लखनऊ समेत पूरे यूपी में करीब 50 हजार मरीज अंगदान के इंतजार में हैं। इनमें 90 फीसदी मरीज लिवर और किडनी के हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी महिलाओं की तुलना में पुरुष किडनी डोनर कम हैं। संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ (SGPGI) के आंकड़ों की मानें, तो एक साल में 111 महिलाओं ने किडनी डोनेट की है, जबकि ऐसा करने वाले पुरुष सिर्फ 16 हैं। भारत में किडनी डोनर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से अधिक है। सवाल उठता है, ऐसा क्यों? क्या यह सिर्फ सामाजिक दबाव का नतीजा है। या फिर इसमें मेडिकल और इमोशनल फैक्टर्स भी जुड़े हैं? पुरुषों में किडनी डोनेशन कम क्यों देखा जाता है? पुरुष और महिला डोनर्स में ज्यादा हेल्थ रिस्क किसे? भास्कर एक्सप्लेनर में इन सभी सवालों के जवाब जानेंगे। पहले अगस्त में यूपी के 2 केस पर नजर डालते हैं केस-1: अगस्त, 2025 में चंदौली के इमलिया गांव में रहने वाली नीलम सिंह ने अपने देवर इंदल सिंह को किडनी डोनेट कर उसकी जिंदगी बचाई। गुरुग्राम के अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। दोनों स्वस्थ हैं। केस- 2: अगस्त में ही गाजियाबाद के मोदीनगर में रहने वाले रवींद्र (44) का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। मुश्किल वक्त में उनकी बड़ी बहन आशा किडनी दान करने के लिए आगे आईं। ट्रांसप्लांट सफल रहा। रवींद्र को नया जीवन मिला। सवाल: यूपी में किडनी डोनेट करने वालों का आंकड़ा क्या है? जवाब: SGPGI लखनऊ की ऑफिशियल वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक, यहां किडनी ट्रांसप्लांट प्रोग्राम साल-1989 में शुरू हुआ था। नेफ्रोलॉजी विभाग के अनुसार, अभी तक 3,800 से ज्यादा ट्रांसप्लांट हुए हैं। करीब 400 मरीज वेटिंग लिस्ट में हैं। ऑर्गन डोनेशन डे पर SGPGI के नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. नारायण प्रसाद ने एक कार्यक्रम में बताया था कि ‘एक साल के अंदर 111 महिलाओं ने किडनी डोनेट की। जबकि ऐसा करने वाले पुरुष सिर्फ 16 हैं।’ उधर, मैक्स हॉस्पिटल में एक साल में 50 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके है। 12 मरीज वेटिंग लिस्ट में हैं। सवाल: क्यों किडनी डोनर्स में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है? जवाब: मैक्स हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. आदित्य कुमार शर्मा बताते हैं- पुरुषों की अपेक्षा महिला डोनर ज्यादा हैं। डॉ. आदित्य इसकी वजह भी बताते हैं। उनके मुताबिक, महिलाएं किडनी डोनेट करने में झिझकती नहीं, जबकि पुरुष कम किडनी दान करते हैं। पुरुषों में डायबिटीज, हाई बीपी और अल्कोहल/स्मोकिंग की आदतें ज्यादा होने से अक्सर मेडिकल टेस्ट में डोनर के लिए फिट नहीं पाए जाते। पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा योग्य पाई जाती हैं। महिलाओं की किडनी ज्यादा हेल्दी होती है। क्योंकि, महिलाएं घर पर रहती हैं, ज्यादा हार्ड वर्क नहीं करतीं। वहीं, पुरुष हार्ड वर्क करते हैं। ये तो थी मेडिकल एक्सपर्ट की राय। मीडिया रिपोर्ट के आंकड़े भी बताते हैं कि महिलाओं को जब किडनी डोनेट की बात आती है, तब उनके पति और परिवारवाले पीछे हट जाते हैं। जबकि, 70 फीसदी महिलाएं किडनी डोनेशन में आगे होती