यूपी में औसत बारिश, फिर इतनी बाढ़ क्यों?:नेपाल 2 बांध से पानी छोड़ रहा; एक्सपर्ट बोले- पानी नहीं छोड़ा तो बैराज टूट जाएंगे

यूपी में कम बारिश हो रही है, फिर भी 6 जिलों में बाढ़ की स्थिति है। 4 नदियों (घाघरा, राप्ती,गंडक,शारदा) का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इसकी वजह नेपाल है। नेपाल में हो रही बारिश से अभी दो बांध राप्ती और शारदा से पानी छोड़ा जा रहा है। यही पानी यूपी में बाढ़ की वजह है। नेपाल किन-किन बांधों से पानी छोड़ता हैं? नेपाल के बांधों की क्षमता क्या है? यूपी की किन नदियों में ये पानी पहुंचता है? सबसे ज्यादा कौन-से जिले प्रभावित होते हैं? सभी सवालों के जवाब भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़िए… सवाल-1: मानसून में क्या नेपाल में ज्यादा बारिश हो रही? जवाब: नेपाल में हर साल मानसून के दौरान ज्यादा बारिश होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह हिमालयी पहाड़ हैं। पहाड़ों में मौसम जल्दी बदलता है, जिससे अचानक बादल फटने जैसी घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा क्लाइमेट चेंज के असर से बारिश का पैटर्न भी बिगड़ गया है। इससे नेपाल में अक्सर सामान्य से ज्यादा पानी बरस जाता है। हालांकि, अभी नेपाल में सामान्य बारिश हो रही है। बीएचयू के प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी बताते हैं कि पहाड़ों पर बारिश मैदानी इलाकों में बाढ़ लाती है। खासतौर से नेपाल में मानसून के सीजन में भारी बारिश होती है। पहाड़ों से तेज पानी नदियों में आता है। बैराजों का पानी जब ज्यादा हो जाता है तो नेपाल उसे छोड़ देता है। ये पानी यूपी की तराई नदियों (गंडक, शारदा, राप्ती) में अचानक बहाव बढ़ा देता है। सवाल-2: नेपाल की कितनी नदियां यूपी में बाढ़ का कारण बनती हैं? जवाब: नेपाल की 5 प्रमुख नदियां महाकाली (घाघरा), शारदा, गंडक, राप्ती और कोसी यूपी में बाढ़ की प्रमुख वजह हैं। लेकिन, यूपी में इनमें से सबसे ज्यादा तबाही घाघरा नदी लाती है। नेपाल में भारी बारिश और ग्लेशियर पिघलने से इसका जलस्तर तेजी से बढ़ता है। यह नदी उत्तर प्रदेश के बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, बाराबंकी, फैजाबाद, और आजमगढ़ जैसे जिलों से होकर बहती है। इन क्षेत्रों में बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव देखा जाता है। नेपाल के गिरिजा बैराज और भारत के शारदा बैराज से भी पानी छोड़े जाने से घाघरा का जलस्तर और बढ़ जाता है। सवाल-3: नेपाल किन-किन बांध से पानी छोड़ता है? जवाब: बांधों की क्षमता ज्यादा नहीं होने से नेपाल को पानी छोड़ना पड़ता है। मुख्य रूप से कोसी बैराज, गंडक बैराज, राप्ती बैराज, शारदा बैराज, कुलेखानी बांध, लालबकेया बांध और अन्य कई छोटे बांधों से नेपाल पानी छोड़ता है। 1 जुलाई, 2025 को राप्ती बैराज से 37000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वहीं, 7 जुलाई को शारदा बैराज से 20,585 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सवाल-4: नेपाल में बांध होने के बावजूद क्यों छोड़ा जा रहा इतना पानी? जवाब: एनवायरमेंटलिस्ट डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य बताते हैं- नेपाल के बांध बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए बनाए गए हैं, न कि बड़े पैमाने पर जल भंडारण के लिए। नेपाल में जो कोसी, गंडक, शारदा पर बैराज बने हैं, असल में ये स्टोरेज बांध नहीं हैं। बैराज सिर्फ पानी के बहाव को नियंत्रित करते हैं या दिशा बदलते हैं। इनमें पानी इकट्‌ठा करने की क्षमता बहुत कम या ना के बराबर है। जैसे कि कोसी बैराज की क्षमता सीमित है। यह मुख्य रूप से बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी अधिकतम क्षमता लगभग 9 लाख क्यूसेक है। गंडक