यूपी के जिला सहारनपुर में पुलिस-प्रशासन की टीम ने 9 जनवरी को टोल प्लाजा मालिक समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया। इस टोल प्लाजा पर सभी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से जबरन टोल टैक्स वसूला जा रहा था। SP सागर जैन ने कहा- एक साल में करीब 50 करोड़ रुपए की टोल वसूली अवैध तरीके से कर ली गई, ऐसा अनुमान है। बाकी हम 5 साल का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं, उससे चीजें और क्लियर होंगी। टोल प्लाजा के मालिक कमलजीत प्रधान समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। नकुड़ विधानसभा सीट से टिकट मांगने की दौड़ में हैं। सपा नेता सीधे तौर पर आरोप लगा रहे हैं कि मौजूदा BJP विधायक मुकेश चौधरी ने सपा नेता को पकड़वाया है, जिससे उनका पॉलिटिकल फ्यूचर बना रहे। दैनिक भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर पूरा मामला समझा। पुलिस अफसरों से बात करके जाना कि फर्जीवाड़ा कैसे हो रहा था? सपा और भाजपा नेताओं से भी इस कंट्रोवर्सी पर अलग-अलग बात की। यह रिपोर्ट पढ़िए… सबसे पहले पूरा केस समझिए टोल मालिक समेत चार गिरफ्तार, फर्जी रसीदें बरामद
सहारनपुर DM मनीष बंसल को पिछले दिनों सूचना मिली कि सरसावा टोल प्लाजा पर हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपए वसूले जा रहे हैं। जबकि हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से टोल वसूली का कोई नियम ही नहीं। DM ने एक टीम बनाई और 9 जनवरी को छापेमारी कराई। इसमें शिकायत सही मिली। मामले में टोल प्लाजा मालिक कमलजीत प्रधान, टोल मैनेजर कालू सिंह राणावत, टोल-कर्मी अक्षय कुमार और सागर की गिरफ्तारी हुई। इनसे एक रसीद बुक, 8 कटी हुई रसीदें और 3 पर्चियां मिलीं, जिन पर वसूली का विवरण लिखा था। क्षेत्रीय लेखपाल रामप्रसाद गुप्ता ने थाना सरसावा में FIR कराई। 12 जनवरी को सहारनपुर की सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से लिए जाते थे 130 रुपए
वसूली का खेल समझने के लिए हमने सहारनपुर के SP (ग्रामीण) सागर जैन से फोन पर बात की। उन्होंने बताया- हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपए वसूले जा रहे थे। इसके लिए टोल प्लाजा संचालक ने अपने स्तर पर फर्जी रसीदें छपवा रखी थीं, जो किसानों को पैसे लेकर दी जाती थीं। शुरुआती पूछताछ में टोल प्लाजा मालिक कमलजीत ने करीब एक साल से वसूली होने की जानकारी दी है। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 50 करोड़ रुपए की अवैध वसूली हो चुकी थी। हम टोल प्लाजा का 5 साल का डेटा खंगाल रहे हैं। सभी डॉक्यूमेंट्स की छानबीन की जा रही है। अभी तक की जानकारी में पता चला है कि पिछले साल भी कमलजीत प्रधान के पास ही टोल संचालन का जिम्मा था। इस पूरे केस की बारीकी से जांच चल रही है। जांच में कुछ और युवकों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है। सहारनपुर में 50 हजार किसान कर रहे पॉपुलर की खेती
आखिर इतनी ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कहां से आ रहीं, जिन्हें टोल प्लाजा वालों ने कमाई का जरिया बना लिया। यह जानने के लिए हमने जानकारों से बात की। दरअसल, सहारनपुर में लकड़ी पर नक्काशी (वुड कार्विंग) का बड़ा काम है। यहां लकड़ी के फर्नीचर और इससे जुड़े सजावटी सामान तैयार करके पूरे देश-विदेश में सप्लाई किए जाते हैं। इस वजह से पॉपुलर की खेती बहुत होती है। मौजूदा वक्त में सहारनपुर में 50 हजार से ज्यादा किसान पॉपुलर की खेती कर रहे हैं। सहारनपुर