बरेली में एक गांव है करेली। यहां रहने वाले ब्रजपाल सिंह कोचिंग पढ़ाते थे। शादी नहीं हो रही थी। वह धर्मांतरण सिंडिकेट के चंगुल में फंस गए। एक मेंबर ने अपनी बहन से उनको निकाह का प्रस्ताव दिया। ब्रजपाल का खतना कराया गया और अब्दुला नाम रखा गया। ब्रजपाल ने अपनी मां और बहन के भी मुस्लिम नाम रख दिए। ऐसे ही जीआईसी के एक सरकारी टीचर के साथ भी होने वाला था। लेकिन ऐनवक्त पर पुलिस की रेड पड़ी और सिंडिकेट का खुलासा हो गया। अभी तक लव जिहाद और रुपए देकर धर्म बदलने के मामले तो यूपी में आते रहे हैं। लेकिन, यह मामला अपने आप में अलग है। अब हिंदू युवाओं को शादी के बदले धर्म बदलवाया जा रहा है। एक मामले में नाबालिग को ड्रग्स देकर नशेड़ी बनाया गया, फिर मुस्लिम बना दिया गया। इस बार संडे बिग स्टोरी में ऐसे ही सिंडिकेट की कहानी… सबसे पहले 2 टीचरों की कहानी, कैसे इस सिंडिकेट में फंसे GIC टीचर का तलाक हुआ, दूसरी शादी के चक्कर में फंसा
अलीगढ़ जिले में क्वार्सी थाना क्षेत्र में रहने वाले प्रभात उपाध्याय बुलंदशहर जिले में जहांगीराबाद क्षेत्र स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के टीचर हैं। प्रभात की नर्सरी से एमफिल तक की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। बुलंदशहर से पहले बरेली के GIC में पोस्टिंग थी। इस दौरान प्रभात एक रेस्टोरेंट पर खाना खाने जाते थे। वहां उनकी मुलाकात कुछ मुस्लिम युवकों से हुई। प्रभात ने उन्हें अपना दर्द बताना शुरू किया कि दृष्टिहीन होने की वजह से किस तरह बीवी ने तलाक ले लिया। प्रभात जिन युवकों से ये दर्द साझा करता था, वो धर्मांतरण सिंडिकेट से जुड़े थे। उन्होंने प्रभात को दूसरी शादी कराने का झांसा दिया। फिर ब्रेनवॉश किया, नमाज पढ़ाई। आखिरकार प्रभात को हमीद बना दिया गया। अब उसका निकाह और खतना कराने की तैयारी थी। उससे पहले ही पुलिस इस सिंडिकेट तक पहुंच गई। शादी कराई, खुद अब्दुला बने और मां-बहन को भी मुस्लिम बनाया
बरेली में एक गांव है करेली। यहां रहने वाले ब्रजपाल सिंह कोचिंग टीचर थे। करीब 10 साल पहले एक्सीडेंट में गंभीर चोटें आईं और वो पढ़ाने में असमर्थ हो गए। पिता की मौत और बहन के तलाक की वजह से वो और तनाव में आ गए। तब तक ब्रजपाल की शादी नहीं हुई थी। परेशान ब्रजपाल इस धर्मांतरण सिंडिकेट के कॉन्टैक्ट में आ गए। सिंडिकेट ने उन्हें ब्रेनवॉश करना शुरू कर दिया। इस्लामिक तकरीरें सुनवाईं। ब्रजपाल को बताया कि इस्लाम में सिर्फ एक ही भगवान है। यहां कोई ऊंच-नीच नहीं है। धर्मांतरण के बाद ब्रजपाल सिंह का नया नाम अब्दुल्ला रखा गया। इसके बाद सिंडिकेट मेंबर ने अपनी बहन तबस्सुम से अब्दुल्ला का निकाह करा दिया। अब्दुल्ला ने अपनी अपनी मां ऊषा रानी को अमीना और बहन राजकुमारी को आयशा नया नाम दिया। इस तरह परिवार के तीन लोग धर्मांतरण कर लिए। ये भी डराने वाला केस- स्टूडेंट को नशेड़ी बनाकर खतने की तैयारी थी
