यूपी में रोजाना 10 हजार लोगों को काटते हैं कुत्ते:कबड्‌डी खिलाड़ी की तड़पकर हुई थी मौत; शेल्टर होम का लखनऊ में क्या है प्लान

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR के नगर निकायों को आवारा कुत्तों की नसबंदी करने और उन्हें स्थायी रूप से शेल्टर होम में रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इसे लेकर देशभर में राय बंटी है। यूपी में भी आवारा कुत्तों का मुद्दा गंभीर है। विधान परिषद को भेजी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना 10 हजार लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में जानते हैं कि आवारा कुत्तों से निपटने के लिए निगम क्या कर रहा है? राज्य में पालतू और आवारा कुत्तों को लेकर गाइडलाइन क्या है? क्या सोसाइटीज में पालतू कुत्तों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है? भास्कर एक्सप्लेनर में इन सारे सवालों के जवाब पढ़िए…. सबसे पहले यूपी में कुत्ते के काटने के बाद हुई 2 मौतों को जानिए… 1- जुलाई, 2025 में बुलंदशहर में राज्यस्तरीय कबड्डी खिलाड़ी बृजेश सोलंकी की कुत्ते के काटने से मौत हो गई थी। बृजेश को मौत से 15 दिन पहले एक आवारा कुत्ते ने काटा। इसको उन्होंने मामूली समझ डॉक्टर से संपर्क नहीं किया। बाद में तबीयत खराब हुई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि उनकी मौत रैबीज संक्रमण से हुई। 2- जुलाई 2025 में ही गाजीपुर में कुत्ते के काटने से युवक की मौत हो गई। मरदह थाना क्षेत्र के रायपुर बाघपुर गांव के रहने वाले 18 साल के सोनू राजभर को कुत्ते के बच्चे ने काट लिया था। उसे रैबीज हो गया। डॉक्टर को दिखाने के बजाय वो झाड़-फूंक कराने लगा। इस चक्कर में उसकी जान चली गई। सवाल 1: यूपी में कुत्तों के हमले के कितने मामले आते हैं? ज्यादा निशाना किसे बना रहे? जवाब: प्रदेश में आवारा कुत्तों के आतंक पर भाजपा एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने नियम-110 के तहत प्रमुख सचिव विधान परिषद को एक रिपोर्ट भेजी है। इसके अनुसार, यूपी में रोजाना 10 हजार लोग इन कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। इनमें 30% से अधिक बच्चे और बुजुर्ग हैं। एमएलसी ने लिखा कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से इंसानों का जीवन खतरे में है। कुत्ते अधिक आक्रामक हो गए हैं। झुंड बनाकर अचानक लोगों पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नसबंदी अभियान प्रभावी तरीके से लागू नहीं हुआ। इनकी आबादी बढ़ने का मुख्य कारण कानूनी प्रतिबंध और लापरवाही है। सवाल 2: सबसे ज्यादा डॉग बाइट के मामले किस जिले में आते हैं? जवाब: यूपी में डॉग बाइट के सबसे ज्यादा मामले अमरोहा में सामने आए हैं। साल- 2024 में अमरोहा में 61 हजार, मेरठ में 60 हजार, मुरादाबाद में 49 हजार, पीलीभीत में 48 हजार और बलिया में 45 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा। सरकार की रिपोर्ट में लखनऊ के 3 बड़े अस्पतालों, बलरामपुर, सिविल और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का ब्योरा भी है। इन तीनों में जून- 2025 (एक महीने) में 4000 से अधिक लोगों को कुत्ता काटने से अस्पताल पहुंचने की बात कही गई है। सवाल 3: इस साल कुत्तों के हमले, कितनी मौत, कितने घायल? जवाब: स्वास्थ्य और परिवार मंत्रालय ने 1 अप्रैल, 2025 को देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाएं और मौतों का आंकड़ा जारी किया। इसमें साल- 2022 से जनवरी- 2025 तक के आंकड़े शामिल किए गए। सवाल 4: यूपी में आवारा कुत्तों की संख्या कितनी है? जवाब: केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के 2019 के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में सबसे अधिक आवारा कुत्ते यूपी में थे। इस सूची में ओडिशा दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर थे। उस समय मंत्रालय ने बताया था कि यूपी में कुल 20,59,261 आवारा कुत्ते हैं। यह संख्या 2012 की तुलना में लगभग आधी थी। वहीं, आंकड़ों के मुताबिक दादरा और नगर हवेली में एक भी आवारा कुत्ता नहीं था। सिर्फ राजधानी लखनऊ की बात करें, तो 2019 में यहां 75 हजार आवारा कुत्ते थे। यह आंकड़ा पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल के सर्वे में सामने आया था। लखनऊ नगर निगम के सर्वे के अनुसार, शहर में अनुमानित 95 हजार आवारा कुत्ते हैं। सवाल 5: आवारा कुत्तों से निपटने के लिए क्या किया जा रहा? जवाब: कुत्तों की आबादी को कंट्रोल करने के लिए स्थानीय प्रशासन समय-समय पर नसबंदी अभियान चलाता है। इंसानों और कुत्तों के बीच संघर्ष कम हो, इसलिए प्रशासन ऐसा करता है। पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के अनुसार 2019 से 2024 