कानपुर का वकील अखिलेश दुबे लड़कियों से फर्जी मुकदमे लिखवाकर लोगों से करोड़ों वसूलता था। हाल में एक BJP नेता ने अखिलेश पर झूठा मुकदमा करने का आरोप लगाया कि उन पर फर्जी केस लगाकर 50 लाख की वसूली की। इसके बाद पुलिस ने मामले में जांच शुरू की। फिर अखिलेश के काले कारनामों की परत-दर-परत खुलती चली गई। पता चला कि अखिलेश ने शहर में 1500 करोड़ की सरकारी संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है। उन पर स्कूल, गेस्ट हाउस और कॉमर्शियल एक्टिविटी कर रहा था। लेकिन, बड़े-बड़े अफसर उस पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। संपत्तियों की कुल बाजार कीमत 2500 करोड़ से ज्यादा की हैं। अखिलेश दुबे पुलिस के लिए मुफ्त में चार्जशीट लिखता था। दुबे के सिंडीकेट में कई IPS-PPS अफसर भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी काली कमाई दुबे के जरिए जमीनों और अलग-अलग कंपनियों में खपा रखी है। कानपुर के पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने दुबे को अरेस्ट करके जेल भेजा, तो पूरा सिंडीकेट का खुलासा हुआ। दुबे ने कैसे अपना ये खेल शुरू किया? कैसे संपत्तियों पर कब्जा किया? पुलिस वालों को कैसे अपने साथ जोड़ा? किस तरह इतने कम समय में करोड़ों का मालिक बना? पढ़िए दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट… पुलिस की मुफ्त में चार्जशीट लिखकर खड़ी की करोड़ों की संपत्ति
अब तक की जांच में सामने आया कि अखिलेश दुबे पुलिस के लिए केस डायरी और चार्जशीट लिखने का काम करता था। अखिलेश दुबे ने पुलिस महकमे से रिटायर कई पुलिस कर्मियों को अपने यहां नौकरी दे रखी थी, जो लिखापढ़ी में माहिर थे। करीब 12 से 15 सालों से तो ये हालात हो गए थे कि प्रदेश के हर बड़े एनकाउंटर में पुलिस पहले दुबे से सलाह-मशविरा करती, इसके बाद एनकाउंटर करती। दुबे उसकी केस डायरी लिखता था। इसके लिए वह फीस नहीं लेता था। अतीक अशरफ का मर्डर हो या विकास दुबे का एनकाउंटर, एसटीएफ के हर बड़े एनकाउंटर की केस डायरी दुबे का गाइडेंस जरूर रहता था। इससे दुबे की पुलिस अफसरों की नजदीकी बढ़ती चली गई और दुबे ने जिस पर जब चाहा रेप की एफआईआर दर्ज करवाकर जेल भिजवा दिया। दुबे के लिए किसी मामले में एफआईआर दर्ज कराना खेल जैसा था। कहा जाए तो पुलिस उसकी जेब में थी। यही वजह थी कि कानपुर में बड़े से बड़ा व्यक्ति या एमपी, एमएलए दुबे से मोर्चा लेने में घबराते थे। इसी दहशत का फायदा उठाकर कानपुर के बड़े बिल्डरों के साथ पार्टनरशिप की और फिर धीरे-धीरे जमीनों के धंधे में उतर गया। कानपुर या यूपी के बड़े शहर ही नहीं उत्तराखंड तक में प्लॉटिंग करके जमीनों को बेचा। मेरठ से भागकर आया था कानपुर
अधिवक्ता अखिलेश दुबे मूल रूप से कन्नौज के गुरसहायगंज का रहने वाला है। उसके पिता सेंट्रल एक्साइज में कॉन्स्टेबल थे। मेरठ में तैनात थे। वहां रहने के दौरान अखिलेश दुबे की सुनील भाटी गैंग से भिड़ंत हो गई। इसके बाद वह भागकर कानपुर आ गया। बात करीब 1985 की है। अखिलेश दुबे किदवई नगर में किराए का कमरा लेकर रहने लगा। दीप सिनेमा के बाहर साइकिल स्टैंड संचालित करता था। इस दौरान मादक पदार्थ तस्कर मिश्री जायसवाल की मादक पदार्थ की पुड़िया बेचने लगा। धीरे-धीरे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गया। 1995 में नीतू नाई का करवाया था एनकाउंटर
