जिनका पूरा परिवार हिस्ट्रीशीटर हो। माता-पिता के साथ चाचा और भाई खुद अपराधी हों, सभी के खिलाफ मुकदमे हों। वह लोग दूसरों को माफिया बता रहे हैं। सरकार जानती है, कानून जानता है। कौन अपराधी है और कौन माफिया। मैं माफिया तो हूं नहीं कि मुझे मिट्टी में मिलाया जाए। ये कहना है प्रयागराज के भाजपा नेता और बारा विधानसभा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया का। दरअसल, प्रतापपुर सीट से सपा विधायक विजमा यादव ने 14 अगस्त को विधानसभा सत्र में उन्हें माफिया और गुंडा कहा था। विजमा ने योगी से मांग की थी कि उदयभान को भी मिट्टी में मिलाया जाए। जिसके बाद उदयभान ने भी विजमा यादव और उनके परिवार पर हमला बोला है। दैनिक भास्कर से उन्होंने कहा- जवाहर की हत्या में मुझे राजनीति के तहत फंसाया गया था। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल : सपा विधायक विजमा यादव ने आपको माफिया और गुंडा कहा?
जवाब: उदयभान कोई माफिया तो नहीं है, जिसे मिट्टी में मिलाया जाए। माफिया तो वह होता है जो लगातार अपराध करता रहे। हत्या, डकैती और वसूली में शामिल हो। मेरे ऊपर तो एक ही मुकदमा है और वह भी राजनीतिक षड्यंत्र के तहत लगाया गया। विजमा यादव का पूरा परिवार हिस्ट्रीशीटर है। सभी पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे लोग मुझे माफिया कह रहे हैं। सवाल: आप पर विजमा यादव के पति की हत्या का आरोप है?
जवाब: यह आरोप पूरी तरह से राजनीतिक साजिश है। क्या यह संभव है कि तीनों भाई एक साथ जाकर किसी की हत्या कर दें? हमें झूठे मामले में फंसाया गया। उस समय भाजपा कमजोर थी। मुलायम सिंह यादव ने हमें ऑफर दिया था कि हम उनके साथ आ जाएं, लेकिन हमने भाजपा के साथ रहना चुना। उसी का नतीजा था कि 8 महीने बाद यह घटना हुई और हमें जबरन फंसाया गया। सवाल: पूजा पाल को सपा से निकाले जाने पर क्या कहेंगे?
जवाब: पूजा पाल ने जो कहा, वह उनका विवेक है। लेकिन यह सच है कि उन पर अत्याचार हुआ था। आप देखिए जब उमेश पाल की हत्या हुई तो अतीक अहमद का बेटा खुद गोली चला रहा था। ऐसे हालात में अगर वह भाजपा या मुख्यमंत्री की तारीफ करती हैं तो यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। सवाल: आपके बेटे की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चाएं हैं?
जवाब: अभी वह छोटा है और क्रिकेट खेलता है। वह बेस्ट बैट्समैन है। जब उसकी उम्र और समय आएगा तो वह खुद तय करेगा कि क्या करना है। जनता और समाज की प्रेरणा भी महत्वपूर्ण होगी। अब जानिए क्या है जवाहर पंडित हत्याकांड एके-47 से जवाहर पंडित को मारी गईं थी गोलियां
13 अगस्त, 1996 को सपा के पूर्व विधायक जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित को करवरिया बंधुओं ने दिन दहाड़े प्रयागराज में गोलियों से छलनी कर दिया था। यह पहली बार था, जब इलाहाबाद में एके-47 गरजी थी। इस मामले में कोर्ट ने 4 नवंबर 2019 में करवरिया बंधुओं (पूर्व बसपा सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व भाजपा विधायक उदयभान करवारिया और पूर्व बसपा एमएलसी सूरजभान करवरिया), उनके साथी रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जवाहर पंडित हत्याकांड में तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष कलराज मिश्रा ने कपिलमुनि करवरिया के पक्ष में गवाही दी थी। कलराज मिश्र के इस बयान के पक्ष में तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी को खुला खत लिखा था और मामले की सीबी सीआईडी जांच की मांग की थी। कलराज मिश्र कपिलमुनि के पक्ष में गवाही भी देने आए थे, लेकिन कोर्ट ने उनकी गवाही को स्वीकार नहीं किया था। 2014 में उदयभान ने कोर्ट में सरेंडर किया था
