यूपी में मानसून का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। उम्मीद है कि 1 से 2 जुलाई तक मानसून यूपी के पूर्वांचल और मध्य इलाकों को सराबोर करेगा। पहले उम्मीद थी कि 20 से 25 जून तक बारिश हो सकती है। लेकिन, बंगाल की खाड़ी से उठा मानसून पिछले 19 दिनों से बिहार बॉर्डर पर ही ‘अटक’ कर रह गया है। ऐसा यूपी के वायुमंडल में ‘लो प्रेशर एरिया’ (कम दबाव क्षेत्र) नहीं बनने से हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसूनी बारिश एक चेन रिएक्शन की तरह काम करती है। पहले इसे समझते हैं- लो प्रेशर वैक्यूम बनता है- जब किसी क्षेत्र में भीषण गर्मी से जमीन और हवा ज्यादा गर्म हो जाती है, तो वहां की हवा हल्की होकर ऊपर उठ जाती है। इससे नीचे एक ‘लो प्रेशर वैक्यूम’ (खाली जगह) बनता है। ठंडी हवाएं बादल बनाती हैं- इस खाली जगह को भरने के लिए बंगाल की खाड़ी से नमी से भरी ठंडी हवाएं तेजी से मैदानी इलाकों की तरफ बहती हैं। यही हवाएं बादल बनाती हैं और झमाझम बारिश करती हैं। इस बार क्या हुआ- यूपी के ऊपर इस बार ऐसा कोई मजबूत ‘लो प्रेशर वैक्यूम’ तैयार नहीं हो सका, जो उन मानसूनी हवाओं को अपनी तरफ खींच सके। नतीजा यह हुआ कि हवाएं बिहार बॉर्डर के पास आकर सुस्त पड़ गईं। जहां मानसून अटका, वहां भी अच्छी बारिश नहीं बिहार के मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) और झारखंड-बिहार सीमा के पास डाल्टनगंज रेखा पर मानसून ठहरा हुआ है। दिलचस्प यह है कि जिन जिलों में मानसून अटका है, वहां भी अच्छी बारिश नहीं हो रही। मौसम विभाग के मुताबिक, 29 जून की शाम से हवाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। मोतिहारी और डाल्टनगंज समेत पूरे बिहार और झारखंड में तेज आंधी (50-60 किमी/घंटा) के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यही सिस्टम अब मानसून को धक्का देकर अगले 24 से 48 घंटों में यूपी में एंट्री दिलाएगा। जून की बारिश, जुलाई-अगस्त का पूर्वानुमान समझिए इस साल जून में मानसूनी बारिश की स्थिति बेहद खराब रही। प्रदेश के 34 जिलों में ‘रेन डेफिसिट’ यानी भारी सूखा दर्ज किया गया। जून महीने में होने वाली औसत बारिश सामान्य से करीब 60% तक कम रही। पूर्वी यूपी – 64% कम बारिश हुई। सामान्यतः यहां 101.2 mm बारिश होती है, जबकि इस बार सिर्फ 36.2 mm बारिश हुई। पश्चिमी यूपी – 50% कम बारिश हुई। सामान्य तौर पर यहां 72.3 mm बारिश होती है, जबकि इस बार सिर्फ 36.3 mm बारिश हुई। जुलाई, अगस्त में भी कम बारिश हो सकती है स्काईमेट के लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) पूर्वानुमान के अनुसार, यूपी में जुलाई और अगस्त में मानसून की बारिश ‘सामान्य से थोड़ी कम’ रहने की आशंका है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस साल अल नीनो का असर प्रशांत महासागर में दोबारा मजबूत हो रहा है। इसके प्रभाव से यूपी में भी मानसूनी हवाओं का प्रवाह थोड़ा सुस्त है। कुल मानसूनी बारिश LPA का 90% से 94% रहने का अनुमान है, जो ‘सामान्य से कम’ की श्रेणी में आता है। जुलाई में बारिश – जुलाई के पहले 15 दिन में पूर्वांचल, मध्य यूपी और पश्चिमी यूपी में अच्छी मानसूनी बारिश देखने को मिलेगी। जुलाई के आखिरी 15 दिनों में मानसून की सक्रियता में थोड़ी कमी आ सकती है। कुल मिलाकर जुलाई में सामान्य से करीब 5% कम बारिश की आशंका है। अगस्त में बारिश – अगस्त में मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका है। इस दौरान सामान्य से 8% तक कम बारिश हो सकती है। जबकि यूपी की खरीफ फसल (विशेषकर धान) के लिए यह महीना काफी अहम होता है। जून की गर्मी ने क्या रिकॉर्ड तोड़े, ये जानिए यूपी में आमतौर पर जून में सिर्फ 2 से 3 दिन हीटवेव चलती है। इस साल मानसून में देरी के कारण प्रदेश के दो-तिहाई जिलों में 10 से 14 दिनों तक भीषण हीटवेव का दौर चलता रहा। 