कानपुर में अखिलेश दुबे की गैंगस्टर नीतू नाई और गोपी नाई से रंजिश शुरू हो गई। नीतू नाई से रंजिश और हत्या के डर से अखिलेश दुबे किदवई नगर से भागकर राममोहन हाता के ‘खलीफा गैंग’ की शरण में पहुंचा। यहां पर एक कांग्रेसी नेता ने दुबे को शेल्टर दिया। दुबे मजबूत गैंग के शरण में आने के बाद कई पुलिस वालों के संपर्क में आ गया। इस दौरान शहर के चर्चित अपराधी और अपने दुश्मन गोपी नाई का पुलिस से साठगांठ व मुखबिरी करके करीब 1995 में एनकाउंटर करवा दिया। इसके बाद से ही अखिलेश दुबे का उदय हुआ। नीतू नाई के एनकाउंटर के बाद दुबे का वर्चस्व बढ़ना शुरू हो गया। इसके बाद दुबे के संपर्क में कई बड़े अपराधी संपर्क में आ गए, तो दूसरी तरफ अखिलेश दुबे भी पुलिस का मजबूत मुखबिर बन गया। धीरे-धीरे कई थानेदार, दरोगा, इंस्पेक्टर संपर्क में आ गए। इसी बीच दुबे ने जुगाड़ से लॉ की डिग्री हासिल कर ली। इसके बाद पीएचडी भी करने का दावा करके अपना नाम डॉ. अखिलेश दुबे लिखने लगा। पुलिस की आड़ में दुबे ने चलाया फर्जी FIR उद्योग
अखिलेश ने कानपुर में राज करने के लिए फर्जी FIR कराना शुरू कर दिया। जो भी कोई अखिलेश की बात नहीं मानता या फिर उसके जमीनों के कारोबार में अड़चन पैदा करता, उसके खिलाफ झूठी रेप और एससी, एसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज करवाकर जेल भिजवा देता था। पुलिस कमिश्नर का PRO निकला अखिलेश का दरबारी
पुलिस कमिश्नर के पैरों तले जमीन उस वक्त खिसक गई, जब उन्हें पता चला कि दुबे सिंडीकेट का दरबारी ही उनका पीआरओ है। पुलिस कमिश्नर ऑफिस के पल-पल की सूचनाएं दुबे को देता है। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने उसे हटाया और उसके खिलाफ जांच बैठा दी। पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद ही केडीए में 15 से 16 जुलाई के बीच सारे अनुभागों में भारी फेरबदल कर दिया गया था। जहां लंबे समय से एक ही कुर्सी पर जमे 100 कर्मचारी दूसरे अनुभागों में भेज दिए गए। वहीं, प्रवर्तन की पूरी टीम ही बदल दी गई। दुबे को किस मामले में भेजा गया जेल?
पुलिस कमिश्नर ने फर्जी रेप के मुकदमों को लेकर SIT गठित की थी। जांच के दौरान 54 ऐसे मामले सामने आए, जो रेप के झूठे मामले थे। सिर्फ लोगों को फंसाने के लिए रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जिसमें से करीब 10 से 12 मामले तो सीधे अखिलेश दुबे से जुड़ रहे थे। इसी में SIT के पास पहुंचा एक मुकदमा BJP नेता रवि सतीजा का था। रवि सतीजा के एक संपत्ति विवाद को लेकर दबाव बनाने के लिए अखिलेश दुबे ने झूठा रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया। जेल भिजवाने की तैयारी थी। लेकिन, सतीजा ने दुबे के पास जाकर हाथ-पैर जोड़कर रुपए देकर समझौता किया। जब SIT ने जांच शुरू की तो रवि सतीजा ने पूरी सच्चाई बयां कर दी कि अखिलेश दुबे ने ब्लैकमेल करने और रंगदारी वसूलने के लिए उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। एक ऐसा वकील, जिसने कभी कोर्ट में नहीं की बहस