वर्ष 2012 में यूपी में सपा की सरकार बनते ही जवाहर पंडित हत्याकांड की सुनवाई तेज हो गई। वर्ष 2013 में हाईकोर्ट ने मामले की कार्यवाही में लगा स्टे खारिज कर दिया। एक जनवरी 2014 को उदयभान ने कोर्ट में सरेंडर किया था। बाद में कपिल मुनि और सूरजभान भी जेल चले गए। तीनों भाई जेल चले गए, तो बीजेपी ने उदयभान की पत्नी नीलम को मेजा सीट से चुनाव लड़ाया। 2017 में बीजेपी ने पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की। चार अक्टूबर 2018 को उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद सेशन कोर्ट में केस वापसी की अर्जी दाखिल की। सरकार की तरफ से कहा गया था कि करवरिया बंधुओं के खिलाफ आरोप साबित होने के लिहाज से पर्याप्त सबूत नहीं है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ जवाहर पंडित की पत्नी विजमा यादव हाईकोर्ट गई थीं। हाईकोर्ट ने सरकार की इस अपील को खारिज करते हुए मुकदमा जारी रखने के निर्देश दिए थे। मूलरूप से कौशांबी के मंझनपुर के चकनारा गांव के रहने वाले करवरिया परिवार को पूरे इलाहाबाद में दबंगई के लिए जाना जाता था। पहले रियल एस्टेट फिर बालू के ठेकों पर उनका वर्चस्व था। उदयभान करवरिया इस परिवार के पहले सदस्य थे, जिन्होंने सियासी जीत हासिल की थी। 2 बार विधायक बने उदयभान
वर्ष 1997 में उदयभान करवरिया कौशांबी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने। 2002 में उदयभान इलाहाबाद की बारा सीट से बीजेपी से पहली बार विधायक बने। 2007 के विधानसभा चुनाव में उदयभान फिर बारा से विधायक बने। 2012 में बारा की विधानसभा सीट सुरक्षित हो गई। उदयभान बारा छोड़ इलाहाबाद उत्तरी से लड़े, लेकिन यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कपिल मुनि 2009 में फूलपुर से बसपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे। पूर्व सांसद कपिल मुनि और पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया मौजूदा समय में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। जबकि पूर्व विधायक उदयभान अभी बाहर हैं। —————————- ये खबर भी पढ़ें… सपा सांसद बर्क बोले- हर चीज का जवाब बुलडोजर नहीं:क्या मुसलमानों को कभी ये कहते देखा कि मंदिर नहीं, मस्जिद थी ‘आपने कभी मुसलमानों को ये कहते देखा कि वहां मंदिर नहीं, मस्जिद थी? ये आपस में बांटने की राजनीति गलत है। फतेहपुर जिले के मकबरे में पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ हुई। कानून का डर सबको होना चाहिए।’ यह कहना है, यूपी की संभल लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क का। UP में सपा के 4 मुस्लिम सांसद हैं, इनमें एक बर्क भी हैं। पढ़ें पूरी खबर
जवाब: उदयभान कोई माफिया तो नहीं है, जिसे मिट्टी में मिलाया जाए। माफिया तो वह होता है जो लगातार अपराध करता रहे। हत्या, डकैती और वसूली में शामिल हो। मेरे ऊपर तो एक ही मुकदमा है और वह भी राजनीतिक षड्यंत्र के तहत लगाया गया। विजमा यादव का पूरा परिवार हिस्ट्रीशीटर है। सभी पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे लोग मुझे माफिया कह रहे हैं। सवाल: आप पर विजमा यादव के पति की हत्या का आरोप है?
जवाब: यह आरोप पूरी तरह से राजनीतिक साजिश है। क्या यह संभव है कि तीनों भाई एक साथ जाकर किसी की हत्या कर दें? हमें झूठे मामले में फंसाया गया। उस समय भाजपा कमजोर थी। मुलायम सिंह यादव ने हमें ऑफर दिया था कि हम उनके साथ आ जाएं, लेकिन हमने भाजपा के साथ रहना चुना। उसी का नतीजा था कि 8 महीने बाद यह घटना हुई और हमें जबरन फंसाया गया। सवाल: पूजा पाल को सपा से निकाले जाने पर क्या कहेंगे?
जवाब: पूजा पाल ने जो कहा, वह उनका विवेक है। लेकिन यह सच है कि उन पर अत्याचार हुआ था। आप देखिए जब उमेश पाल की हत्या हुई तो अतीक अहमद का बेटा खुद गोली चला रहा था। ऐसे हालात में अगर वह भाजपा या मुख्यमंत्री की तारीफ करती हैं तो यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। सवाल: आपके बेटे की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चाएं हैं?