से सटा हरियाणा राज्य का यमुनानगर है, जहां प्लाईवुड की 350 से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं। सहारनपुर और देहरादून रीजन के पॉपुलर की ज्यादातर सप्लाई यमुनानगर की फैक्ट्रियों को होती है। प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि प्लाईवुड फैक्ट्रियों ने अपने-अपने कांटे सहारनपुर के खेतों में लगा दिए हैं, जहां सीधे खेत से पॉपुलर के पेड़ इकट्ठा करके फैक्ट्रियों तक पहुंचाए जाते हैं। टोल प्लाजा से रोजाना गुजरते हैं 13 हजार से ज्यादा वाहन
सहारनपुर से यमुनानगर की पॉपुलर फैक्ट्रियों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता कस्बा सरसावा है। सरसावा को पार करते ही टोल प्लाजा पड़ता है। ये हाईवे देहरादून को पंचकूला से भी जोड़ता है। स्थिति ये है कि हर मिनट ट्रैक्टर-ट्रॉली इस टोल प्लाजा को पार करती है। सरसावा से भरी हुई ट्रॉलियां जाती हैं और यमुनानगर से खाली होकर आती हैं। इसी क्षेत्र में यमुना नदी बहती है, जहां खनन होता है। खनन की ट्रैक्टर–ट्रॉलियां भी यहीं से गुजरती हैं। हमने टोल प्लाजा पर पहुंचकर वहां मौजूदा कर्मचारियों से ऑफ कैमरा बात की। उन्होंने बताया कि पिछले साल 13 हजार वाहन रोजाना इस टोल प्लाजा से गुजरते थे। एक साल में ये संख्या अब और बढ़ गई है। हालांकि, उन्होंने इसका सटीक डेटा नहीं बताया। हमने पूछा- अब टोल का संचालन कैसे हो रहा है? इस पर उन्होंने कहा कि टोल मालिक/मैनेजर जेल चले गए। कर्मचारी जैसे-तैसे टोल प्लाजा चला रहे। हमने कुछ देर तक टोल प्लाजा पर खड़े होकर सच्चाई परखी। पुलिस एक्शन के बाद से अब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से टोल वसूली बंद कर दी गई है। हमने कई ट्रैक्टर-ट्रॉली ड्राइवरों से बात करने की कोशिश की, लेकिन रोजाना यहां से गुजरने की वजह से वो ऑन कैमरा बातचीत करने को तैयार नहीं हुए। सपा नेता बोले- कमलजीत ने SIR में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया, इसलिए जेल भेजा
अब इस पूरे प्रकरण में राजनीति भी शुरू हो गई है। कुछ सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि नकुड़ क्षेत्र से मौजूदा BJP विधायक मुकेश चौधरी ने अपना पॉलिटिकल करियर बचाए रखने के लिए प्रतिद्वंद्वी कमलजीत प्रधान को जेल भिजवा दिया है। दरअसल, कमलजीत सिंह सरसावा क्षेत्र में गांव शेखपुरा का रहने वाला है। वो समाजवादी पार्टी से नकुड़ विधानसभा सीट से टिकट मांग रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कमलजीत की पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कई बड़े नेताओं के साथ फोटो भी मौजूद है। कमलजीत के जेल जाते ही सोशल मीडिया वॉर शुरू हो गई है। सपा के तमाम लोग कमलजीत के पक्ष में आ गए हैं। वो इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। सहारनपुर में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फरहद गाड़ा कहते हैं- कमलजीत हमारी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। इस नाते सपा का प्रतिनिधिमंडल उनके घर गया। फैमिली का कहना है कि हमारा टोल प्लाजा से कोई मतलब नहीं। सरसावा एसओ ने फोन करके कमलजीत को बुलाया। कमलजीत खुद थाने गए थे, न कि पुलिस उन्हें लेकर गई। इसके बाद करीब 7-8 घंटे तक कमलजीत को अलग-अलग थानों में घुमाते रहे। पुलिस ने उनके घरवालों को कुछ नहीं बताया और अचानक कमलजीत को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया। अब पुलिस कह रही कि पिछले एक साल से टोल प्लाजा पर अवैध वसूली हो रही थी। हमारा कहना है कि अगर ऐसा हो रहा था तो पुलिस-प्रशासन ने पिछले एक साल से किसानों से ये लूट क्यों होने दी? फरहद गाड़ा, कमलजीत को जेल भेजने के पीछे दूसरी कहानी बताते हैं। कहते हैं- पिछले दिनों सहारनपुर में SIR का काम चला। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रखा था कि वो एक-एक बूथ पर जाकर चौकन्ना रहें। 20 दिसंबर को जिला प्रशासन ने बीएलओ के साथ 36 सहायक लगाए, जो विशेष समुदाय (मुस्लिम) के थे। इसके बाद 26 दिसंबर को सहायकों की दूसरी लिस्ट आई। इसमें 36 में से 31 मुस्लिम सहायकों के नाम काट दिए गए। हम इस बाबत DM के पास गए। कमलजीत प्रधान ने सोशल मीडिया पर आकर उन सभी मुस्लिम नामों की लिस्ट पढ़ डाली, जिन्हें सहायक कार्य से हटाया गया था। सत्ता के लोगों को ये बात चुभी और उन्होंने खुन्नस में कमलजीत को जेल भेज दिया। कमलजीत को साजिश का शिकार बनाया गया है। पूर्व BJP विधायक ने भी कार्रवाई पर उठाए सवाल
पूर्व भाजपा विधायक शशिबाला पुंडीर ने फेसबुक पर 2 पोस्ट डालकर टोल प्लाजा मामले में कमलजीत प्रधान की अरेस्टिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा- कमलजीत प्रधान को राजनीति का शिकार बनाया गया है। वह लड़का बहुत प्रोग्रेस कर रहा था। उसको झूठा फंसाया गया है। राजनीति करनी चाहिए, लेकिन इतना गिरकर नहीं। मुख्यमंत्री जी को भी पत्र लिखूंगी कि अपने जनप्रतिनिधियों पर ध्यान नहीं देते, उनकी जांच नहीं करते, जिन्होंने जिला लूट खाया। एक दूसरी पोस्ट में शशिबाला पुंडीर ने लिखा- मैं आज जेल में जाकर कमलजीत से मिली हूं। सारी घटना पूछी। कमलजीत के नाम सरसावा टोल प्लाजा पर कहीं कुछ नहीं है। टोल पहले उसके नाम पर था, अब नहीं है। उसका कहीं कोई पैसे का ट्रांजैक्शन टोल प्लाजा से नहीं है। मैंने डीएम से भी निष्पक्ष जांच के लिए कहा है। BJP विधायक बोले- कमलजीत मेरा भतीजा, मैंने तो छुड़ाने के प्रयास किए
इस प्रकरण में लगातार लग रहे आरोपों पर नकुड़ क्षेत्र से BJP विधायक मुकेश चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- कमलजीत मेरा भतीजा है। हमारे दोस्त का मित्र है। मेरे चुनाव में साथ रहा। मैं उसे क्यों जेल भिजवाऊंगा? राजनीतिक रूप से मेरा नाम लिया जा रहा। मेरा इसमें कोई रोल नहीं। घटना वाले दिन मेरे पास उनके चचेरे भाई के लड़के का फोन आया और उसने पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद मैंने अधिकारियों से फोन पर बात की। अधिकारियों ने मुझे पूरी कार्रवाई समझाई। रुद्रसेन जी (सपा नेता) हमारे बड़े भाई हैं। उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। हमें खुद टोल की पूरी जानकारी नहीं थी। इसके बाद मैंने सरकारी शासनादेश मंगवाकर पढ़ा था। उसमें स्पष्ट है कि ट्रैक्टर के पीछे कुछ भी जुड़ा हो, उससे टोल नहीं ले सकते। ये पुष्टि हो चुकी है कि टोल लिया जा रहा था। विधायक ने आगे कहा- कमलजीत को छुड़ाने के लिए हमारे मंत्री बृजेश सिंह, विधायक कीरत सिंह ने भी अधिकारियों को फोन किया। फोन करने वालों में मैं अकेला नहीं था। उसके सबसे संबंध हैं। जिसने चुनाव में मेरे साथ काम किया हो, मैं उसे कैसे बंद करवा दूंगा। 