अखिलेश दुबे एक ऐसा वकील था, जिसने कभी कोर्ट में खड़े होकर किसी केस में बहस नहीं की, उसके दरबार में खुद कोर्ट लगती थी और दुबे ही फैसला सुनाता था। ऐसा वकील जो कभी कचहरी नहीं गया और कोर्ट में किसी केस की बहस नहीं की। सिर्फ अपने दफ्तर में बैठकर पुलिस अफसरों के लिए उनके जांचों की लिखापढ़ी करता था। बड़े-बड़े केस की लिखापढ़ी दुबे के दफ्तर में होती थी। इसी का फायदा उठाकर वह लोगों के नाम निकालने और जोड़ने का काम करता था। इसी डर की वजह से बीते 3 दशक से उसका कानपुर में बादशाहत कायम थी। कोई भी उससे मोर्चा लेने की स्थिति में नहीं था। बेटी की शादी में IPS अफसर कर रहे थे अगवानी
अखिलेश दुबे ने अपनी बेटी की शादी आगरा के ताज होटल से की थी। शादी में एक-दो नहीं 40 से 50 IPS अफसर पहुंचे थे। PPS और दरोगा-इंस्पेक्टरों की तो गिनती ही नहीं थी। शादी में अधिवक्ता अखिलेश दुबे का रसूख देखने को मिला था। किसी एमपी, एमएलए या फिर कैबिनेट मिनिस्टर की घरेलू शादी में भी ऐसा रसूख देखने को नहीं मिलता है। शादी में सीनियर आईपीएस अफसर बारातियों की अगुवानी कर रहे थे। एसपी और एडिशनल एसपी स्तर के अफसर तो बारातियों की प्लेट तक परोस कर लगा रहे थे। दुबे ने पुलिस ने पैरलल सिंडीकेट चलाया, बड़ी पंचायतें कराने लगा
अखिलेश दुबे का शहर में इस तरह कद बढ़ गया कि अब उसके यहां हर बड़े मामले की पंचायत होने लगी। बड़े से बड़े मामले निपटाने के लिए लोग कोर्ट कचहरी या पुलिस के पास जाने की बजाय दुबे के पास ही जाते थे। दुबे बड़ी से बड़ी पंचायत कराकर लोगों के मामले निपटाने लगा। दुबे की अदालत में ही कानपुर के बड़े मसले निपटने लगे। इससे भी दुबे को मोटी कमाई होने लगी। हर बड़े मामले में उसका हस्ताक्षेप होने लगा। अगर जरूरत पड़ती तो दुबे पुलिस अफसरों को अपने दरबार में ही बुलाकर मामले को निपटाता या फिर जब कोई उसकी बात नहीं मानता तो वह अपने शस्त्र झूठे मुकदमे लिखाकर दबाव बनाता था। इस तरह के एक-दो नहीं सैकड़ों मामले अब तक पुलिस के सामने आ चुके हैं। काले कारनामों को छिपाने को शुरू किया चैनल
दुबे ने अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए सबसे पहले एक न्यूज चैनल शुरू किया। इसके बाद वकीलों का सिंडीकेट बनाया, फिर इसमें कई पुलिस अफसरों को शामिल किया। कानपुर में स्कूल, गेस्ट हाउस, शॉपिंग मॉल और जमीनों के कारोबार में बड़े से बड़े बिल्डर उसके साथ जुड़ते चले गए। दुबे का सिंडीकेट इतना मजबूत था कि उसकी बिल्डिंग पर केडीए से लेकर कोई भी विभाग आपत्ति नहीं करता था। मंडलायुक्त का दफ्तर हो या डीएम ऑफिस, केडीए, नगर निगम और पुलिस महकमे से लेकर हर विभाग में उसका मजबूत सिंडीकेट फैल गया। उसके एक आदेश पर बड़े से बड़ा काम हो जाता था। जानिए कहां पर कितना कब्जा किया कम्युनिटी सेंटर की आड़ में पूरे पार्क पर किया कब्जा
साकेत नगर में डब्ल्यू वन का भू-उपयोग पार्क है। जिसका क्षेत्रफल 3719 वर्ग मीटर है। इसमें 365.82 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की लीज डीड बृज किशोरी दुबे स्मारक समिति के सचिव अखिलेश दुबे के पक्ष में केडीए द्वारा 26 दिसंबर 2005 को की गई थी। 2008 में दो मंजिल तक कम्युनिटी सेंटर बनाने की अनुमति मिली। जांच कमेटी ने पाया है कि किशोरी वाटिका की आड़ में पूरे पार्क पर कब्जा कर लिया गया है। पार्क का व्यवसायिक इस्तेमाल हो रहा है। कमेटी ने कम्युनिटी सेंटर का अवैध निर्माण ढहाने और पार्क को पब्लिक के लिए खाली कराने की सिफारिश की है। दुबे ने पार्क की जमीन कब्जा करके बना दिया स्कूल
