मैं दान-दक्षिणा के लिए साध्वी नहीं बनना चाहती:हर्षा रिछारिया बोलीं- हमें युवा पीढ़ी को तप-त्याग दिखाना चाहिए, ना कि 5 करोड़ की कारें

‘मैं दान-दक्षिणा के लिए साध्वी नहीं बनना चाहती, इसलिए अब मैं धर्म प्रचार के साथ एंकरिंग भी करूंगी, ताकि मुझे आर्थिक मदद मिल सके, मैं अपने दम पर आगे सनातन के लिए काम कर सकूं।’ ये कहना है प्रयागराज महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया का। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा- हमें युवा पीढ़ी को त्याग, साधना और तप दिखाना चाहिए। मगर आज हम उन्हें 4-5 करोड़ की लग्जरी गाड़ियां दिखा रहे हैं। इससे हम क्या संदेश देना चाहते हैं, धर्म के रास्ते पर चलो और करोड़ों कमाओ। 12 जनवरी को हर्षा ने सनातन का प्रचार छोड़ने का ऐलान किया था। VIDEO जारी करके कहा- मैंने इस एक साल में बहुत सारे विरोध का सामना किया। अब मौनी अमावस्या के बाद धर्म के रास्ते को छोड़ दूंगी और अपने पुराने प्रोफेशन (एकरिंग) में जाऊंगी। किसी लड़की के चरित्र पर सवाल उठना बहुत आसान है, लेकिन मैं सीता नहीं हूं कि जो अग्निपरीक्षा दूं। इसके बाद से वह लगातार चर्चाओं में बनी हुईं हैं। दैनिक भास्कर ने हर्षा रिछारिया से विस्तार से बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल : आपने धर्म प्रचार का रास्ता छोड़ने का ऐलान क्यों किया?
जवाब : पिछले 1 साल में मेरा जीवन महाकुंभ से लेकर माघ मेले तक लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरा है। इस दौरान मेरा काफी विरोध हुआ। माघ मेले से पहले मैंने अपने NGO के नाम से जमीन आवंटित करवाई थी। जैसे ही कुछ संतों को यह जानकारी मिली, वैसे ही विरोध शुरू हो गया। यहां तक कहा जाने लगा कि प्रशासन की ओर से मुझे कोई सुविधा न दी जाए। सवाल : क्या आपको मेला क्षेत्र के अधिकारियों का सपोर्ट नहीं मिला?
जवाब : संतों के विरोध के बाद हालात ऐसे हो गए कि कई अधिकारियों ने मेरा फोन उठाना भी बंद कर दिया। लगातार हो रहे विरोध से थक-हारकर मैं 10 जनवरी को माघ मेला छोड़कर चली गई। मैंने सोचा कि जब मुझे काम ही नहीं करने दिया जा रहा, तो मैं कब तक अकेले लड़ती रहूंगी। कब तक अकेली ध्वज लेकर आगे चलती रहूंगी। मैं भी इंसान हूं, मैं भी अकेली पड़ सकती हूं और टूट सकती हूं। सवाल : कहा जा रहा कि आप दोबारा सनातन का प्रचार करेंगी?
जवाब : मैं इस प्रचार को पूरी तरह छोड़ने वाली नहीं थी, बल्कि उस पर विराम लगाने का मन बना रही थी। मैंने अपने वीडियो में कहीं भी यह नहीं कहा कि मैं इसे हमेशा के लिए छोड़ रही हूं। आप मेरा वीडियो देखिए, मैंने सिर्फ इतना कहा था कि मैं विराम ले रही हूं। सवाल : सतुआ बाबा ने कहा कि धर्म कोई खरीदने की चीज नहीं?
जवाब : उन्होंने बिल्कुल सही कहा कि धर्म खरीदने या अपनाने जैसी चीज नहीं है। मैं यह बात पिछले 5 दिनों में कई बार कह चुकी हूं कि मैं धर्म नहीं छोड़ रही हूं। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे इस धर्म में जन्म मिला। धर्म मेरा है और मैं चाहूंगी कि ईश्वर मुझे हर जन्म इसी धर्म में दे। पहली बात मैं सिर्फ धर्म-प्रचार पर विराम ले रही थी। दूसरी बात मेरी पूरी बात उन्होंने सुनी ही नहीं। उन्होंने कहा कि सभी संत मिलकर मेरा विरोध करेंगे। लेकिन आप ही कुछ संत हैं, जो पिछले एक साल से मेरा विरोध कर रहे थे। मुझे तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। जब मैंने धर्म के रास्ते पर चलना शुरू किया था, तब भी विरोध था। अब मैं विराम ले रही हूं, तब भी विरोध हो रहा है। सवाल : माघ मेले में लग्जरी गाड़ियां दिख रही हैं?