जवाब: अभी वह छोटा है और क्रिकेट खेलता है। वह बेस्ट बैट्समैन है। जब उसकी उम्र और समय आएगा तो वह खुद तय करेगा कि क्या करना है। जनता और समाज की प्रेरणा भी महत्वपूर्ण होगी। अब जानिए क्या है जवाहर पंडित हत्याकांड एके-47 से जवाहर पंडित को मारी गईं थी गोलियां
13 अगस्त, 1996 को सपा के पूर्व विधायक जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित को करवरिया बंधुओं ने दिन दहाड़े प्रयागराज में गोलियों से छलनी कर दिया था। यह पहली बार था, जब इलाहाबाद में एके-47 गरजी थी। इस मामले में कोर्ट ने 4 नवंबर 2019 में करवरिया बंधुओं (पूर्व बसपा सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व भाजपा विधायक उदयभान करवारिया और पूर्व बसपा एमएलसी सूरजभान करवरिया), उनके साथी रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जवाहर पंडित हत्याकांड में तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष कलराज मिश्रा ने कपिलमुनि करवरिया के पक्ष में गवाही दी थी। कलराज मिश्र के इस बयान के पक्ष में तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी को खुला खत लिखा था और मामले की सीबी सीआईडी जांच की मांग की थी। कलराज मिश्र कपिलमुनि के पक्ष में गवाही भी देने आए थे, लेकिन कोर्ट ने उनकी गवाही को स्वीकार नहीं किया था। 2014 में उदयभान ने कोर्ट में सरेंडर किया था
वर्ष 2012 में यूपी में सपा की सरकार बनते ही जवाहर पंडित हत्याकांड की सुनवाई तेज हो गई। वर्ष 2013 में हाईकोर्ट ने मामले की कार्यवाही में लगा स्टे खारिज कर दिया। एक जनवरी 2014 को उदयभान ने कोर्ट में सरेंडर किया था। बाद में कपिल मुनि और सूरजभान भी जेल चले गए। तीनों भाई जेल चले गए, तो बीजेपी ने उदयभान की पत्नी नीलम को मेजा सीट से चुनाव लड़ाया। 2017 में बीजेपी ने पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की। चार अक्टूबर 2018 को उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद सेशन कोर्ट में केस वापसी की अर्जी दाखिल की। सरकार की तरफ से कहा गया था कि करवरिया बंधुओं के खिलाफ आरोप साबित होने के लिहाज से पर्याप्त सबूत नहीं है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ जवाहर पंडित की पत्नी विजमा यादव हाईकोर्ट गई थीं। हाईकोर्ट ने सरकार की इस अपील को खारिज करते हुए मुकदमा जारी रखने के निर्देश दिए थे। मूलरूप से कौशांबी के मंझनपुर के चकनारा गांव के रहने वाले करवरिया परिवार को पूरे इलाहाबाद में दबंगई के लिए जाना जाता था। पहले रियल एस्टेट फिर बालू के ठेकों पर उनका वर्चस्व था। उदयभान करवरिया इस परिवार के पहले सदस्य थे, जिन्होंने सियासी जीत हासिल की थी। 2 बार विधायक बने उदयभान
वर्ष 1997 में उदयभान करवरिया कौशांबी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने। 2002 में उदयभान इलाहाबाद की बारा सीट से बीजेपी से पहली बार विधायक बने। 2007 के विधानसभा चुनाव में उदयभान फिर बारा से विधायक बने। 2012 में बारा की विधानसभा सीट सुरक्षित हो गई। उदयभान बारा छोड़ इलाहाबाद उत्तरी से लड़े, लेकिन यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कपिल मुनि 2009 में फूलपुर से बसपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे। पूर्व सांसद कपिल मुनि और पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया मौजूदा समय में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। जबकि पूर्व विधायक उदयभान अभी बाहर हैं। —————————- ये खबर भी पढ़ें… सपा सांसद बर्क बोले- हर चीज का जवाब बुलडोजर नहीं:क्या मुसलमानों को कभी ये कहते देखा कि मंदिर नहीं, मस्जिद थी ‘आपने कभी मुसलमानों को ये कहते देखा कि वहां मंदिर नहीं, मस्जिद थी? ये आपस में बांटने की राजनीति गलत है। फतेहपुर जिले के मकबरे में पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ हुई। कानून का डर सबको होना चाहिए।’ यह कहना है, यूपी की संभल लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क का। UP में सपा के 4 मुस्लिम सांसद हैं, इनमें एक बर्क भी हैं। पढ़ें पूरी खबर