हैं। नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में 2022 में प्रकाशित एक लेख पर नजर डालिए। उसके मुताबिक महिलाओं के अधिक जीवनदाता (डोनर) बनने के पीछे कई कारण सामने आते हैं। इनमें आर्थिक दबाव, महिलाओं में आत्म-त्याग की भावना शामिल है। यही वजह है कि अक्सर मां, पत्नी, बेटी या बहन ही अंगदान के लिए आगे आती हैं। सवाल- क्या आर्थिक जिम्मेदारियों से पुरुष डोनेशन में पीछे हटते हैं? जवाब: हां। मैक्स हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिल्ट डॉ. कुलदीप सिंह बताते हैं- परिवारों में पुरुष आर्थिक रीढ़ होते हैं। ऑपरेशन और रिकवरी के दौरान इनकम में कमी का डर उन्हें डोनेशन से रोकता है। किडनी डोनेट से पहले काउंसिलिंग की जाती है। इसमें महिलाएं जल्दी तैयार हो जाती हैं। हालांकि इसके पीछे पुरुषों का आर्थिक जिम्मेदारियों और नौकरी खोने के डर शामिल है। कई बार पारिवारिक दबाव भी महिलाओं को किडनी डोनेट करने के लिए आगे आने पर मजबूर करता है। सवाल: क्या महिलाओं को ज्यादा रिस्क झेलना पड़ता है? जवाब: नहीं। मेडिकल एक्सपर्ट बताते हैं- महिला और पुरुष दोनों डोनर्स के लिए खतरा समान होता है। हालांकि, ये डिपेंड करता है कि उनकी हेल्थ कैसी है? महिलाओं में कुछ रिस्क फैक्टर अलग तरह से सामने आते हैं। सवाल- किडनी ट्रांसप्लांट में रिस्क कब बढ़ जाता है? जवाब- एक्सपर्ट कहते हैं- 45 साल की उम्र पार करने के बाद शरीर किडनी ट्रांसप्लांट को स्वीकारने में ज्यादा दिक्कत देता है। जर्नल ऑफ द अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता दर उम्र और जेंडर दोनों पर निर्भर करती है। ट्रांसप्लांट के बाद महिलाओं में समय के साथ किडनी फेल होने का खतरा अधिक रहता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि 45 साल से अधिक उम्र के मरीजों में यह जोखिम और बढ़ जाता है। इसलिए किडनी ट्रांसप्लांट से पहले मरीज के शरीर का अच्छे तरीके से मेडिकल टेस्ट जरुरी है। सवाल: किडनी ट्रांसप्लांट किन बातों पर डिपेंड करता है? जवाब: किडनी ट्रांसप्लांट का सफल होना कई बातों पर निर्भर करता है। इनमें सबसे अहम है डोनर की किडनी की स्थिति और उसकी वर्किंग कैपेसिटी। इसके अलावा डोनर और रिसीवर की ब्लड रिपोर्ट्स और मैचिंग, ऑपरेशन में लगा समय, मरीज की सर्जरी के समय की स्थिति और ऑपरेशन के बाद देखभाल भी ट्रांसप्लांट के सफल होने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… सपा सांसद बर्क बोले- हर चीज का जवाब बुलडोजर नहीं, क्या मुसलमानों को कभी ये कहते देखा कि मंदिर नहीं, मस्जिद थी ‘आपने कभी मुसलमानों को ये कहते देखा कि वहां मंदिर नहीं, मस्जिद थी? ये आपस में बांटने की राजनीति गलत है। फतेहपुर जिले के मकबरे में पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ हुई। कानून का डर सबको होना चाहिए।’ यह कहना है, यूपी की संभल लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क का। UP में सपा के 4 मुस्लिम सांसद हैं, इनमें एक बर्क भी हैं। 24 नवंबर, 2024 की संभल हिंसा के बाद से सांसद बर्क की लगातार घेराबंदी हो रही है। उन पर हिंसा फैलाने, बिजली चोरी करने, अतिक्रमण करके मकान बनाने सहित कई और भी आरोप हैं। दैनिक भास्कर ने उनसे इन तमाम आरोपों, मंदिर-मस्जिद विवाद, बुलडोजर एक्शन सहित कई मुद्दों पर बात की। पढ़िए पूरी खबर…