मेरठ में 8 जनवरी को मां की हत्या करके बेटी को पारस सोम लेकर भाग गया। 2 दिन बाद 130 Km दूर वो दोनों सहारनपुर में मिले। उन्हें मेरठ लाने के बाद लड़की को परिवार के सुपुर्द किया गया। पारस को जेल भेजा गया। इससे पहले उसने कहा- मैं बेगुनाह हूं…फंसाया गया है। वहीं, जिस रूबी को लेकर पारस भागा था, उसने कोर्ट में कहा- मुझे जबरन ले जाया गया। मेरी जिंदगी की सबसे अनमोल चीज (मां) मुझसे छीन ली गई। उसके पास तमंचा था, मैं ट्रेन में डर के मारे नहीं चिल्लाई। उसने कहा था कि जैसे मां को मारा, तुम्हें भी मार दूंगा। दलित लड़की की किडनैपिंग और उसकी मां की हत्या के बाद मेरठ का कपसाड़ गांव यूपी की सियासत के केंद्र में आ गया। कांग्रेस ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। वहीं, 10 जनवरी को गाजियाबाद से लेकर मेरठ तक नगीना सांसद चंद्रशेखर को पुलिस ट्रेस करती रही। सोमवार शाम को संवासिनी गृह से पीड़िता को पुलिस सिक्योरिटी में घर भेजा गया। पुलिस ने उसके घर पर निगाह रखने के लिए CCTV लगवाए हैं। कपसाड़ में अभी कर्फ्यू जैसे हालात हैं। पुलिस यहां किसी भी नेता को घुसने नहीं दे रही। गांव वाले भी बिना आधारकार्ड दिखाए, अंदर नहीं जा सकते। लोग 3 दिन से गांव में कैद हैं। यहां के हालात समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम कपसाड़ गांव पहुंची। पढ़िए ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट… गांव की तरफ जाने वाले रास्तों का माहौल
SP, ADM प्रधान के साथ एंट्री पॉइंट पर, पहचान के बाद जाने दे रहे
हमारी टीम सबसे पहले मेरठ से करीब 30 Km दूर अटेरना चौकी पहुंची। यहां से कपसाड़ गांव के लिए 2 रास्ते जाते हैं। दोनों ही रूट पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। एक बैरिकेडिंग पर SP यातायात राघवेंद्र, ADM न्यायिक समेत करीब 25 पुलिसकर्मी तैनात मिले। यहां गांव के प्रधान को ग्रामीणों की पहचान के लिए बैठाया गया था। इसी चौराहे के एक रास्ते पर कपसाड़ से पहले अटेरना गांव पड़ता है। दूसरे रास्ते पर सलावा के बाद कपसाड़ गांव आता है। करीब 8 गांवों की तरफ जाने वाले सभी रूट यहां से ब्लॉक थे। जो भी व्यक्ति गांव में जाने की कोशिश करता, तो बैरिकेडिंग पर खड़े पुलिसकर्मी उसे रोक देते। पहले उसका आधार कार्ड चेक हो रहा था। गांव का नाम देखने के बाद ही एंट्री मिल रही थी। अफसरों ने बिना कैमरे पर आए बताया कि बाहरी लोगों की एंट्री बैन है। लेकिन लोकल लोगों को परेशान नहीं किया जा रहा। गांव के अंदर SP, CO लगातार मूवमेंट कर रहे
