बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने 2027 के विधानसभा में जीत का फॉर्मूला समझाया। मुस्लिम भाईचारा कमेटी की बैठक में बताया कि कैसे 20% दलित और 19% मुस्लिम मिलकर विनिंग कॉम्बिनेशन बन सकते हैं? जबकि सपा का बेस यादव वोटबैंक ही 8% है। मुस्लिमों का पूरा समर्थन पाकर भी ये सिर्फ 27% की ही ताकत बन पाते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम समाज का पूरा समर्थन पाकर भी सपा गठबंधन भाजपा को नहीं हरा पाई थी। इसकी तुलना में 2007 में मुस्लिमों का थोड़ा-सा ही समर्थन बटोर कर बसपा ने भाजपा-सपा दोनों पार्टियों को हराया था। सपा सिर्फ भाजपा का डर दिखाकर मुस्लिमों को वोट हासिल करना चाहती है। जबकि बसपा मुस्लिमों को सत्ता-संगठन में उचित भागीदारी देने के साथ अपने 4 साल के कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों के आधार पर समर्थन चाहती है। मुस्लिम भाईचारा कमेटी की बैठक में मायावती ने क्या 5 बड़े संदेश दिए? मुस्लिमों का समर्थन पाने के लिए बसपा कौन-सी रणनीति पर आगे बढ़ेगी? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मुस्लिम भाईचारा कमेटी की बैठक की 5 अहम बातें… सम्मान देकर मुस्लिमों को पार्टी से जोड़ने की रणनीति
मुस्लिम भाईचारा कमेटी की बैठक में खुद मायावती मौजूद रहीं। बिहार चुनाव प्रचार में व्यस्त भतीजे आकाश आनंद को भी बुलाया था। बसपा के गठन के बाद ये पहली बार है, जब मायावती ने खुद मुस्लिम भाईचारा कमेटी की बैठक ली। इसके पहले 2017 तक पार्टी के दूसरे पदाधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष ही इस तरह की बैठकें लेते थे। मुस्लिमों को बैठक व्यवस्था में पहली 2 लाइनों में जगह दी गई। अन्य पदाधिकारियों को इसके पीछे वाली लाइन में बैठाया गया। इससे मायावती ये संदेश देने में सफल रहीं कि बसपा में मुस्लिमों को पूरा सम्मान मिलेगा। 2017 के विधानसभा चुनाव तक मुस्लिम भाईचारा कमेटी सक्रिय रही। लेकिन, इसके बाद बसपा ने इसे भंग कर दिया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी इसका गठन नहीं किया गया। लेकिन, 9 अक्टूबर के कार्यक्रम की सफलता ने मायावती को एक बार फिर अपने आजमाए पुराने फॉर्मूले पर लौटने को मजबूर कर दिया है। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में मुस्लिम भाईचारा कमेटी के दो-दो संयोजक बनाए गए हैं। एक संयोजक मुस्लिम, तो दूसरा दलित है। इसी तरह का संगठन विधानसभा स्तर पर भी गठित करना है। इसमें भी दो-दो संयोजक होंगे। आगे इसका विस्तार बूथ स्तर तक करना है। मेरठ मंडल प्रभारी आनंद सिंह चंद्रेश ने बताया कि हर विधानसभा में 100-100 बड़े मुस्लिम चेहरों को पार्टी से जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए मंडल संयोजक विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिमों के बीच छोटी-छोटी बैठक करेंगे। बसपा प्रमुख मायावती के 4 शासनकाल में मुस्लिमों के लिए किए गए 100 बड़े विकास कार्यों और निर्णयों की एक सूची भी दी गई। इसे मुस्लिम बस्तियों की बैठक में ले जाकर दिखाना है। साथ ही यह बताना है कि बसपा के शासन में ही सबसे अधिक उनके हित के कार्य हुए। मुस्लिमों को ये समझाना है कि सपा सिर्फ भाजपा का डर दिखाकर उनका वोट हासिल करती रही है। उनके विकास के लिए कोई काम नहीं किया, न ही सत्ता में कभी उचित भागीदारी दी। मुस्लिम भाईचारा कमेटी की ओर से जोड़े गए सदस्यों की प्रगति रिपोर्ट सीधे बसपा के प्रदेश कार्यालय के माध्यम से मायावती तक पहुंचेगी। वह खुद इस पर नजर रखेंगी। SIR पर कोई विरोध नहीं, ग्राउंड लेवल पर वोटर बनवाना है
चुनाव आयोग की ओर से यूपी समेत देश के 12 राज्यों में लागू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी बसपा प्रमुख मायावती ने इस बैठक में अपना रुख साफ किया। मायावती ने कहा कि बिहार में कांग्रेस, राजद सहित अन्य विपक्षी दलों ने SIR का विरोध किया था। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने वहां इसे लागू किया और इसी आधार पर चुनाव भी हो रहा। ऐसे में यूपी में दूसरे दल भले ही इसका विरोध करें, हमें इस चक्कर में नहीं पड़ना। बस बूथ स्तर पर बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का गठन करना है। सभी पदाधिकारियों को चुनाव आयोग की ओर से जारी SIR की एक संक्षिप्त पुस्तिका दी गई है। इसके आधार पर उन्हें बसपा कैडर वाले वोटरों को अधिक से अधिक जुड़वाना है। लखनऊ मंडल के मुस्लिम भाईचारा कमेटी के संयोजक एवं पूर्व प्रवक्ता फैजान खान ने बताया- बैठक में हमारी पार्टी की मुखिया का साफ निर्देश रहा कि हमें ग्राउंड स्तर पर काम करना है। इसके विरोध और खामियां निकालने में वक्त जाया नहीं करना है। बसपा से आखिरकार मुस्लिम क्यों दूर हुआ?