बरेली में इज्जतनगर में रहने वाले 17 वर्षीय छात्र बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है। पिता की मौत हो चुकी है। परिवार चलाने के लिए वो एक सैलून पर पार्ट टाइम जॉब भी करता है। इसी दौरान उसका कॉन्टैक्ट सैलून पर काम करने वाले एक दूसरे शख्स से हो जाता है, जो धर्मांतरण सिंडिकेट का मेंबर है। पहले इस छात्र को ड्रग्स का एडिक्ट बनाया जाता है। फिर धीरे-धीरे उसका मौखिक ब्रेनवॉश किया जाता है। इसके बाद सैलून वर्कर उसको कुछ इस्लामिक लिटरेचर प्रोवाइड कराता है। जब छात्र का ब्रेनवॉश हो जाता है तो उससे नमाज पढ़वानी शुरू कर दी जाती है। पुलिस का दावा है कि धर्मांतरण की प्रक्रिया आखिरी फेज में थी। उसमें सिर्फ खतना होना बाकी था। इससे पहले ही पुलिस इस सिंडिकेट तक पहुंच गई और छात्र को धर्मांतरण से बचा लिया। पुलिस अफसरों के मुताबिक, लगातार नशा देने से इस छात्र की मानसिक हालत भी ठीक नहीं रही है। उसको इलाज की जरूरत है। सिंडिकेट सरगना ने मुस्लिम बनाने के लिए बहन की ही शादी करा दी
बरेली से 30 किमी दूर फैजनगर गांव में स्थिति मदरसे में धर्मांतरण का काम चल रहा था। सिंडिकेट का सरगना गांव का ही अब्दुल मजीद है। गांव में ही एक बुजुर्ग ने कैमरे पर न आने की शर्त पर बताया कि अब्दुल मजीद हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए बहुत ज्यादा गिर गया था। उसने जयपुर के रहने वाले पीयूष (अब मोहम्मद अली) से अपनी बहन की बातचीत शुरू करवाई। वॉट्सऐप पर उसके फोटो और वीडियो भेजे। फिर उससे निकाह का झांसा देकर धर्म बदलवाया। अब्दुल मजीद ने पीयूष का मदरसे में पहले खतना करवाया, फिर उसका नया नाम मोहम्मद अली रखा। उसके बाद अब्दुल मजीद ने 3 साल पहले 2022 में आयशा से उसका निकाह करवा दिया। पीयूष का पूरा परिवार मुस्लिम बन गया। इतना ही नहीं, अब्दुल मजीद ने उसे इस्लामिक किताबें और जाकिर नाईक के ऑडियो सुना-सुना कर कट्टर मुसलमान बना दिया। अब पीयूष, मोहम्मद अली बनकर उसके गैंग में शामिल हो गया है। इसके बाद जीजा-साले मिलकर अन्य हिंदुओं को फंसाने लगे हैं। दोनों गैंग के मास्टरमाइंड हैं। मोहम्मद अली हिंदुओं को अपने बारे में बताता था। उन्हें बताता था कि मैं पहले हिंदू था। मेरा नाम पीयूष था, लेकिन सनातन धर्म बेकार है। कुछ महीने पहले आगरा में भी धर्मांतरण गिरोह का खुलासा हुआ था। पुलिस ने पीयूष समेत कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सिंडिकेट के पास धर्मांतरण के 45 सर्टिफिकेट मिले
अब्दुल मजीद इस सिंडिकेट को पिछले करीब 9 साल से चला रहा था। इसके तार देशभर में फैले थे। मदरसे के नाम पर चंदा जुटाया जाता था। उसको लोगों के धर्मांतरण में खर्च किया जाता था। इस गैंग से धर्मांतरण से संबंधित करीब 45 सर्टिफिकेट मिले हैं। पुलिस जांच में पुष्टि हुई कि इस गैंग ने अब तक जयपुर के पीयूष, टीचर प्रभात उपाध्याय, कोचिंग टीचर ब्रजपाल सिंह, उसकी मां और बहन सहित एक नाबालिग लड़के का धर्मांतरण कराया है। बरेली पुलिस की जांच में ये क्लियर हुआ है कि इस गैंग का मोटिव सिर्फ और सिर्फ हिंदू युवकों को धर्मांतरण करके इस्लाम धर्म ग्रहण कराना था। एक पीड़ित के पाकिस्तानी शख्स से भी वॉट्सऐप पर बातचीत होने की बात सामने आई है। इससे एक अंदेशा ये भी है कि सिंडिकेट के तार पाकिस्तान से जुड़े हो सकते हैं। एक ही बैंक खाते में 2 हजार ट्रांजैक्शन
