यूपी में फ्लोराइड के पानी से बूढ़े दिखने लगे युवा:करोड़ों खर्च पर काम अधूरा, कुएं-हैंडपंप का गंदा पानी पी रहे

राजू की उम्र तो 35 साल है, लेकिन दिखते ऐसे हैं जैसे बूढ़े हो गए हों। 5 साल पहले तक ये ऐसे नहीं थे। लेकिन अब शरीर में इतनी ताकत नहीं बची कि अपने बूते चल सकें। इनके पिता भी ऐसे ही कमजोर और बीमार हैं। वे चारपाई पर पड़े हैं। इन दोनों की बीमारी की वजह है- फ्लोराइड मिला हुआ गंदा पानी पीना। ये दुर्दशा केवल एक गांव की नहीं, यूपी के सोनभद्र जिले के 250 से ज्यादा गांव की है। इन गांवों के लोग फ्लोराइड, आर्सेनिक और हैवी मेटल वाला पानी पीने को मजबूर हैं। 5 साल पहले इन गांवों में जल जीवन मिशन का काम शुरू हुआ, तो लोग खुश थे। उम्मीद थी कि गंदे पानी से छुटकारा मिलेगा, लेकिन उम्मीदों पर पानी फिर गया। अफसरों ने गांव में आधी-अधूरी पाइप लाइन डालकर और टोटियां लगाकर काम 100% बता दिया। नतीजा- हर घर पानी नहीं आया। सरकारी रिकॉर्ड में ये गांव 100% पानी पहुंचाने वाले बताए हैं। लेकिन, हकीकत में लोग कुएं-हैंडपंप से निकलने वाला फ्लोराइड वाला पानी पीकर अपाहिज हो रहे। आखिर यहां साफ पानी क्यों नहीं मिल रहा? दैनिक भास्कर की टीम इस बात की इन्वेस्टिगेशन के लिए सोनभद्र से 80 किमी दूर म्योरपुर ब्लॉक के वनवासी आश्रम पहुंची। यहां हमारी मुलाकात सोशल एक्टिविस्ट जगत नारायण विश्वकर्मा से हुई। जगत फ्लोराइड युक्त पानी पीने के लिए मजबूर लोगों के पक्ष में काम कर रहे हैं। दूषित पानी पीने की वजह से उनके भी पैर टेढ़े और दांत खराब हो चुके हैं। अब सवाल है कि साफ पानी के लिए शासन के लगाए वाटर फिल्टर प्लांट से भी इस समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ? इसके लिए हमने दो तरह से इन्वेस्टिगेशन किया- 1- क्या फ्लोराइड से प्रभावित गांव में जल जीवन मिशन का फायदा मिल रहा है? 2- इन गांवों में जो पानी आ रहा है, वह साफ है या नहीं? पहले समझते हैं ज्यादा फ्लोराइड से क्या नुकसान है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, पीने के पानी में फ्लोराइड की सामान्य मात्रा 1.5 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लेकिन, सोनभद्र में 12 से 14 पीपीएम है। इसका खुलासा कई रिपोर्ट्स में हुआ है। BHU के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर कृपा राम बताते हैं- हमारे शरीर में फ्लोराइड होना बहुत जरूरी है। अगर फ्लोराइड नहीं होता, तो हमारी हड्डियां उतनी मजबूत नहीं होंगी। लेकिन फ्लोराइड तय लिमिट से ज्यादा होगा तो वह हड्डियों को कमजोर कर देगा। आप सोनभद्र की साइड में आएंगे तो फ्लोराइड की समस्या है, लेकिन ये समस्या ग्राउंड वाटर से रिलेटेड है। अब पढ़िए, फ्लोराइड का पानी पीने वाले गांवों का क्या हाल है? गांव के कई परिवारों के ज्यादातर लोग अपंग हो गए
हम म्योरपुर ब्लॉक के गड़िया गांव पहुंचे। ये गांव जंगलों और पहाड़ों के बीच बसा है। गांव में 60 साल की शीला घर के सामने पेड़ के नीचे बैठी थीं। शीला की कमर झुक चुकी है। बताती हैं कि परिवार में सभी अपंग हो गए। फ्लोराइड वाले पानी से ऐसा हुआ। मेरी 2 बेटियां और 2 बेटे हैं। उनकी भी हड्डियां कमजोर हो गईं। शीला के घर में छोटी बेटी संतोषी मिली। संतोषी घर में झाडू लगा रही थी। बताती है कि पानी की वजह से दांत खराब हो चुके हैं। हड्डियों में दर्द रहता है। शीला कहती हैं कि साफ पानी आए, तो कुछ राहत मिले। 18 साल की रीना अविकसित रह गईं, हाइट केवल साढ़े 4 फीट गांव में हमारी मुलाकात रीना से हुई। नंगे पैर आ रही रीना को देखकर लगा कि 8 साल की बच्ची आ रही है। रीना से बातचीत में पता चला कि वह 18 साल की है। रीना कहती हैं कि हैंडपंप का पानी पीने को मिलता है। गांव में बहुत से लोग इस वजह से बीमार हैं। उसकी भी हाइट नहीं बढ़ सकी। गांव में जल जीवन के पाइप ही नहीं पड़े, पानी कैसे आएगा?
