जब भारतीय राजनीति में दिखावा, लग्जरी और शानो-शौकत की होड़ मची है, तब एक ऐसी महिला जो इन सबसे कोसों दूर रहती हैं। विवादों से भी खुद को दूर रखती हैं। उनकी सादगी की मिसालें दी जाती हैं। यानी बिल्कुल सिंपल। जी हां, बात हो रही है यूपी के सबसे बड़े राजनीतिक खानदान के सबसे बड़े नेता अखिलेश यादव की पत्नी के बारे में। वह राजनीति में मुलायम की लोकसभा सीट मैनपुरी की विरासत संभाल रही हैं। आज उनका जन्मदिन है। डिंपल मैनपुरी से दूसरी बार सांसद हैं। वह कन्नौज लोकसभा सीट का भी प्रतिनिधित्व दो बार कर चुकी हैं। डिंपल यादव को न ताे गहनों का शौक है और न दिखावे का। बात एक साल पुरानी है। मार्च का महीना था, डिंपल मैनपुरी से लखनऊ लौट रही थीं। रास्ते में दो गाड़ियों का एक्सीडेंट हो गया। मौके पर पुलिस और सहायता पहुंचने में समय लग रहा था। डिंपल अपनी गाड़ी से उतरीं, देखा दोनों पक्ष आपस में विवाद कर रहे थे। उन्होंने न सिर्फ दोनों पक्षों को समझाया बल्कि दोनों को अलग-अलग अपनी गाड़ियों से अस्पताल भिजवाया। अलग-अलग अस्पताल इसलिए कि कहीं वहां दोनों पक्ष दोबारा न भिड़ जाएं। डिंपल के बर्थडे पर पढ़िए उनके जीवन से जुड़ी बातें… अखिलेश ने वापस कर दिया था हीरे का हार
डिंपल को गहनों का शौक बिल्कुल नहीं है। साल- 2021 में एक नेता मिलने पहुंचे तो डिंपल के लिए हीरे का हार लेकर आए थे। अखिलेश यादव ने उक्त नेता से पूछा कि ये क्या है? नेताजी ने कहा कि मैडम के लिए छोटा सा उपहार है। अखिलेश ने दोबारा पूछा कि है क्या? नेता ने डिब्बा खोलकर अखिलेश यादव को दिखाया। सामने इम्पोर्टेड हीरे का हार था। अखिलेश यादव ने पूछा कभी देखा है उन्हें गहने पहने हुए? आदत खराब न करो। उन्हें इन चीजों का शौक नहीं। इसे वापस ले जाओ। खुद को विवादों से दूर रखा
डिंपल यादव ने हमेशा खुद को विवादों से दूर ही रखा। बड़े से बड़े विवादित सवालों का जवाब भी उन्होंने अपनी शख्सियत की ही तरह बड़ी सादगी से दिया। जुलाई, 2025 में जब पार्लियामेंट की मस्जिद के इमाम सपा के नेताओं को लेकर पहुंचे तो उसमें डिंपल भी मौजूद थीं। उनकी मौजूदगी पर कुछ मौलवियों ने सवाल उठाए, जिसके बाद उस पर डिबेट शुरू हो गई। लेकिन, डिंपल ने इस मसले पर खामोश रह कर खुद को विवादों से दूर कर लिया। 1978 में पुणे में जन्मी डिंपल यादव एक अनुशासित भारतीय सेना के परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रिटायर्ड कर्नल राम चंद्र सिंह रावत और मां चंपा रावत है। मूलरूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से ताल्लुक रखने वाले परिवार की वजह से उनका बचपन अलग-अलग शहरों पुणे, बठिंडा, अंडमान-निकोबार और लखनऊ में बीता। आर्मी पब्लिक स्कूल, लखनऊ से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। सेना के माहौल ने उनमें अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सादगी के बीज बोए। बचपन से ही घुड़सवारी उनका जुनून रहा। लखनऊ के रेसकोर्स और कैवेलरी क्लब में वे नियमित रूप से ट्रेनिंग लेती रही हैं। किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं डिंपल-अखिलेश की लव स्टोरी
डिंपल और अखिलेश यादव की प्रेम कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं। दोनों की पहली मुलाकात लखनऊ में एक कॉमन दोस्त के घर पर हुई। उस समय डिंपल को पता ही नहीं था कि अखिलेश मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं। दोस्ती प्यार में बदली और चार साल तक यह रिश्ता चला। अखिलेश ऑस्ट्रेलिया पढ़ाई के लिए गए, तो भी ये रिश्ता न सिर्फ बना रहा, बल्कि और मजबूत होता गया। शादी के लिए शुरुआत में दोनों परिवार राजी नहीं थे। शायद इसकी वजह ये भी थी कि डिंपल राजपूत परिवार से ताल्लुक रखती थीं। मुलायम सिंह यादव को अंतरजातीय विवाह के साथ उत्तराखंड आंदोलन के कारण आपत्ति थी। अखिलेश ने अपनी दादी मूर्ति देवी को अपनी लव स्टोरी बताई। दादी की हामी के बाद परिवार मान गया। आखिरकार 24 नवंबर, 1999 को लखनऊ में शादी हुई, जिसमें अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना जैसे सेलिब्रिटी भी शामिल हुए। बागवानी का भी शौक