तक संस्था ने सिर्फ लखनऊ शहर में 89 हजार कुत्तों की नसबंदी की है। संस्था ने लखनऊ नगर निगम के साथ मिलकर यह काम किया। संस्था के मुताबिक WHO का मानक है कि कुत्तों की आबादी कंट्रोल करने के लिए उनकी कुल आबादी का 70% की नसबंदी होना चाहिए। संस्था ने इससे अधिक संख्या में राजधानी में आवारा कुत्तों की नसबंदी की है। इसमें पिछले 6 साल में शहर के 8 जोन को कवर किया गया। इनमें गोमतीनगर, इंदिरानगर, जानकीपुरम और हजरतगंज जैसे वीआईपी इलाके भी शामिल हैं। संस्था ने 2025 के आखिर तक शहर के 90 फीसदी आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का लक्ष्य रखा है। सवाल 6: क्या शेल्टर जैसा कुछ प्लान है? जवाब: दिल्ली-एनसीआर में सड़कों से आवारा कुत्ते हटाकर एनिमल शेल्टर्स में रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लखनऊ में चर्चा शुरू हो गई है। वजह, देश में कुत्ते काटने की सबसे अधिक घटनाएं यूपी में होना है। बीते 6 सालों (2018 से 2023 तक) में यूपी में कुत्तों के काटने की 53,41,592 घटनाएं हुईं। लखनऊ में अभी तक लगभग 95 हजार कुत्तों की नसबंदी और 98 हजार का एंटी रैबीज वैक्सीनेशन हो चुका है। लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने लखनऊ में आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने को लेकर नगर निगम के अफसरों के साथ बातचीत की है। इसमें उन्होंने सूरत नगर निगम की तरह लखनऊ में एक डॉग शेल्टर होम बनाने की बात कही है। साथ ही ये भी कहा कि उससे पहले पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के प्रावधान देखे जाएंगे। उसके बाद कार्पवाई की जाएगी। इस डॉग शेल्टर होम में AI कैमरों का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा लखनऊ नगर निगम जल्द ही पालतू कुत्तों को माउथ गार्ड पहनाकर ही घर के बाहर लेकर आने का नियम बनाएगा। जिससे लोग पालतू कुत्तों का शिकार न बनें। इसके अलावा यूपी के बड़े शहरों में पालतू कुत्ते के लिए लाइसेंस बनवाना भी अनिवार्य किया जाएगा। इस नियम का उल्लंघन करने वालों जुर्माना वसूल किया जाएगा। सवाल 7: राज्य में पालतू और आवारा कुत्तों को लेकर गाइडलाइन क्या है? जवाब: राज्य में आवारा और पालतू कुत्तों को लेकर कई गाइडलाइन यूपी सरकार ने जारी की है। पालतू कुत्तों के लिए नियम आवारा कुत्तों के लिए नियम (ABC प्रोग्राम) सवाल 8: क्या सोसाइटीज में पालतू कुत्तों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है? जवाब: नहीं। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) और अदालतों के साफ निर्देश हैं कि पालतू जानवर रखना नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसे रोका नहीं जा सकता। AWBI के 2015 के गाइडलाइन के मुताबिक, सोसाइटी किसी भी निवासी को कुत्ता रखने से मना नहीं कर सकती। न ही किसी खास नस्ल, आकार या संख्या के आधार पर रोक लगा सकती है। सवाल 9: यदि पालतू कुत्ता नियमों का उल्लंघन करता है तो क्या दंड हैं? जवाब: उत्तर प्रदेश में नगर निगम और स्थानीय निकाय के उपनियमों के तहत पालतू कुत्ते का रजिस्ट्रेशन न कराने, पट्टा न लगाने, सार्वजनिक जगह पर गंदगी छोड़ने या किसी पर हमला कराने पर 500 से 5,000 रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार गलती करने पर पालतू रखने का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। कानूनी रूप से, आईपीसी की धारा- 289 के तहत लापरवाही से खतरनाक जानवर को नियंत्रित न करने पर 6 महीने की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वहीं, अगर पालतू के हमले से किसी को चोट लगती है, तो मेडिकल खर्च और हर्जाना मालिक को देना जरूरी है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… मकबरा-मंदिर विवाद के पीछे 12 बीघा जमीन, भाजपा जिलाध्यक्ष ने भीड़ इकट्ठा की; लोग बोले- 5 दिन पहले सब शांत था 7 अगस्त, 2025 यानी आज से 6 दिन पहले तक फतेहपुर शहर के आबूनगर में मकबरे को लेकर कोई धार्मिक विवाद नहीं था। 7 अगस्त को मठ-मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति नाम के एक संगठन ने डीएम को याचिका दी। इसमें कहा कि नई बस्ती रेडईया स्थित सिद्धपीठ ठाकुरजी विराजमान मंदिर के सुंदरीकरण की जरूरत है। 11 अगस्त को समिति यह काम शुरू करेगी। डीएम की तरफ से किसी तरह की कोई परमिशन नहीं दी गई। क्योंकि जहां साफ-सफाई की बात हो रही, वहां पहले से मजार और ईदगाह है। 6 जिलों के एसपी, पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। रात में ही मजार को बनवा दिया गया। एक संभावित दंगा फिलहाल रुक गया, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है। दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची और चीजों को समझा। जानिए अब हालात क्या हैं…पढ़िए पूरी खबर…