प्रधान प्रेमचंद्र यादव ने बताया- गांव के पानी में फ्लोराइड की मात्रा बहुत ज्यादा है। इसकी वजह से गांव में 40 साल की उम्र में ही लोग बूढ़े जैसे दिखने लगे हैं। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। जल जीवन मिशन भी गांव में आया तो सड़क के किनारे कनेक्शन दे दिए। पूरे गांव में टोटी तो लगा दी, लेकिन पानी नहीं आ पाया। वह भी इसलिए कि आधे से ज्यादा गांव में पाइप ही नहीं डाला। मेरे गांव में हर घर में आपको बीमार मिलेंगे। जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर गड़िया गांव के आंकड़ों से पता चला कि यहां 100% घरों में पानी आ रहा। ब्लॉक प्रमुख बोले- पानी नहीं आ रहा
म्योरपुर ब्लॉक प्रमुख मान सिंह गौड़ से हमारी बातचीत हुई। मान सिंह गौड़ ने बताया कि प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी। लेकिन, उसका फायदा क्षेत्र में नहीं दिख रहा। लोग लंगड़े-लूले हो रहे हैं। उन्हें साफ पानी नहीं मिल रहा। गांव में पाइप ही नहीं पहुंचा, मिशन ने काम पूरा बता दिया इसके बाद हम कुसमहा गांव पहुंचे। यह गांव पथरीले पहाड़ों के बीच बसा है। यहां हमारी मुलाकात युवाओं से हुई। जब हमने उनसे गांव में जल जीवन मिशन के बारे में बात की, तो सामने सुशील कुमार गौतम आए। वह अपने दरवाजे पर ले गए। बताया कि हमारे दरवाजे पर टोटी सालभर से लगी है। लेकिन, न तो आज तक पानी आया है और न ही अभी हम लोगों को पानी आने की उम्मीद है। सुशील कहते हैं- हम लोग फ्लोराइड वाला पानी ही पीते हैं। गांव में 500 से ज्यादा लोग फ्लोराइड वाला पानी पीने से बीमार हैं। यहां पानी की बहुत समस्या है। हिंडाल्को कंपनी से टैंकर आता है, लेकिन उसका अपना स्पॉट है। इस वजह से सबको पानी नहीं मिल पाता। सुशील के साथ हम लोग गांव के अंदर पहुंचे तो वहां हमारी मुलाकात अहमतिया से हुई। अहमतिया बताती हैं कि खराब पानी पीने की वजह से हम लंगड़ा कर चलते हैं। पैर की हड्डियां कमजोर हो चुकी हैं। शादी होकर आई नई बहुओं को डर- अपंग हो जाएंगे
यहीं हमारी मुलाकात उर्मिला से हुई। उर्मिला बताती हैं- हमारे घर में पानी का कनेक्शन नहीं किया। फ्लोराइड वाला पानी पीने से शरीर में दर्द रहता है। गांव के रामप्रकाश बताते हैं- घर के आगे दो-दो टोटियां लगीं, लेकिन डेढ़ साल से पानी नहीं आ रहा। हम लोग हिंडाल्को का ही पानी पीते हैं, जो टैंकर से आता है। हैंडपंप का पानी अगर आप रातभर रख दीजिए, तो पूरा पानी पीला हो जाता है। इससे बीमारियां हो रही हैं। प्रभावती कहती हैं कि हम लोग शादी करके आए हैं, तो हम लोगों पर अभी असर नहीं हुआ। लेकिन, यहां गांव के लोग बीमार हैं। जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर कुसमहा गांव दिख रहा कि यहां 100% घरों में पानी आ रहा। बुजुर्ग ठीक से चल नहीं पाते, युवाओं के