ब्लॉक डब्ल्यू वन में प्लॉट नंबर 559 का भू-उपयोग पार्क है। इस पार्क का क्षेत्रफल 1.11 एकड़ यानी 4492.011 वर्ग मीटर है। इसमें 1860 वर्ग मीटर पार्क का आवंटन डॉ. बृज किशोर दुबे स्कूल के लिए 15 सितंबर 1998 में 10 वर्ष के लिए किया गया था। इसकी मियाद वर्ष 2008 में समाप्त हो गई और केडीए द्वारा इसका नवीनीकरण नहीं किया गया। लिहाजा पार्क में भवन का निर्माण अवैध है। जांच में यह भी बताया गया है कि यह जमीन केडीए की अर्जित जमीन है, लिहाजा इसमें अवैध निर्माणकर्ताओं को बेदखल करते हुए निर्माण ध्वस्त करने की सिफारिश कमेटी ने की है। केडीए की जमीन पर कर दी प्लॉटिंग
जूही कलां के योजना द्वितीय डब्ल्यू वन में प्लॉट नंबर 558/1 रिजर्व आवास है। यह 1758 वर्ग गज में है। संस्थापक का नाम राम कृष्ण दुबे और ब्रिज किशोरी दुबे अंकित है। इस प्लॉट परिसर में 558 ई के 1 से 10 नंबर से भवन निर्मित हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 1980 से 2000 के बीच कई भूखंड बेचे गए। केडीए ने किसी का आवंटन ही नहीं किया। प्लॉट से सटे पार्क नंबर 559 का भी कुछ भाग इसमें मिलाकर कई निर्माण किए गए हैं। 1680 वर्ग मीटर में बॉस्केट बॉल कोर्ट और 2000 वर्ग मीटर में स्कूल का निर्माण मिला, जो बृज किशोरी दुबे मेमोरियल के नाम से है। पार्क में खड़ा कर दिया स्कूल
इतना ही नहीं, एक और जमीन का मामला भी सामने आया है। तेजाब मिल कैंपस वेलफेयर सोसाइटी 84/63 उत्तरीय रेलवे सहकारी आवास समिति की है। इसमें एक पार्क की जमीन पर स्कूल बना मिला। इसमें कमेटी ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि केडीए ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है, मगर इसमें प्रभावी प्रवर्तन की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। केडीए द्वारा बताया गया कि पार्क में भवन बनाए जाने कोई नक्शा केडीए के अभिलेखों में स्वीकृत नहीं मिला है। आगे की कार्रवाई केडीए करेगा। उत्तराखंड में पहाड़ खरीदकर की प्लॉटिंग
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि दुबे ने उत्तराखंड में एक पहाड़ ही खरीद लिया था। इसके बाद वहां पर बड़े पैमाने पर जमीनों पर प्लॉटिंग करके अफसरों को फॉर्म हाउस बेचा था। एक पुलिस अफसर के साथ तो हरिद्वार में आलीशान होटल भी बन रहा है। छह महीने पहले हुए थे गेस्ट हाउस गिराने का आदेश
शिवशक्ति गेस्ट हाउस का निर्माण भी जांच कमेटी ने बिना नक्शे के ही पाया है। साथ ही यह भी लिखा है कि इस भूखंड की रजिस्ट्री कूटरचित अभिलेखों के आधार पर की गई। कोतवाली में धोखाधड़ी की धाराओं में पहले से एफआईआर दर्ज है जिसका मामला एसीजेएम कोर्ट में विचाराधीन है। समिति के मुताबिक केडीए ने इसके ध्वस्तीकरण का आदेश फरवरी में ही जारी किया है। समिति ने सिफारिश की है। लोग डरें नहीं, दुबे के सताए हुए सामने आकर शिकायत करें
पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने बताया-अखिलेश दुबे से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। जो भी दुबे का सताया हुआ है, खुलकर सामने आए और शिकायत करें। उसकी जांच करके दुबे और उसके सिंडीकेट के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। लोग खुलकर शिकायत करेंगे, तभी दुबे का सिंडीकेट पूरी तरह से टूट पाएगा। केडीए की जांच में सामने आया है कि अखिलेश दुबे ने शहर के अलग-अलग इलाकों में 1500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति पर कब्जा कर रखा है। केडीए जल्द ही दुबे के कब्जे वाली जमीनों पर बुलडोजर चलाकर उसे कब्जामुक्त कराएगा। ………………………………… पढ़ें पूरी खबर… ‘दोस्तों ने बर्थडे पार्टी में बुलाकर पति को मार डाला’, हिस्ट्रीशीटर अंकित की पत्नी बोली- वे जलते थे रात में मेरे पति अंकित के पास दोस्त शिवम और रोहन की कॉल आई। रोहन की बर्थडे पार्टी में आने के लिए बुलाया। 14 अगस्त की रात 8.25 बजे अंकित रोहन की बर्थडे पार्टी में चला गया। लेकिन, वो रातभर घर नहीं लौटे। रात 12 बजे तक हमारी फोन पर बात हुई। उसके बाद अंकित का मोबाइल बंद हो गया। पढ़ें पूरी खबर…
अब तक की जांच में सामने आया कि अखिलेश दुबे पुलिस के लिए केस डायरी और चार्जशीट लिखने का काम करता था। अखिलेश दुबे ने पुलिस महकमे से रिटायर कई पुलिस कर्मियों को अपने यहां नौकरी दे रखी थी, जो लिखापढ़ी में माहिर थे। करीब 12 से 15 सालों से तो ये हालात हो गए थे कि प्रदेश के हर बड़े एनकाउंटर में पुलिस पहले दुबे से सलाह-मशविरा करती, इसके बाद एनकाउंटर करती। दुबे उसकी केस डायरी लिखता था। इसके लिए वह फीस नहीं लेता था। अतीक अशरफ का मर्डर हो या विकास दुबे का एनकाउंटर, एसटीएफ के हर बड़े एनकाउंटर की केस डायरी दुबे का गाइडेंस जरूर रहता था। इससे दुबे की पुलिस अफसरों की नजदीकी बढ़ती चली गई और दुबे ने जिस पर जब चाहा रेप की एफआईआर दर्ज करवाकर जेल भिजवा दिया। दुबे के लिए किसी मामले में एफआईआर दर्ज कराना खेल जैसा था। कहा जाए तो पुलिस उसकी जेब में थी। यही वजह थी कि कानपुर में बड़े से बड़ा व्यक्ति या एमपी, एमएलए दुबे से मोर्चा लेने में घबराते थे। इसी दहशत का फायदा उठाकर कानपुर के बड़े बिल्डरों के साथ पार्टनरशिप की और फिर धीरे-धीरे जमीनों के धंधे में उतर गया। कानपुर या यूपी के बड़े शहर ही नहीं उत्तराखंड तक में प्लॉटिंग करके जमीनों को बेचा। मेरठ से भागकर आया था कानपुर
अधिवक्ता अखिलेश दुबे मूल रूप से कन्नौज के गुरसहायगंज का रहने वाला है। उसके पिता सेंट्रल एक्साइज में कॉन्स्टेबल थे। मेरठ में तैनात थे। वहां रहने के दौरान अखिलेश दुबे की सुनील भाटी गैंग से भिड़ंत हो गई। इसके बाद वह भागकर कानपुर आ गया। बात करीब 1985 की है। अखिलेश दुबे किदवई नगर में किराए का कमरा लेकर रहने लगा। दीप सिनेमा के बाहर साइकिल स्टैंड संचालित करता था। इस दौरान मादक पदार्थ तस्कर मिश्री जायसवाल की मादक पदार्थ की पुड़िया बेचने लगा। धीरे-धीरे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गया। 1995 में नीतू नाई का करवाया था एनकाउंटर
कानपुर में अखिलेश दुबे की गैंगस्टर नीतू नाई और गोपी नाई से रंजिश शुरू हो गई। नीतू नाई से रंजिश और हत्या के डर से अखिलेश दुबे किदवई नगर से भागकर राममोहन हाता के ‘खलीफा गैंग’ की शरण में पहुंचा। यहां पर एक कांग्रेसी नेता ने दुबे को शेल्टर दिया। दुबे मजबूत गैंग के शरण में आने के बाद कई पुलिस वालों के संपर्क में आ गया। इस दौरान शहर के चर्चित अपराधी और अपने दुश्मन गोपी नाई का पुलिस से साठगांठ व मुखबिरी करके करीब 1995 में एनकाउंटर करवा दिया। इसके बाद से ही अखिलेश दुबे का उदय हुआ। नीतू नाई के एनकाउंटर के बाद दुबे का वर्चस्व बढ़ना शुरू हो गया। इसके बाद दुबे के संपर्क में कई बड़े अपराधी संपर्क में आ गए, तो दूसरी तरफ अखिलेश दुबे भी पुलिस का मजबूत मुखबिर बन गया। धीरे-धीरे कई थानेदार, दरोगा, इंस्पेक्टर संपर्क में आ गए। इसी बीच दुबे ने जुगाड़ से लॉ की डिग्री हासिल कर ली। इसके बाद पीएचडी भी करने का दावा करके अपना नाम डॉ. अखिलेश दुबे लिखने लगा। पुलिस की आड़ में दुबे ने चलाया फर्जी FIR उद्योग