इन 2 रूट को छोड़कर हम दूसरे रास्तों से गांव के अंदर घुसने का प्रयास करने लगे। मगर सलावा और दौराला पुलिस चौकी के पास भी ऐसे ही हालात दिखे। गांव के अंदर SP देहात अभिजीत कुमार, CO सरधना लगातार चेकिंग कर रहे थे। रास्ते में जो लोग मिले, उन्होंने बताया कि 24 घंटे गांव के अंदर हर गली और चौराहे पर पुलिस का पहरा है। महिला पुलिस और PAC की एक बटालियन तैनात है। लड़की के घर के चारों ओर CCTV का पहरा पुलिस-प्रशासन ने पीड़िता रुबी के घर को चारों ओर से रविवार रातोंरात CCTV से कवर कर दिया। घर की तरफ जाने वाली दोनों गलियों, घर के चारों ओर, छत की तरफ भी CCTV लगा दिए हैं। ताकि किसी तरह की गतिविधि, हरकत होने की तुरंत जानकारी मिल सके। इसके साथ ही पुलिस ने पूरे गांव को छावनी बना दिया है। 14 एंट्री प्वाइंट, सब पर नाकेबंदी कपसाड़ गांव में डायरेक्ट-इनडायरेक्ट एंट्री के 14 प्वाइंट हैं। इसमें मुख्य और शॉर्टकट दोनों रास्ते शामिल हैं। गांव का सुरक्षा खाका इस तरह बुना गया है कि चोर रास्तों पर भी पुलिस की नजर है। पुलिस ने उनको भी बैरिकेडिंग कर रखी है। कपसाड़ में रहने वाले बंटी सोम बताते हैं- इस वक्त छोटे रास्तों पर भी बैरिकेडिंग हैं। 20-20 कदम पर पुलिस मिलती है, जो चेहरे से जान गए हैं, वो सवाल नहीं करते। बाकी पहचान पत्र जेब में ही रखने को बोला गया है। धीरे-धीरे गांव की तरफ बढ़ने पर हमारी मुलाकात अरविंद सिंह से हुई। उनके साथ कुछ और लोग भी थे, मगर कोई कैमरे पर बात करने को तैयार नहीं हुआ। सवाल पूछने पर कहते हैं- यहां माहौल एंटी ठाकुर बना दिया गया है। गांव वाले ऐसा नहीं चाहते। पुलिस ज्यादा लगी है, इसलिए न कोई बाहर जा पा रहा, न बाहर वाले अंदर आ पा रहे। लोग बस अपने घरों में रह रहे हैं। अगर घर से बाहर निकल रहे तो गलियों में खड़ी पुलिस पहले पूछती है कि कहां जा रहे हो, क्या काम है? VIDEO बनाने पर मोबाइल छीन रहे
कपसाड़ के ही नितिन बताते हैं- पुलिस गांव में अंदर आने पर ही पाबंदी नहीं लगा रही। अगर हम घर से बाहर या छत पर जा रहे तो भी पूछताछ हो रही। वीडियो बनाने और फोटो खींचने पर तो बहुत पाबंदी है। पुलिस गांव वालों को न तो वीडियो बनाने दे रही, न फोटो लेने दे रही। अगर कोई मना करने के बावजूद बना रहा तो मोबाइल छीन लेते हैं। केवल खेत पर काम करने की आजादी है। 24 गांव ठाकुर के, इनमें 1 ही कपसाड़
गांव के परमानंद कहते हैं- सरधना में ठाकुरों के 24 गांव हैं, इसे ठाकुर चौबीसी कहा जाता है, कपसाड़ भी उसी ठाकुर चौबीसी का एक गांव है। जहां ठाकुरों की आबादी लगभग 6 हजार है, बाकी 2 हजार लोगों में दलित, पिछड़े, बनिया और ब्राह्मण आते हैं। मगर यहां के माहौल पर कोई सवाल नहीं उठा सकता, कभी कोई विवाद नहीं होता है। वहीं, पास खड़े ग्रामीण युवक ने कहा- मुझे लगता है कि हम लोग जो वॉट्सऐप पर पोस्ट कर रहे हैं, वो भी पुलिस वाले देख रहे हैं। कुछ लोगों के अकाउंट बंद हो गए हैं। नेटवर्क भी 2 दिन से चल नहीं रहा। हमारे गांव के मोबाइल टावर भी सर्विलांस पर लगवा दिए हैं। कहीं कोई सोशल मीडिया पर कुछ गलत पोस्ट तो नहीं कर रहा। कौन सा व्यक्ति क्या फोटो, वीडियो बनाकर बाहर भेज रहा है, पुलिस सब चेक