जवाब : माघ मेला कल्पवासियों का मेला है, यहां संत-सन्यासी की त्याग, साधना और तपस्या देखने को मिलती है। यहां ग्रस्त व्यक्ति भी आता है, परिवार से दूर होकर, अपनी परिवार को त्यागकर, यहां चैन-सुकून और त्याग के साथ कल्पवास करता है। वह अपनी चटाई पर बैठकर अपना पूरा दिन व्यतीत करता है, खुद भोजन बनाकर खाता है। जब एक साधक इतना त्याग करता है, तो हमारे संतों और धर्म के प्रतीक के रूप में हमें वही त्याग, साधना और तपस्या दिखानी चाहिए। लेकिन आज हम वहां चार-पांच करोड़ की गाड़ियां दिखा रहे हैं। इसका संदेश क्या है? कि धर्म के रास्ते पर चलो और करोड़ों कमाओ? सवाल : कब एहसास हुआ कि फाइनेंशियल सपोर्ट के बिना मूवमेंट नहीं चलेगा?
जवाब : एक साल के बाद मुझे यह समझ में आया कि आगे बढ़ने के लिए कहीं न कहीं आर्थिक सहयोग भी जरूरी होता है। मैं कोई साधु-सन्यासी नहीं हूं कि मुझे लाखों-करोड़ों की दान-दक्षिणा मिले। जहां तक दान-दक्षिणा या आय की बात है, तो इसके लिए मुझे साध्वी बनना पड़े, ऐसा मुझे सही नहीं लगता। इसलिए मैंने यह तय किया है कि साइड-बाय-साइड मैं अपना एंकरिंग का काम भी थोड़ा-थोड़ा शुरू करूंगी, ताकि मेरी आर्थिक स्थिति संतुलित रहे और मेरे लिए आगे बढ़ना थोड़ा आसान हो सके। सवाल : सनातन का प्रचार छोड़ने के ऐलान के बाद क्या बदलाव आया?
जवाब : ऐसा हुआ है, मुझे देश-विदेश से जबरदस्त समर्थन मिला। साधु-संतों, महिलाओं, युवाओं, बेटियों और मीडिया से मुझे सहयोग मिला। इस समर्थन ने मुझे अंदर से और मजबूत किया। इसके बाद मैंने तय किया कि मैं धर्म प्रचार से पीछे नहीं हटूंगी, बल्कि और तेजी से इसे आगे बढ़ाऊंगी। सवाल : लोग कहते हैं कि आप साध्वी नहीं रीलबाज हैं?
जवाब : लोग मुझे रीलबाज कह रहे हैं। इस बात को मैं खुद ही स्वीकार करती हूं कि मैं साध्वी नहीं हूं। जहां तक रील बनाने की बात है, तो मैं आपसे यही पूछना चाहती हूं कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर कौन ऐसा है, जो वीडियो नहीं बना रहा। आज की तारीख में मंत्री हों, संत हों या सामान्य व्यक्ति, लगभग सभी के सोशल मीडिया अकाउंट हैं और उनके लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स भी हैं। फिर सिर्फ मुझे ही रीलबाज क्यों कहा जा रहा है और किस आधार पर कहा जा रहा है? मैं कोई अशोभनीय या नग्नता से जुड़ा कंटेंट तो नहीं बना रही हूं। मैं वही बातें कह रही हूं, जो अपने विचारों और अपनी आस्था के अनुसार उचित समझती हूं। सवाल : क्या आप शादी करने का प्लान कर रही हैं?
जवाब : मैंने अभी यह तय नहीं किया है कि शादी कब करनी है। पिछले एक साल से मेरा जीवन कुछ इस तरह हो गया है कि मेरे मन में हर समय आगे के काम को लेकर ही विचार चलते रहते हैं। इस काम को आगे बढ़ाने में दिन-रात की मेहनत और कई तरह की कठिनाइयां आती हैं। मेरा सारा ध्यान इन्हीं चुनौतियों को पार करने में लगा रहता है। फिलहाल शादी के बारे में सोचने का समय नहीं मिलता है। सवाल : मॉडलिंग को लेकर आपके क्या विचार हैं?