अखिलेश ने कानपुर में राज करने के लिए फर्जी FIR कराना शुरू कर दिया। जो भी कोई अखिलेश की बात नहीं मानता या फिर उसके जमीनों के कारोबार में अड़चन पैदा करता, उसके खिलाफ झूठी रेप और एससी, एसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज करवाकर जेल भिजवा देता था। पुलिस कमिश्नर का PRO निकला अखिलेश का दरबारी
पुलिस कमिश्नर के पैरों तले जमीन उस वक्त खिसक गई, जब उन्हें पता चला कि दुबे सिंडीकेट का दरबारी ही उनका पीआरओ है। पुलिस कमिश्नर ऑफिस के पल-पल की सूचनाएं दुबे को देता है। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने उसे हटाया और उसके खिलाफ जांच बैठा दी। पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद ही केडीए में 15 से 16 जुलाई के बीच सारे अनुभागों में भारी फेरबदल कर दिया गया था। जहां लंबे समय से एक ही कुर्सी पर जमे 100 कर्मचारी दूसरे अनुभागों में भेज दिए गए। वहीं, प्रवर्तन की पूरी टीम ही बदल दी गई। दुबे को किस मामले में भेजा गया जेल?
पुलिस कमिश्नर ने फर्जी रेप के मुकदमों को लेकर SIT गठित की थी। जांच के दौरान 54 ऐसे मामले सामने आए, जो रेप के झूठे मामले थे। सिर्फ लोगों को फंसाने के लिए रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जिसमें से करीब 10 से 12 मामले तो सीधे अखिलेश दुबे से जुड़ रहे थे। इसी में SIT के पास पहुंचा एक मुकदमा BJP नेता रवि सतीजा का था। रवि सतीजा के एक संपत्ति विवाद को लेकर दबाव बनाने के लिए अखिलेश दुबे ने झूठा रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया। जेल भिजवाने की तैयारी थी। लेकिन, सतीजा ने दुबे के पास जाकर हाथ-पैर जोड़कर रुपए देकर समझौता किया। जब SIT ने जांच शुरू की तो रवि सतीजा ने पूरी सच्चाई बयां कर दी कि अखिलेश दुबे ने ब्लैकमेल करने और रंगदारी वसूलने के लिए उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। एक ऐसा वकील, जिसने कभी कोर्ट में नहीं की बहस
अखिलेश दुबे एक ऐसा वकील था, जिसने कभी कोर्ट में खड़े होकर किसी केस में बहस नहीं की, उसके दरबार में खुद कोर्ट लगती थी और दुबे ही फैसला सुनाता था। ऐसा वकील जो कभी कचहरी नहीं गया और कोर्ट में किसी केस की बहस नहीं की। सिर्फ अपने दफ्तर में बैठकर पुलिस अफसरों के लिए उनके जांचों की लिखापढ़ी करता था। बड़े-बड़े केस की लिखापढ़ी दुबे के दफ्तर में होती थी। इसी का फायदा उठाकर वह लोगों के नाम निकालने और जोड़ने का काम करता था। इसी डर की वजह से बीते 3 दशक से उसका कानपुर में बादशाहत कायम थी। कोई भी उससे मोर्चा लेने की स्थिति में नहीं था। बेटी की शादी में IPS अफसर कर रहे थे अगवानी
