यूपी के बहराइच में आदमखोर भेड़ियों के आतंक से 50 से ज्यादा गांव के लोग खौफ में जी रहे हैं। भेड़िए पहले बच्चों को ही उठा ले जा रहे थे, अब बड़ों को भी मार डाल रहे। भेड़िए 2 महीने में 4 बच्चों को उठा ले गए, जबकि पति-पत्नी को मार डाला है। अब तक 30 से ज्यादा हमले किए हैं, जिसमें 20 से ज्यादा लोग घायल हैं। इन हमलों के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने भेड़िए की प्रजातियों में शामिल ‘कैनिस ल्यूपस पैलिप्स’ प्रजाति को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। भेड़िए की यही प्रजाति बहराइच जिले में लोगों की जान ले रही है। भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़िए भेड़िए की कौन-सी प्रजाति भारत में पाई जाती है? भेड़िए की उत्पत्ति कैसे हुई? भेड़िए यूपी में इतने आदमखोर क्यों हो रहे? क्या वे बदला लेते हैं? कैसे इन्हें रोका जा सकता है? क्या हमेशा के लिए भेड़िए खत्म हो जाएंगे? सबसे पहले ये दो केस पढ़िए
केस 1- 11 अक्टूबर, 2025 को बहराइच जिले के कैसरगंज तहसील में भेड़िए ने एक महिला और 4 बच्चों समेत पांच लोगों पर हमला कर दिया। इन हमलों में एक मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया। सुबह से लेकर शाम तक मंझारा तौकली इलाके के 5 अलग-अलग जगहों में ये हमले हुए। केस 2- 8 अक्टूबर, 2025 को बहराइच में भेड़िया 6 साल की बच्ची को घर के अंदर से खींच ले गया। बच्ची खेल रही थी, दरवाजा खुला था। तभी भेड़िया दबे पांव अंदर आया और पेट से जकड़ कर उसे लेकर भागने लगा। ग्रामीणों ने भी लाठी-डंडे लेकर उसे दौड़ाया। भीड़ का शोर सुनकर वह बच्ची को घर से करीब 400 मीटर दूर छोड़कर भाग गया। परिजन बच्ची के पास पहुंचे, तो वह गंभीर घायल थी। सवाल: भारत में भेड़िए की कौन सी प्रजाति पाई जाती है?
जवाब: भारत में पाई जाने वाली भेड़िए की प्रजाति का नाम कैनिस ल्यूपस पैलिप्स है। यह ग्रे भेड़िए की ही एक प्रजाति है। भारत में पाए जाने वाले भेड़िए का रंग भूरा होता है। सवाल: क्यों हमला कर रहे भेड़िए?
जवाब: लखनऊ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर अमिता कन्नौजिया के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान में वर्तमान में लगभग 3003 भारतीय भेड़िए बचे हैं। इस वजह से इन्हें संवेदनशील श्रेणी में रखा जा सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इनके अस्तित्व पर खतरा इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि जंगलों में इनके रहने की जगह कम होती जा रही है। इंसानों इन्हें मार दे रहे हैं। भारतीय भेड़िया अपनी प्राचीनता और इतिहास के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पृथ्वी की सबसे पुरानी प्रजातियों में से एक है। उपमहाद्वीप में इंसानों के आने से पहले भेड़िए पहले से ही मौजूद थे। इसलिए, इनके विलुप्त होने का मतलब होगा कि पूरी ऐतिहासिक विरासत ही समाप्त हो जाएगी। सवाल: क्या भेड़िए बदला लेते हैं?