2 साल से टोल उसके पास ही है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… ‘भाजपा नेता संगीत सोम मीट कारोबारी हैं’, मेरठ में सपा विधायक अतुल प्रधान के गंभीर आरोप यूपी के मेरठ की सरधना सीट से विधायक रह चुके संगीत सोम एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वह शाहरुख खान की IPL टीम केकेआर में शामिल मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने की मांग को लेकर चर्चा में आए। संगीत सोम की गिनती फायर ब्रांड नेता के रूप में होती रही है। लेकिन, बांग्लादेश के विरोध के बाद उनके अतीत के रिकॉर्ड को लेकर सरधना से मौजूदा सपा विधायक अतुल प्रधान ने उन पर हमला बोला है। उनके अतीत के कुछ दस्तावेज भी उन्होंने पेश किए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में संगीत सोम किसी मीट के उत्पादन या निर्यात के काम में शामिल रहे हैं? अगर सच है, तो किन-किन कंपनियों में वे रहे? किस पद पर रहे? कब तक रहे? अब क्या स्थिति है? पढ़ें पूरी खबर
सहारनपुर DM मनीष बंसल को पिछले दिनों सूचना मिली कि सरसावा टोल प्लाजा पर हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपए वसूले जा रहे हैं। जबकि हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से टोल वसूली का कोई नियम ही नहीं। DM ने एक टीम बनाई और 9 जनवरी को छापेमारी कराई। इसमें शिकायत सही मिली। मामले में टोल प्लाजा मालिक कमलजीत प्रधान, टोल मैनेजर कालू सिंह राणावत, टोल-कर्मी अक्षय कुमार और सागर की गिरफ्तारी हुई। इनसे एक रसीद बुक, 8 कटी हुई रसीदें और 3 पर्चियां मिलीं, जिन पर वसूली का विवरण लिखा था। क्षेत्रीय लेखपाल रामप्रसाद गुप्ता ने थाना सरसावा में FIR कराई। 12 जनवरी को सहारनपुर की सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से लिए जाते थे 130 रुपए
वसूली का खेल समझने के लिए हमने सहारनपुर के SP (ग्रामीण) सागर जैन से फोन पर बात की। उन्होंने बताया- हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपए वसूले जा रहे थे। इसके लिए टोल प्लाजा संचालक ने अपने स्तर पर फर्जी रसीदें छपवा रखी थीं, जो किसानों को पैसे लेकर दी जाती थीं। शुरुआती पूछताछ में टोल प्लाजा मालिक कमलजीत ने करीब एक साल से वसूली होने की जानकारी दी है। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 50 करोड़ रुपए की अवैध वसूली हो चुकी थी। हम टोल प्लाजा का 5 साल का डेटा खंगाल रहे हैं। सभी डॉक्यूमेंट्स की छानबीन की जा रही है। अभी तक की जानकारी में पता चला है कि पिछले साल भी कमलजीत प्रधान के पास ही टोल संचालन का जिम्मा था। इस पूरे केस की बारीकी से जांच चल रही है। जांच में कुछ और युवकों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है। सहारनपुर में 50 हजार किसान कर रहे पॉपुलर की खेती
आखिर इतनी ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कहां से आ रहीं, जिन्हें टोल प्लाजा वालों ने कमाई का जरिया बना लिया। यह जानने के लिए हमने जानकारों से बात की। दरअसल, सहारनपुर में लकड़ी पर नक्काशी (वुड कार्विंग) का बड़ा काम है। यहां लकड़ी के फर्नीचर और इससे जुड़े सजावटी सामान तैयार करके पूरे देश-विदेश में सप्लाई किए जाते हैं। इस वजह से पॉपुलर की खेती बहुत होती है। मौजूदा वक्त में सहारनपुर में 50 हजार से ज्यादा किसान पॉपुलर की खेती कर रहे हैं। सहारनपुर से सटा हरियाणा राज्य का यमुनानगर है, जहां प्लाईवुड की 350 से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं। सहारनपुर और देहरादून रीजन के पॉपुलर की ज्यादातर सप्लाई यमुनानगर की फैक्ट्रियों को होती है। प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि प्लाईवुड फैक्ट्रियों ने अपने-अपने कांटे सहारनपुर के खेतों में लगा दिए हैं, जहां सीधे खेत से पॉपुलर के पेड़ इकट्ठा करके फैक्ट्रियों तक पहुंचाए जाते हैं। टोल प्लाजा से रोजाना गुजरते हैं 13 हजार से ज्यादा वाहन