अखिलेश दुबे ने अपनी बेटी की शादी आगरा के ताज होटल से की थी। शादी में एक-दो नहीं 40 से 50 IPS अफसर पहुंचे थे। PPS और दरोगा-इंस्पेक्टरों की तो गिनती ही नहीं थी। शादी में अधिवक्ता अखिलेश दुबे का रसूख देखने को मिला था। किसी एमपी, एमएलए या फिर कैबिनेट मिनिस्टर की घरेलू शादी में भी ऐसा रसूख देखने को नहीं मिलता है। शादी में सीनियर आईपीएस अफसर बारातियों की अगुवानी कर रहे थे। एसपी और एडिशनल एसपी स्तर के अफसर तो बारातियों की प्लेट तक परोस कर लगा रहे थे। दुबे ने पुलिस ने पैरलल सिंडीकेट चलाया, बड़ी पंचायतें कराने लगा
अखिलेश दुबे का शहर में इस तरह कद बढ़ गया कि अब उसके यहां हर बड़े मामले की पंचायत होने लगी। बड़े से बड़े मामले निपटाने के लिए लोग कोर्ट कचहरी या पुलिस के पास जाने की बजाय दुबे के पास ही जाते थे। दुबे बड़ी से बड़ी पंचायत कराकर लोगों के मामले निपटाने लगा। दुबे की अदालत में ही कानपुर के बड़े मसले निपटने लगे। इससे भी दुबे को मोटी कमाई होने लगी। हर बड़े मामले में उसका हस्ताक्षेप होने लगा। अगर जरूरत पड़ती तो दुबे पुलिस अफसरों को अपने दरबार में ही बुलाकर मामले को निपटाता या फिर जब कोई उसकी बात नहीं मानता तो वह अपने शस्त्र झूठे मुकदमे लिखाकर दबाव बनाता था। इस तरह के एक-दो नहीं सैकड़ों मामले अब तक पुलिस के सामने आ चुके हैं। काले कारनामों को छिपाने को शुरू किया चैनल
दुबे ने अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए सबसे पहले एक न्यूज चैनल शुरू किया। इसके बाद वकीलों का सिंडीकेट बनाया, फिर इसमें कई पुलिस अफसरों को शामिल किया। कानपुर में स्कूल, गेस्ट हाउस, शॉपिंग मॉल और जमीनों के कारोबार में बड़े से बड़े बिल्डर उसके साथ जुड़ते चले गए। दुबे का सिंडीकेट इतना मजबूत था कि उसकी बिल्डिंग पर केडीए से लेकर कोई भी विभाग आपत्ति नहीं करता था। मंडलायुक्त का दफ्तर हो या डीएम ऑफिस, केडीए, नगर निगम और पुलिस महकमे से लेकर हर विभाग में उसका मजबूत सिंडीकेट फैल गया। उसके एक आदेश पर बड़े से बड़ा काम हो जाता था। जानिए कहां पर कितना कब्जा किया कम्युनिटी सेंटर की आड़ में पूरे पार्क पर किया कब्जा
साकेत नगर में डब्ल्यू वन का भू-उपयोग पार्क है। जिसका क्षेत्रफल 3719 वर्ग मीटर है। इसमें 365.82 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की लीज डीड बृज किशोरी दुबे स्मारक समिति के सचिव अखिलेश दुबे के पक्ष में केडीए द्वारा 26 दिसंबर 2005 को की गई थी। 2008 में दो मंजिल तक कम्युनिटी सेंटर बनाने की अनुमति मिली। जांच कमेटी ने पाया है कि किशोरी वाटिका की आड़ में पूरे पार्क पर कब्जा कर लिया गया है। पार्क का व्यवसायिक इस्तेमाल हो रहा है। कमेटी ने कम्युनिटी सेंटर का अवैध निर्माण ढहाने और पार्क को पब्लिक के लिए खाली कराने की सिफारिश की है। दुबे ने पार्क की जमीन कब्जा करके बना दिया स्कूल
ब्लॉक डब्ल्यू वन में प्लॉट नंबर 559 का भू-उपयोग पार्क है। इस पार्क का क्षेत्रफल 1.11 एकड़ यानी 4492.011 वर्ग मीटर है। इसमें 1860 वर्ग मीटर पार्क का आवंटन डॉ. बृज किशोर दुबे स्कूल के लिए 15 सितंबर 1998 में 10 वर्ष के लिए किया गया था। इसकी मियाद वर्ष 2008 में समाप्त हो गई और केडीए द्वारा इसका नवीनीकरण नहीं किया गया। लिहाजा पार्क में भवन का निर्माण अवैध है। जांच में यह भी बताया गया है कि यह जमीन केडीए की अर्जित जमीन है, लिहाजा इसमें अवैध निर्माणकर्ताओं को बेदखल करते हुए निर्माण ध्वस्त करने की सिफारिश कमेटी ने की है। केडीए की जमीन पर कर दी प्लॉटिंग