जवाब: रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर अमित श्रीवास्तव बताते हैं- भेड़िए बेहद बुद्धिमान और संवेदनशील जानवर माने जाते हैं। कहा जाता है कि उनमें बदले की प्रवृत्ति भी होती है। यानी अगर उनके किसी साथी को मारा या पकड़ लिया जाए, तो वे आक्रामक होकर प्रतिक्रिया देते हैं। बदला लेने की कोशिश करते हैं। पहले जहां भेड़िए नहीं पाएं जाते, वहां भी मिलने लगे हैं। पहले तराई इलाकों में भेड़िए नहीं मिलते थे। लेकिन, अब तराई इलाकों में ये वापस आने लगे हैं। आमतौर पर भेड़ियों की औसत आयु 10 से 12 साल होती है। जंगलों में रहने वाले भेड़िए लगभग 10 साल तक जीवित रहते हैं। जबकि चिड़ियाघरों या सुरक्षित वातावरण में उनकी उम्र 12 से 15 साल तक पहुंच सकती है। सवाल: भेड़िए झुंड में ही क्यों चलते हैं?
जवाब: लखनऊ यूनिवर्सिटी की प्रो. अमिता कन्नौजिया बताती हैं- भेड़ियों की सामाजिक संरचना काफी मजबूत होती है। वह अपने झुंड से कभी भी अलग होना नहीं चाहता। झुंड के सबसे मजबूत और बड़े भेड़िए को झुंड का सरदार चुना जाता है। सरदार अपने समूह का मार्गदर्शन करता है और अपने झुंड को सुरक्षा देने की भी गारंटी देता है। यही वजह है कि भेड़ियों को 7 से 30 की संख्या में झुंड में चलते देखा गया है। सवाल: किस आधार पर इन भेड़ियों की हुई पहचान?
जवाब: भारतीय शोधकर्ताओं ने रिसर्च में भारत और पाकिस्तान के करीब 10 हजार स्थानों पर भेड़ियों की मौजूदगी का सर्वे किया, जहां पिछले 2 दशकों में इनकी आबादी दर्ज की गई थी। पता चला कि फिलहाल जंगलों में 2877 से 3310 वयस्क भारतीय भेड़िए ही बचे हैं। रिसर्च में महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान को इन भेड़ियों के प्रमुख आवास के रूप में पहचाना गया। जहां भारत के करीब आधे भेड़िए पाए जाते हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोधकर्ता डॉ. खान के अनुसार, आवास का नुकसान, इंसानों के साथ संघर्ष, बीमारियां और जंगली कुत्तों के साथ संकरण (हाइब्रिडाइजेशन) इस प्रजाति के अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे हैं। उन्होंने बताया कि कुत्ता-भेड़िया संकरण से आनुवंशिक रूप से शुद्ध भेड़ियों की संख्या में निरंतर गिरावट देखी जा रही है। यह भारतीय भेड़िया के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। बता दें कि एक तरफ भेड़ियों की कम होती जनसंख्या चिंता का विषय बनी है। वहीं, दूसरी तरफ कई जगहों पर भेड़ियों के हमले की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके चलते कई लोगों की जान तक चली गई है। सवाल : क्या भेड़िए इतने बड़े पैमाने पर पहली बार आदमखोर हुए हैं?
जवाब: ब्रिटिश राज के अधिकारी सर्जन जनरल जोसेफ फेयर के रखे रिकॉर्ड से पता चलता है कि भेड़ियों और इंसानों के टकराव की कहानी काफी पुरानी है। 19वीं सदी में कई साल तो ऐसा भी हुआ, जब बाघों से ज्यादा भेड़ियों ने इंसानों का शिकार किया। साल 1875 में बाघों ने 828 लोगों को और भेड़ियों ने 1,018 लोगों को मारा था। इतना ही नहीं, 1970 के दशक में ऐसे दर्जनों केस सामने आए, जिनमें भेड़ियों ने गर्भवती महिलाओं का पीछा किया। उनमें से कुछ को अपना शिकार भी बनाया। 1871 और 1916 के बीच सरकार ने भेड़ियों को मारने के लिए ऑपरेशन शुरू किया। भेड़िए के बच्चे को मारने के लिए 12 आना और नर भेड़िए को मारने के लिए 8 आना इनाम रखा गया। यूपी के जौनपुर में वयस्क भेड़िए को मारने के लिए 5 रुपए तक इनाम रखा गया था। परिणाम ये हुआ कि इन 4 दशक में देशभर में 1 लाख से ज्यादा भेड़िए मारे गए थे। सवाल: भेड़िए को काबू करने का क्या तरीका है, UP में भेड़िए काबू में क्यों नहीं आ रहे?
