किन्नर अखाड़े की स्थापना की। उन्होंने अपने साथियों के साथ किन्नर समाज को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए इसे शुरू किया। किन्नर अखाड़ा बनाने के पीछे वो तर्क देती हैं, किन्नरों को समाज में सम्मान दिलाने के लिए इसकी शुरुआत की। एक इंटरव्यू में वो कहती हैं, कानून बन जाने के बाद भी जब तक समाज न स्वीकार करे, जीत अधूरी है। धर्म उसे समाज से जोड़ने का जरिया है। वो कहती हैं कि धर्म के जरिए सीधे लोगों से जुड़ा जा सकता है, जो एक्टिविजम से नहीं हो पाएगा। LGBTQ समुदाय के एक्टिविस्ट सिर्फ आपस के अपने समूहों से जुड़े होते हैं। यह एक इको चैंबर जैसा है। सवाल- पहली बार किन्नर अखाड़ा कुंभ में कब शामिल हुआ?
जवाब- किन्नर अखाड़ा सबसे पहले 2016 में उज्जैन कुंभ में शामिल हुआ था। उसके बाद 2019 में प्रयागराज के कुंभ मेले में शामिल हुआ। तब इस अखाड़े के टेंट में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी। अखाड़ों के इतिहास में यह पहली बार था, जब किन्नर समूह का एक अलग अखाड़ा बना था। किन्नर अखाड़ा, जूना अखाड़ा के साथ ही जुड़ा है। कुंभ 2019 में किन्नर अखाड़े ने देवत्व यात्रा यानी पेशवाई निकाली थी। इसमें अखाड़े की महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के अलावा पीठाधीश्वर प्रभारी उज्जैन की पवित्रा माई, उत्तर भारत की महामंडलेश्वर भवानी मां और महामंडलेश्वर डॉ. राज राजेश्वरी भी पहुंची थीं। सवाल- क्या किन्नर अखाड़े को मान्यता है?
जवाब- किन्नर अखाड़ा शुरू हुए 10 साल बीत गए हैं। वो प्रयागराज से लेकर उज्जैन तक के धार्मिक आयोजनों में शामिल हो चुका है। इसके बावजूद अखाड़ों को मान्यता देने वाली संस्था ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ की तरफ से किन्नर अखाड़े को आज तक मान्यता नहीं मिली। जब इस अखाड़े की शुरुआत की गई, तब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इसका विरोध किया था। ऐसे में, आधिकारिक रूप से 2019 के प्रयागराज के कुंभ में किन्नर अखाड़े के पास शामिल होने की इजाजत नहीं थी। तब किन्नर अखाड़े ने यह कहते हुए महाकुंभ में शिरकत की कि वे उप-देवता हैं। इसलिए उन्हें किसी मान्यता की जरूरत नहीं। यही वजह है कि आज भी यह अखाड़ा जूना अखाड़े के तहत आता है। इसे अलग अखाड़े की मान्यता नहीं दी गई है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें – ममता कुलकर्णी बोलीं- जिससे मेरा नाम जुड़ा, वो आतंकी नहीं, दाऊद से कोई नाता नहीं 90 के दशक की मशहूर अदाकारा ममता कुलकर्णी का अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। गोरखपुर में उन्होंने कहा, उसने कोई बम ब्लास्ट नहीं किया, वह आतंकी नहीं है। VIDEO में जानिए पूरा विवाद और महामंडलेश्वर के पास कितना पैसा है?