शरीर का निचला हिस्सा खराब हम पहाड़ों के बीच बसे कछनरवा गांव पहुंचे, तो वहां हमारी मुलाकात सुमरिया से हुई। सुमरिया के दोनों पैर टेढ़े हो गए हैं। वह धीरे-धीरे एक पैर के पीछे एक पैर रख कर ही चल पाती हैं। बताती हैं कि जब वह शादी के बाद यहां आई थीं, तब ठीक थीं। लेकिन, 10 साल में पैर खराब हो गए। सुमरिया के परिवार में बेटी सुषमा भी इससे पीड़ित है। सुषमा जमीन पर लेटी थीं। भाई जगदीश ने बताया कि वह उठ नहीं सकती। वह 26 साल की हैं। जगदीश बताते हैं- यहां फ्लोराइड वाला पानी पीने की वजह से ऐसा हुआ है। 12 साल के बेटे का शरीर विकसित ही नहीं हुआ कछनरवा गांव को देख कर पता चला कि यहां लोगों की जिंदगी घिसट रही है। सुमरिया के घर के पास ही हमारी मुलाकात अमित से हुई। अमित अपने बेटे के साथ खड़े थे। बेटे का सिर आश्चर्यजनक तरीके से शरीर से बड़ा हो गया है। अमित ने बताया कि बेटे की उम्र 12 साल है, लेकिन उसका विकास नहीं हो पाया। बेटे को चलने में भी दिक्कत है। पैरों में दर्द रहता है। अमित बताते हैं- 7 साल की उम्र तक तो ठीक था, उसके बाद हालत खराब होने लगी। डॉक्टर कहते हैं कि अब बहुत इलाज नहीं। सुमरिया के घर से थोड़ी दूर पर हमारी मुलाकात फुलवंती देवी से हुई। फुलवंती के बेटे के सीने और पीठ की हड्डियां बाहर निकल आई हैं। इस वजह से उसका शारीरिक विकास रुक गया है। फुलवंती के बेटे और उसके दोस्तों के दांत भी खराब हो गए हैं। सभी के दांत पीले पड़ गए हैं। डेढ़ साल से टोटी लगी, लेकिन पानी नहीं आया कछनरवा गांव के दूसरे हिस्से में हमारी मुलाकात राजू से हुई। राजू अपने घर के दरवाजे पर टेक लगाकर बैठे मिले। हम जब उनके पास पहुंचे, तो पता चला कि वह पिछले 5 साल से उठ बैठ नहीं सकते। उनके कमर के नीचे का हिस्सा खराब हो चुका है। वह दैनिक काम के लिए भी अब दूसरों पर निर्भर रहते हैं। यही हाल उनके पिता का भी है। वह भी एक कोने में चारपाई पर पड़े हैं। राजू कहते हैं- 30 साल तक सब अच्छा था। 5 साल से हम उठ-बैठ नहीं पा रहे। यह कहते हुए वह भावुक हो जाते हैं। बोले- खराब पानी पीने की वजह से ऐसा हो रहा। उनकी मां मिश्री बताती हैं- बाप-बेटे का ध्यान वो अकेली रखती हैं। मजदूरी कर घर चला रही हैं। घर के आंगन में टोटी तो डेढ़-दो साल से लगी है लेकिन पानी नहीं आता है। मिश्री बताती हैं- हम बैठ नहीं पाते हैं। खड़े-खड़े ही खाना बनाते हैं। जमीन पर बैठने में दिक्कत होती है। डॉक्टर को भी कितना दिखाएंगे? इतना पैसा नहीं है। गांव से निकलते वक्त हमारी मुलाकात रीना से हुई। रीना बताती हैं कि हैंडपंप का पानी पीने की वजह से शरीर में दर्द रहता है। टोटी लगा दी, लेकिन पानी नहीं आता। इसकी वजह से गंदा पानी ही पीते हैं। जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर कछनरवा गांव में 100% घरों में