यूपी में धुंध और भीषण गर्मी पड़ रही है। पारा 39°C तक पहुंच गया है। गोरखपुर समेत 10 जिलों में शुक्रवार को चौथे दिन भी धुंध दिखाई दी। कुछ जगहों पर विजिबिलिटी 50 से 100 मीटर तक सिमट गई। इस बीच, उत्तराखंड में बर्फबारी शुरू हो गई है। इसका सीधा असर यूपी में भी देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में ठंडी हवाएं चलेंगी। पारे में गिरावट आएगी। मौसम विभाग ने बताया- पहाड़ों पर बर्फबारी के अलावा एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इससे प्रदेश में 15 मार्च से बारिश और आंधी का सिलसिला शुरू होगा। काशी-कानपुर समेत 20 जिलों में रुक-रुक कर बारिश होगी। यह सीजन की पहली बारिश होगी। इससे पिछले कई दिनों से सामान्य से ऊपर चल रहे तापमान में गिरावट आएगी। ठंडी हवाएं हल्की ठंड का एहसास कराएंगी। पिछले 24 घंटे की बात करें तो बांदा सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.8°C दर्ज किया गया। इसके अलावा झांसी, आगरा, उरई और हमीरपुर में पारा 37°C के पार पहुंच गया। काशी में पारे में उछाल आया। इसके बाद विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से बचाने के लिए जर्मन हैंगर लगवाए हैं। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने कहा – 15 मार्च से प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में बारिश की संभावना है। इस दौरान 30-40 किमी/घंटे की स्पीड से हवाएं चलेंगी। मौसम में अचानक बदलाव से पारे में गिरावट होगी। रात के वक्त हल्की ठंड का एहसास होगा। तस्वीरें देखिए- काशी-गोरखपुर समेत 20 जिलों में बारिश का अलर्ट अतुल कुमार सिंह ने बताया- बारिश का मुख्य असर तराई इलाकों और पूर्वांचल में देखने को मिल सकता है। तराई क्षेत्र लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और पीलीभीत और पूर्वांचल क्षेत्र के गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, मऊ, बलिया, वाराणसी, कानपुर, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर और आजमगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। क्या धुंध से फसलों को होगा नुकसान? काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं को नहीं सताएगी धूप श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए जर्मन हैंगर लगवाए हैं। इस वजह से दर्शन के लिए लाइन में लगे भक्तों को धूप से राहत मिलेगी। दरअसल, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पत्थरों से बनाया गया है। तेज धूप पत्थरों पर पड़ने के बाद पत्थरों से तपिश ज्यादा निकलती है। श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी को लेकर मंदिर प्रशासन ने यह फैसला लिया है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया- रोज हजारों और लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में लंबी-लंबी कतार लगती है। कई बार श्रद्धालु बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। इसी के मद्देनजर मंदिर में जर्मन हैंगर लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को धूप न लगे। उन्हें गर्मी से राहत मिल सके। तेज धूप में बाहर निकलने से बचें डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। किसानों के लिए मौसम मिलाजुला असर डाल सकता है। हल्की बारिश जहां फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं तेज गर्मी और हवाओं से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। अगले 4 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम… अचानक धुंध की एक और वजह? बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया- बिहार से मराठवाड़ा के बीच में लो-प्रेशर बना हुआ है। इस वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में सुबह के वक्त कोहरे जैसे हालात बन रहे हैं। हवा सतह से नीचे चल रही है। इसलिए तापमान में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तापमान में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया- आगामी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 14 मार्च से प्रदेश के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। 15 मार्च से प्रदेश के तराई इलाकों के साथ-साथ पूर्वांचल के कुछ भागों में इस सीजन में पहली बार हल्की बारिश होगी। यह दौरान कुछ दिन चल चलेगा। बाद में तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी। मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी? स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसका असर यह है कि अब तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। गर्म दिनों की संख्या भी बढ़ रही है। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। कुछ जगहों पर तापमान 48 डिग्री से ऊपर तक दर्ज किया गया है। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव IMD के अनुमान के अनुसार, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव? मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। ——————–
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