इस पूरे केस का सुपरविजन कर रहीं बरेली पुलिस की SP (साउथ) अंशिका वर्मा ने दैनिक भास्कर को बताया- जिस मदरसे में ये धर्मांतरण सिंडिकेट चल रहा था, वो पूरी तरह अवैध है। गैंग के मास्टरमाइंड अब्दुल मजीद की देशभर में घूमने की ट्रैवल हिस्ट्री मिली है। वो इसी मदरसे के नाम पर लोगों से 100-200 रुपए चंदा लेता था। मजीद के वॉट्सऐप चैट में भी चंदा मांगने के मैसेज मिले हैं। मजीद के एक बैंक अकाउंट में 8 महीने के भीतर 13 लाख रुपए आए हैं। ये पैसा तकरीबन 2 हजार ट्रांजैक्शन में आया है। ज्यादातर ट्रांजैक्शन 100-200 रुपए वाली हैं। इस बात से भी साफ हो जाता है कि वो ये पैसा चंदे के रूप में लोगों से मंगवा रहा था। इस सिंडिकेट के कुल 21 बैंक अकाउंट मिले हैं। उन्हें खंगाला जा रहा है कि इन सभी अकाउंट में कुल कितना और कहां-कहां से पैसा आया। 100 से ज्यादा मुस्लिम लड़कियों के फोटो मिले
सिंडिकेट के वॉट्सऐप चैट्स पर 100 से ज्यादा मुस्लिम लड़कियों की फोटो मिली हैं। ये लड़कियां कौन हैं, इनका प्रोफाइल क्या है, इसकी जांच पुलिस कर रही है। हालांकि जिस तरह से सिंडिकेट काम कर रहा था, उससे आशंका है कि इन लड़कियों से हिंदू लड़कों की शादी कराकर मुस्लिम बनाने की तैयारी थी। एसपी बरेली अंशिका वर्मा ने बताया कि हमें तमाम वॉट्सऐप चैट मिली हैं। उनका विश्लेषण कर रहे हैं। इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट हो चुका है। काफी चैट भी डिलीट हुई हैं। ऐसा लगता है, जैसे पुलिस रेड से पहले इस सिंडिकेट को हमारी भनक लग चुकी थी। मोबाइल की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। ————————— ये खबर भी पढ़ें… ब्रेनवॉश, फिर मुस्लिम लड़की से निकाह और खतना, बरेली में हिंदुओं के धर्मांतरण का सिंडिकेट यूपी की बरेली पुलिस ने 26 अगस्त को छांगुर बाबा जैसा धर्मांतरण सिंडिकेट का खुलासा किया। इस मामले में मदरसा संचालक समेत कुल 4 आरोपियों को अरेस्ट किया गया है। ये गैंग ऐसे लोगों को टारगेट करता था, जो आर्थिक या पारिवारिक रूप से कमजोर हों। पहले इनका ब्रेनवॉश किया जाता था। फिर मुस्लिम लड़कियों से शादी कराई जाती थी। आखिर में खतना करके पूरी तरह से धर्मांतरण करा दिया जाता था। ‘दैनिक भास्कर’ ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर सिंडिकेट के बारे में समझा। जांच से जुड़े पुलिस अफसरों से बात की। सिंडिकेट मेंबरों की प्रोफाइल और पीड़ित परिवारों की कहानी भी जानी। पढ़िए पूरी खबर…
अलीगढ़ जिले में क्वार्सी थाना क्षेत्र में रहने वाले प्रभात उपाध्याय बुलंदशहर जिले में जहांगीराबाद क्षेत्र स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के टीचर हैं। प्रभात की नर्सरी से एमफिल तक की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। बुलंदशहर से पहले बरेली के GIC में पोस्टिंग थी। इस दौरान प्रभात एक रेस्टोरेंट पर खाना खाने जाते थे। वहां उनकी मुलाकात कुछ मुस्लिम युवकों से हुई। प्रभात ने उन्हें अपना दर्द बताना शुरू किया कि दृष्टिहीन होने की वजह से किस तरह बीवी ने तलाक ले लिया। प्रभात जिन युवकों से ये दर्द साझा करता था, वो धर्मांतरण सिंडिकेट से जुड़े थे। उन्होंने प्रभात को दूसरी शादी कराने का झांसा दिया। फिर ब्रेनवॉश किया, नमाज पढ़ाई। आखिरकार प्रभात को हमीद बना दिया गया। अब उसका निकाह और खतना कराने की तैयारी थी। उससे पहले ही पुलिस इस सिंडिकेट तक पहुंच गई। शादी कराई, खुद अब्दुला बने और मां-बहन को भी मुस्लिम बनाया