पानी आने का दावा किया जा रहा। काम पूरा बताया, लेकिन पानी नहीं आया गोविंदपुर गांव में हमारी मुलाकात फूलकुमारी से हुई। बुजुर्ग फूलकुमारी की कमर झुक गई है। कहती हैं कि यह सब बीमारी गंदा पानी पीने की वजह से हुई है। उन्हें उम्मीद नहीं कि अभी पानी आएगा। कहती हैं कि पानी की टोटियां तो लग गई हैं, लेकिन पानी नहीं आया। पड़ोसी फुलवा देवी कहती हैं कि हमारे पैर में दिक्कत है। चलने-फिरने में दिक्कत होती है। डॉक्टर ने बताया कि घुटने का पानी सूख गया है। जिसकी वजह से दिक्कत हो रही है। अब हमारे सामने सवाल था- टोटियों से आने वाला पानी पीने लायक है या नहीं? इस सवाल का जवाब तलाशते हुए हम झीलो गांव पहुंचे। झीलो में जल जीवन मिशन ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखा है। हमने इंचार्ज आलोक से बातचीत की। आलोक ने ट्रीटमेंट प्लांट दिखाकर बताया कि पानी का ट्रीटमेंट कैसे करते हैं। उन्होंने बताया- हम डैम से पानी उठाते हैं। प्लांट से 178 गांवों को पानी सप्लाई करते हैं। यहां पानी को प्री और पोस्ट क्लोरिनेशन किया जाता है। जहां तक फ्लोराइड की बात है, तो यह दिक्कत ग्राउंड वाटर में है। सरफेस वाटर में फ्लोराइड का लेवल मिनिमम है। इसको चेक करने के लिए हमने खुद और बाहर की लैब में पानी टेस्ट कराया। इसमें फ्लोराइड, आर्सेनिक, लेड और मर्करी नहीं मिला है। इससे स्पष्ट है कि यहां का पानी साफ है। वहीं, सोशल एक्टिविस्ट जगत नारायण कहते हैं- टोटी का पानी अगर साफ है तो गांव में जल्द से जल्द पानी पहुंचाना चाहिए। क्योंकि अभी हम जो पानी पी रहे, उसमें तमाम हैवी मेटल्स हैं। सोनभद्र के जो ब्लॉक फ्लोराइड से प्रभावित हैं, उनमें केवल बभनी ब्लॉक के गांव में ही पानी मुझे दिखा। बाकी अन्य ब्लॉकों में पानी नहीं पहुंच रहा है। जगत नारायण की बात की तस्दीक करने के लिए हम सोनभद्र के गांव में जो सरकारी टोटी से पानी पहुंचाया जा रहा, उसकी लैब रिपोर्ट की तलाश में लगे। हमारी तलाश उसी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर जाकर खत्म हुई। प्लांट इंचार्ज आलोक ने हमें SILKON BIOTECH PRIVATE LIMITED, VARANASI की लैब टेस्ट रिपोर्ट दिखाई। यह वह पानी है, जो झीलो के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में आता है। उसका सैंपल 27 दिसंबर, 2024 को लिया और 9 जनवरी, 2025 को इसका टेस्ट किया। इसमें खास तौर पर फ्लोराइड की मिनिमम मात्रा मिली। आर्सेनिक, लेड और मरकरी भी नहीं मिला है। इसके आधार पर विभाग इसे पीने लायक पानी बता रहे हैं। अब भी सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर यह पानी साफ है तो फिर गांव में पानी कब आएगा? इसके बाद हम झीलो गांव से निकलकर खमरिया पहुंचे। यहां से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट मात्र दो से तीन किमी दूर है। यहां हमारी मुलाकात तारिक से हुई। तारिक बताते हैं- टोटियां लगी हैं, लेकिन पानी 10-15 दिन में एक बार आता है। जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर खमरिया गांव में 100% घरों में पानी आने का दावा किया जा रहा। अब जानिए जिम्मेदारों का क्या कहना है? हमारा पानी साफ है, गांव के लोग पी सकते हैं
