मायावती ने ‘अनुभवहीन’ ईशान को जिम्मेदारी क्यों सौंपी:क्या यूपी चुनाव में लॉन्च करेंगी, BSP का उत्तराधिकारी कौन बनेगा?

बसपा से आकाश आनंद के बाहर किए जाने और ईशान आनंद की एंट्री ने पार्टी के भविष्य को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने पहले आकाश को आगे बढ़ाकर नई पीढ़ी को नेतृत्व देने का मॉडल पेश किया। फिर अचानक अपरिपक्व बताकर पर कतर दिए। साथ ही सबको चौंकाते हुए उन्होंने अनुभवहीन ईशान को 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह है कि लंदन से पढ़कर आए ईशान आनंद मायावती की उम्मीदों पर कितने खरे उतरते हैं और क्या वे बसपा के जेन-जी वोटरों को साध पाएंगे? तीन सवालों से समझेंगे मायावती का गेम प्लान- यूपी में चुनाव के वक्त सौंपी जा सकती है जिम्मेदारी मायावती ने 6 सितंबर को ईशान आनंद को अचानक यूपी-उत्तराखंड को छोड़कर देश के 19 राज्यों का मुख्य सेक्टर प्रभारी बना दिया। 19 राज्यों को उन्होंने दो सेक्टर में बांटा है। सेक्टर एक में 10 राज्य और सेक्टर-2 में 9 राज्य रखे हैं। दोनों ही सेक्टरों के दो-दो प्रभारी भी बनाए हैं। सेक्टर-1 के प्रभारी राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और सुरेश राव को तो सेक्टर-2 का प्रभारी राजाराम और अतर सिंह राव को बनाया है। ईशान को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया है। मतलब वो इन 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा करेंगे। इसकी रिपोर्ट वे पार्टी उपाध्यक्ष आनंद कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को देंगे। मतलब साफ है कि ईशान को अभी चुनावी राज्य के लिए महत्वपूर्ण यूपी-उत्तराखंड से दूर रखा गया है। लेकिन, एक्सपर्ट मानते हैं कि मायावती अभी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपकर ईशान की क्षमता परखना चाहती हैं। यदि वे उनकी कसाैटी पर खरे उतरे तो यूपी-उत्तराखंड की भी जिम्मेदारी सौंप सकती हैं। ईशान को चुनावी सभाओं में उतारा जा सकता है… दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी आंदोलन के बाद से मायावती के हर सोशल मीडिया पोस्ट और पार्टी की बैठक में जेन-जी व जेन-अल्फा की बातें करती हैं। वे खुलकर इनकी समस्याओं को उठाने की बात कर चुकी हैं। पार्टी पदाधिकारियों को भी इनकी समस्याएं उठाने का निर्देश दे चुकी हैं। यूपी में एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद कुल मतदाता 13.39 करोड़ हैं। इनमें जेन-जी वोटर्स 2.07 करोड़ हैं। इनकी उम्र 18 से 29 वर्ष है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 3.80 करोड़, सपा को 2.95 करोड़ और बसपा को 1.18 करोड़ वोट मिले थे। इस लिहाज से ये जेन-जी के 2 करोड़ वोट बहुत मायने रखते हैं। अभी दलित युवाओं में चंद्रशेखर भी एक युवा चेहरा हैं। ऐसे में मायावती आकाश के बाद अब उनके छोटे भाई 27 साल के ईशान को मैदान में उतारकर जेन-जी को साधना चाहती हैं। वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि देर-सवेर मायावती ईशान आनंद को यूपी-उत्तराखंड की भी जिम्मेदारी सौंप सकती हैं। खासकर चुनावी माहौल में ईशान को दूर रखना बसपा के लिए भी नुकसानदायक होगा। अभी परखने का सिलसिला चलेगा, फिर मायावती फैसला लेंगी जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) में प्रोफेसर विवेक कुमार कहते हैं कि मायावती जब तक शारीरिक रूप से फिट हैं, तब तक वे किसी को भी अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं करेंगी। कांशीराम ने भी यही किया था। जब वे बीमार रहने लगे, तब जाकर उन्होंने मायावती अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया था। मायावती ने बड़े भतीजे आकाश को तीन बार बड़ी जिम्मेदारी दी और फिर छीन ली। यह मायावती