मां की हत्या करने वाले का बेटी से अफेयर था:मेरठ में दोनों को स्कूल से निकाला गया; 3 पंचायत के बाद भी नहीं सुधरे

पारस-रुबी का पिछले 3 साल से अफेयर था। दोनों एक-दूसरे से मिलते थे, पसंद करते थे। उनके अफेयर की चर्चा पूरे गांव में थी। दो बार गांव में ही इसको लेकर बवाल और पंचायत भी हो चुकी है। दोनों गांव के ही इंटर कॉलेज में एक साथ एक ही क्लास में पढ़ते थे। वहीं से दोनों की दोस्ती और फिर मोहब्बत शुरू हुई। दोनों का पढ़ने में मन नहीं लगता था। पढ़ाई में बहुत कमजोर थे। दोनों 10वीं के बाद स्कूल से निकाल दिए गए। स्कूल टीचर ने खुद दोनों को कई बार समझाया, लेकिन नहीं माने। यह कहना है कपसाड़ गांव के लोगों का। लोग बताते हैं- पूरे गांव में इसकी चर्चा थी। इसीलिए लड़की की शादी भी दूसरी जगह तय कर दी गई थी। लेकिन, तभी ये सब हो गया। बेटी के प्यार के चक्कर में मां बेमतलब में मारी गई। दरअसल, मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में दलित लड़की को ठाकुर बिरादरी का युवक दिनदहाड़े उठाकर ले गया। लड़की को बचाने आई बुजुर्ग मां को युवक ने धारदार हथियार मारकर उसकी हत्या कर दी। इस कांड ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस पूरी घटना के पीछे का कारण जानने के लिए जब दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची। कपसाड़ गांव मेरठ से 30 किमी दूर है। लड़का-लड़की के घर के बीच की दूरी 1 किमी है। टीम ने मौके पर पहुंचे कर सारा सच जाना। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए पूरा मामला रूबी ने ढाई साल पहले छोड़ दी थी पढ़ाई
कपसाड़ गांव में रहने वाले सत्येंद्र कुमार मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार में पत्नी सुनीता के अलावा तीन बेटे और एक बेटी रुबी (20) है। रुबी के सबसे बड़े भाई की शादी हो चुकी है। वह बाहर काम करता है, जबकि उसकी पत्नी और दो बेटियां गांव में ही रहती हैं। दूसरे नंबर पर एक और भाई है, उसकी भी शादी हो चुकी है। वह परिवार के साथ गांव में ही रहता है। तीसरे नंबर पर रूबी है। इसके बाद चौथे नंबर पर एक छोटा भाई है। इन दोनों की अभी शादी नहीं हुई है। गरीब होने के कारण रूबी ने करीब ढाई साल पहले पढ़ाई छोड़ दी थी। फिलहाल, परिवार में उसके रिश्ते को लेकर बातचीत चल रही थी। 8 जनवरी की सुबह रूबी अपनी मां सरिता के साथ खेत पर अपने पिता सतेंद्र के पास जा रही थी। दोनों को वहां नरेंद्र के खेत में गन्ने की छिलाई करनी थी। गांव से बाहर जंगल के पास पहुंचते ही उन्हें पारस राजपूत नाम का गांव का ही रहने वाला लड़का मिला। सफेद रंग की ऑल्टो कार से लेकर भागा
पारस, रूबी को उठाकर ले जाने लगा, तो रूबी की मां सुनीता चीखने-चिल्लाने लगी। इतने में पारस ने दरांती से सुनीता के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए और रूबी को लेकर भाग गया। सरिता वहीं लहूलुहान हालत में गिर पड़ी। इसी बीच उनकी चीख सुनकर आसपास के लोग दौड़कर आए। अस्पताल ले गए, जहां 8 जनवरी की शाम 5 बजे सुनीता ने दम तोड़ दिया। वहीं, रूबी और पारस सफेद रंग की ऑल्टो कार से भाग गए। इसके बाद से दोनों का अब तक कोई पता नहीं चल रहा। पारस के 3 मोबाइल नंबर हैं और तीनों बंद हैं। रूबी के पास फोन नहीं है। दोनों की लास्ट लोकेशन कैली गांव मिली। पुलिस ने सरधना, ठाकुर चौबीसी, दौराला और कैली गांव तक दबिश दी। 200 से ज्यादा सीसीटीवी खंगाले, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। अब जानिए आरोपी के बारे में पारस कपसाड़ गांव का रहने वाला है। वह गांव में ही एक डॉक्टर के यहां कंपाउंडर है। पारस और रूबी दोनों पहले से एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं। 3 साल से उनका अफेयर चल रहा था। पारस के परिवार में पिता, माता, दादा और दादी हैं। वह तीन भाइयों में सबसे छोटा है। तीनों भाइयों की अभी शादी नहीं हुई है। घटना के बाद से पारस के माता-पिता और दोनों भाई फरार हैं, जिनका अभी तक पता नहीं चल सका है। वहीं, पुलिस ने पूछताछ के लिए उसके दादा-दादी को कोतवाली में बैठा रखा है। अब पढ़िए गांव वालों ने जो बताया.. दलित लड़की को जिस तरह ठाकुर बिरादरी का युवक किडनैप कर ले गया, उसकी मां की हत्या कर दी। इस घटना से गांव में गुस्सा है। पूरे मामले को जातीय रंग भी दिया जा रहा। भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस, आसपा, भीम आर्मी, भाकियू, आप से लेकर सभी दलों के नेता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं। उनके लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। तमाम दलित राजनीतिक संगठन भी मामले में गांव में आ रहे हैं। 3 साल से पारस-रूबी का अफेयर था