कर रही है। महिला बोली- केवल आलू खाकर काम चला रहे गांव में रहने वाले कपिल ने बताया- गांव में इतनी फोर्स हमने कभी नहीं देखी। ऐसा तो कभी हमारे गांव में चुनावों में भी नहीं हुआ। जबकि हमारा गांव तो आए दिन चर्चाओं में रहता है। लेकिन इतनी सख्ती तो कभी नहीं देखी। पिछले 4 दिनों से सब्जी, फल को भी तरस गए। बस घर में जो अनाज, भाजी रखा है, वही पका रहे। वो भी खत्म होने को है। सब्जीवालों को गांव के अंदर आने नहीं दे रहे, हमें भी बाहर जाने की अनुमति नहीं है। राकेश ने बताया – पुलिस यहां दिनरात ड्यूटी दे रही है। वो भी भूखे-प्यासे रहते हैं। तो हमारी जिम्मेदारी बनती है कि अपने मेहमानों की भी थोड़ी खातिरदारी करें। घर में जो बिस्किट, चाय थी वो अब तक की खातिरदारी में लगा दी। गांव की दुकानों पर भी सामान खत्म हो चुका है। अब न घर में खाने की चीजें हैं, न दुकानों पर कुछ मिल रहा। बस जो राशन, सामान है, उसी में गुजारा कर रहे। स्कूल से टीचर खुद घर छोड़ रहीं गांव में जो स्कूल हैं, वहां जिन बच्चों की परीक्षा चल रही है, वो ही स्कूल जा रहे। बच्चों को खुद टीचर स्कूल से उनके घरों तक छोड़कर आ रही हैं। परीक्षा के कारण बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा है। इसके अलावा गांव की सारी गतिविधि बंद हैं, क्योंकि पता नहीं कहां से क्या हो जाए। यूपी से लेकर दिल्ली तक सियासत गरम गाजियाबाद से मेरठ तक पुलिस को चकमा देते रहे चंद्रशेखर 10 जनवरी को नगीना सांसद चंद्रशेखर पुलिस को चकमा देते हुए मेरठ बॉर्डर तक पहुंच गए। वहां उन्हें पकड़कर दिल्ली वापस भेजा गया। शनिवार दोपहर पुलिस ने गाजियाबाद में काफिला रोका तो चंद्रशेखर कार छोड़कर दौड़ पड़े। पुलिसकर्मी पकड़ पाते, इससे पहले वह बाइक पर निकल गए। अगत्य मोर्चा डासना टोल पर लगाया गया, लेकिन यहां भी चंद्रशेखर समर्थकों की भीड़ का फायदा उठाकर और गाड़ियां बदलकर चकमा देने में कामयाब रहे। बाद में मेरठ की सीमा पर उन्हें रोका गया और दिल्ली वापस भेज गया। चंद्रशेखर कहते हुए सुने गए कि एक चुना हुआ सांसद कपसाड़ नहीं जा सकता, क्योंकि कपसाड़ मेरठ में नहीं, पाकिस्तान में है।.. वहीं मायावती ने भी ट्वीट करके नाराजगी जाहिर की… अब ये जानिए कि लड़की लेकर भागने के बाद पारस कहां-कहां गया… मेरठ पुलिस के मुताबिक, कपसाड़ स्थित रजवाहे से रूबी को अगवा करके पारस अपनी रिश्तेदारी खतौली में ले गया था। शाम तक उन्हें मां सुनीता की मौत की खबर मिल गई। फिर दोनों दिल्ली चले गए, वहां एक होटल में रात गुजारी। उसके बाद वहां से पारस के दोस्त के पास गुरुग्राम चले गए। दोनों मीडिया कवरेज के जरिए गांव के माहौल पर नजर रखे हुए थे। गांव का माहौल बिगड़ने पर पारस रूबी को लेकर गुरुग्राम से साथ ट्रेन से सहारनपुर पहुंच गया। यहां टपरी गांव में उसकी बहन रहती है। उनके घर पर शुक्रवार की रात बिताई। यहां