सहारनपुर से यमुनानगर की पॉपुलर फैक्ट्रियों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता कस्बा सरसावा है। सरसावा को पार करते ही टोल प्लाजा पड़ता है। ये हाईवे देहरादून को पंचकूला से भी जोड़ता है। स्थिति ये है कि हर मिनट ट्रैक्टर-ट्रॉली इस टोल प्लाजा को पार करती है। सरसावा से भरी हुई ट्रॉलियां जाती हैं और यमुनानगर से खाली होकर आती हैं। इसी क्षेत्र में यमुना नदी बहती है, जहां खनन होता है। खनन की ट्रैक्टर–ट्रॉलियां भी यहीं से गुजरती हैं। हमने टोल प्लाजा पर पहुंचकर वहां मौजूदा कर्मचारियों से ऑफ कैमरा बात की। उन्होंने बताया कि पिछले साल 13 हजार वाहन रोजाना इस टोल प्लाजा से गुजरते थे। एक साल में ये संख्या अब और बढ़ गई है। हालांकि, उन्होंने इसका सटीक डेटा नहीं बताया। हमने पूछा- अब टोल का संचालन कैसे हो रहा है? इस पर उन्होंने कहा कि टोल मालिक/मैनेजर जेल चले गए। कर्मचारी जैसे-तैसे टोल प्लाजा चला रहे। हमने कुछ देर तक टोल प्लाजा पर खड़े होकर सच्चाई परखी। पुलिस एक्शन के बाद से अब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से टोल वसूली बंद कर दी गई है। हमने कई ट्रैक्टर-ट्रॉली ड्राइवरों से बात करने की कोशिश की, लेकिन रोजाना यहां से गुजरने की वजह से वो ऑन कैमरा बातचीत करने को तैयार नहीं हुए। सपा नेता बोले- कमलजीत ने SIR में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया, इसलिए जेल भेजा
अब इस पूरे प्रकरण में राजनीति भी शुरू हो गई है। कुछ सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि नकुड़ क्षेत्र से मौजूदा BJP विधायक मुकेश चौधरी ने अपना पॉलिटिकल करियर बचाए रखने के लिए प्रतिद्वंद्वी कमलजीत प्रधान को जेल भिजवा दिया है। दरअसल, कमलजीत सिंह सरसावा क्षेत्र में गांव शेखपुरा का रहने वाला है। वो समाजवादी पार्टी से नकुड़ विधानसभा सीट से टिकट मांग रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कमलजीत की पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कई बड़े नेताओं के साथ फोटो भी मौजूद है। कमलजीत के जेल जाते ही सोशल मीडिया वॉर शुरू हो गई है। सपा के तमाम लोग कमलजीत के पक्ष में आ गए हैं। वो इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। सहारनपुर में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फरहद गाड़ा कहते हैं- कमलजीत हमारी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। इस नाते सपा का प्रतिनिधिमंडल उनके घर गया। फैमिली का कहना है कि हमारा टोल प्लाजा से कोई मतलब नहीं। सरसावा एसओ ने फोन करके कमलजीत को बुलाया। कमलजीत खुद थाने गए थे, न कि पुलिस उन्हें लेकर गई। इसके बाद करीब 7-8 घंटे तक कमलजीत को अलग-अलग थानों में घुमाते रहे। पुलिस ने उनके घरवालों को कुछ नहीं बताया और अचानक कमलजीत को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया। अब पुलिस कह रही कि पिछले एक साल से टोल प्लाजा पर अवैध वसूली हो रही थी। हमारा कहना है कि अगर ऐसा हो रहा था तो पुलिस-प्रशासन ने पिछले एक साल से किसानों से ये लूट क्यों होने दी? फरहद गाड़ा, कमलजीत को जेल भेजने के पीछे दूसरी कहानी बताते हैं। कहते हैं- पिछले दिनों सहारनपुर में SIR का काम चला। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रखा था कि वो एक-एक बूथ पर जाकर चौकन्ना रहें। 20 दिसंबर को जिला प्रशासन ने बीएलओ के साथ 36 सहायक लगाए, जो विशेष समुदाय (मुस्लिम) के थे। इसके बाद 26 दिसंबर को सहायकों की दूसरी लिस्ट आई। इसमें 36 में से 31 मुस्लिम सहायकों के नाम काट दिए गए। हम इस बाबत DM के पास गए। कमलजीत प्रधान ने सोशल मीडिया पर आकर उन सभी मुस्लिम नामों की लिस्ट पढ़ डाली, जिन्हें सहायक कार्य से हटाया गया था। सत्ता के लोगों को ये बात चुभी और उन्होंने खुन्नस में कमलजीत को जेल भेज दिया। कमलजीत को साजिश का शिकार बनाया गया है। पूर्व BJP विधायक ने भी कार्रवाई पर उठाए सवाल
