यूपी में फरवरी तक होगा मंत्रिमंडल विस्तार:भूपेंद्र चौधरी समेत 3-4 नए मंत्री बनाए जाएंगे, जानिए रेस में कौन?

यूपी में भाजपा अध्यक्ष बनाने के बाद अब योगी सरकार 2.0 के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार की बारी है। सूत्रों के मुताबिक, फरवरी- 2026 तक मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। नि‌‌वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह, रामपुर के विधायक आकाश सक्सेना समेत कई नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। दरअसल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चयन और मंत्रिमंडल विस्तार का बीते 11 महीने से इंतजार किया जा रहा था। आखिरकार 13 दिसंबर को यूपी भाजपा को महराजगंज के सांसद और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी के रूप में नया अध्यक्ष मिल गया। राजनीति के जानकार मानते हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी भाजपा की पूरी तैयारी है। इसको लेकर भी दिल्ली में एक-दो बार मंथन भी हो चुका है। अब नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी अपने हिसाब से एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी के नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन और आरएसएस के साथ मंथन करेंगे। लोकसभा के शीतकालीन सत्र के बाद इसकी कवायद शुरू हो सकती है। भूपेंद्र चौधरी बनाए जाएंगे मंत्री
सूत्रों के मुताबिक, योगी मंत्रिमंडल में जाट समाज से फिलहाल एक भी कैबिनेट मंत्री नहीं है। भूपेंद्र चौधरी को पंचायतीराज मंत्री पद से इस्तीफा दिलाकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी। अब चौधरी पूर्व अध्यक्ष हो गए हैं। लिहाजा उनके समायोजन के लिए मंत्रिमंडल विस्तार होना है। भूपेंद्र चौधरी के साथ मांट के विधायक राजेश चौधरी भी मंत्री पद की दौड़ में हैं। सूत्रों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के भाजपा प्रभारी एवं एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह भी मंत्रिपद की दौड़ में हैं। सीएम योगी और पार्टी के राष्ट्रीय सह-महामंत्री संगठन शिवप्रकाश के करीबी महेंद्र सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाकर एक बार फिर शक्तिशाली विभाग की कमान सौंपी जा सकती है। रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने विधानसभा चुनाव में सपा नेता आजम खान को हराया था। रामपुर में सपा का गढ़ ढहाने में आकाश की बड़ी भूमिका रही। बीते दिनों दिल्ली में उनकी बेटी के शादी समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी ने शिरकत की थी। सूत्रों के मुताबिक, योगी मंत्रिमंडल में वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण सक्सेना की जगह आकाश सक्सेना ले सकते हैं। उधर, हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रभारी एवं पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा, पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण सिंह, विधायक ठाकुर रामवीर सिंह, सरोजनी नगर विधायक राजेश्वर सिंह भी मंत्री पद की दौड़ में हैं। पंकज चौधरी केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देंगे
भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष पंकज चौधरी अब केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा देंगे। भाजपा में एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत है। चौधरी को भाजपा का यूपी अध्यक्ष बनाया गया है। लिहाजा, उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। सूत्रों के मुताबिक, चौधरी पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से मुलाकात के बाद इस्तीफा दे सकते हैं। केशव का कद बढ़ेगा
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पंकज चौधरी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने से यूपी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कद बढ़ेगा। पंकज चौधरी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य दोनों ही केंद्रीय नेतृत्व के करीबी हैं। दोनों पिछड़ी जाति से होने के साथ ही दोनों का एकजुट रहना ही उनके लिए फायदेमंद रहेगा। पंकज चौधरी को संगठन चलाने की नई जिम्मेदारी मिली है। लिहाजा उन्हें केशव के अनुभव का फायदा मिलेगा। पार्टी की कोर कमेटी में भी अब पंकज और केशव का पलड़ा भारी होने की संभावना है। पंकज के अध्यक्ष बनने का असर क्या?… केंद्र और संघ का दखल बढ़ेगा
भाजपा में अब केंद्र और आरएसएस का दखल पहले से ज्यादा बढ़ेगा। ऐसा माना जा रहा है कि पंकज चौधरी कोर कमेटी के हर निर्णय को लागू करने से पहले पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और आरएसएस की हरी झंडी जरूर लेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब सरकार और संगठन के तालमेल पर रहेगी। पंकज चौधरी ने साफ कर दिया है कि उनके लिए कार्यकर्ता सर्वोपरि हैं। कार्यकर्ता के लिए वह लड़ेंगे भी, कार्यकर्ताओं की बात सरकार तक पहुंचाएंगे भी। वहीं सीएम योगी ने भी एसआईआर के जरिए संदेश दे दिया है कि फील्ड में कार्यकर्ताओं ने अच्छा काम नहीं किया। उन्होंने 2027 में जीत के लिए भाजपा का बूथ मजबूत करने की भी आवश्यकता जताई है। हालांकि, योगी और पंकज चौधरी दोनों सकारात्मक राजनीति करते हैं। बीते 8 सालों में सीएम योगी ने संगठन के कामकाज में दखल नहीं दिया। संगठन की ओर से सरकार को जो भी कहा गया है, वह हरसंभव काम सरकार ने किया। वहीं, महेंद्रनाथ पांडेय से लेकर भूपेंद्र चौधरी तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्षों ने भी सरकार के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया। हालांकि सीएम योगी और पंकज चौधरी ने पहले ही दिन साफ कर दिया कि सरकार और संगठन कंधे से कंधा मिलाकर एक साथ चलकर केंद्रीय नेतृत्व की अपेक्षाओं को पूरा करेंगे। राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू होगा
पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू होगा। अल्पसंख्यक आयोग सहित अन्य आयोगों और बोर्डों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां होगी। मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति भी अभियान आगे बढ़ेगा। अब जानिए चुनौती क्या है?… पंचायत चुनाव पहली परीक्षा
भाजपा के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की पहली राजनीतिक परीक्षा पंचायत चुनाव हैं। यूं तो भाजपा बीते 6 महीने से पंचायत चुनाव की तैयारी कर रही है। लेकिन, अब पंकज चौधरी खुद चुनाव की कमान संभालेंगे। पंकज को पूर्वांचल की राजनीति की गहरी समझ है। इसका फायदा भाजपा को पंचायत चुनाव में मिल सकता है। उन्होंने अपने पहले अध्यक्षीय भाषण में साफ कर दिया है कि ना जातिवाद चलेगा न परिवारवाद। ऐसे में पंचायत चुनाव में 2022 की तर्ज पर किसी एक जाति विशेष का प्रभाव नहीं रहेगा। केंद्र में भी मंत्रिमंडल विस्तार होगा
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, 2026 में असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होना है। वहीं, 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव है। इन राज्यों में जातीय समीकरण सेट करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। यूपी से पिछड़े और दलित वर्ग के कुछ सांसदों को मोदी सरकार में जगह मिल सकती है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी BJP अध्यक्ष का 2027 के लिए नया फॉर्मूला, योगी के पैर छुए, कहा-लड़ूंगा, अड़ूंगा यूपी भाजपा की राजनीति अब 4K और 4S के बीच होगी। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी रविवार को करीब 17 मिनट बोले। पंकज ने अपने पहले अध्यक्षीय भाषण में अपना राजनीतिक एजेंडा सरकार, संघ और संगठन के बीच रखा। पढ़ें पूरी खबर