फैजान खान कहते हैं- बहुजन समाज पार्टी स्थापना के समय से ही मुस्लिम समाज को अपना अंग मानती रही है। विपक्ष की पार्टियों ने मुस्लिमों को गुमराह करके बसपा से दूर किया। सपा ने हमेशा से भाजपा का डर दिखाकर वोट लिया। लेकिन, बसपा ने विकास के साथ ही संगठन और सरकार में उन्हें भागीदारी दी। बसपा के शासन में कभी दंगा नहीं हुआ। फैजान खान कहते हैं- सपा मुस्लिमों को भाजपा का डर क्यों दिखाती है? हिम्मत हो, तो उनके लिए काम करके दिखाओ। 9 अक्टूबर के कार्यक्रम में लाखों की भीड़ आने के बाद से हमारी पार्टी और मुखिया उत्साह में है। उन्होंने उस कार्यक्रम में मंच से ही कहा था कि इस बार सत्ता में बसपा को लाने के लिए जी-जान लगा दूंगी। यही कारण है कि बसपा अपने सारे संगठन को फिर से बहाल कर रही है। विधानसभा चुनाव से एक साल पहले सभी को ग्राउंड में उतार दिया गया है। जहां दूसरे दल अभी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में जुटे हैं। वहीं, हमारी पार्टी ने धरातल पर जाकर लोगों के बीच काम शुरू कर दिया है। मुस्लिमों को भी ये समझ में आ रहा है। 2022 के चुनाव में और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा-कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होकर वोट दिया। फिर भी वे भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोक पाए। भाजपा को सत्ता से बसपा ही हटा सकती है। समसुद्दीन को हटाने की वजह भी मायावती ने साफ की
मायावती ने मुस्लिम भाईचारा कमेटी की इस बैठक में एक तरफ जहां उन्हें पार्टी से अपने समाज को जोड़ने का मंत्र बताया। वहीं, पार्टी से हटाए गए समसुद्दीन को लेकर भी तस्वीर साफ की। कहा कि उन्हें कई बार चेतावनी दी गई। फिर भी उनमें बदलाव नहीं दिखा। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से मिलकर कई सीटों पर कमजोर प्रत्याशी उतारा था। इसी तरह लोकसभा में सपा से मिलकर कई सीटों पर कमजोर प्रत्याशी या कहिए डमी कैंडिडेट उतार दिया था। प्रभार उन्हें पूर्वांचल का देती फिर भी वे गाजियाबाद जाकर वहां गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे थे। इसी कारण उन्हें पार्टी से बाहर किया गया। आगे भी पार्टी में ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा। पार्टी में रहकर ऐसा कोई कर रहा है तो सीधे मुझे सूचना दें, मैं आगे भी ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करूंगी। बिहार चुनाव के बाद आकाश आनंद यूपी में होंगे सक्रिय
बिहार चुनाव में सक्रिय आकाश आनंद भी इस बैठक में शामिल हुए। उन्हें एक दिन पहले ही बुलाया गया था। बैठक में वे मायावती और पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के साथ पहुंचे। फिर पार्टी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल से मिले। अध्यक्ष पाल ने उन्हें बसपा की टोपी पहनाई। इस बैठक में मायावती ने ये भी जानकारी दी कि बिहार चुनाव के बाद आकाश पूरी तरह से यूपी में समय देंगे। वे पूरे प्रदेश में जाएंगे। सभाओं के अलावा पार्टी पदाधिकारियों की बैठक लेंगे। बूथ लेवल पर कितना काम हुआ, इसे भी देखेंगे। जहां जरूरत होगी, मैं भी निकलूंगी। ————— ये खबर भी पढ़ें- SIR से यूपी में नहीं बनेंगे बिहार जैसे हालात:CEO बोले- हमारे पास एक साल का ‘बफर टाइम’ यूपी में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बिहार जैसी स्थिति नहीं होगी। बिहार में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले SIR लागू किया गया था, जबकि यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 में होगा। यानी हमारे पास एक साल का ‘बफर टाइम’ है।’ यह कहना है, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का। उन्होंने दैनिक भास्कर से SIR की प्रक्रिया और राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर विस्तार से बात की। पढ़िए पूरी खबर…