से शनिवार को हरिद्वार के लिए ट्रेन में सवार हो गए। पारस ने अपने परिवार के बारे में दोस्त राजेंद्र से जानकारी की। उसने ट्रेन में सवार सहयात्री के मोबाइल से कॉल कर ली। तभी पुलिस ने पारस को पकड़ लिया। पुलिस कस्टडी में पारस सोम ने बताया कि तीन साल से कालेज में पढ़ते समय ही रूबी से प्यार हो गया था। दोनों ने साथ में भागने का फैसला लिया था। दरअसल, परिवार के लोगों ने रूबी की शादी तय कर दी थी। पिछले दो महीने से रूबी को साथ ले जाने का प्लान बना रहा था। गुरुवार को भी रूबी को खेत में जाते देखकर उसके पीछे-पीछे निकला था। जैसे ही रूबी साथ चलने के लिए तैयार हुई। तभी उसकी मां ने विरोध किया। इसी हाथापाई में फरसे से हमला हो गया। हालांकि, पुलिस पारस के इन बयानों को नहीं मान रही। अब युवती के बयान को आधार बनाकर ही मुकदमे में आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब पुलिस अधिकारियों की बात ADG भानु भास्कर ने बताया- युवती के बयान दर्ज हो चुके हैं। फिलहाल उसे आशा ज्योति केंद्र से रिलीज कर दिया गया है। फिलहाल दोनों को सुनीता हत्याकांड में आरोपी बनाया जाएगा। युवती के बयानों को आधार बनाते हुए मुकदमे में अन्य धाराएं बढ़ा दी गई हैं। लॉ एंड ऑर्डर बनाया जा रहा है। हर शाम सीनियर ऑफिसर खुद पूरी टीम से सिक्योरिटी की ब्रीफिंग ले रहे हैं। ……………. ये पढ़ें – ‘मेरा रूबी से 3 साल पुराना अफेयर, मैं निर्दोष हूं’:मेरठ में मां की हत्या कर बेटी को अगवा करने वाला जज के सामने गिड़गिड़ाया जज साहब! मेरा नाम पारस सोम है। मैं निर्दोष हूं और मुझे गलत फंसाया जा रहा। मुझे बचा लीजिए। मैं 3 साल से रूबी के साथ रिलेशनशिप में हूं। हमारा रिश्ता सच्चा है। किडनैपिंग की कोई बात नहीं है। हम दोनों दोस्त हैं। रूबी अपनी मर्जी से आई थी। ये बातें पारस सोम ने स्पेशल सीजेएम विकास सावन की कोर्ट में कही, जिसने मेरठ में मां की हत्या कर बेटी को किडनैप कर लिया था। आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। जबकि रूबी को एसीजेएम- 2 नम्रता की कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उसे काउंसिलिंग के लिए भेजा गया है। पढ़िए पूरी खबर…
SP, ADM प्रधान के साथ एंट्री पॉइंट पर, पहचान के बाद जाने दे रहे
हमारी टीम सबसे पहले मेरठ से करीब 30 Km दूर अटेरना चौकी पहुंची। यहां से कपसाड़ गांव के लिए 2 रास्ते जाते हैं। दोनों ही रूट पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। एक बैरिकेडिंग पर SP यातायात राघवेंद्र, ADM न्यायिक समेत करीब 25 पुलिसकर्मी तैनात मिले। यहां गांव के प्रधान को ग्रामीणों की पहचान के लिए बैठाया गया था। इसी चौराहे के एक रास्ते पर कपसाड़ से पहले अटेरना गांव पड़ता है। दूसरे रास्ते पर सलावा के बाद कपसाड़ गांव आता है। करीब 8 गांवों की तरफ जाने वाले सभी रूट यहां से ब्लॉक थे। जो भी व्यक्ति गांव में जाने की कोशिश करता, तो बैरिकेडिंग पर खड़े पुलिसकर्मी उसे रोक देते। पहले उसका आधार कार्ड चेक हो रहा था। गांव का नाम देखने के बाद ही एंट्री मिल रही थी। अफसरों ने बिना कैमरे पर आए बताया कि बाहरी लोगों की एंट्री बैन है। लेकिन लोकल लोगों को परेशान नहीं किया जा रहा। गांव के अंदर SP, CO लगातार मूवमेंट कर रहे