जवाब: रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर अमित श्रीवास्तव बताते हैं- भेड़ियों का झुंड अगर आदमखोर बन जाता है, तो इसे काबू करने का एक ही तरीका है। इसके सरदार यानी अल्फा भेड़िए को पकड़ लिया जाए। सरदार के पकड़े जाने पर बाकी भेड़िए छिप जाते हैं या इलाका छोड़कर दूर भाग जाते हैं। इन भेड़ियों को आदत पड़ गई है कि ये आसानी से इंसानी बस्ती में शिकार करते है। इंसानों का शिकार करना इनके लिए आसान है। अल्फा भेड़िया इनका गुरु होता है। वही निर्णय लेता है, ये उसी के हिसाब से चलते हैं। उनकी रणनीति बहुत अच्छी होती है। ये रणनीति से अटैक करते हैं। सवाल: क्या भेड़िए और कुत्ते एक प्रजाति के जानवर हैं?
जवाब: हां, भेड़िए और कुत्तों के जेनेटिक रिसर्च से पता चलता है कि दोनों के वंशज एक ही हैं। लेकिन दोनों की शारीरिक बनावट, शिकार और व्यवहार एकदम अलग-अलग हैं। ……………… ये खबर भी पढ़ें… बागपत में चिताओं से अस्थियां गायब हो रहीं, 8 महीने से गांववाले परेशान; क्या दिवाली पर तंत्र–मंत्र के लिए तांत्रिक चुरा रहे यूपी में बागपत के हिम्मतपुर सूजती गांव में लोग डरे हुए हैं। श्मशान घाट से अस्थियां गायब हो रही हैं। कुछ दिन पहले एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार हुआ। परिवार जब तीसरे दिन अस्थियां लेने गया, तो चिता के पास दीपक जल रहा था, उपले सुलग रहे थे और तंत्र-मंत्र का सामान बिखरा हुआ था। अस्थियां गायब थीं। पिछले आठ महीनों से श्मशान में ऐसी ही घटनाएं हो रही हैं। गांव वाले बताते हैं- पहले लगता था किसी जानवर का काम होगा, लेकिन हर बार चिता के पास पूजा-सामग्री, अगरबत्ती, नींबू और राख मिलती है। प्रशासन का कहना है कि ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, हमारी टीम जांच कर रही है। पढ़िए पूरी खबर…
केस 1- 11 अक्टूबर, 2025 को बहराइच जिले के कैसरगंज तहसील में भेड़िए ने एक महिला और 4 बच्चों समेत पांच लोगों पर हमला कर दिया। इन हमलों में एक मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया। सुबह से लेकर शाम तक मंझारा तौकली इलाके के 5 अलग-अलग जगहों में ये हमले हुए। केस 2- 8 अक्टूबर, 2025 को बहराइच में भेड़िया 6 साल की बच्ची को घर के अंदर से खींच ले गया। बच्ची खेल रही थी, दरवाजा खुला था। तभी भेड़िया दबे पांव अंदर आया और पेट से जकड़ कर उसे लेकर भागने लगा। ग्रामीणों ने भी लाठी-डंडे लेकर उसे दौड़ाया। भीड़ का शोर सुनकर वह बच्ची को घर से करीब 400 मीटर दूर छोड़कर भाग गया। परिजन बच्ची के पास पहुंचे, तो वह गंभीर घायल थी। सवाल: भारत में भेड़िए की कौन सी प्रजाति पाई जाती है?
जवाब: भारत में पाई जाने वाली भेड़िए की प्रजाति का नाम कैनिस ल्यूपस पैलिप्स है। यह ग्रे भेड़िए की ही एक प्रजाति है। भारत में पाए जाने वाले भेड़िए का रंग भूरा होता है। सवाल: क्यों हमला कर रहे भेड़िए?
