यूपी में MBBS की फीस बढ़ाने पर बवाल क्यों:तीन साल में 15% की बजाय 20% तक बढ़ा दी फीस, कैसे बनेंगे डॉक्टर

केस-1 : महाराष्ट्र की भक्ति पाटील ने सत्र 2024-25 में कानपुर के रामा मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया था। उस समय कॉलेज की फीस 12.66 लाख रुपए बताई गई थी। भक्ति के पिता रणजीत ने एजुकेशन लोन लेकर किसी तरह फीस की व्यवस्था की। पहले सत्र का एग्जाम भी नहीं हुआ था कि कॉलेज ने एक साल के अंदर दो बार फीस बढ़ा दी। पहले पहले 31 हजार और दूसरी बार 2.48 लाख रुपए फीस बढ़ाई गई। अब पिता को समझ में नहीं आ रहा कि बीच सत्र में बढ़ी हुई फीस की व्यवस्था कैसे करें? केस-2 : जीएस कॉलेज हापुड़ मेडिकल कॉलेज की फीस बढ़ोतरी के खिलाफ स्टूडेंट आन्या पोरवाल और 239 ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। कॉलेज ने 11.78 लाख से बढ़ाकर 14.14 लाख रुपए कर दी थी। बीच सत्र में इस फीस बढ़ोतरी को याचिका से चुनौती दी गई थी। यह भी बताया गया था कि इससे पहले अक्टूबर- 2024 में भी कॉलेज ने फीस बढ़ाई थी। इस पर हाईकोर्ट ने छात्रों को राहत देते हुए 5 जुलाई, 2025 को जारी फीस बढ़ोतरी अधिसूचना को स्थगित कर दिया था। आन्या और भक्ति पाटील की तरह यूपी के 17 प्राइवेट कॉलेजों में 3600 छात्रों पर अचानक बीच सत्र में इसी तरह का फीस बढ़ोतरी का बोझ लाद दिया गया। मतलब इन प्राइवेट कॉलेजों ने एक झटके में 350 करोड़ से अधिक का वारा-न्यारा कर लिया है। NEET का नियम कहता है कि 3 साल में कोई भी कॉलेज 15% से अधिक की फीस नहीं बढ़ा सकता। लेकिन, यहां 20% तक फीस बढ़ा दी गई है। आखिर यूपी में एमबीबीएस की फीस बढ़ाने पर बवाल क्यों मचा है? हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्राइवेट कॉलेज फीस क्यों कम नहीं कर रहे? आखिर प्रशासन की कौन-सी चूक का प्राइवेट कॉलेजों ने फायदा उठाया। पढ़िए ये रिपोर्ट… पहले पढ़ते हैं कि डीजीएमई की कौन-सी गलती पड़ी भारी
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस डीजीएमई ने साल-2020 में निर्धारित की थी। नियम के अनुसार, अगले 3 साल तक ये फीस ही तय थी। 2024-25 के सत्र के लिए डीजीएमई ने पुरानी फीस को ही रखा। इसके खिलाफ यूपी अनएडेड मेडिकल एंड साइंस कॉलेज वेलफेयर एसोसिएशन और 17 अन्य ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी। 17 अगस्त को हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में फीस नियतन समिति के समक्ष सुनवाई हुई। इस पर 28 अक्टूबर, 2024 को फीस नियतन समिति ने ट्यूशन, हॉस्टल, मेस सहित अन्य खर्चे मिलाकर 31 हजार रुपए तक बढ़ा दिए थे। प्रदेश के प्राइवेट कॉलेज इस फीस बढ़ोत्तरी से संतुष्ट नहीं हुए। जनवरी में फिर से हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका लगा दी। इसमें कहा गया कि फीस नियतन समिति ने यूपी प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2006 के अनुसार शुल्क का निर्धारण नहीं किया है। इस पर हाईकोर्ट ने 10 जनवरी और फिर 4 मार्च, 2025 को डीजीएमई को नए सिरे से फीस निर्धारित करने के आदेश दिए थे। इसी आदेश के क्रम में बीती 5 जुलाई को फीस नियतन समिति ने 1.50 से 5.50 लाख रुपए तक फीस बढ़ा दी। फीस नियतन समिति ने नीट की गाइडलाइन की भी परवाह नहीं की। इसमें हर साल 5% ही फीस बढ़ाने का प्रावधान है। यह भी नियम है कि एमबीबीएस के एक बैच के छात्रों की बीच सत्र में बार-बार फीस नहीं बढ़ा सकते। लेकिन, यहां एक साल के अंदर ही दो बार फीस बढ़ा दी गई। इसी को आधार बनाकर छात्रों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हापुड़ के छात्रों को राहत मिल गई, लेकिन दूसरे 16 कॉलेजों के 3300 छात्रों को राहत नहीं मिल पाई है। सरकार और प्राइवेट कॉलेज फीस बढ़ोतरी को ठहरा रहे उचित
