आज मौनी अमावस्या है। प्रयागराज के माघ मेले में 3 करोड़ लोगों के स्नान करने का अनुमान लगाया जा रहा। घाटों पर खास इंतजाम किए गए हैं। पूरे शहर में डायवर्जन लागू किया गया है। बता दें, 17 जनवरी यानी मौनी अमावस्या से 1 दिन पहले त्रिवेणी में 1.5 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं। पिछले साल मौनी अमावस्या के वक्त महाकुंभ चल रहा था। तब त्रिवेणी में करीब 10 करोड़ लोगों ने स्नान किया था। भगदड़ मचने से हादसा भी हो गया था। इसलिए इस बार घाट पर सिक्योरिटी ज्यादा कर दी गई है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर स्नान करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मौनी अमावस्या का पुण्यकाल जानिए इस साल मौनी अमावस्या की 17 जनवरी (शनिवार) की रात 11:52 बजे से शुरू होकर 18 जनवरी (रविवार) की रात 1:08 बजे तक रहेगी। पंडितों के अनुसार, 18 जनवरी को अमावस्या तिथि पूरे दिन रहने से श्रद्धालु किसी भी समय गंगा स्नान कर सकते हैं। विशेष पुण्यकाल के साथ सामान्य समय में भी स्नान, दान और पूजा का पूर्ण फल मिलेगा। स्नान का पुण्यकाल मौन व्रत रखना तपस्या है इस अमावस्या पर ब्रह्म, पद्म और वायु पुराण में मौन व्रत करने की बात कही गई है। इनके अनुसार माघ महीने की अमावस्या पर भगवान विष्णु और पितरों की पूजा के साथ इस दिन मौन व्रत रखने से महापुण्य मिलता है। श्रीमद् भगवद् गीता में मौन को तप कहा गया है। माना जाता है कि इस तिथि पर मौन व्रत रखने से तप के समान पुण्य फल मिलता है। अपनी इच्छाओं पर काबू पाने के लिए युगों से मौन व्रत किया जा रहा है। इस व्रत से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इससे डिप्रेशन, चिंता और तनाव में कमी आती है। इससे सेल्फ कंट्रोल और सहनशक्ति भी बढ़ती है। तीर्थ स्नान का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व