पारस-रुबी को लेकर क्यों और कैसे गया? इस पर गांव के लोग ऑन कैमरा कुछ भी बताने से बच रहे हैं। पड़ोसियों ने साफ कहा- चाहे हम ठाकुर हैं या दलित, हम जिस पक्ष की बात कहेंगे, उसके बुरे बन जाएंगे। हम इसे खराब करना नहीं चाहते। ऑफ रिकार्ड लोगों ने बताया कि पारस और रूबी का पिछले 3 साल से अफेयर था। दोनों एक-दूसरे से मिलते थे। पसंद करते थे। उनके अफेयर की चर्चा पूरे गांव में थी। दोनों को 10वीं के बाद स्कूल से निकाला दिया गया था
गांववालों ने बताया- कई बार गांव में दोनों के अफेयर को लेकर बवाल हुआ। पंचायत कराकर मामला शांत करा दिया जाता। इसके बावजूद दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ता। दोनों के घरवाले शादी को लेकर तैयार नहीं थे, क्योंकि दोनों अलग बिरादरी से थे। ऑफ कैमरा लोगों ने बताई पूरी कहानी
लोगों ने बताया- पारस और रूबी गांव के ही इंटर कॉलेज में एक साथ एक क्लास में पढ़ते थे। वहीं से दोनों की दोस्ती और फिर मोहब्बत शुरू हुई। दोनों ही 10वीं के बाद स्कूल से निकाल दिए गए। स्कूल टीचर ने खुद दोनों को कई बार समझाया, लेकिन नहीं माने। इस पर उनका नाम स्कूल से काट दिया और टीसी दे दी थी। गांव में 3 बार हुई पंचायत
पारस और रूबी स्कूल से नाम कटने के बाद भी एक-दूसरे से मिलते थे। गांव में दोनों के रिश्ते को लेकर 3 बार पंचायत बैठ चुकी है। तीनों बार पंचायत ने फैसला कराया। इसमें दोनों परिवारों से कहा गया कि अपने-अपने बच्चों को समझाएं। पिछली पंचायत में भी ये तय हो गया था कि दोनों परिवार अपने बेटा-बेटी को थामकर रखेंगे। दोनों मिलेंगे नहीं और रूबी का परिवार बेटी की शादी कर देगा। अप्रैल में होनी थी रूबी की शादी
पंचायत के फैसले के बाद से ही रुबी का परिवार उसके लिए रिश्ता देख रहा था। हाल में ही उसकी शादी तय हुई थी। अप्रैल में ही उसकी शादी थी। 8 जनवरी को जब ये घटना हुई, उसी दिन रूबी की शादी की डेट फिक्स होनी थी। पिता ने कहा- मुहूर्त निकलवाने जा रहे थे, ये हो गया
किडनैप हुई बेटी के पिता सत्येंद्र कहते हैं- हम तो बेटी की शादी की तारीख का मुहूर्त तय करने वाले थे, लेकिन दरिंदों ने हमारी खुशी को मातम में बदल दिया। पहले बेटी की शादी 2 मई को तय थी, लेकिन अप्रैल में मुहूर्त निकलवाने की तैयारी कर रहे थे। उसी के लिए आज बात करनी थी। इससे पहले ही सब उजड़ गया। अब हमारे पास कुछ भी नहीं बचा। बेटी को लापता हुए 24 घंटे से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। वहीं, प्रशासन ने पिता सत्येंद्र को 10 लाख का चेक 9 जनवरी की शाम को दिया। इसके बाद घरवाले सुनीता का अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। करीब 30 घंटे बाद सुनीता का अंतिम संस्कार किया गया। परिवार ने प्रशासन के सामने 4 मांगें रखीं 10 जनवरी को गांव आएंगे चंद्रशेखर
इस मामले में 10 जनवरी नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद मेरठ कपसाड़ गांव पहुंचेंगे। उनके साथ रविंद्र सिंह भाटी भी आएंगे। वहीं, कांग्रेस से प्रदीप नरवाल भी पीड़ित परिवार से मिलने आएंगे। ठाकुर चौबीसी में आता है कपसाड़
जिस गांव में ये विवाद हुआ, वो ठाकुर चौबीसी में आता है। सरधना विधानसभा क्षेत्र के ठाकुर चौबीसी का मतलब यहां ठाकुर बाहुल्य 24 गांव हैं। यहां सबसे ज्यादा वोट ठाकुरों के हैं। भाजपा के फायरब्रांड नेता और सरधना से पूर्व विधायक संगीत सोम के प्रभाव वाले ये गांव हैं। आरोपी पारस भी ठाकुर बिरादरी से है। गांव में पिछले दिनों सम्राट मिहिर भोज के नाम वाला बोर्ड लगाने और फिर उसे उतारने पर विवाद हुआ था। तब गुर्जर और राजपूत दोनों बिरादरियों में टकराव हुआ था। गांव में 200 परिवार दलितों के हैं और 600 से ज्यादा परिवार ठाकुरों के रहते हैं। मेरठ के एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया- दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें एक पारस और दूसरा उसका दोस्त सुनील है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। गांव में शांति व्यवस्था बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारी मौके पर तैनात हैं। अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी युवक और युवती पहले से एक-दूसरे को जानते थे। मामले की जांच जारी है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। ———————- ये खबर भी पढ़ें… पिता बोले-बेटी की शादी तय थी, दरिंदा उठा ले गया:मेरठ में 30 घंटे बाद उठी दलित महिला की अर्थी; अखिलेश ने 2 लाख दिए मेरठ में दलित महिला की हत्या कर उसकी बेटी को अगवा करने के मामले ने शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने महिला के शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। आरोपी कंपाउंडर की गिरफ्तारी और लड़की की सकुशल बरामदगी तक अर्थी न उठाने पर अड़ गए। पढे़ं पूरी खबर…