इन 2 रूट को छोड़कर हम दूसरे रास्तों से गांव के अंदर घुसने का प्रयास करने लगे। मगर सलावा और दौराला पुलिस चौकी के पास भी ऐसे ही हालात दिखे। गांव के अंदर SP देहात अभिजीत कुमार, CO सरधना लगातार चेकिंग कर रहे थे। रास्ते में जो लोग मिले, उन्होंने बताया कि 24 घंटे गांव के अंदर हर गली और चौराहे पर पुलिस का पहरा है। महिला पुलिस और PAC की एक बटालियन तैनात है। लड़की के घर के चारों ओर CCTV का पहरा पुलिस-प्रशासन ने पीड़िता रुबी के घर को चारों ओर से रविवार रातोंरात CCTV से कवर कर दिया। घर की तरफ जाने वाली दोनों गलियों, घर के चारों ओर, छत की तरफ भी CCTV लगा दिए हैं। ताकि किसी तरह की गतिविधि, हरकत होने की तुरंत जानकारी मिल सके। इसके साथ ही पुलिस ने पूरे गांव को छावनी बना दिया है। 14 एंट्री प्वाइंट, सब पर नाकेबंदी कपसाड़ गांव में डायरेक्ट-इनडायरेक्ट एंट्री के 14 प्वाइंट हैं। इसमें मुख्य और शॉर्टकट दोनों रास्ते शामिल हैं। गांव का सुरक्षा खाका इस तरह बुना गया है कि चोर रास्तों पर भी पुलिस की नजर है। पुलिस ने उनको भी बैरिकेडिंग कर रखी है। कपसाड़ में रहने वाले बंटी सोम बताते हैं- इस वक्त छोटे रास्तों पर भी बैरिकेडिंग हैं। 20-20 कदम पर पुलिस मिलती है, जो चेहरे से जान गए हैं, वो सवाल नहीं करते। बाकी पहचान पत्र जेब में ही रखने को बोला गया है। धीरे-धीरे गांव की तरफ बढ़ने पर हमारी मुलाकात अरविंद सिंह से हुई। उनके साथ कुछ और लोग भी थे, मगर कोई कैमरे पर बात करने को तैयार नहीं हुआ। सवाल पूछने पर कहते हैं- यहां माहौल एंटी ठाकुर बना दिया गया है। गांव वाले ऐसा नहीं चाहते। पुलिस ज्यादा लगी है, इसलिए न कोई बाहर जा पा रहा, न बाहर वाले अंदर आ पा रहे। लोग बस अपने घरों में रह रहे हैं। अगर घर से बाहर निकल रहे तो गलियों में खड़ी पुलिस पहले पूछती है कि कहां जा रहे हो, क्या काम है? VIDEO बनाने पर मोबाइल छीन रहे
कपसाड़ के ही नितिन बताते हैं- पुलिस गांव में अंदर आने पर ही पाबंदी नहीं लगा रही। अगर हम घर से बाहर या छत पर जा रहे तो भी पूछताछ हो रही। वीडियो बनाने और फोटो खींचने पर तो बहुत पाबंदी है। पुलिस गांव वालों को न तो वीडियो बनाने दे रही, न फोटो लेने दे रही। अगर कोई मना करने के बावजूद बना रहा तो मोबाइल छीन लेते हैं। केवल खेत पर काम करने की आजादी है। 24 गांव ठाकुर के, इनमें 1 ही कपसाड़