शादी के बाद डिंपल ने राजनीति से दूरी बनाए रखी। एक दशक तक वे घर और बच्चों पर फोकस रहीं। उनके 3 बच्चे हैं। बेटियां अदिति और टीना हैं, बेटा अर्जुन है। परिवार के साथ समय बिताना उनका सबसे बड़ा शौक है। इसके अलावा उन्हें बागवानी का भी शौक है। जब अखिलेश यादव की सरकार यूपी में थी, उस समय उन्होंने बहुत से ऐसे पेड़ बाहर से मंगाकर लखनऊ की सड़कों के किनारे लगवाए जो अलग-अलग मौसम में अलग-अलग तरह के फूलों के जरिए अपने रंग बिखेरते हैं। हार गईं थी पहला चुनाव, फिर चुनी गई निर्विरोध
2009 में डिंपल ने पहली बार फिरोजाबाद से चुनाव लड़ा। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस के राजबब्बर ने उन्हें हरा दिया। 2012 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो कन्नौज सीट से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। यहां उपचुनाव हुआ और डिंपल निर्विरोध सांसद चुनी गईं। उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी महिला और देश की 44वीं व्यक्ति बनीं, जिन्हें निर्विरोध चुना गया। 2014 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 2019 में कन्नौज में भाजपा के सुब्रत पाठक ने उन्हें हरा दिया। 2022 में नेताजी मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया, तो मैनपुरी में उपचुनाव हुआ। सपा ने डिंपल को प्रत्याशी बनाया, जहां से वे बड़े अंतर से चुनाव जीतीं। 2024 में भी इस जीत को बरकरार रखा। सादगी जो सबको हैरान करती है
डिंपल यादव की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी है। कॉटन या सिल्क की सादी साड़ियां, बिना जेवरात के लुक, सिंपल ब्लाउज, यही उनका स्टाइल है। 48 साल की उम्र में भी वे सबसे अलग नजर आती हैं। लोकसभा में अक्सर अखिलेश और डिंपल आगे और पीछे की सीटों पर नजर आते हैं। यहां भी वे अपनी सादगी की वजह से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहती हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… ‘माघ मेले में दातून नहीं बिक रही…झूठे वीडियो बन रहे’, दूर-दूर से बेचने आए लोग बोले- कोई फ्री भी नहीं ले रहा प्रयागराज के माघ मेले में दातून के बिजनेस को लेकर चर्चा है। कई ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें लोग दावा कर रहे कि दातून बेचकर हर दिन 1 हजार से ज्यादा रुपए कमा रहे हैं। कई तो पूरे मेले में लाखों रुपए कमाने का दावा कर रहे हैं। इन वीडियो को देखकर तमाम लोग माघ मेले में दातून बेचने चले आए। यहां कुछ दिन रहे, लेकिन बाद में अपने घर लौट गए। पढ़ें पूरी खबर
डिंपल को गहनों का शौक बिल्कुल नहीं है। साल- 2021 में एक नेता मिलने पहुंचे तो डिंपल के लिए हीरे का हार लेकर आए थे। अखिलेश यादव ने उक्त नेता से पूछा कि ये क्या है? नेताजी ने कहा कि मैडम के लिए छोटा सा उपहार है। अखिलेश ने दोबारा पूछा कि है क्या? नेता ने डिब्बा खोलकर अखिलेश यादव को दिखाया। सामने इम्पोर्टेड हीरे का हार था। अखिलेश यादव ने पूछा कभी देखा है उन्हें गहने पहने हुए? आदत खराब न करो। उन्हें इन चीजों का शौक नहीं। इसे वापस ले जाओ। खुद को विवादों से दूर रखा
डिंपल यादव ने हमेशा खुद को विवादों से दूर ही रखा। बड़े से बड़े विवादित सवालों का जवाब भी उन्होंने अपनी शख्सियत की ही तरह बड़ी सादगी से दिया। जुलाई, 2025 में जब पार्लियामेंट की मस्जिद के इमाम सपा के नेताओं को लेकर पहुंचे तो उसमें डिंपल भी मौजूद थीं। उनकी मौजूदगी पर कुछ मौलवियों ने सवाल उठाए, जिसके बाद उस पर डिबेट शुरू हो गई। लेकिन, डिंपल ने इस मसले पर खामोश रह कर खुद को विवादों से दूर कर लिया। 1978 में पुणे में जन्मी डिंपल यादव एक अनुशासित भारतीय सेना के परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रिटायर्ड कर्नल राम चंद्र सिंह रावत और मां चंपा रावत है। मूलरूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से ताल्लुक रखने वाले परिवार की वजह से उनका बचपन अलग-अलग शहरों पुणे, बठिंडा, अंडमान-निकोबार और लखनऊ में बीता। आर्मी पब्लिक स्कूल, लखनऊ से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। सेना के माहौल ने उनमें अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सादगी के बीज बोए। बचपन से ही घुड़सवारी उनका जुनून रहा। लखनऊ के रेसकोर्स और कैवेलरी क्लब में वे नियमित रूप से ट्रेनिंग लेती रही हैं। किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं डिंपल-अखिलेश की लव स्टोरी