मुस्लिम भाईचारा कमेटी की बैठक में खुद मायावती मौजूद रहीं। बिहार चुनाव प्रचार में व्यस्त भतीजे आकाश आनंद को भी बुलाया था। बसपा के गठन के बाद ये पहली बार है, जब मायावती ने खुद मुस्लिम भाईचारा कमेटी की बैठक ली। इसके पहले 2017 तक पार्टी के दूसरे पदाधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष ही इस तरह की बैठकें लेते थे। मुस्लिमों को बैठक व्यवस्था में पहली 2 लाइनों में जगह दी गई। अन्य पदाधिकारियों को इसके पीछे वाली लाइन में बैठाया गया। इससे मायावती ये संदेश देने में सफल रहीं कि बसपा में मुस्लिमों को पूरा सम्मान मिलेगा। 2017 के विधानसभा चुनाव तक मुस्लिम भाईचारा कमेटी सक्रिय रही। लेकिन, इसके बाद बसपा ने इसे भंग कर दिया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी इसका गठन नहीं किया गया। लेकिन, 9 अक्टूबर के कार्यक्रम की सफलता ने मायावती को एक बार फिर अपने आजमाए पुराने फॉर्मूले पर लौटने को मजबूर कर दिया है। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में मुस्लिम भाईचारा कमेटी के दो-दो संयोजक बनाए गए हैं। एक संयोजक मुस्लिम, तो दूसरा दलित है। इसी तरह का संगठन विधानसभा स्तर पर भी गठित करना है। इसमें भी दो-दो संयोजक होंगे। आगे इसका विस्तार बूथ स्तर तक करना है। मेरठ मंडल प्रभारी आनंद सिंह चंद्रेश ने बताया कि हर विधानसभा में 100-100 बड़े मुस्लिम चेहरों को पार्टी से जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए मंडल संयोजक विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिमों के बीच छोटी-छोटी बैठक करेंगे। बसपा प्रमुख मायावती के 4 शासनकाल में मुस्लिमों के लिए किए गए 100 बड़े विकास कार्यों और निर्णयों की एक सूची भी दी गई। इसे मुस्लिम बस्तियों की बैठक में ले जाकर दिखाना है। साथ ही यह बताना है कि बसपा के शासन में ही सबसे अधिक उनके हित के कार्य हुए। मुस्लिमों को ये समझाना है कि सपा सिर्फ भाजपा का डर दिखाकर उनका वोट हासिल करती रही है। उनके विकास के लिए कोई काम नहीं किया, न ही सत्ता में कभी उचित भागीदारी दी। मुस्लिम भाईचारा कमेटी की ओर से जोड़े गए सदस्यों की प्रगति रिपोर्ट सीधे बसपा के प्रदेश कार्यालय के माध्यम से मायावती तक पहुंचेगी। वह खुद इस पर नजर रखेंगी। SIR पर कोई विरोध नहीं, ग्राउंड लेवल पर वोटर बनवाना है
चुनाव आयोग की ओर से यूपी समेत देश के 12 राज्यों में लागू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी बसपा प्रमुख मायावती ने इस बैठक में अपना रुख साफ किया। मायावती ने कहा कि बिहार में कांग्रेस, राजद सहित अन्य विपक्षी दलों ने SIR का विरोध किया था। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने वहां इसे लागू किया और इसी आधार पर चुनाव भी हो रहा। ऐसे में यूपी में दूसरे दल भले ही इसका विरोध करें, हमें इस चक्कर में नहीं पड़ना। बस बूथ स्तर पर बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का गठन करना है। सभी पदाधिकारियों को चुनाव आयोग की ओर से जारी SIR की एक संक्षिप्त पुस्तिका दी गई है। इसके आधार पर उन्हें बसपा कैडर वाले वोटरों को अधिक से अधिक जुड़वाना है। लखनऊ मंडल के मुस्लिम भाईचारा कमेटी के संयोजक एवं पूर्व प्रवक्ता फैजान खान ने बताया- बैठक में हमारी पार्टी की मुखिया का साफ निर्देश रहा कि हमें ग्राउंड स्तर पर काम करना है। इसके विरोध और खामियां निकालने में वक्त जाया नहीं करना है। बसपा से आखिरकार मुस्लिम क्यों दूर हुआ?