प्रदेश सरकार और प्राइवेट संस्थानों का कहना है कि फीस वृद्धि यूपी प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2006 के अनुसार की गई है। राज्यपाल ने शुल्क नियामक समिति की सिफारिशों को मंजूरी दी है। इसी आधार पर कॉलेजों की फीस निर्धारित की गई है। 2024-25 में प्रवेश के वक्त ही छात्रों को बता दिया गया था कि अभी फीस प्रोविजनल है। फीस निर्धारित होने के बाद अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी। हालांकि, सरकार और प्राइवेट कॉलेजों से इतर छात्रों के अभिभावकों का अलग ही दर्द है। महाराष्ट्र के रणजीत पाटील रावेर ने बताया कि मेरी बेटी का नीट एग्जाम 528/720 स्कोर था। कानपुर के रामा मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, में सत्र 2024-25 में उन्होंने बेटी काे प्रवेश दिलाया था। पाटील कहते हैं कि प्रवेश के समय कॉलेज की फीस देखकर निर्णय लिया था। इसी आधार पर एजुकेशन लोन भी लिया था। अब बीच सत्र में अचानक 3 लाख रुपए प्रतिवर्ष फीस बढ़ा दी गई है। अब हम जैसा मध्यमवर्गीय परिवार इसका बोझ कैसे उठा पाएगा? एमबीबीएस की पढ़ाई साढ़े 4 साल की होती है। इस अनुसार 12 से 15 लाख रुपए का अतिरिक्त पैसे की व्यवस्था कैसे होगी? पाटील ने इस फीस बढ़ोतरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि हापुड़ के केस में कोर्ट ने 5 जुलाई के आदेश को ही स्थगित कर दिया है। इसका साफ मतलब है कि सभी 17 कॉलेजों में यह आदेश स्वतः: लागू माना जाएगा। लेकिन, दूसरे कॉलेजों ने अतिरिक्त फीस लेना बंद नहीं किया है। सीएम से अभिभावकों ने फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने की मांग की
यूपी के मेडिकल कॉलेजों में छात्रों का फीस के नाम पर हो रहे आर्थिक शोषण को लेकर पेरेंट्स मुखर हैं। प्रदेश के प्राइवेट कॉलेज में अपने बच्चे को एमबीबीएस पढ़ा रहे एक पेरेंट सीपी शर्मा कहते हैं कि बीच सत्र में ढाई से तीन लाख रुपए फीस बढ़ाने के निर्णय पर सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय चुप्पी हमारे दर्द को बढ़ाने वाली है। 2024-25 बैच के मेडिकल छात्रों का पहला सत्र लगभग खत्म होने को आया है। उनकी फीस में अचानक बढ़ोतरी नियम के खिलाफ की गई है। कॉलेजों ने प्रवेश के 2 महीने बाद ही फीस बढ़ा दी थी। तब हम लोग चुप रह गए थे कि प्रवेश के समय ही हमें प्रोविजनल फीस की जानकारी दी गई थी। लेकिन, अचानक से 5 जुलाई को अधिसूचना निकाल कर फिर से 2.50 लाख रुपए तक फीस बढ़ा दी गई। एक मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को कैसे डॉक्टर बना पाएगा? यूपी में वर्तमान में 30 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें से कई मेडिकल कॉलेजों में इसी तरह की मनमानी फीस बढ़ा दी गई है। कोर्ट और डीजीएमई का हवाला देकर यह कॉलेज भावी डॉक्टरों से मनमानी तरीके से फीस वसूल रहे हैं। अभिभावकों ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से इस मामले में दखल देने की अपील की है। लाभ के लिए कोई प्राइवेट मेडिकल कॉलेज फीस नहीं बढ़ा सकता
