महिला IPS बोलीं- कमेंटबाजी सोशल मीडिया पर शिफ्ट हुई:मैंने भी बॉडी शेमिंग झेली; ऐसे लोगों को ठीक करेंगे

मिर्जापुर की SP अपर्णा रजत कौशिक सुर्खियों में है। एक प्रेस ब्रीफिंग के वीडियो पर आए बॉडी शेमिंग के हजारों कमेंट ने कई सवाल खड़े किए। ट्रोलर्स IPS अफसर की कद-काठी पर भद्दे कमेंट कर रहे थे। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस की सोशल मीडिया टीम को कमेंट ऑप्शन तक बंद करना पड़ा। इस पूरे मामले पर दैनिक भास्कर ने IPS अपर्णा कौशिक से बात की। वह कहती हैं- पब्लिक प्लेस पर होने वाली छींटाकशी काफी हद तक कंट्रोल हो चुकी है। लेकिन, यह सब सोशल मीडिया पर शिफ्ट हो गया है। हम इससे भी निपटेंगे। हूबहू पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल- पहली बार इंस्टाग्राम पर कमेंट पढ़कर आपका रिएक्शन क्या था?
अपर्णा- जब कमेंट होने शुरू हुए, तो मैंने 15 से 20 मिनट तक देखे। जो लोग कमेंट कर रहे थे, उन्होंने आईडी पर अपनी फोटो भी नहीं लगाई थी। मैंने सोचा कि जिन्हें खुद पर कॉन्फिडेंस नहीं, उन पर मैं अपनी एनर्जी क्यों वेस्ट करूं? मेरे पास करने के लिए उससे बड़ी चीजें हैं। सवाल- कमेंट देखने के बाद आपने क्या किया?
अपर्णा- मैं हर चीज को पुलिस अफसर की तरह देखती हूं। पुलिस टीम ने डेटा एनालाइज किया, तो ज्यादातर फेक अकाउंट निकले। उनके बारे में पता करने में थोड़ा समय लगेगा। पुलिस अफसर के तौर पर मुझे प्रॉयोरिटी तय करनी होती है कि हम पहले लोगों की प्रॉब्लम सुनें, फिर अपनी।
सवाल- भद्दे कमेंट देखने के बाद बतौर महिला क्या फील करती हैं?
अपर्णा- ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिला के साथ ऐसा होता है, बहुत सारे पुरुष भी ऐसी हरकत झेलते हैं। उनके अपीयरेंस पर कमेंट किए जाते हैं। अक्सर लोग निगेटिव चीज में इंगेज होना ज्यादा पसंद करते हैं। आपने कोई कमेंट कर दिया, उसके बाद आपको सोचना चाहिए कि ऐसा करके क्या मैं अच्छा इंसान बना? जिन्होंने भी कमेंट किए, उनमें से किसी से भी आप पूछ लीजिएगा कि उन्होंने क्या कॉन्ट्रिब्यूट किया? वो कोई जवाब नहीं दे पाएंगे। सवाल- क्या महिलाओं के लिए लोगों की सोच अभी बदली नहीं है?
अपर्णा- आप जानती हैं, हमेशा फीमेल सेंट्रिक गालियां दी जाती हैं। मैं जब भी कभी स्कूलों में जाती हूं तो लड़कों से कहती हूं कि आप जो गालियां देते हैं, उसमें किसको पॉइंट आउट करते हैं? आपके घर में भी एक मां है, बहन है। ये ‘पार्ट ऑफ साइकी’ बन जाता है। आप उसी लेंस से फीमेल को देखने लगते हैं। ये चीजें हमें बंद करानी होंगी। हम उन्हें बताते हैं कि फीमेल इन्फीरियर है, वो सुपीरियर हैं। आज देखेंगे तो बहुत सारी लड़कियां बोर्ड की टॉपर हैं, एग्जाम टॉप करती हैं। सवाल- क्या सोशल मीडिया कमेंट पर बड़े एक्शन की जरूरत है?