फैजान खान कहते हैं- बहुजन समाज पार्टी स्थापना के समय से ही मुस्लिम समाज को अपना अंग मानती रही है। विपक्ष की पार्टियों ने मुस्लिमों को गुमराह करके बसपा से दूर किया। सपा ने हमेशा से भाजपा का डर दिखाकर वोट लिया। लेकिन, बसपा ने विकास के साथ ही संगठन और सरकार में उन्हें भागीदारी दी। बसपा के शासन में कभी दंगा नहीं हुआ। फैजान खान कहते हैं- सपा मुस्लिमों को भाजपा का डर क्यों दिखाती है? हिम्मत हो, तो उनके लिए काम करके दिखाओ। 9 अक्टूबर के कार्यक्रम में लाखों की भीड़ आने के बाद से हमारी पार्टी और मुखिया उत्साह में है। उन्होंने उस कार्यक्रम में मंच से ही कहा था कि इस बार सत्ता में बसपा को लाने के लिए जी-जान लगा दूंगी। यही कारण है कि बसपा अपने सारे संगठन को फिर से बहाल कर रही है। विधानसभा चुनाव से एक साल पहले सभी को ग्राउंड में उतार दिया गया है। जहां दूसरे दल अभी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में जुटे हैं। वहीं, हमारी पार्टी ने धरातल पर जाकर लोगों के बीच काम शुरू कर दिया है। मुस्लिमों को भी ये समझ में आ रहा है। 2022 के चुनाव में और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा-कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होकर वोट दिया। फिर भी वे भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोक पाए। भाजपा को सत्ता से बसपा ही हटा सकती है। समसुद्दीन को हटाने की वजह भी मायावती ने साफ की
मायावती ने मुस्लिम भाईचारा कमेटी की इस बैठक में एक तरफ जहां उन्हें पार्टी से अपने समाज को जोड़ने का मंत्र बताया। वहीं, पार्टी से हटाए गए समसुद्दीन को लेकर भी तस्वीर साफ की। कहा कि उन्हें कई बार चेतावनी दी गई। फिर भी उनमें बदलाव नहीं दिखा। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से मिलकर कई सीटों पर कमजोर प्रत्याशी उतारा था। इसी तरह लोकसभा में सपा से मिलकर कई सीटों पर कमजोर प्रत्याशी या कहिए डमी कैंडिडेट उतार दिया था। प्रभार उन्हें पूर्वांचल का देती फिर भी वे गाजियाबाद जाकर वहां गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे थे। इसी कारण उन्हें पार्टी से बाहर किया गया। आगे भी पार्टी में ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा। पार्टी में रहकर ऐसा कोई कर रहा है तो सीधे मुझे सूचना दें, मैं आगे भी ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करूंगी। बिहार चुनाव के बाद आकाश आनंद यूपी में होंगे सक्रिय
बिहार चुनाव में सक्रिय आकाश आनंद भी इस बैठक में शामिल हुए। उन्हें एक दिन पहले ही बुलाया गया था। बैठक में वे मायावती और पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के साथ पहुंचे। फिर पार्टी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल से मिले। अध्यक्ष पाल ने उन्हें बसपा की टोपी पहनाई। इस बैठक में मायावती ने ये भी जानकारी दी कि बिहार चुनाव के बाद आकाश पूरी तरह से यूपी में समय देंगे। वे पूरे प्रदेश में जाएंगे। सभाओं के अलावा पार्टी पदाधिकारियों की बैठक लेंगे। बूथ लेवल पर कितना काम हुआ, इसे भी देखेंगे। जहां जरूरत होगी, मैं भी निकलूंगी। ————— ये खबर भी पढ़ें- SIR से यूपी में नहीं बनेंगे बिहार जैसे हालात:CEO बोले- हमारे पास एक साल का ‘बफर टाइम’ यूपी में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बिहार जैसी स्थिति नहीं होगी। बिहार में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले SIR लागू किया गया था, जबकि यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 में होगा। यानी हमारे पास एक साल का ‘बफर टाइम’ है।’ यह कहना है, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का। उन्होंने दैनिक भास्कर से SIR की प्रक्रिया और राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर विस्तार से बात की। पढ़िए पूरी खबर…