गांव के परमानंद कहते हैं- सरधना में ठाकुरों के 24 गांव हैं, इसे ठाकुर चौबीसी कहा जाता है, कपसाड़ भी उसी ठाकुर चौबीसी का एक गांव है। जहां ठाकुरों की आबादी लगभग 6 हजार है, बाकी 2 हजार लोगों में दलित, पिछड़े, बनिया और ब्राह्मण आते हैं। मगर यहां के माहौल पर कोई सवाल नहीं उठा सकता, कभी कोई विवाद नहीं होता है। वहीं, पास खड़े ग्रामीण युवक ने कहा- मुझे लगता है कि हम लोग जो वॉट्सऐप पर पोस्ट कर रहे हैं, वो भी पुलिस वाले देख रहे हैं। कुछ लोगों के अकाउंट बंद हो गए हैं। नेटवर्क भी 2 दिन से चल नहीं रहा। हमारे गांव के मोबाइल टावर भी सर्विलांस पर लगवा दिए हैं। कहीं कोई सोशल मीडिया पर कुछ गलत पोस्ट तो नहीं कर रहा। कौन सा व्यक्ति क्या फोटो, वीडियो बनाकर बाहर भेज रहा है, पुलिस सब चेक कर रही है। महिला बोली- केवल आलू खाकर काम चला रहे गांव में रहने वाले कपिल ने बताया- गांव में इतनी फोर्स हमने कभी नहीं देखी। ऐसा तो कभी हमारे गांव में चुनावों में भी नहीं हुआ। जबकि हमारा गांव तो आए दिन चर्चाओं में रहता है। लेकिन इतनी सख्ती तो कभी नहीं देखी। पिछले 4 दिनों से सब्जी, फल को भी तरस गए। बस घर में जो अनाज, भाजी रखा है, वही पका रहे। वो भी खत्म होने को है। सब्जीवालों को गांव के अंदर आने नहीं दे रहे, हमें भी बाहर जाने की अनुमति नहीं है। राकेश ने बताया – पुलिस यहां दिनरात ड्यूटी दे रही है। वो भी भूखे-प्यासे रहते हैं। तो हमारी जिम्मेदारी बनती है कि अपने मेहमानों की भी थोड़ी खातिरदारी करें। घर में जो बिस्किट, चाय थी वो अब तक की खातिरदारी में लगा दी। गांव की दुकानों पर भी सामान खत्म हो चुका है। अब न घर में खाने की चीजें हैं, न दुकानों पर कुछ मिल रहा। बस जो राशन, सामान है, उसी में गुजारा कर रहे। स्कूल से टीचर खुद घर छोड़ रहीं गांव में जो स्कूल हैं, वहां जिन बच्चों की परीक्षा चल रही है, वो ही स्कूल जा रहे। बच्चों को खुद टीचर स्कूल से उनके घरों तक छोड़कर आ रही हैं। परीक्षा के कारण बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा है। इसके अलावा गांव की सारी गतिविधि बंद हैं, क्योंकि पता नहीं कहां से क्या हो जाए। यूपी से लेकर दिल्ली तक सियासत गरम गाजियाबाद से मेरठ तक पुलिस को चकमा देते रहे चंद्रशेखर 10 जनवरी को नगीना सांसद चंद्रशेखर पुलिस को चकमा देते हुए मेरठ बॉर्डर तक पहुंच गए। वहां उन्हें पकड़कर दिल्ली वापस भेजा गया। शनिवार दोपहर पुलिस ने गाजियाबाद में काफिला रोका तो चंद्रशेखर कार छोड़कर दौड़ पड़े। पुलिसकर्मी पकड़ पाते, इससे पहले वह बाइक पर निकल गए। अगत्य मोर्चा डासना टोल पर लगाया गया, लेकिन यहां भी चंद्रशेखर समर्थकों की भीड़ का फायदा उठाकर और गाड़ियां बदलकर चकमा देने में कामयाब रहे। बाद में मेरठ की सीमा पर उन्हें रोका गया और दिल्ली वापस भेज गया। चंद्रशेखर कहते हुए सुने गए कि एक चुना हुआ सांसद कपसाड़ नहीं जा सकता, क्योंकि कपसाड़ मेरठ में नहीं, पाकिस्तान में है।.. वहीं मायावती ने भी ट्वीट