जवाब : नहीं, मैंने कभी मॉडलिंग नहीं की है और न ही पिछले कई सालों में इसके बारे में सोचा है। मैं एंकरिंग करती रही हूं और मुझे यह काम हमेशा बहुत पसंद रहा है। मुझे लगता है कि ईश्वर ने मुझे मेरी आवाज एक उद्देश्य के लिए दी है, मैं हमेशा अपनी आवाज के दम पर पहचान बनाना चाहती हूं। मॉडलिंग न तो कभी मेरा सपना रही है और न ही भविष्य में होगी। सवाल : किन लोगों की वजह से आप परेशान हुईं?
जवाब : मेरी आंखों के आंसू बहुत कुछ कह देते हैं। जब भी उस दर्द की बात आती है, तो अपने आप आंखें भर आती हैं। ट्रोलिंग सिर्फ ट्रोलिंग तक सीमित नहीं रही। इसके साथ कुछ ऐसे इन्फ्लुएंसर हैं, जो मिर्च-मसाला लगाते हैं, उन्हें सिर्फ व्यूज दिखते हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाले इंसान पर इसका क्या असर पड़ेगा। यह बहुत गलत है। सवाल : जिन लोगों ने कमेंट किए, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगी?
जवाब : मैंने ऐसे लोगों की पूरी जानकारी जुटा ली है। मैं इस मामले में कानूनी कार्रवाई करूंगी। मेरे वकील काम कर रहे हैं। मैं ऐसा इसलिए कर रही हूं ताकि जो मेरे साथ हुआ, वह किसी और के साथ न हो। आज मेरी छवि खराब करने की कोशिश की गई, लेकिन यह सब अब यहीं नहीं रुकेगा। सवाल : क्या एक लड़की होने की वजह से आपका विरोध हो रहा?
जवाब : मुझे यह समझ में नहीं आता कि अगर सिर्फ लड़की होना ही पाप है, तो फिर हम दूसरे धर्म की बेटियों को इतने सम्मान के साथ क्यों स्वीकार करते हैं। कहीं न कहीं मुझे लगता है कि आज भी समाज का एक छोटा सा हिस्सा ऐसा है, जो नहीं चाहता कि हमारे ही धर्म की कोई बेटी आगे बढ़े। वे चाहते हैं कि दूसरे धर्म के लोग आगे बढ़ें, लेकिन अपने ही धर्म की बेटियां नहीं। यह सोच बहुत तेजी से फैल रही है। हाल ही में मैं जबलपुर में थी, वहां भी मैंने एक मामला सुना, जहां एक बेटी के कथा-व्यास पर बैठने का विरोध किया गया। सवाल उठाया गया कि एक लड़की होकर वह कथावाचक कैसे बन सकती है, व्यास पीठ पर कैसे बैठ सकती है। कहीं सुनने को मिलता है कि कोई नई आचार्य महामंडलेश्वर नहीं बन सकती। सवाल : शंकराचार्य, साधु-संत, महात्मा आपको क्यों नहीं समझ रहे हैं?
जवाब : शंकराचार्य, जगतगुरु का हमारी सनातन संस्कृति में बहुत सम्मान है। कोई भी उस पद पर बैठा हो, हम उनके प्रति हमेशा नतमस्तक रहते हैं। मुझे लगता है, बिना पूरी बात जाने, किसी पर आलोचना करना गलत है। दूसरी बात, अगर मैंने सुना कि किसी ने कुछ गलत कहा, तो भी हमारे शब्दों और भाषा में मर्यादा होनी चाहिए। संत पदवी पर बैठे व्यक्ति का गलत शब्द या गलत आचरण कई अन्य संतों पर भी सवाल खड़ा कर सकता है। मेरा जो भी विरोध कर रहे हैं, वे बोल सकते हैं। बड़े हैं, उनके अनुभव हैं। लेकिन नारी के बारे में बोलते समय उन्हें मर्यादित और सम्मानजनक भाषा का उपयोग करना चाहिए।
——————————– ये भी पढ़ें हिंदू लड़कियां अब्दुल के चक्कर में क्यों पड़े?:हर्षा रिछारिया बोलीं- डंडे से समझाने की जरूरत; माघ मेले में युवाओं का कैंपेन प्रयागराज में संगम में स्नान करके श्रद्धालु लौट रहे हैं। सामने 3 लोग चार्ट लेकर खड़े हैं। किसी में लिखा है- अपनी बेटी को लव जिहाद से बचाओ तो किसी में लिखा है कब तक हिंदू कटता रहेगा? ये बैनर लेकर खड़े लोग कहते हैं कि लोगों को हम लव जिहाद को लेकर जागरूक कर रहे। बात सिर्फ इतनी नहीं, पूरे मेले में लव जिहाद को लेकर चर्चा है। कहीं नागा साधु तो कहीं शंकराचार्य इस मामले में खुलकर बोल रहे। पढ़िए पूरी खबर….