जवाब: लखनऊ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर अमिता कन्नौजिया के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान में वर्तमान में लगभग 3003 भारतीय भेड़िए बचे हैं। इस वजह से इन्हें संवेदनशील श्रेणी में रखा जा सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इनके अस्तित्व पर खतरा इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि जंगलों में इनके रहने की जगह कम होती जा रही है। इंसानों इन्हें मार दे रहे हैं। भारतीय भेड़िया अपनी प्राचीनता और इतिहास के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पृथ्वी की सबसे पुरानी प्रजातियों में से एक है। उपमहाद्वीप में इंसानों के आने से पहले भेड़िए पहले से ही मौजूद थे। इसलिए, इनके विलुप्त होने का मतलब होगा कि पूरी ऐतिहासिक विरासत ही समाप्त हो जाएगी। सवाल: क्या भेड़िए बदला लेते हैं?
जवाब: रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर अमित श्रीवास्तव बताते हैं- भेड़िए बेहद बुद्धिमान और संवेदनशील जानवर माने जाते हैं। कहा जाता है कि उनमें बदले की प्रवृत्ति भी होती है। यानी अगर उनके किसी साथी को मारा या पकड़ लिया जाए, तो वे आक्रामक होकर प्रतिक्रिया देते हैं। बदला लेने की कोशिश करते हैं। पहले जहां भेड़िए नहीं पाएं जाते, वहां भी मिलने लगे हैं। पहले तराई इलाकों में भेड़िए नहीं मिलते थे। लेकिन, अब तराई इलाकों में ये वापस आने लगे हैं। आमतौर पर भेड़ियों की औसत आयु 10 से 12 साल होती है। जंगलों में रहने वाले भेड़िए लगभग 10 साल तक जीवित रहते हैं। जबकि चिड़ियाघरों या सुरक्षित वातावरण में उनकी उम्र 12 से 15 साल तक पहुंच सकती है। सवाल: भेड़िए झुंड में ही क्यों चलते हैं?
जवाब: लखनऊ यूनिवर्सिटी की प्रो. अमिता कन्नौजिया बताती हैं- भेड़ियों की सामाजिक संरचना काफी मजबूत होती है। वह अपने झुंड से कभी भी अलग होना नहीं चाहता। झुंड के सबसे मजबूत और बड़े भेड़िए को झुंड का सरदार चुना जाता है। सरदार अपने समूह का मार्गदर्शन करता है और अपने झुंड को सुरक्षा देने की भी गारंटी देता है। यही वजह है कि भेड़ियों को 7 से 30 की संख्या में झुंड में चलते देखा गया है। सवाल: किस आधार पर इन भेड़ियों की हुई पहचान?
जवाब: भारतीय शोधकर्ताओं ने रिसर्च में भारत और पाकिस्तान के करीब 10 हजार स्थानों पर भेड़ियों की मौजूदगी का सर्वे किया, जहां पिछले 2 दशकों में इनकी आबादी दर्ज की गई थी। पता चला कि फिलहाल जंगलों में 2877 से 3310 वयस्क भारतीय भेड़िए ही बचे हैं। रिसर्च में महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान को इन भेड़ियों के प्रमुख आवास के रूप में पहचाना गया। जहां भारत के करीब आधे भेड़िए पाए जाते हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोधकर्ता डॉ. खान के अनुसार, आवास का नुकसान, इंसानों के साथ संघर्ष, बीमारियां और जंगली कुत्तों के साथ संकरण (हाइब्रिडाइजेशन) इस प्रजाति के अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे हैं। उन्होंने बताया कि कुत्ता-भेड़िया संकरण से आनुवंशिक रूप से शुद्ध भेड़ियों की संख्या में निरंतर गिरावट देखी जा रही है। यह भारतीय भेड़िया के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। बता दें कि एक तरफ भेड़ियों की कम होती जनसंख्या चिंता का विषय बनी है। वहीं, दूसरी तरफ कई जगहों पर भेड़ियों के हमले की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके चलते कई लोगों की जान तक चली गई है। सवाल : क्या भेड़िए इतने बड़े पैमाने पर पहली बार आदमखोर हुए हैं?