डिंपल और अखिलेश यादव की प्रेम कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं। दोनों की पहली मुलाकात लखनऊ में एक कॉमन दोस्त के घर पर हुई। उस समय डिंपल को पता ही नहीं था कि अखिलेश मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं। दोस्ती प्यार में बदली और चार साल तक यह रिश्ता चला। अखिलेश ऑस्ट्रेलिया पढ़ाई के लिए गए, तो भी ये रिश्ता न सिर्फ बना रहा, बल्कि और मजबूत होता गया। शादी के लिए शुरुआत में दोनों परिवार राजी नहीं थे। शायद इसकी वजह ये भी थी कि डिंपल राजपूत परिवार से ताल्लुक रखती थीं। मुलायम सिंह यादव को अंतरजातीय विवाह के साथ उत्तराखंड आंदोलन के कारण आपत्ति थी। अखिलेश ने अपनी दादी मूर्ति देवी को अपनी लव स्टोरी बताई। दादी की हामी के बाद परिवार मान गया। आखिरकार 24 नवंबर, 1999 को लखनऊ में शादी हुई, जिसमें अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना जैसे सेलिब्रिटी भी शामिल हुए। बागवानी का भी शौक
शादी के बाद डिंपल ने राजनीति से दूरी बनाए रखी। एक दशक तक वे घर और बच्चों पर फोकस रहीं। उनके 3 बच्चे हैं। बेटियां अदिति और टीना हैं, बेटा अर्जुन है। परिवार के साथ समय बिताना उनका सबसे बड़ा शौक है। इसके अलावा उन्हें बागवानी का भी शौक है। जब अखिलेश यादव की सरकार यूपी में थी, उस समय उन्होंने बहुत से ऐसे पेड़ बाहर से मंगाकर लखनऊ की सड़कों के किनारे लगवाए जो अलग-अलग मौसम में अलग-अलग तरह के फूलों के जरिए अपने रंग बिखेरते हैं। हार गईं थी पहला चुनाव, फिर चुनी गई निर्विरोध
2009 में डिंपल ने पहली बार फिरोजाबाद से चुनाव लड़ा। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस के राजबब्बर ने उन्हें हरा दिया। 2012 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो कन्नौज सीट से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। यहां उपचुनाव हुआ और डिंपल निर्विरोध सांसद चुनी गईं। उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी महिला और देश की 44वीं व्यक्ति बनीं, जिन्हें निर्विरोध चुना गया। 2014 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 2019 में कन्नौज में भाजपा के सुब्रत पाठक ने उन्हें हरा दिया। 2022 में नेताजी मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया, तो मैनपुरी में उपचुनाव हुआ। सपा ने डिंपल को प्रत्याशी बनाया, जहां से वे बड़े अंतर से चुनाव जीतीं। 2024 में भी इस जीत को बरकरार रखा। सादगी जो सबको हैरान करती है
डिंपल यादव की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी है। कॉटन या सिल्क की सादी साड़ियां, बिना जेवरात के लुक, सिंपल ब्लाउज, यही उनका स्टाइल है। 48 साल की उम्र में भी वे सबसे अलग नजर आती हैं। लोकसभा में अक्सर अखिलेश और डिंपल आगे और पीछे की सीटों पर नजर आते हैं। यहां भी वे अपनी सादगी की वजह से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहती हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… ‘माघ मेले में दातून नहीं बिक रही…झूठे वीडियो बन रहे’, दूर-दूर से बेचने आए लोग बोले- कोई फ्री भी नहीं ले रहा प्रयागराज के माघ मेले में दातून के बिजनेस को लेकर चर्चा है। कई ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें लोग दावा कर रहे कि दातून बेचकर हर दिन 1 हजार से ज्यादा रुपए कमा रहे हैं। कई तो पूरे मेले में लाखों रुपए कमाने का दावा कर रहे हैं। इन वीडियो को देखकर तमाम लोग माघ मेले में दातून बेचने चले आए। यहां कुछ दिन रहे, लेकिन बाद में अपने घर लौट गए। पढ़ें पूरी खबर