यूपी से मानसून 10 दिन पहले विदा होगा:अल-नीनो फिर मजबूत हो रहा; जानिए इस बार सर्दियां कैसी होंगी

उत्तर प्रदेश में अभी तक जितनी जरूरत थी, उससे 11% कम बारिश हुई है। मौसम वैज्ञानिक अल-नीनो को इसकी वजह बता रहे हैं। 28 जून को यूपी में मानसून की एंट्री के बाद से ही अल-नीनो का असर बना हुआ है। इससे यूपी के 13 जिलों में जरूरत से ज्यादा बारिश हुई, जबकि 34 जिलों में अनुमान से कम बारिश रिकॉर्ड हुई। एक बार फिर अल-नीनो धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। इस कारण यूपी में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ने के आसार हैं। आशंका है कि मानसून यूपी से 10 दिन पहले विदा ले सकता है। यूपी में मानसून कैसे विदा होता है, ये मौसम विशेषज्ञ डॉ. दिनेश शाह बताते हैं – वह बताते हैं- अल-नीनो के एक्टिव होने से पश्चिम और पूर्वांचल के जिलों में करीब 8 से 10% तक कम बारिश हो सकती है। 2025 में 20 अगस्त तक कोटे से 25% कम बारिश हुई थी। लेकिन अगस्त के आखिरी 10 दिन और सितंबर महीने में मानसून ने भरपाई कर दी थी। इस बार ऐसा होने की गुंजाइश कम है। कहीं सूखा, कहीं बाढ़ जैसे हालात पूर्वी यूपी में देवरिया में सामान्य से 74% कम, भदोही में 64%, जौनपुर में 59%, संतकबीरनगर में 51%, अमेठी और कौशांबी में 46% कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। पश्चिमी यूपी में कुशीनगर और पीलीभीत में 69% कम, कानपुर देहात में 65%, मऊ में 65%, शामली में 62% और गाजियाबाद में 61% कम बारिश हुई है। चित्रकूट में सामान्य से 44% ज्यादा, प्रयागराज में 32% और कानपुर नगर में 24% ज्यादा बारिश हुई है। संभल में सामान्य से 84% ज्यादा, मुजफ्फरनगर में 83%, मेरठ में 74%, हमीरपुर में 45% और एटा में 42% ज्यादा बारिश हुई है। यानी राज्य का औसत भले सामान्य कैटेगरी में हो, लेकिन अलग-अलग जिलों में बारिश का अंतर बहुत ज्यादा है। सर्दियों पर असर- शीतलहर के दिन कम रह सकते हैं अल-नीनो के असर से यूपी में सामान्य से ज्यादा तापमान रह सकता है। इससे सर्दियों पर 2 तरह से असर दिख सकता है। पहला- शीतलहर वाले दिनों में कमी आ सकती है। सर्दियों में सामान्य शीतलहर 8 से 10 दिन की होती है। जो 2 से 3 दिन के अलग-अलग चरणों में आती है। इस बार ये 4 से 6 दिन तक सीमित रह सकती है। दूसरा- तापमान में गिरावट पिछले साल के बराबर नहीं होगी। उदाहरण के लिए 2025 की सर्दियों में मेरठ, कानपुर, आगरा, अयोध्या, बरेली का तापमान अलग-अलग तारीखों पर 2 से 3 डिग्री तक पहुंच गया था। इस बार तापमान इतना नीचे आने की उम्मीद कम जताई जा रही है। हालांकि इसका कोहरे से कोई संबंध नहीं होगा। क्योंकि कोहरा स्थानीय वायुमंडल में नमी और हवा की स्पीड से बनता है। जो बारिश कम हुई, वो सामान्य श्रेणी में यूपी में पूरे साल में सामान्य 850 मिमी बारिश होती है। इसका करीब 70% हिस्सा मानसून के दौरान मिलता है। यानी मानसून के सीजन में सामान्य बारिश करीब 560 से 570 मिमी होनी चाहिए। इस बार 26 अगस्त तक करीब 502 मिमी बारिश हो चुकी है। यह सामान्य से करीब 64 मिमी कम है। हालांकि, मौसम विभाग के मुताबिक बारिश में 19% तक का अंतर सामान्य श्रेणी में माना जाता है। गेहूं, चना और सरसों की बुआई पर असर अल-नीनो का सबसे बड़ा असर रबी की फसलों पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञ के मुताबिक, सबसे पहले गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों की बुआई पर असर पड़ सकता है। अगर सितंबर के आखिर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खेतों में नमी कम रह जाएगी। इससे खासकर बुंदेलखंड में रबी की समय पर बुआई मुश्किल हो सकती है। इसके बाद फसल के बढ़ने के समय अगर पर्याप्त ठंड नहीं पड़ी और फरवरी-मार्च में गर्मी जल्दी बढ़ गई, तो फसल को दोहरा नुकसान हो सकता है। गेहूं में दाना भरने के समय तापमान ज्यादा बढ़ने से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहेगी। अल-नीनो के देर से मजबूत होने का फायदा नहीं, बल्कि नुकसान की आशंका ज्यादा है। मानसून अगर थोड़ा जल्दी लौटता है, सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश कम रहती है, सर्दियों में न्यूनतम तापमान बढ़ा रहता है और मार्च में गर्मी जल्दी बढ़ती है, तो इसका असर फसलों की बुआई पर पड़ना तय है। आज कहां-कहां बारिश हो सकती है, जानिए… —————– ये भी पढ़ें- यूपी के 28 जिलों में सूखा, 78% तक कम बारिश:2 महीने में कैसे होगी भरपाई; अगस्त-सितंबर में स्थिति बिगड़ेगी या सुधरेंगे हालात…? मानसून का आधा सीजन बीत चुका है, लेकिन यूपी के 28 जिलों में सूखे की स्थिति है। इसमें पूर्वांचल के सबसे ज्यादा 19 जिले हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 1 जून से 31 जुलाई के बीच सामान्य से 27% कम बारिश हुई है। जबकि, अप्रैल में मौसम विभाग (IMD) ने इस सीजन (1 जून से 30 सितंबर) 8 से 10% कम बारिश का अनुमान जताया था। पूरी खबर पढ़िए…