यूपी में बच्चे की पीठ पर पूंछ क्यों निकली?:जन्म से पहले सबकी होती है; इंसानों और जानवरों की पूंछ में क्या अंतर

मऊ जिले में डेढ़ साल के सूर्यांश के शरीर में पूंछ निकल आई, जो उम्र के साथ बढ़ने लगी। यह देख उसके घरवाले उसे हनुमानजी मानकर पूजने लगे। बच्चे को चलने और कहीं पूंछ छू जाने से तेज दर्द होता था। उसके मां-बाप बच्चे को लेकर लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उनकी काउंसलिंग की। सर्जरी करके बच्चे की पूंछ हटा दी। डॉक्टरों के मुताबिक, जन्म से बच्चे की पीठ पर पूंछ निकली थी। पूंछ की लंबाई 14 सेमी मापी गई। ऐसे में सवाल यह है कि बच्चे के शरीर में पूंछ कैसे निकली? मेडिकल साइंस इसे क्या कहता है? कितने बच्चों में ऐसा देखने को मिलता है? जानवरों की तरह इंसान की पूंछ क्यों काम नहीं करती? सारे सवालों के जवाब भास्कर एक्सप्लेनर में जानिए… सवाल: बच्चे के शरीर में पूंछ क्यों निकली? जवाब: जब बच्चा मां के गर्भ में बन रहा होता है, तो शुरुआत में उसके शरीर में एक छोटी सी पूंछ होती है। इसे एम्ब्रायोनिक टेल कहा जाता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, यह पूंछ अपने-आप गायब हो जाती है। लेकिन कभी-कभी यह पूंछ खत्म नहीं होती और बच्चा इसी के साथ पैदा हो जाता है। कुछ मामलों में यह जीन म्यूटेशन की वजह से भी होता है। अगर परिवार में पहले किसी बच्चे में ऐसा हुआ हो, तो इसका खतरा और बढ़ सकता है। बलरामपुर अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार बताते हैं कि बच्चा लंबे समय से पूंछ की वजह से दर्द सह रहा था। ये एक तरह की ह्यूमन टेल थी, जो रीढ़ की हड्डियों (वर्टिब्रा) के बीच स्पाइनल कॉर्ड की झिल्लियों से गहराई से जुड़ी थी। पूंछ काफी संवेदनशील थी। इसे छूने से भी बच्चे को दर्द होता था। मेदांता अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. आकाश के मुताबिक, ये बच्चे में जेनेटिक ही होता है। दरअसल, गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में हर इंसानी भ्रूण में एक छोटी पूंछ बनती है। विकास के साथ यह धीरे-धीरे सिकुड़कर शरीर के अंदर समा जाती है और कॉक्सिक्स यानी रीढ़ की हड्डी का अंतिम हिस्सा बन जाती है। लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में पूंछ जैसा हिस्सा बाहर की ओर बढ़ने लगता है। डॉक्टर बताते हैं कि यह 2 तरह की हो सकती है सवाल: इसका इलाज क्या है ? जवाब: एक्सपर्ट बताते हैं कि पहले के समय में जब कोई बच्चा पूंछ के साथ पैदा होता था, तो लोग इसे भगवान का रूप या किसी चमत्कार से जोड़ देते थे। उस समय इलाज की सुविधा नहीं थी, इसलिए लोग इसे अंधविश्वास से देखते थे। लेकिन आज मेडिकल साइंस बहुत आगे बढ़ चुका है। अब ऐसी पूंछ को सर्जरी करके आसानी से और सुरक्षित रूप से हटाया जा सकता है। आमतौर पर जन्म के कुछ महीनों बाद या बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए, तब डॉक्टर ऑपरेशन करके पूंछ निकाल देते हैं। सर्जरी के बाद बच्चा बिल्कुल सामान्य जीवन जी सकता है। सवाल: कितने बच्चों ने लिया पूंछ के साथ जन्म ? जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक जिन इंसानी बच्चों के पूंछ के साथ जन्म लेने के मामले दर्ज हुए हैं, उनमें पूंछ की लंबाई करीब 18 सेंटीमीटर तक पाई गई है। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, दुनिया में ऐसे केवल 40 मामले ही सामने आए हैं। इन बच्चों की पूंछ आमतौर पर मुलायम होती है, इनमें हड्डी नहीं होती और आकार उंगली जैसा दिखता है। डॉक्टर इसे सर्जरी के जरिए आसानी से हटाकर बच्चे को नॉर्मल जीवन दे सकते है। सवाल: जानवर और इंसानों की पूंछ में क्या फर्क ? जवाब: जानवरों जैसे कुत्ता, बिल्ली, बंदर, गाय आदि की पूंछ उनकी हड्डी का हिस्सा होती है। यह उनकी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी रहती है और लगातार हिलती है। वे इसे संतुलन बनाने, खतरे का संकेत देने, या भावनाएं दिखाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। जानवर के पूंछ और इंसान के पूंछ में