करके नाराजगी जाहिर की… अब ये जानिए कि लड़की लेकर भागने के बाद पारस कहां-कहां गया… मेरठ पुलिस के मुताबिक, कपसाड़ स्थित रजवाहे से रूबी को अगवा करके पारस अपनी रिश्तेदारी खतौली में ले गया था। शाम तक उन्हें मां सुनीता की मौत की खबर मिल गई। फिर दोनों दिल्ली चले गए, वहां एक होटल में रात गुजारी। उसके बाद वहां से पारस के दोस्त के पास गुरुग्राम चले गए। दोनों मीडिया कवरेज के जरिए गांव के माहौल पर नजर रखे हुए थे। गांव का माहौल बिगड़ने पर पारस रूबी को लेकर गुरुग्राम से साथ ट्रेन से सहारनपुर पहुंच गया। यहां टपरी गांव में उसकी बहन रहती है। उनके घर पर शुक्रवार की रात बिताई। यहां से शनिवार को हरिद्वार के लिए ट्रेन में सवार हो गए। पारस ने अपने परिवार के बारे में दोस्त राजेंद्र से जानकारी की। उसने ट्रेन में सवार सहयात्री के मोबाइल से कॉल कर ली। तभी पुलिस ने पारस को पकड़ लिया। पुलिस कस्टडी में पारस सोम ने बताया कि तीन साल से कालेज में पढ़ते समय ही रूबी से प्यार हो गया था। दोनों ने साथ में भागने का फैसला लिया था। दरअसल, परिवार के लोगों ने रूबी की शादी तय कर दी थी। पिछले दो महीने से रूबी को साथ ले जाने का प्लान बना रहा था। गुरुवार को भी रूबी को खेत में जाते देखकर उसके पीछे-पीछे निकला था। जैसे ही रूबी साथ चलने के लिए तैयार हुई। तभी उसकी मां ने विरोध किया। इसी हाथापाई में फरसे से हमला हो गया। हालांकि, पुलिस पारस के इन बयानों को नहीं मान रही। अब युवती के बयान को आधार बनाकर ही मुकदमे में आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब पुलिस अधिकारियों की बात ADG भानु भास्कर ने बताया- युवती के बयान दर्ज हो चुके हैं। फिलहाल उसे आशा ज्योति केंद्र से रिलीज कर दिया गया है। फिलहाल दोनों को सुनीता हत्याकांड में आरोपी बनाया जाएगा। युवती के बयानों को आधार बनाते हुए मुकदमे में अन्य धाराएं बढ़ा दी गई हैं। लॉ एंड ऑर्डर बनाया जा रहा है। हर शाम सीनियर ऑफिसर खुद पूरी टीम से सिक्योरिटी की ब्रीफिंग ले रहे हैं। ……………. ये पढ़ें – ‘मेरा रूबी से 3 साल पुराना अफेयर, मैं निर्दोष हूं’:मेरठ में मां की हत्या कर बेटी को अगवा करने वाला जज के सामने गिड़गिड़ाया जज साहब! मेरा नाम पारस सोम है। मैं निर्दोष हूं और मुझे गलत फंसाया जा रहा। मुझे बचा लीजिए। मैं 3 साल से रूबी के साथ रिलेशनशिप में हूं। हमारा रिश्ता सच्चा है। किडनैपिंग की कोई बात नहीं है। हम दोनों दोस्त हैं। रूबी अपनी मर्जी से आई थी। ये बातें पारस सोम ने स्पेशल सीजेएम विकास सावन की कोर्ट में कही, जिसने मेरठ में मां की हत्या कर बेटी को किडनैप कर लिया था। आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। जबकि रूबी को एसीजेएम- 2 नम्रता की कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उसे काउंसिलिंग के लिए भेजा गया है। पढ़िए पूरी खबर…