बरेली में एक गांव है करेली। यहां रहने वाले ब्रजपाल सिंह कोचिंग टीचर थे। करीब 10 साल पहले एक्सीडेंट में गंभीर चोटें आईं और वो पढ़ाने में असमर्थ हो गए। पिता की मौत और बहन के तलाक की वजह से वो और तनाव में आ गए। तब तक ब्रजपाल की शादी नहीं हुई थी। परेशान ब्रजपाल इस धर्मांतरण सिंडिकेट के कॉन्टैक्ट में आ गए। सिंडिकेट ने उन्हें ब्रेनवॉश करना शुरू कर दिया। इस्लामिक तकरीरें सुनवाईं। ब्रजपाल को बताया कि इस्लाम में सिर्फ एक ही भगवान है। यहां कोई ऊंच-नीच नहीं है। धर्मांतरण के बाद ब्रजपाल सिंह का नया नाम अब्दुल्ला रखा गया। इसके बाद सिंडिकेट मेंबर ने अपनी बहन तबस्सुम से अब्दुल्ला का निकाह करा दिया। अब्दुल्ला ने अपनी अपनी मां ऊषा रानी को अमीना और बहन राजकुमारी को आयशा नया नाम दिया। इस तरह परिवार के तीन लोग धर्मांतरण कर लिए। ये भी डराने वाला केस- स्टूडेंट को नशेड़ी बनाकर खतने की तैयारी थी
बरेली में इज्जतनगर में रहने वाले 17 वर्षीय छात्र बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है। पिता की मौत हो चुकी है। परिवार चलाने के लिए वो एक सैलून पर पार्ट टाइम जॉब भी करता है। इसी दौरान उसका कॉन्टैक्ट सैलून पर काम करने वाले एक दूसरे शख्स से हो जाता है, जो धर्मांतरण सिंडिकेट का मेंबर है। पहले इस छात्र को ड्रग्स का एडिक्ट बनाया जाता है। फिर धीरे-धीरे उसका मौखिक ब्रेनवॉश किया जाता है। इसके बाद सैलून वर्कर उसको कुछ इस्लामिक लिटरेचर प्रोवाइड कराता है। जब छात्र का ब्रेनवॉश हो जाता है तो उससे नमाज पढ़वानी शुरू कर दी जाती है। पुलिस का दावा है कि धर्मांतरण की प्रक्रिया आखिरी फेज में थी। उसमें सिर्फ खतना होना बाकी था। इससे पहले ही पुलिस इस सिंडिकेट तक पहुंच गई और छात्र को धर्मांतरण से बचा लिया। पुलिस अफसरों के मुताबिक, लगातार नशा देने से इस छात्र की मानसिक हालत भी ठीक नहीं रही है। उसको इलाज की जरूरत है। सिंडिकेट सरगना ने मुस्लिम बनाने के लिए बहन की ही शादी करा दी
बरेली से 30 किमी दूर फैजनगर गांव में स्थिति मदरसे में धर्मांतरण का काम चल रहा था। सिंडिकेट का सरगना गांव का ही अब्दुल मजीद है। गांव में ही एक बुजुर्ग ने कैमरे पर न आने की शर्त पर बताया कि अब्दुल मजीद हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए बहुत ज्यादा गिर गया था। उसने जयपुर के रहने वाले पीयूष (अब मोहम्मद अली) से अपनी बहन की बातचीत शुरू करवाई। वॉट्सऐप पर उसके फोटो और वीडियो भेजे। फिर उससे निकाह का झांसा देकर धर्म बदलवाया। अब्दुल मजीद ने पीयूष का मदरसे में पहले खतना करवाया, फिर उसका नया नाम मोहम्मद अली रखा। उसके बाद अब्दुल मजीद ने 3 साल पहले 2022 में आयशा से उसका निकाह करवा दिया। पीयूष का पूरा परिवार मुस्लिम बन गया। इतना ही नहीं, अब्दुल मजीद ने उसे इस्लामिक किताबें और जाकिर नाईक के ऑडियो सुना-सुना कर कट्टर मुसलमान बना दिया। अब पीयूष, मोहम्मद अली बनकर उसके गैंग में शामिल हो गया है। इसके बाद जीजा-साले मिलकर अन्य हिंदुओं को फंसाने लगे हैं। दोनों गैंग के मास्टरमाइंड हैं। मोहम्मद अली हिंदुओं को अपने बारे में बताता था। उन्हें बताता था कि मैं पहले हिंदू था। मेरा नाम पीयूष था, लेकिन सनातन धर्म बेकार है। कुछ महीने पहले आगरा में भी धर्मांतरण गिरोह का खुलासा हुआ था। पुलिस ने पीयूष समेत कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सिंडिकेट के पास धर्मांतरण के 45 सर्टिफिकेट मिले