उत्तर प्रदेश निजी व्यवसायिक शैक्षणिक संस्था अधिनियम 2006 में प्राइवेट कॉलेजों की फीस निर्धारित करने की गाइडलाइन बनाई गई है। इसमें साफ कहा गया है कि वे लाभ कमाने के लिए फीस नहीं बढ़ा सकते। अध्याय-4 में कहा गया है कि पाठ्यक्रम के स्वरूप, कॉलेज के विकास के लिए फंड, प्रशासन और अन्य व्यय, कर्मचारियों पर व्यय सहित अन्य तर्कसंगत कारण होने चाहिए। फीस निर्धारण समिति इन 6 बिंदुओं पर ही किसी कॉलेज की फीस बढ़ सकती है। फीस बढ़ाने के समय उस संस्था को भी सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। नेशनल काउंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइन की कहती है कि कोई भी प्राइवेट कॉलेज अधिकतम बहुत जरूरी होने पर ही 5% तक फीस हर साल बढ़ा सकता है। पर यहां 20% से अधिक बढ़ा दी गई। वैसे भी 28 अक्टूबर, 2024 को बढ़ाई गई फीस को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले प्राइवेट कॉलेजों ने गाइडलाइन के अनुसार फीस निर्धारित करने की मांग की थी। कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश में फीस निर्धारण समिति को रि-विजिट करने के लिए कहा गया था। लेकिन, समिति ने प्राइवेट कॉलेजों के दबाव में उनके हक में मनमानी तरीके से फीस बढ़ा दी। ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल सहित अन्य शुल्क भी बढ़ाए
प्राइवेट कॉलेजों ने ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल की फीस भी बढ़ा दी है। सत्र 2024-25 में प्रवेश के समय छात्रों को नॉन एसी हॉस्टल के लिए 1.50 लाख और एसी हास्टल के लिए 1.75 लाख रुपए प्रतिवर्ष शुल्क बताया गया था। इसके अलावा 3 लाख रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट के और अन्य शुल्क (मिसलेनियस शुल्क) के तौर पर 85,600 रुपए जमा कराए गए थे। 28 अक्टूबर, 2024 को फीस निर्धारण कमेटी ने इसे भी बढ़ा दिया। नॉन एसी हास्टल के लिए 1.65 लाख, एसी वाले कमरे के लिए 1.92 लाख और अन्य शुल्क (मिसलेनियस शुल्क) के तौर पर 94,160 रुपए कर दिए। इस बार भी यही बढ़ा हुआ शुल्क लिया जा रहा है। हॉस्टल के लिए कहा गया है कि एक कमरे में अधिकतम 2 ही छात्र रहेंगे। पर प्राइवेट कॉलेजों में मनमाने तरीके से 3 बच्चों को रखा जा रहा है। प्राइवेट कॉलेजों ने हॉस्टल अनिवार्य कर रखा है। मतलब, यदि कॉलेज में उसी शहर का कोई बच्चा पढ़ना चाहे तो उसे भी हॉस्टल में रहना होगा। अलग से एक लाख तक परीक्षा शुल्क भी वसूलते हैं मेडिकल कॉलेज
पीएम मोदी को एक पेरेंट ने पत्र लिखकर फीस कम कराने की अपील की है। इसमें पेरेंट ने लिखा है कि यूपी के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में MBBS छात्रों से अवैध फीस वसूली और मिड-सेशन फीस वृद्धि ने हजारों परिवारों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। मेरी बेटी भक्ति रणजीत पाटील, जो रामा मेडिकल कॉलेज, कानपुर में 2024-25 सत्र में नीट मेरिट के आधार पर भर्ती हुई, इसका उदाहरण है। प्रवेश के समय डीजीएमई, लखनऊ ने 12.66 लाख रुपए वार्षिक फीस तय की थी। लेकिन, 3 महीने बाद 31,337 और फिर 5 जुलाई, 2025 को 2.48 लाख की वृद्धि कर फीस 15.19 लाख कर दी गई। एक साल में दो बार फीस बढ़ाना अन्यायपूर्ण है। इसके अलावा, हर साल 75 हजार से 1 लाख तक अतिरिक्त “परीक्षा शुल्क” वसूला जाता है। मना करने पर कॉलेज प्रशासन मानसिक दबाव बनाता है और डीजीएमई इसकी अनदेखी करता है। ————————– ये खबर भी पढ़ें :- यूपी के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में फीस वृद्धि पर रोक: MBBS की फीस 14.14 लाख करने का मामला, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स की फीस वृद्धि पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह ने यह आदेश आन्या परवाल समेत 239 छात्रों की याचिका पर दिया है। पूरी खबर पढ़ें-