पूर्व भाजपा विधायक शशिबाला पुंडीर ने फेसबुक पर 2 पोस्ट डालकर टोल प्लाजा मामले में कमलजीत प्रधान की अरेस्टिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा- कमलजीत प्रधान को राजनीति का शिकार बनाया गया है। वह लड़का बहुत प्रोग्रेस कर रहा था। उसको झूठा फंसाया गया है। राजनीति करनी चाहिए, लेकिन इतना गिरकर नहीं। मुख्यमंत्री जी को भी पत्र लिखूंगी कि अपने जनप्रतिनिधियों पर ध्यान नहीं देते, उनकी जांच नहीं करते, जिन्होंने जिला लूट खाया। एक दूसरी पोस्ट में शशिबाला पुंडीर ने लिखा- मैं आज जेल में जाकर कमलजीत से मिली हूं। सारी घटना पूछी। कमलजीत के नाम सरसावा टोल प्लाजा पर कहीं कुछ नहीं है। टोल पहले उसके नाम पर था, अब नहीं है। उसका कहीं कोई पैसे का ट्रांजैक्शन टोल प्लाजा से नहीं है। मैंने डीएम से भी निष्पक्ष जांच के लिए कहा है। BJP विधायक बोले- कमलजीत मेरा भतीजा, मैंने तो छुड़ाने के प्रयास किए
इस प्रकरण में लगातार लग रहे आरोपों पर नकुड़ क्षेत्र से BJP विधायक मुकेश चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- कमलजीत मेरा भतीजा है। हमारे दोस्त का मित्र है। मेरे चुनाव में साथ रहा। मैं उसे क्यों जेल भिजवाऊंगा? राजनीतिक रूप से मेरा नाम लिया जा रहा। मेरा इसमें कोई रोल नहीं। घटना वाले दिन मेरे पास उनके चचेरे भाई के लड़के का फोन आया और उसने पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद मैंने अधिकारियों से फोन पर बात की। अधिकारियों ने मुझे पूरी कार्रवाई समझाई। रुद्रसेन जी (सपा नेता) हमारे बड़े भाई हैं। उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। हमें खुद टोल की पूरी जानकारी नहीं थी। इसके बाद मैंने सरकारी शासनादेश मंगवाकर पढ़ा था। उसमें स्पष्ट है कि ट्रैक्टर के पीछे कुछ भी जुड़ा हो, उससे टोल नहीं ले सकते। ये पुष्टि हो चुकी है कि टोल लिया जा रहा था। विधायक ने आगे कहा- कमलजीत को छुड़ाने के लिए हमारे मंत्री बृजेश सिंह, विधायक कीरत सिंह ने भी अधिकारियों को फोन किया। फोन करने वालों में मैं अकेला नहीं था। उसके सबसे संबंध हैं। जिसने चुनाव में मेरे साथ काम किया हो, मैं उसे कैसे बंद करवा दूंगा। 2 साल से टोल उसके पास ही है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… ‘भाजपा नेता संगीत सोम मीट कारोबारी हैं’, मेरठ में सपा विधायक अतुल प्रधान के गंभीर आरोप यूपी के मेरठ की सरधना सीट से विधायक रह चुके संगीत सोम एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वह शाहरुख खान की IPL टीम केकेआर में शामिल मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने की मांग को लेकर चर्चा में आए। संगीत सोम की गिनती फायर ब्रांड नेता के रूप में होती रही है। लेकिन, बांग्लादेश के विरोध के बाद उनके अतीत के रिकॉर्ड को लेकर सरधना से मौजूदा सपा विधायक अतुल प्रधान ने उन पर हमला बोला है। उनके अतीत के कुछ दस्तावेज भी उन्होंने पेश किए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में संगीत सोम किसी मीट के उत्पादन या निर्यात के काम में शामिल रहे हैं? अगर सच है, तो किन-किन कंपनियों में वे रहे? किस पद पर रहे? कब तक रहे? अब क्या स्थिति है? पढ़ें पूरी खबर