फर्क बस इतना ही होता है कि इंसान के बच्चे अगर पूंछ के साथ जन्म लेते हैं तो पूंछ में हड्डी नहीं होती है। वहीं, जानवरों के पूंछ में हड्डी होती है। सवाल: मेडिकल साइंस इसको लेकर क्या कहता है ? जवाब: पुरानी थ्योरी के मुताबिक हमारे पूर्वज चिम्पैंजी थे, जिनकी पूंछ होती थी। समय के साथ उनमें बदलाव आया, उनकी पूंछ धीरे-धीरे खत्म होती गई और आगे चलकर इंसान का विकास हुआ। इस वजह से माना जाता था कि अगर आज भी कोई बच्चा पूंछ के साथ जन्म लेता है तो यह हमारे पुराने पूर्वजों वाली खासियत है। चार्ल्स डार्विन की थ्योरी के बाद ही इंसान में पूंछ को लेकर गलतफहमियां शुरू हुईं। उन्होंने कहा था कि इंसान में पूंछ का दिखना एक ऐसी घटना है जो हमारे पुराने पूर्वजों से जुड़ी है, क्योंकि इंसान का शरीर विकास की एक लंबी प्रक्रिया से गुजरा है। 1980 के दशक में वैज्ञानिकों ने भी इसे माना और बताया कि इंसान के जीन में समय के साथ कई बदलाव हुए। इन्हीं बदलावों ने इंसानों में पूंछ खत्म कर दी। लेकिन कभी-कभी यह जीन बदलाव उल्टा हो जाता है, जिससे बच्चा पूंछ के साथ पैदा हो सकता है। 1985 में वैज्ञानिकों ने इंसान की दो तरह की पूंछ को परिभाषित किया ट्रू टेल और प्सूडो टेल। अगर इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें, तो जब महिला के पेट में बच्चा 5 हफ्ते का होता है, तब उसमें एक छोटी सी पूंछ जैसी संरचना बनती है। शुरुआत में यह छोटी रीढ़ की तरह होती है। सामान्यतः बच्चे के बढ़ने के साथ यह पूंछ गायब हो जाती है। लेकिन कई बार ये गलत लाइफस्टाइल के वजह से रह जाती है, जिसे सर्जरी करके हटा दिया जाता है। सवाल: इंसानों की पूंछ क्यों गायब हो गई? जवाब: 25 मिलियन सालों के बाद 2024 में वैज्ञानिकों ने ये ढूंढने का प्रयास किया कि मनुष्यों ने अपनी पूंछ क्यों खो दी। क्या इससे हमें फायदा हुआ? नेचर जर्नल में प्रकाशित नई स्टडी में बताया गया कि इंसानों के डीएनए में हुआ एक खास बदलाव लाखों साल पहले पूंछ के खत्म होने की वजह बना। सवाल: रिसर्च की शुरुआत कैसे हुई? जवाब: न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र और अब ब्रॉड इंस्टीट्यूट में वैज्ञानिक बो जिया की टेलबोन में चोट लगी। इसी चोट के बाद उन्हें यह जानने की जिज्ञासा हुई कि इंसान में टेलबोन तो है, लेकिन असली पूंछ क्यों नहीं। इसी से रिसर्च की शुरुआत हुई। इस दौरान वैज्ञानिकों ने तीन प्रजातियों के डीएनए की तुलना की इंसान, बिना पूंछ वाले वानर और पूंछ वाले बंदर। तुलना में पता चला कि इंसानों और बिना पूंछ वाले वानरों के डीएनए में AluY नाम का डीएनए स्निपेट जुड़ा हुआ है। यह बदलाव पूंछ वाले बंदरों में नहीं मिला। यही छोटा-सा बदलाव पूंछ के विकास को रोकने का कारण बना। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इंसानों के पूर्वजों में एक से ज्यादा जेनेटिक बदलाव हुए होंगे, जिनकी वजह से पूंछ धीरे-धीरे गायब हो गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रिसर्च बताती है कि मानव शरीर कैसे विकसित हुआ और क्यों कुछ अंग समय के साथ खत्म हो गए। आने वाले समय में और रिसर्च से इंसान के विकास से जुड़ी कई और महत्वपूर्ण बातें सामने आ सकती हैं। ………….. पढ़िए पूरी खबर… बच्चे को पूंछ निकली, हनुमानजी मानकर पूजने लगे घरवाले:लखनऊ में डॉक्टरों ने सर्जरी कर हटाई, चलने-छूने पर तड़प उठता था यूपी में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। डेढ़ साल के बच्चे के शरीर में पूंछ निकल आई, जो उम्र बढ़ने के साथ बढ़ रही थी। यह देख उसके घरवाले उसे हनुमानजी मानकर पूजने लगे थे।बच्चे को चलने और कहीं वह पूंछ छू जाने से तेज दर्द होता था। इस पर उसके मां-बाप लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों उनकी काउंसलिंग कर सर्जरी करके बच्चे की पूंछ हटा दी। डॉक्टरों के मुताबिक, जन्म से बच्चे की पीठ पर पूंछ निकली थी। पूंछ की लंबाई 14 सेमी मापी गई। बच्चे को लेटने या चलने पर असहनीय दर्द होता था। ऐसे में डॉक्टरों ने बिना देरी किए सर्जरी करने की ठानी। पढ़िए पूरी खबर….