बैराज की क्षमता भी कोसी बैराज की तरह सीमित है और मानसून में ज्यादा पानी होने की स्थिति में इसके गेट खोल दिए जाते हैं। सवाल-5: क्या क्षमता के बांध न होना नेपाल की मजबूरी है? जवाब: डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य के अनुसार, नेपाल की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति के कारण बड़े जलाशयों की कमी है। बांधों को टूटने से बचाने के लिए पानी छोड़ना नेपाल की मजबूरी है। अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो बांध टूटने की स्थिति में भारी तबाही होगी। सवाल-6 : नेपाल से छोड़े जाने वाले पानी का रूट क्या है? जवाब: नेपाल के पांच बड़े बांधों से हर साल भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है। यह पानी मुख्य तौर पर तीन बड़े रूटों ( शारदा, राप्ती और घाघरा) से होकर उत्तर प्रदेश में प्रवेश करता है। इन्हीं तीन रूटों से यूपी में सबसे ज्यादा बाढ़ का खतरा रहता है। इसके अलावा चौथा रूट गंडक नदी है, जिससे होकर भी नेपाल का पानी यूपी के गंगा बेसिन से जुड़ता है। चारों रूटों से आने वाला पानी पूर्वी यूपी के कई जिलों को प्रभावित करता है।
सवाल-7: बाढ़ से हर साल कितनी फसल को नुकसान होता है? जवाब: यूपी में करीब 30 नदियां बहती हैं। इनमें से करीब 5 नदियां नेपाल से निकलती हैं। जिनमें से 4 नदियां यूपी में बाढ़ का खतरा लाती हैं। घाघरा नदी, राप्ती, शारदा और गंडक। इससे राज्य का 73.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होता हैं। बाढ़ से सालाना औसतन 26.89 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित होती है। इससे फसलों, घरों को सालाना 432 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान रहता है। सवाल-8: नेपाल के पानी की वजह से यूपी के प्रभावित जिले? जवाब: नेपाल से छोड़े गए पानी के वजह से यूपी के तराई क्षेत्र सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित होते हैं। यह प्रभाव मुख्य रूप से राप्ती, घाघरा, और शारदा जैसी नदियों के कारण होता है। ये नेपाल के बैराजों से पानी छोड़ने के बाद उफान पर आती हैं। सवाल-9: क्या नदियों की सफाई न होना भी बाढ़ की बड़ी वजह? जवाब: हां, नदियों की सफाई न होना भी बाढ़ की बड़ी वजह है। नेपाल की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि पहाड़ों में अचानक बारिश होती है। पानी तेजी से नीचे उतरता है। नदियों के रास्ते में सिल्ट (गाद) भर जाती है। इससे नदियों की गहराई कम हो जाती है। यही वजह है कि पानी आबादी वाले इलाकों में भरने लगता है। चूंकि नदियों के किनारे बहुत घनी आबादी है, इसलिए बाढ़ से ज्यादा नुकसान होता है। सवाल-10: 2024 में यूपी में क्या रही थी बाढ़ की स्थिति? जवाब: ReliefWeb की वेबसाइट पर जारी डाटा के मुताबिक, 2024 में उत्तर प्रदेश में 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इनमें तराई और पूर्वी यूपी के बलरामपुर, श्रावस्ती, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। कुल 1,809 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए थे। नेपाल से राप्ती बैराज और अन्य बैराजों से छोड़ा गया पानी, साथ ही भारी बारिश, बाढ़ का प्रमुख कारण था। ———————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में इस बार होगी अच्छी बारिश, जून में सामान्य से 11% ज्यादा बरसे बादल, जानिए जुलाई में कैसा रहेगा मानसून यूपी में मानसून की एंट्री 18 जून को हो चुकी है। जून में हर साल के मुकाबले इस बार 11% ज्यादा बारिश हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई में भी उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र को छोड़कर प्रदेश के अन्य भागों में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। पढ़िए पूरी खबर..