अब्दुल मजीद इस सिंडिकेट को पिछले करीब 9 साल से चला रहा था। इसके तार देशभर में फैले थे। मदरसे के नाम पर चंदा जुटाया जाता था। उसको लोगों के धर्मांतरण में खर्च किया जाता था। इस गैंग से धर्मांतरण से संबंधित करीब 45 सर्टिफिकेट मिले हैं। पुलिस जांच में पुष्टि हुई कि इस गैंग ने अब तक जयपुर के पीयूष, टीचर प्रभात उपाध्याय, कोचिंग टीचर ब्रजपाल सिंह, उसकी मां और बहन सहित एक नाबालिग लड़के का धर्मांतरण कराया है। बरेली पुलिस की जांच में ये क्लियर हुआ है कि इस गैंग का मोटिव सिर्फ और सिर्फ हिंदू युवकों को धर्मांतरण करके इस्लाम धर्म ग्रहण कराना था। एक पीड़ित के पाकिस्तानी शख्स से भी वॉट्सऐप पर बातचीत होने की बात सामने आई है। इससे एक अंदेशा ये भी है कि सिंडिकेट के तार पाकिस्तान से जुड़े हो सकते हैं। एक ही बैंक खाते में 2 हजार ट्रांजैक्शन
इस पूरे केस का सुपरविजन कर रहीं बरेली पुलिस की SP (साउथ) अंशिका वर्मा ने दैनिक भास्कर को बताया- जिस मदरसे में ये धर्मांतरण सिंडिकेट चल रहा था, वो पूरी तरह अवैध है। गैंग के मास्टरमाइंड अब्दुल मजीद की देशभर में घूमने की ट्रैवल हिस्ट्री मिली है। वो इसी मदरसे के नाम पर लोगों से 100-200 रुपए चंदा लेता था। मजीद के वॉट्सऐप चैट में भी चंदा मांगने के मैसेज मिले हैं। मजीद के एक बैंक अकाउंट में 8 महीने के भीतर 13 लाख रुपए आए हैं। ये पैसा तकरीबन 2 हजार ट्रांजैक्शन में आया है। ज्यादातर ट्रांजैक्शन 100-200 रुपए वाली हैं। इस बात से भी साफ हो जाता है कि वो ये पैसा चंदे के रूप में लोगों से मंगवा रहा था। इस सिंडिकेट के कुल 21 बैंक अकाउंट मिले हैं। उन्हें खंगाला जा रहा है कि इन सभी अकाउंट में कुल कितना और कहां-कहां से पैसा आया। 100 से ज्यादा मुस्लिम लड़कियों के फोटो मिले
सिंडिकेट के वॉट्सऐप चैट्स पर 100 से ज्यादा मुस्लिम लड़कियों की फोटो मिली हैं। ये लड़कियां कौन हैं, इनका प्रोफाइल क्या है, इसकी जांच पुलिस कर रही है। हालांकि जिस तरह से सिंडिकेट काम कर रहा था, उससे आशंका है कि इन लड़कियों से हिंदू लड़कों की शादी कराकर मुस्लिम बनाने की तैयारी थी। एसपी बरेली अंशिका वर्मा ने बताया कि हमें तमाम वॉट्सऐप चैट मिली हैं। उनका विश्लेषण कर रहे हैं। इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट हो चुका है। काफी चैट भी डिलीट हुई हैं। ऐसा लगता है, जैसे पुलिस रेड से पहले इस सिंडिकेट को हमारी भनक लग चुकी थी। मोबाइल की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। ————————— ये खबर भी पढ़ें… ब्रेनवॉश, फिर मुस्लिम लड़की से निकाह और खतना, बरेली में हिंदुओं के धर्मांतरण का सिंडिकेट यूपी की बरेली पुलिस ने 26 अगस्त को छांगुर बाबा जैसा धर्मांतरण सिंडिकेट का खुलासा किया। इस मामले में मदरसा संचालक समेत कुल 4 आरोपियों को अरेस्ट किया गया है। ये गैंग ऐसे लोगों को टारगेट करता था, जो आर्थिक या पारिवारिक रूप से कमजोर हों। पहले इनका ब्रेनवॉश किया जाता था। फिर मुस्लिम लड़कियों से शादी कराई जाती थी। आखिर में खतना करके पूरी तरह से धर्मांतरण करा दिया जाता था। ‘दैनिक भास्कर’ ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर सिंडिकेट के बारे में समझा। जांच से जुड़े पुलिस अफसरों से बात की। सिंडिकेट मेंबरों की प्रोफाइल और पीड़ित परिवारों की कहानी भी जानी। पढ़िए पूरी खबर…