जवाब: ब्रिटिश राज के अधिकारी सर्जन जनरल जोसेफ फेयर के रखे रिकॉर्ड से पता चलता है कि भेड़ियों और इंसानों के टकराव की कहानी काफी पुरानी है। 19वीं सदी में कई साल तो ऐसा भी हुआ, जब बाघों से ज्यादा भेड़ियों ने इंसानों का शिकार किया। साल 1875 में बाघों ने 828 लोगों को और भेड़ियों ने 1,018 लोगों को मारा था। इतना ही नहीं, 1970 के दशक में ऐसे दर्जनों केस सामने आए, जिनमें भेड़ियों ने गर्भवती महिलाओं का पीछा किया। उनमें से कुछ को अपना शिकार भी बनाया। 1871 और 1916 के बीच सरकार ने भेड़ियों को मारने के लिए ऑपरेशन शुरू किया। भेड़िए के बच्चे को मारने के लिए 12 आना और नर भेड़िए को मारने के लिए 8 आना इनाम रखा गया। यूपी के जौनपुर में वयस्क भेड़िए को मारने के लिए 5 रुपए तक इनाम रखा गया था। परिणाम ये हुआ कि इन 4 दशक में देशभर में 1 लाख से ज्यादा भेड़िए मारे गए थे। सवाल: भेड़िए को काबू करने का क्या तरीका है, UP में भेड़िए काबू में क्यों नहीं आ रहे?
जवाब: रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर अमित श्रीवास्तव बताते हैं- भेड़ियों का झुंड अगर आदमखोर बन जाता है, तो इसे काबू करने का एक ही तरीका है। इसके सरदार यानी अल्फा भेड़िए को पकड़ लिया जाए। सरदार के पकड़े जाने पर बाकी भेड़िए छिप जाते हैं या इलाका छोड़कर दूर भाग जाते हैं। इन भेड़ियों को आदत पड़ गई है कि ये आसानी से इंसानी बस्ती में शिकार करते है। इंसानों का शिकार करना इनके लिए आसान है। अल्फा भेड़िया इनका गुरु होता है। वही निर्णय लेता है, ये उसी के हिसाब से चलते हैं। उनकी रणनीति बहुत अच्छी होती है। ये रणनीति से अटैक करते हैं। सवाल: क्या भेड़िए और कुत्ते एक प्रजाति के जानवर हैं?
जवाब: हां, भेड़िए और कुत्तों के जेनेटिक रिसर्च से पता चलता है कि दोनों के वंशज एक ही हैं। लेकिन दोनों की शारीरिक बनावट, शिकार और व्यवहार एकदम अलग-अलग हैं। ……………… ये खबर भी पढ़ें… बागपत में चिताओं से अस्थियां गायब हो रहीं, 8 महीने से गांववाले परेशान; क्या दिवाली पर तंत्र–मंत्र के लिए तांत्रिक चुरा रहे यूपी में बागपत के हिम्मतपुर सूजती गांव में लोग डरे हुए हैं। श्मशान घाट से अस्थियां गायब हो रही हैं। कुछ दिन पहले एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार हुआ। परिवार जब तीसरे दिन अस्थियां लेने गया, तो चिता के पास दीपक जल रहा था, उपले सुलग रहे थे और तंत्र-मंत्र का सामान बिखरा हुआ था। अस्थियां गायब थीं। पिछले आठ महीनों से श्मशान में ऐसी ही घटनाएं हो रही हैं। गांव वाले बताते हैं- पहले लगता था किसी जानवर का काम होगा, लेकिन हर बार चिता के पास पूजा-सामग्री, अगरबत्ती, नींबू और राख मिलती है। प्रशासन का कहना है कि ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, हमारी टीम जांच कर रही है। पढ़िए पूरी खबर…