यूपी का मौसम तेजी से बदल रहा है। पिछले 48 घंटों में 15 से अधिक जिलों में हल्की बारिश के बाद प्रदेश का पारा करीब 3°C तक गिर गया है। बांदा का पारा अभी तक 40°C के पार चला गया था लेकिन पिछले 2 दिन से पारा 37°C पर आ गया है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे बाद फिर से बारिश का अलर्ट जारी किया है। जो 22 मार्च तक जारी रह सकता है। जबकि सोमवार को मुजफ्फरनगर में देर रात झमाझम बारिश हुई। कई इलाकों में ओले भी गिरे। बिजनौर में तेज आंधी की वजह से पेड़ उखड़ गए। सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे और होर्डिंग्स गिर गए। सहारनपुर में आंधी की वजह से टीन शेड गिरने से पूर्व प्रधान समेत 2 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले, कल यानी रविवार को नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या समेत 15 शहरों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश हुई। लखनऊ में बूंदाबांदी के साथ धूलभरी आंधी चली। हरदोई और सीतापुर में बिजली गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 2 बच्चों समेत 3 लोग झुलस गए। लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने मौसम में हुए बदलाव की वजह बताई। उन्होंने कहा- 19 मार्च से प्रदेश में एक और विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, इससे बारिश-आंधी का दौर शुरू होगा। 40-50 किमी की स्पीड से हवाएं चलेंगी। ओले भी गिर सकते हैं। मौसम की 3 तस्वीरें- 19 मार्च से फिर शुरू होगी बारिश
बारिश का असर खत्म होते ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि 18 मार्च तक प्रदेश में किसी सक्रिय मौसम तंत्र की अनुपस्थिति रहेगी, जिसके कारण मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा और तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद 19 मार्च से एक नया सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित करेगा। इसके असर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से बारिश की शुरुआत होने की संभावना है, जो धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में फैल सकती है। 19 से 22 मार्च के बीच कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने के आसार हैं। खड़ी फसलों पर होगा असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बारिश का सीधा असर तापमान पर भी पड़ेगा। अधिकतम तापमान में लगभग 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की तेजी से गिरावट दर्ज हो सकती है, जिससे तापमान सामान्य या सामान्य से नीचे पहुंच सकता है।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि आगामी बारिश और आंधी-तूफान की संभावना को देखते हुए खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी?
यूपी के बांदा में दो दिन पहले पारा 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ साल में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसलिए तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। आमतौर पर मार्च के आखिरी हफ्ते तक पारा 40 डिग्री तक पहुंचता था, लेकिन अब मार्च के दूसरे हफ्ते में ही पारा 40 डिग्री तक पहुंच गया। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव
IMD यानी मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव?
मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश का असर खत्म होते ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि 18 मार्च तक प्रदेश में किसी सक्रिय मौसम तंत्र की अनुपस्थिति रहेगी, जिसके कारण मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा और तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद 19 मार्च से एक नया सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित करेगा। इसके असर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से बारिश की शुरुआत होने की संभावना है, जो धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में फैल सकती है। 19 से 22 मार्च के बीच कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने के आसार हैं। खड़ी फसलों पर होगा असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बारिश का सीधा असर तापमान पर भी पड़ेगा। अधिकतम तापमान में लगभग 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की तेजी से गिरावट दर्ज हो सकती है, जिससे तापमान सामान्य या सामान्य से नीचे पहुंच सकता है।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि आगामी बारिश और आंधी-तूफान की संभावना को देखते हुए खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी?
यूपी के बांदा में दो दिन पहले पारा 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ साल में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसलिए तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। आमतौर पर मार्च के आखिरी हफ्ते तक पारा 40 डिग्री तक पहुंचता था, लेकिन अब मार्च के दूसरे हफ्ते में ही पारा 40 डिग्री तक पहुंच गया। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव
IMD यानी मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव?
मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।