जूही कलां के योजना द्वितीय डब्ल्यू वन में प्लॉट नंबर 558/1 रिजर्व आवास है। यह 1758 वर्ग गज में है। संस्थापक का नाम राम कृष्ण दुबे और ब्रिज किशोरी दुबे अंकित है। इस प्लॉट परिसर में 558 ई के 1 से 10 नंबर से भवन निर्मित हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 1980 से 2000 के बीच कई भूखंड बेचे गए। केडीए ने किसी का आवंटन ही नहीं किया। प्लॉट से सटे पार्क नंबर 559 का भी कुछ भाग इसमें मिलाकर कई निर्माण किए गए हैं। 1680 वर्ग मीटर में बॉस्केट बॉल कोर्ट और 2000 वर्ग मीटर में स्कूल का निर्माण मिला, जो बृज किशोरी दुबे मेमोरियल के नाम से है। पार्क में खड़ा कर दिया स्कूल
इतना ही नहीं, एक और जमीन का मामला भी सामने आया है। तेजाब मिल कैंपस वेलफेयर सोसाइटी 84/63 उत्तरीय रेलवे सहकारी आवास समिति की है। इसमें एक पार्क की जमीन पर स्कूल बना मिला। इसमें कमेटी ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि केडीए ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है, मगर इसमें प्रभावी प्रवर्तन की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। केडीए द्वारा बताया गया कि पार्क में भवन बनाए जाने कोई नक्शा केडीए के अभिलेखों में स्वीकृत नहीं मिला है। आगे की कार्रवाई केडीए करेगा। उत्तराखंड में पहाड़ खरीदकर की प्लॉटिंग
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि दुबे ने उत्तराखंड में एक पहाड़ ही खरीद लिया था। इसके बाद वहां पर बड़े पैमाने पर जमीनों पर प्लॉटिंग करके अफसरों को फॉर्म हाउस बेचा था। एक पुलिस अफसर के साथ तो हरिद्वार में आलीशान होटल भी बन रहा है। छह महीने पहले हुए थे गेस्ट हाउस गिराने का आदेश
शिवशक्ति गेस्ट हाउस का निर्माण भी जांच कमेटी ने बिना नक्शे के ही पाया है। साथ ही यह भी लिखा है कि इस भूखंड की रजिस्ट्री कूटरचित अभिलेखों के आधार पर की गई। कोतवाली में धोखाधड़ी की धाराओं में पहले से एफआईआर दर्ज है जिसका मामला एसीजेएम कोर्ट में विचाराधीन है। समिति के मुताबिक केडीए ने इसके ध्वस्तीकरण का आदेश फरवरी में ही जारी किया है। समिति ने सिफारिश की है। लोग डरें नहीं, दुबे के सताए हुए सामने आकर शिकायत करें
पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने बताया-अखिलेश दुबे से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। जो भी दुबे का सताया हुआ है, खुलकर सामने आए और शिकायत करें। उसकी जांच करके दुबे और उसके सिंडीकेट के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। लोग खुलकर शिकायत करेंगे, तभी दुबे का सिंडीकेट पूरी तरह से टूट पाएगा। केडीए की जांच में सामने आया है कि अखिलेश दुबे ने शहर के अलग-अलग इलाकों में 1500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति पर कब्जा कर रखा है। केडीए जल्द ही दुबे के कब्जे वाली जमीनों पर बुलडोजर चलाकर उसे कब्जामुक्त कराएगा। ………………………………… पढ़ें पूरी खबर… ‘दोस्तों ने बर्थडे पार्टी में बुलाकर पति को मार डाला’, हिस्ट्रीशीटर अंकित की पत्नी बोली- वे जलते थे रात में मेरे पति अंकित के पास दोस्त शिवम और रोहन की कॉल आई। रोहन की बर्थडे पार्टी में आने के लिए बुलाया। 14 अगस्त की रात 8.25 बजे अंकित रोहन की बर्थडे पार्टी में चला गया। लेकिन, वो रातभर घर नहीं लौटे। रात 12 बजे तक हमारी फोन पर बात हुई। उसके बाद अंकित का मोबाइल बंद हो गया। पढ़ें पूरी खबर…