हम एक्सईएन जल जीवन मिशन ग्रामीण अरुण कुमार सिंह के पास उनके ऑफिस पहुंचे। अरुण बताते हैं कि सोनभद्र में ग्राउंड वाटर, हैंडपंप का पानी और ट्यूबवेल का पानी पीने से लोग बीमार हो रहे। एमडी बोले- ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस से बंद कामों को पूरा करेंगे
इस मामले को लेकर हमने जल जीवन मिशन ग्रामीण के एमडी राजशेखर से बात की। उन्होंने हमसे वॉट्सऐप कॉल पर बात की। उन्होंने बताया कि आपके मुताबिक जहां पानी नहीं पहुंचा, हमारी कोशिश है कि हम वहां जल्द से जल्द पानी पहुंचा दें। —————— भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबरें भी पढ़ें- यूपी में अफसरों को रुपए की पुड़िया दो…पासपोर्ट बनवाओ:कैमरे पर लिए ₹2000, रिजेक्ट एप्लिकेशन अप्रूव पासपोर्ट दफ्तरों पर चलने वाली दलाली और यहां तैनात विदेश मंत्रालय के अफसरों के रुपए लेने के मामले को एक्सपोज करने के लिए दैनिक भास्कर टीम ने गोरखपुर पासपोर्ट ऑफिस में एक महीने तक इन्वेस्टिगेशन किया। जिस फाइल में कमी बताकर यहां के अफसर ने रिजेक्ट किया, उसी फाइल को APO ने अगले दिन 2 हजार रुपए लेकर अप्रूव कर दिया। पढ़ें पूरी खबर यूपी में चल रहे अफ्रीकन-रशियन गर्ल्स के सेक्स रैकेट:स्पा सेंटर्स में एक्स्ट्रा सर्विस के नाम पर कस्टमर्स फंसा रहे; देखें स्टिंग अफ्रीकन… रशियन… थाई… ये लड़कियां जिस्मफरोशी के लिए खुद की नुमाइश कर रही हैं। यूपी में स्पा सेंटर की आड़ में इंडियन और थाई गर्ल्स से वैश्यावृत्ति कराना आम बात है। अब इन स्पा सेंटरों में काम्पिटिशन इतना बढ़ गया कि ये कस्टमर्स को फंसाने के लिए अफ्रीकन और रशियन गर्ल्स का सेक्स रैकेट चला रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर गली-चौराहे तक इनके एजेंट एक्टिव हैं, जो लड़कियां उपलब्ध करा रहे। पढ़ें पूरी खबर बाप-दादा का नाम बदल डॉक्टर बने परिवार के 8 लोग:यूपी में फ्रीडम फाइटर के दत्तक बेटे-पोतों को आरक्षण, असली परिवार दुकान चला रहा गोरखपुर के एक ही परिवार के 8 सदस्य हैं। सभी पेशे से डॉक्टर हैं। सभी ने फ्रीडम फाइटर का आश्रित प्रमाणपत्र लगाकर MBBS में एडमिशन लिया। दरअसल, फ्रीडम फाइटर के असली, दत्तक बेटे-बेटी (गोद लिए) और उनके बच्चों (पोता, पोती, नाती, नातिन) को मेडिकल कॉलेजों में 2% आरक्षण मिलता है। इसलिए लोग गोदनामा और फ्रीडम फाइटर के आश्रित होने का प्रमाणपत्र बनवा लेते हैं। पढ़ें पूरी खबर