अपर्णा- देखिए, पहले ईव-टीजिंग या हैरेसमेंट फिजिकल स्पेस में होते थे। धीरे-धीरे यह ऑनलाइन स्पेस में शिफ्ट हुआ है। सोसाइटी इन्वॉल्व हो रही है, तो क्राइम का पैटर्न भी बदला है। हम अपनी टीम को इससे निपटने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। एक और बात है, इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिनके सिर्फ 2 फॉलोअर हैं। हमें ऐसे लोगों पर अपनी एनर्जी नहीं लगानी चाहिए। सवाल- आपकी पोस्ट पर कमेंट करने के बाद कुछ आईडी अब नहीं दिख रहीं?
अपर्णा- आप सही हैं। मैंने खुद देखा कि जितनी जल्दी उन्होंने कमेंट किया, उतनी ही जल्दी दुम दबाकर भाग भी गए। आप कुछ गलत करेंगे तो जाहिर सी बात है आपमें खौफ रहता ही है। कोई भी गलत काम आप करेंगे, चाहे फिजिकल स्पेस में करें या सोशल स्पेस में, कार्रवाई होगी। सवाल- क्या एक्शन लेकर नजीर सेट करने की कोशिश होगी?
अपर्णा- देखिए, सोशल मीडिया पर एक्टिविटी को आप मिटा नहीं सकते। उसका डिजिटल फुटप्रिंट हमेशा रहता है। इसलिए ऐसे लोगों पर सबक सिखाना जरूरी है। आप अगर ट्रैफिक वायलेशन के रील डालेंगे, कोई गलत काम करते हुए रील डालेंगे, वो हमारी नजर में आएगा तो कार्रवाई जरूर होगी। सवाल- क्या आप सिविल सर्विस में आना सफल मानती हैं?
अपर्णा- मैं उस जिले का नाम नहीं ले रही हूं, सिर्फ केस बता रही हूं। एक 55-60 के बीच की विडो (विधवा) महिला थी। उनके पड़ोसी ने अकेला पाकर उन्हें ग्रैब करने की कोशिश की। अब सोचिए, वो अकेली रहती हैं, विडो हैं, उनको क्या महसूस हुआ होगा? हमारे पास कंप्लेंट आते ही इंवेस्टिगेशन ऑफिसर ने बहुत इंटेलिजेंटली काम किया। हमने 3 दिन के अंदर चार्जशीट लगा दी। बहुत स्ट्रॉन्गली केस को ट्रायल में रखा। हमने उसका ट्रायल तेज कराया। केस में फैसला आया तो आरोपी को सजा हुई। इसके बाद वो महिला मिठाई का डिब्बा लेकर मेरे ऑफिस में मिलने आईं। वो देखकर मैं बहुत इमोशनल हो गई थी। वो भी इमोशनल हो गई थीं। बहुत सारे केस होते हैं, लेकिन कभी जब आप पूरे जस्टिस को उसके अंजाम तक पहुंचाते हैं, तो बहुत स्वीट विक्ट्री होती है। कई मामलों में आरोपी को पकड़ने के बाद केस चलता है। कभी हमारा ट्रांसफर हो जाता है, हम विक्टिम को जस्टिस मिलता देख नहीं पाते। लेकिन, उस बार मैं लकी थी। जरूरत है आप चुप न रहें, बोल्ड होकर कॉल आउट करें। —————————- यह खबर भी पढ़ें सहेलियों की बातें सुन IPS बनीं अपर्णा कौशिक,18 लाख की जॉब छोड़ी, रेप के आरोपी इंस्पेक्टर को सस्पेंड कराया एक बेटी की कामयाबी के पीछे पूरे परिवार का संघर्ष होता है। आज समय बदला है, बेटियां घर से निकलती हैं, तो उनकी सेफ्टी की पूरी गारंटी रहती है। एक समय था, जब महिलाएं रामपुर जैसे शहर में घरों से निकलने में कतराती थीं। यह कहना है IPS अपर्णा रजत कौशिक का। पढ़िए पूरी खबर…