का तरीका है। वे इन कदमों से आकाश के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं। इसी के साथ उन्होंने छोटे भाई ईशान आनंद को भी 19 राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है। मतलब वे ईशान को भी परखना चाहती हैं। ईशान ने लंदन से एलएलबी की पढ़ाई की है। फिलहाल परिवार का बिजनेस संभाल रहे थे। अब उनकी राजनीतिक दक्षता और क्षमता परखी जाएगी। वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम का आकलन अलग है। वे कहते हैं कि उत्तराधिकार को लेकर मायावती ने 3 सितंबर को पार्टी की बैठक में कहा था कि वह भी कांशीराम की तरह पार्टी में परिवारवाद को आगे नहीं बढ़ाएंगी? लेकिन, तीन दिन बाद ही उन्होंने ईशान को 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी सौंप दी। आखिर ईशान की पार्टी में पहले कौन सी बड़ी भूमिका थी। बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे की पहचान के सिवा उनकी अपनी क्या उपलब्धि है। मतलब साफ है कि मायावती परिवारवाद के खिलाफ बयान भले ही दे रही हों, लेकिन जब कभी राजनीतिक उत्तराधिकारी चुनने की नौबत आएगी, तो वो चेहरा परिवार से ही कोई होगा। क्या आकाश से बेहतर साबित होंगे ईशान? 31 साल के आकाश से क्या 27 वर्षीय ईशान बेहतर साबित होंगे। इसे लेकर वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम कहते हैं कि ईशान को अभी साबित करना है। आकाश ने खुद को साबित कर दिया है कि वे भीड़ जुटाऊ चेहरा हैं। उनके भाषण अक्रामक और तथ्यों की सटीकता वाले होते हैं। पिछले दिनों हाथरस की सादाबाद विधानसभा में इसकी झलक दिख चुकी है। आकाश की भाषण शैली बसपा समर्थकों को पसंद आती हैं। उनमें वही अक्रामकता नजर आती है, जो कभी मायावती में समर्थक देख चुके हैं। ईशान ने अभी तक कोई भी सार्वजनिक सभा संबोधित नहीं किया है। उन्हें जिम्मेदारी भी संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा की मिली है। मायावती को फॉलो ना करने वाले आकाश को कितनों ने किया अनफॉलो 6 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को अनफॉलो करने का निर्देश पार्टी पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों को दिए थे। आकाश के एक्स अकाउंट पर 2.73 लाख फॉलोअर्स हैं। जब आकाश से 3 सितंबर को मायावती ने पद छीना था, तब उनके समर्थकों की संख्या 2.72 लाख से कुछ ही अधिक थी। मतलब तीन दिन में उनके समर्थकों की संख्या बढ़ी है। वहीं, 3 सितंबर तक आकाश 56 लोगों को खुद फाॅलो करते थे। अब इसकी संख्या 52 हो चुकी है। मतलब 4 को उन्होंने अनफॉलो कर दिया। आकाश जिसे फॉलो करते हैं, उसमें पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, यूपी बसपा अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, रामजी गौतम सहित कई बड़े पदाधिकारी शामिल हैं। लेकिन, चौंकाने वाली बात ये है कि आकाश बसपा प्रमुख मायावती को सोशल मीडिया पर फॉलो नहीं करते। तीन सितंबर की कार्रवाई से पहले वो मायावती के हर पोस्ट को अपने सोशल पेज पर री-पोस्ट करते थे। अब ये भी बंद कर दिया है। ————– ये पढ़ें – आकाश आनंद को मायावती फिर BSP से निकाल सकती हैं: नेताओं से बोलीं- उन्हें अनफॉलो करें; छोटे भतीजे को संगठन समीक्षा का काम सौंपा बसपा प्रमुख मायावती कभी भी अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से फिर बाहर कर सकती हैं। रविवार को मायावती और आकाश आनंद ने इस बात के संकेत खुद दिए। आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना बायो (परिचय) बदल दिया। उन्होंने खुद को बसपा समर्थक लिखा। 4 दिन में यह दूसरा मौका है, जब आकाश ने अपना बायो बदला है। 3 सितंबर को लखनऊ बैठक में न बुलाए जाने पर उन्होंने बायो में बसपा कार्यकर्ता बताया था। पढ़िए पूरी खबर…