20 से 22 जून के आसपास मानसून की पुरवा हवाओं के साथ यह बंद हो जाती है। लेकिन, इस साल 30 जून तक लू चलती रही। इससे जून में 2 बड़े रिकॉर्ड बने- 1. 127 साल की सबसे गर्म रात जून में दिन का तापमान औसतन 38°C से 40°C रहता है। इस साल दिन का पारा 47.6°C और रात का तापमान 30.8°C तक पहुंच गया, जो सामान्य से 5°C से 8°C ज्यादा है। प्रयागराज में 11-12 जून की रात का तापमान 34.3°C दर्ज किया गया, जिसने पिछले 127 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। साल-1898 में यहां सबसे गर्म रात का तापमान 33.5°C दर्ज हुआ था। 2. ‘ग्लोबल हीट इंडेक्स’ की टॉप-20 सूची में यूपी के जिले जून में ऐसे 3 मौके आए, जब दुनिया की रियल-टाइम टेम्परेचर रैंकिंग में यूपी के जिले शामिल हुए। जून के दूसरे सप्ताह में दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों की सूची में भारत के 19 शहर थे, जिनमें यूपी के 5 जिले शामिल थे। ये जिले बांदा, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर और फतेहपुर थे। कानपुर का अधिकतम तापमान कई बार 47°C पार चला गया। इस साल रिकॉर्डतोड़ गर्मी क्यों पड़ी लेट मानसून, मजबूत वेदर सिस्टम नहीं बना इस साल मानसून केरल में ही 4 दिन लेट पहुंचा। इसके बाद बिहार बॉर्डर पर करीब 19 दिनों से रुका है। इससे सूखी और गर्म हवाओं का दौर 8 दिन आगे खिंच गया। यूपी के वायुमंडल में कोई मजबूत वेदर सिस्टम (एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन) सक्रिय न होने से प्री-मानसून बारिश गायब रही। आसमान साफ होने से तेज धूप सीधे जमीन पर पड़ी। राजस्थान और पाकिस्तान के रेगिस्तानों की तरफ से आने वाली सूखी, गर्म पछुआ हवाएं बिना किसी रुकावट के यूपी को भट्टी बनाती रहीं। धान की रोपाई जुलाई में करने की सलाह धान की रोपाई- चूंकि जुलाई के शुरुआती हफ्तों में अच्छी मानसूनी बारिश की उम्मीद है, इसलिए किसान जुलाई के पहले पखवाड़े (15 जुलाई तक) में अपनी रुकी हुई धान की रोपाई तेजी से पूरी कर सकते हैं। अगस्त में सिंचाई की जरूरत- अगस्त में बारिश कम होने के कारण किसानों को पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर रहने के बजाय ट्यूबवेल, बोरिंग और नहरों के पानी का इस्तेमाल बढ़ाना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ने की आशंका रहेगी। —————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में इस साल सूखे के आसार, मानसून लेट हुआ, जून में हीटवेव चलेगी, बारिश के भरोसे रहे तो धान की खेती चौपट होगी यूपी में इस साल मानसून सीजन में बारिश कम होगी। वेस्ट यूपी के 10 जिलों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। जबकि 60 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। वेस्ट यूपी में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन यानी चक्रवात की वजह से जून के शुरुआती हफ्ते में बारिश होगी। पूरी खबर पढ़ें…